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स्वास्थ्य मंत्री इरफ़ान अंसारी का हजारीबाग में आचरण लोकतंत्र पर खुला हमला है। सवालों से भागने की कायरता छुपाने के लिए पत्रकारों पर हमला करवाना न सिर्फ शर्मनाक, बल्कि सत्ता के घमंड का घिनौना प्रदर्शन है। जो मंत्री अपने बयान में महिलाओं के सम्मान को ठेस पहुंचाता है, और फिर सच पूछने वाले पत्रकारों पर गुंडों से हमला करवाता है — वो स्वास्थ्य नहीं, भय और अराजकता का विभाग चला रहा है। क्या यही है सरकार का असली चेहरा? क्या सवाल पूछना अब जुर्म बन गया है? पत्रकारों पर हमला सीधे-सीधे लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को कुचलने की साजिश है। दोषियों की तुरंत गिरफ्तारी हो, नहीं तो यह चुप्पी भी राज्य सरकार का अपराध मानी जाएगी।

11 hrs ago
user_MUKESH NATH
MUKESH NATH
चंदवा, लातेहार, झारखंड•
11 hrs ago

स्वास्थ्य मंत्री इरफ़ान अंसारी का हजारीबाग में आचरण लोकतंत्र पर खुला हमला है। सवालों से भागने की कायरता छुपाने के लिए पत्रकारों पर हमला करवाना न सिर्फ शर्मनाक, बल्कि सत्ता के घमंड का घिनौना प्रदर्शन है। जो मंत्री अपने बयान में महिलाओं के सम्मान को ठेस पहुंचाता है, और फिर सच पूछने वाले पत्रकारों पर गुंडों से हमला करवाता है — वो स्वास्थ्य नहीं, भय और अराजकता का विभाग चला रहा है। क्या यही है सरकार का असली चेहरा? क्या सवाल पूछना अब जुर्म बन गया है? पत्रकारों पर हमला सीधे-सीधे लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को कुचलने की साजिश है। दोषियों की तुरंत गिरफ्तारी हो, नहीं तो यह चुप्पी भी राज्य सरकार का अपराध मानी जाएगी।

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  • Post by MUKESH NATH
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    Post by MUKESH NATH
    user_MUKESH NATH
    MUKESH NATH
    चंदवा, लातेहार, झारखंड•
    10 hrs ago
  • लातेहार ब्लड बैंक में जालिम गांव निवासी जरूरतमंद महिला अनारी देवी को एबी पॉजिटिव रक्त की आवश्यकता होने पर मंगलवार को सीआरपीएफ 11वीं बटालियन के जवान लवकुश ने कमांडेंट के निर्देश पर रक्तदान किया। चार दिन से रक्त की तलाश के बाद यह मदद मिली। जवान ने लोगों से रक्तदान के लिए आगे आने की अपील करते हुए इसे सबसे बड़ा पुण्य कार्य बताया। परिजनों ने इस सराहनीय पहल पर आभार जताया।
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    लातेहार ब्लड बैंक में जालिम गांव निवासी जरूरतमंद महिला अनारी देवी को एबी पॉजिटिव रक्त की आवश्यकता होने पर मंगलवार को सीआरपीएफ 11वीं बटालियन के जवान लवकुश ने कमांडेंट के निर्देश पर रक्तदान किया। चार दिन से रक्त की तलाश के बाद यह मदद मिली। जवान ने लोगों से रक्तदान के लिए आगे आने की अपील करते हुए इसे सबसे बड़ा पुण्य कार्य बताया। परिजनों ने इस सराहनीय पहल पर आभार जताया।
    user_Ram Kumar
    Ram Kumar
    Photographer लातेहार, लातेहार, झारखंड•
    40 min ago
  • एक भाई अपनी बहन के खाते से ₹19,300 निकालने के लिए इतना मजबूर हो गया कि उसने उसकी कब्र खोदकर कंकाल ही बैंक पहुंचा दिया…
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    एक भाई अपनी बहन के खाते से ₹19,300 निकालने के लिए इतना मजबूर हो गया कि उसने उसकी कब्र खोदकर कंकाल ही बैंक पहुंचा दिया…
    user_Nihit Kumar
    Nihit Kumar
    Latehar, Jharkhand•
    49 min ago
  • Post by AAM JANATA
    1
    Post by AAM JANATA
    user_AAM JANATA
    AAM JANATA
    लोहरदगा, लोहरदगा, झारखंड•
    1 hr ago
