आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में स्वास्थ्य और पोषण सुरक्षा पर विशेष ध्यान देना अत्यंत आवश्यक है। कृषि विज्ञान केंद्र, माधोपुर के वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. अभिषेक प्रताप सिंह ने पोषण वाटिका के महत्व पर जोर देते हुए इसे 'कुपोषण मुक्त भारत' के लक्ष्य को प्राप्त करने का सबसे सरल उपाय बताया है। डॉ. सिंह के अनुसार, पोषण वाटिका घर के आस-पास की खाली भूमि पर या जमीन उपलब्ध न होने पर छत पर भी बनाई जा सकती है। प्राकृतिक तरीके और बिना रसायन के उगाई गई सब्जियों व फलों का सेवन परिवार के स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी है। गोबर की खाद, जीवामृत और प्राकृतिक विधि से उगाई गई ये फसलें कीटनाशकों के अवशेषों से मुक्त होती हैं, जिससे कैंसर, किडनी और लीवर जैसी बीमारियों का खतरा कम होता है। ताजी हरी सब्जियां, सहजन, पालक, गाजर, पपीता, अमरूद, नींबू और आंवला विटामिन-A, C, आयरन, कैल्शियम व जिंक के प्रमुख स्रोत हैं। इनके नियमित सेवन से बच्चों में कुपोषण और महिलाओं में खून की कमी दूर होती है। शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए विटामिन-C से भरपूर आंवला, नींबू, अमरूद और सहजन का सेवन मौसमी बीमारियों से बचाव में सहायक है। इसके अतिरिक्त, किसान अतिरिक्त उत्पादन को स्थानीय बाजार में बेचकर आय अर्जित कर सकते हैं और बाजार पर निर्भरता कम कर सकते हैं। नौतन प्रखंड के बैकुंठवा गांव के किसान राघोशरण प्रसाद ने बताया कि लगभग 250 वर्ग मीटर की पोषण वाटिका से उनके पूरे परिवार की साल भर की सब्जी-फल की जरूरत पूरी हो जाती है और अतिरिक्त उत्पादन बेचकर उन्हें लाभ मिलता है। वे प्रतिमाह 2000-2500 रुपये की बचत भी कर रहे हैं। वहीं, बैरिया प्रखंड के पुजहा गांव की श्रीमति विंदा देवी ने तो अपने घर की छत पर पोषण वाटिका बनाकर एक मिसाल पेश की है। डॉ. अभिषेक प्रताप सिंह ने सुझाव दिया कि सहजन, पपीता, नींबू, आंवला और करौंदा जैसे बड़े पौधों को वाटिका की उत्तर और पश्चिम दिशा में लगाना चाहिए ताकि उनकी छाया अन्य सब्जियों पर न पड़े। वहीं, हल्दी, अदरक और पत्तेदार साग-भाजी को छायादार स्थान पर लगाना उचित रहता है। कृषि विज्ञान केंद्र 'एक घर, एक पोषण वाटिका' अभियान के तहत चयनित गांवों में महिलाओं को सब्जी बीज किट और तकनीकी प्रशिक्षण भी प्रदान कर रहा है। डॉ. सिंह ने अंत में कहा कि हर घर में पोषण वाटिका का होना अनिवार्य है, क्योंकि रसायन-मुक्त सब्जियों का सेवन करने से डॉक्टर के पास जाने की आवश्यकता काफी हद तक कम हो जाती है।
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में स्वास्थ्य और पोषण सुरक्षा पर विशेष ध्यान देना अत्यंत आवश्यक है। कृषि विज्ञान केंद्र, माधोपुर के वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. अभिषेक प्रताप सिंह ने पोषण वाटिका के महत्व पर जोर देते हुए इसे 'कुपोषण मुक्त भारत' के लक्ष्य को प्राप्त करने का सबसे सरल उपाय बताया है। डॉ. सिंह के अनुसार, पोषण वाटिका घर के आस-पास की खाली भूमि पर या जमीन उपलब्ध न होने पर छत पर भी बनाई जा सकती है। प्राकृतिक तरीके और बिना रसायन के उगाई गई सब्जियों व फलों का सेवन परिवार के स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी है। गोबर
