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मेवाड़ की प्रसिद्ध बंदूक की होली
पुरुषोत्तम तिवाड़ी
मेवाड़ की प्रसिद्ध बंदूक की होली
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- राजस्थान के उदयपुर जिले के मेनार गांव में मेनारिया ब्राह्मण समाज द्वारा होली के अगले दिन 400 वर्षों से अधिक समय से 'बारूद की होली' खेली जाती है। यह अनोखी परंपरा मुगलों पर ब्राह्मणों की ऐतिहासिक विजय का जश्न है जिसमें तलवारतोपों और बंदूकों से बारूद बरसाकर शौर्य दिवस मनाया जाता है। #brahman #trending #holi #happyholi #reels1
- Jaipur gallery1
- शाहपुरा (जयपुर ग्रामीण) के जयपुर तिराहा फ्लाईओवर के दिल्ली-जयपुर लेन शुरू कर दिया है,आमजन को जाम से राहत मिलेगी।1
- Post by Dashrath singh Bardwa3
- जयपुर/राजस्थान | सोशल मीडिया पर वायरल हो रही एक घटना ने राजस्थान पुलिस की कार्यशैली और अनुशासन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना के अनुसार, वर्दी के नशे में चूर एक पुलिसकर्मी ने सिविल ड्रेस (सफेद टी-शर्ट) में मौजूद व्यक्ति पर हाथ उठा दिया, लेकिन पासा तब पलट गया जब सामने वाला व्यक्ति भी पुलिस विभाग से ही निकला। इस घटना ने न केवल पुलिस के भीतर के आपसी तालमेल की कमी को उजागर किया है, बल्कि यह भी दिखा दिया है कि वर्दी पहनने के बाद कानून को 'जेब में' समझने की मानसिकता कितनी हावी हो चुकी है। मुख्य बिंदु: क्या पुलिस को मिला है 'उत्पीड़न' का अधिकार? तस्वीर में साझा किए गए विचारों के आधार पर कुछ प्रमुख मुद्दे सामने आए हैं: वर्दी का गलत इस्तेमाल: आरोप है कि पुलिसकर्मी आम जनता के साथ गाली-गलौज और मारपीट को अपना अधिकार समझने लगे हैं। डर का माहौल: आम आदमी पुलिस की मदद लेने के बजाय उनसे डरता है, क्योंकि उसे 'बंद करने' या 'फर्जी केस' में फंसाने की धमकियां दी जाती हैं। पुलिस एक्ट में संशोधन की मांग: जानकारों और सोशल मीडिया यूजर्स का कहना है कि अब समय आ गया है जब 'पुलिस एक्ट' में बड़े बदलाव किए जाएं ताकि शक्तियों के दुरुपयोग पर लगाम लग सके। "अगर सफेद टी-शर्ट वाला व्यक्ति पुलिस में न होता, तो शायद वह इस अन्याय के खिलाफ हाथ नहीं उठा पाता। यह घटना संकेत है कि अगर सुधार नहीं हुआ, तो पुलिस को सामाजिक आक्रोश का सामना करना पड़ सकता है।" डीजीपी और गृहमंत्री से जवाबदेही की मांग इस वायरल पोस्ट के माध्यम से राजस्थान के पुलिस महानिदेशक (DGP) और गृहमंत्री से सीधा सवाल पूछा गया है। क्या इस मामले की निष्पक्ष जांच होगी? क्या वर्दी की आड़ में की गई इस गुंडागर्दी के लिए किसी की जवाबदेही तय की जाएगी? निष्कर्ष: कानून व्यवस्था बनाए रखना पुलिस का काम है, न कि कानून को अपने हाथ में लेकर जनता का दमन करना। यह घटना विभाग के लिए एक चेतावनी है कि वे अपने कर्मियों को नैतिक व्यवहार और कानून की मर्यादा का पाठ पढ़ाएं।1
- थिरपाली बड़ी श्याम मंदीर से खाटू श्याम पहुँचा बाबा श्याम का निशान,श्याम नगरी खाटू श्याम मे निशान संग श्याम भक्तों की मस्ती, जय श्री श्याम,1
- जयपुर। राजधानी जयपुर में नर्सिंग भर्ती 2023 के अभ्यर्थियों का धरना लगातार दो महीने से जारी है। अभ्यर्थी शहर के शहीद स्मारक (शिफू) पर प्रदर्शन कर रहे हैं और राज्य सरकार पर वादाख़िलाफ़ी का आरोप लगा रहे हैं। युवाओं का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद उन्हें चयनित सूची से बाहर कर दिया गया है। धरने पर बैठे अभ्यर्थियों का आरोप है कि सरकार ने पहले नियुक्ति देने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। प्रदर्शन कर रहीं महिला अभ्यर्थियों ने बताया कि वे सर्दियों से रोजगार की उम्मीद में इंतजार कर रही हैं, लेकिन अब तक नियुक्ति पत्र जारी नहीं किए गए। उनका कहना है कि लंबे समय से चल रहे आंदोलन के बावजूद सरकार की ओर से सकारात्मक पहल नहीं दिख रही। अभ्यर्थियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। वहीं, प्रशासन की ओर से अब तक इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। धरना स्थल पर रोज़ बड़ी संख्या में अभ्यर्थी जुट रहे हैं और सरकार से शीघ्र न्याय की मांग कर रहे हैं।1
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