  • बरवाडीह(लातेहार): बरवाडीह प्रखंड क्षेत्र के छेचा पंचायत अंतर्गत ग्राम छेचा में बिरसा हरित आम बागवानी योजना के तहत लाभुक वरिष्ठ पत्रकार सह किसान तस्लीम खान अपनी मेहनत और लगन से खेती को नई पहचान दे रहे हैं। पत्रकारिता के साथ-साथ कृषि को अपना मुख्य पेशा मानने वाले तस्लीम खान ने अपनी निजी रैयती जमीन को उपजाऊ बनाकर एक मिसाल पेश की है। उन्होंने लगभग एक एकड़ भूमि को घेराबंदी कर खेती योग्य बनाया है, जहां आम बागवानी के साथ-साथ हरी सब्जियों की भी भरपूर खेती की जा रही है। खेत में भिंडी, खीरा, ककड़ी, कद्दू, प्याज, नेनुआ, करेला, टमाटर, बैंगन सहित कई प्रकार की हरी सब्जियां उगाई जा रही हैं। भीषण गर्मी के बावजूद वे स्वयं खेत में सिंचाई कर फसलों की देखरेख करते हैं और समय निकालकर मेहनत भी करते हैं। तस्लीम खान बताते हैं कि घर की जरूरत के लिए ताजी सब्जियां यहीं से मिल जाती हैं। अधिक उत्पादन होने पर वे घर से ही उचित दाम पर स्थानीय लोगों को सब्जियां बेच देते हैं।आसपास के लोग भी जानते हैं कि उनके यहां ताजी और अच्छी सब्जियां उपलब्ध होती हैं। खेती-बाड़ी के इस कार्य में उनकी धर्मपत्नी भी पूरा सहयोग करती हैं। जब तस्लीम खान पत्रकारिता के सिलसिले में बाहर जाते हैं, तब उनकी पत्नी खेत की निगरानी और देखरेख संभालती हैं। आम बागवानी के साथ-साथ मौसम के अनुसार दूसरी जमीन पर धान, मक्का, गेहूं, सरसों और अरहर की भी खेती की जाती है। जरूरत से अधिक उत्पादन होने पर उसे बाजार या स्थानीय साहुकारों को बेच दिया जाता है। तस्लीम खान का कहना है कि खेती उनके परिवार की पुरानी परंपरा है। उनके पिता भी खेती करते थे और आज वे स्वयं इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहां कि खेती करने से न केवल परिवार की जरूरतें पूरी होती हैं, बल्कि शरीर भी स्वस्थ रहता है। उन्होंने आगे भी खेती को इसी तरह जारी रखने की बात कही। पत्रकारिता और कृषि दोनों क्षेत्रों में उनका यह संतुलन क्षेत्र के लोगों के लिए प्रेरणादायक बन गया है।
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    बरवाडीह(लातेहार): बरवाडीह प्रखंड क्षेत्र के छेचा पंचायत अंतर्गत ग्राम छेचा में बिरसा हरित आम बागवानी योजना के तहत लाभुक वरिष्ठ पत्रकार सह किसान तस्लीम खान अपनी मेहनत और लगन से खेती को नई पहचान दे रहे हैं। पत्रकारिता के साथ-साथ कृषि को अपना मुख्य पेशा मानने वाले तस्लीम खान ने अपनी निजी रैयती जमीन को उपजाऊ बनाकर एक मिसाल पेश की है। उन्होंने लगभग एक एकड़ भूमि को घेराबंदी कर खेती योग्य बनाया है, जहां आम बागवानी के साथ-साथ हरी सब्जियों की भी भरपूर खेती की जा रही है। खेत में भिंडी, खीरा, ककड़ी, कद्दू, प्याज, नेनुआ, करेला, टमाटर, बैंगन सहित कई प्रकार की हरी  सब्जियां उगाई जा रही हैं। भीषण गर्मी के बावजूद वे स्वयं खेत में सिंचाई कर फसलों की देखरेख करते हैं और समय निकालकर मेहनत भी करते हैं। तस्लीम खान बताते हैं कि घर की जरूरत के लिए ताजी सब्जियां यहीं से मिल जाती हैं। अधिक उत्पादन होने पर वे घर से ही उचित दाम पर स्थानीय लोगों को सब्जियां बेच देते हैं।आसपास के लोग भी जानते हैं कि उनके यहां ताजी और अच्छी सब्जियां उपलब्ध होती हैं। खेती-बाड़ी के इस कार्य में उनकी धर्मपत्नी भी पूरा सहयोग करती हैं। जब तस्लीम खान पत्रकारिता के सिलसिले में बाहर जाते हैं, तब उनकी पत्नी खेत की निगरानी और देखरेख संभालती हैं। आम बागवानी के साथ-साथ मौसम के अनुसार दूसरी जमीन पर धान, मक्का, गेहूं, सरसों और अरहर की भी खेती की जाती है। जरूरत से अधिक उत्पादन होने पर उसे बाजार या स्थानीय साहुकारों को बेच दिया जाता है। तस्लीम खान का कहना है कि खेती उनके परिवार की पुरानी परंपरा है। उनके पिता भी खेती करते थे और आज वे स्वयं इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहां कि खेती करने से न केवल परिवार की जरूरतें पूरी होती हैं, बल्कि शरीर भी स्वस्थ रहता है। उन्होंने आगे भी खेती को इसी तरह जारी रखने की बात कही। पत्रकारिता और कृषि दोनों क्षेत्रों में उनका यह संतुलन क्षेत्र के लोगों के लिए प्रेरणादायक बन गया है।