की खाद, जीवामृत और प्राकृतिक विधि से उगाई गई ये फसलें कीटनाशकों के अवशेषों से मुक्त होती हैं, जिससे कैंसर, किडनी और लीवर जैसी बीमारियों का खतरा कम होता है। ताजी हरी सब्जियां, सहजन, पालक, गाजर, पपीता, अमरूद, नींबू और आंवला विटामिन-A, C, आयरन, कैल्शियम व जिंक के प्रमुख स्रोत हैं। इनके नियमित सेवन से बच्चों में कुपोषण और महिलाओं में खून की कमी दूर होती है। शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए विटामिन-C से भरपूर आंवला, नींबू, अमरूद और सहजन का सेवन मौसमी बीमारियों से बचाव में सहायक है। इसके अतिरिक्त, किसान अतिरिक्त उत्पादन को स्थानीय बाजार में
बेचकर आय अर्जित कर सकते हैं और बाजार पर निर्भरता कम कर सकते हैं। नौतन प्रखंड के बैकुंठवा गांव के किसान राघोशरण प्रसाद ने बताया कि लगभग 250 वर्ग मीटर की पोषण वाटिका से उनके पूरे परिवार की साल भर की सब्जी-फल की जरूरत पूरी हो जाती है और अतिरिक्त उत्पादन बेचकर उन्हें लाभ मिलता है। वे प्रतिमाह 2000-2500 रुपये की बचत भी कर रहे हैं। वहीं, बैरिया प्रखंड के पुजहा गांव की श्रीमति विंदा देवी ने तो अपने घर की छत पर पोषण वाटिका बनाकर एक मिसाल पेश की है। डॉ. अभिषेक प्रताप सिंह ने सुझाव दिया कि सहजन, पपीता, नींबू,
आंवला और करौंदा जैसे बड़े पौधों को वाटिका की उत्तर और पश्चिम दिशा में लगाना चाहिए ताकि उनकी छाया अन्य सब्जियों पर न पड़े। वहीं, हल्दी, अदरक और पत्तेदार साग-भाजी को छायादार स्थान पर लगाना उचित रहता है। कृषि विज्ञान केंद्र 'एक घर, एक पोषण वाटिका' अभियान के तहत चयनित गांवों में महिलाओं को सब्जी बीज किट और तकनीकी प्रशिक्षण भी प्रदान कर रहा है। डॉ. सिंह ने अंत में कहा कि हर घर में पोषण वाटिका का होना अनिवार्य है, क्योंकि रसायन-मुक्त सब्जियों का सेवन करने से डॉक्टर के पास जाने की आवश्यकता काफी हद तक कम हो जाती है।
- बलिया शहर के कुंवर सिंह इंटर कॉलेज परिसर में उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी, लखनऊ के सहयोग से पंडित पारसनाथ उपाध्याय स्मृति न्यास द्वारा एक संगीत प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। म्यूजिक प्लेनेट संगीत प्रशिक्षण केंद्र के सचिव और संगीत शिरोमणि डॉ. अरविंद उपाध्याय के निर्देशन में संचालित इस कार्यशाला के सत्रहवें दिन का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस कार्यशाला में बच्चों को गीत, संगीत, नृत्य और विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियों का प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। कार्यक्रम में कुंवर सिंह डिग्री कॉलेज के प्रो. मंजीत सिंह मुख्य अतिथि तथा सनबीम स्कूल के शिक्षक एवं साहित्यकार डॉ. नवचंद्र तिवारी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जिनका स्वागत टीडी कॉलेज के बायोटेक विभागाध्यक्ष डॉ. राहुल पांडेय ने पुष्पहार अर्पित कर किया। अपने संबोधन में प्रो. मंजीत सिंह ने गीत-संगीत को मानव जीवन का अभिन्न अंग बताते हुए कहा कि शिक्षा के साथ कला का ज्ञान विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और उन्हें एक अतिरिक्त योग्यता प्रदान करता है। वहीं, डॉ. नवचंद्र तिवारी ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि ग्रीष्मावकाश बच्चों की छिपी प्रतिभाओं को निखारने और उन्हें नई दिशा देने का सबसे उपयुक्त समय होता है, और ऐसे प्रशिक्षण शिविर बच्चों के सर्वांगीण विकास में सहायक सिद्ध होते हैं। इस कार्यशाला के सफल संचालन में पंडित पारसनाथ उपाध्याय स्मृति न्यास की अध्यक्षा श्रीमती जया उपाध्याय, आनंद