    user_Manoj dutt dev
    Manoj dutt dev
    Local News Reporter लातेहार, लातेहार, झारखंड•
    10 hrs ago
  • गुमला जिले के चंदाली स्थित ईवीएम वेयरहाउस का आज विधिवत निरीक्षण किया गया। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजामों का जायजा लेते हुए सीसीटीवी कैमरों की सक्रियता, विद्युत आपूर्ति और अग्निशमन प्रणाली जैसे महत्वपूर्ण मानकों की बारीकी से समीक्षा की गई।
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    गुमला जिले के चंदाली स्थित ईवीएम वेयरहाउस का आज विधिवत निरीक्षण किया गया। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजामों का जायजा लेते हुए सीसीटीवी कैमरों की सक्रियता, विद्युत आपूर्ति और अग्निशमन प्रणाली जैसे महत्वपूर्ण मानकों की बारीकी से समीक्षा की गई।
    user_Altamas Rja
    Altamas Rja
    Local News Reporter लोहरदगा, लोहरदगा, झारखंड•
    12 hrs ago
  • मनिका, लातेहार:-मनिका प्रखंड क्षेत्र के रांकीकला पंचायत के कुई गांव में धूमकुड़िया भवन बना गौशाला और पुआल भंडार जबकि कल्याण विभाग से धूमकुड़िया भवन का निर्माण आदिवासी समाज के सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यों जैसे सरहुल और कर्मा पर्व के लिए समर्पित कर आदिवासी संस्कृति के संरक्षण के ख्याल करते हुए निर्माण कराया गया था| धूमकुड़िया भवन आदिवासी समाज के लोगों के लिए मिलन स्थल के रूप में उपयोग करना था| जिससे आदिवासी समाज एक दूसरे से जुड़ सके| पारंपरिक धूम कुड़िया प्रथम के अनुरूप युवा पीढ़ी को अपनी परंपरा, सामाजिक संस्कारों और जीवन शैली से परिचित कराना था लेकिन आप देख सकते हैं कि यह धूमकुड़िया भवन को गौशाला और पुआल का गोदाम बना दिया गया है, जो स्थानीय लोगों की उदासीनता को दर्शाता है, जो अपनी परंपराओं को धीरे-धीरे भूलते जा रहे हैं|ऐसा लगता है कि उन्हें धमकुडिया भवन निर्माण के उद्देश्यों के बारे में जानकारी ही नहीं है|
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    मनिका, लातेहार:-मनिका प्रखंड क्षेत्र के रांकीकला पंचायत के कुई गांव में धूमकुड़िया भवन बना गौशाला और पुआल भंडार जबकि कल्याण विभाग से धूमकुड़िया भवन का निर्माण आदिवासी समाज के सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यों जैसे सरहुल और कर्मा पर्व के लिए समर्पित कर आदिवासी संस्कृति के संरक्षण के ख्याल करते हुए निर्माण कराया गया था|
धूमकुड़िया भवन आदिवासी समाज के लोगों के लिए मिलन स्थल के रूप में उपयोग करना था|
जिससे आदिवासी समाज एक दूसरे से जुड़ सके|
पारंपरिक धूम कुड़िया प्रथम के अनुरूप युवा पीढ़ी को अपनी परंपरा, सामाजिक संस्कारों और जीवन शैली से परिचित कराना था 
लेकिन आप देख सकते हैं कि यह धूमकुड़िया भवन को गौशाला और पुआल का गोदाम बना दिया गया है, जो स्थानीय लोगों की उदासीनता को दर्शाता है, जो अपनी परंपराओं को धीरे-धीरे भूलते जा रहे हैं|ऐसा लगता है कि उन्हें धमकुडिया भवन निर्माण के उद्देश्यों के बारे में जानकारी ही नहीं है|
    user_Shamsher Alam
    Shamsher Alam
    Local News Reporter मनिका, लातेहार, झारखंड•
    8 hrs ago
  • Post by MUKESH NATH
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    Post by MUKESH NATH
    user_MUKESH NATH
    MUKESH NATH
    चंदवा, लातेहार, झारखंड•
    11 hrs ago
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