जी वर्मा, सुशील कुमार तिवारी, श्याम कुमार वर्मा, सूरज सिंह और अदिति मिश्रा का सराहनीय योगदान रहा। इस अवसर पर एससी कॉलेज के प्रो. रामकुमार सिंह, सुदिष्टि पुरी महाविद्यालय के प्रो. विवेकानंद देव पांडेय, मीरा देवी डिग्री कॉलेज के प्रो. शैलेंद्र श्रीवास्तव, कुंवर सिंह इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य शशि प्रेमदेव, कवयित्री सुशील पाल, नम्रता राय, निकिता, कृष्णदत्त पांडेय, राजेश सहित अनेक गणमान्य लोग भी उपस्थित रहे।1
- पश्चिमी चंपारण जिले के मझौलिया प्रखंड क्षेत्र के अमवा मझार स्थित गंडक नहर के 55 पुल बड़ा केवड़ा के समीप एक दर्दनाक हादसा हुआ है, जहाँ रील (वीडियो) बनाने के दौरान दो युवकों की डूबने से मौत हो गई। इस घटना के बाद पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है और मृतकों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। अंचलाधिकारी डॉ. राजीव रंजन कुमार ने इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि मृतकों की पहचान मुफस्सिल थाना क्षेत्र के बारी टोला निवासी धर्म कुमार (18 वर्ष), पिता विनोद यादव, और करण कुमार (19 वर्ष), पिता नंद लाल महतो के रूप में हुई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, दोनों युवक अपने कुछ साथियों के साथ गंडक नहर के 55 पुल बड़ा केवड़ा के पास गए थे। वे मोबाइल से रील बनाने में व्यस्त थे, तभी उनका संतुलन बिगड़ गया और वे नहर के गहरे पानी में जा गिरे। आसपास मौजूद लोगों ने उन्हें बचाने का प्रयास किया, लेकिन तेज बहाव और गहराई के कारण वे सफल नहीं हो सके। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची। काफी खोजबीन के बाद दोनों युवकों के शवों को नहर से बाहर निकाला गया। मुफस्सिल थाना पुलिस ने शवों को अपने कब्जे में लेकर आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की और पोस्टमार्टम के लिए बेतिया जीएमसीएच भेज दिया। इस दुखद घटना के बाद मृतकों के गांव बारी टोला में गहरा मातम पसरा हुआ है, जहाँ परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और ग्रामीण भी इस हादसे से स्तब्ध हैं। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि नदियों, नहरों और अन्य जलाशयों के किनारे वीडियो या रील बनाते समय विशेष सावधानी बरतें, ताकि भविष्य में इस प्रकार की दुर्घटनाओं से बचा जा सके।4
- नौतन थाना क्षेत्र के शिवराजपुर स्थित गंडक नदी में शुक्रवार देर रात लगभग 10 बजे तेज आंधी के दौरान नाव से गिरकर एक युवक के डूब जाने की घटना सामने आई है। डूबे हुए युवक की पहचान बैरा परसौनी गांव निवासी शैलेन्द्र चौधरी के 23 वर्षीय पुत्र साजन लाल चौधरी के रूप में हुई है। परिजनों ने बताया कि साजन लाल चौधरी गंडक पार दियरा क्षेत्र में खेती-बाड़ी के कार्य से गए थे और शुक्रवार रात करीब दस बजे नाव से घर लौट रहे थे। इसी दौरान अचानक तेज आंधी आ गई, जिससे उनका संतुलन बिगड़ गया और वे नाव से नदी में गिरकर डूब गए। नाव पर सवार अन्य लोगों ने उन्हें बचाने का प्रयास भी किया, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिल सकी। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और एसडीआरएफ टीम को बुलाकर युवक की खोजबीन शुरू कर दी। थानाध्यक्ष प्रमोद कुमार पासवान ने जानकारी दी कि युवक की तलाश जारी है और एसडीआरएफ की टीम गंडक नदी में लगातार सर्च अभियान चलाकर शव की खोज में जुटी हुई है।1
- पश्चिम चंपारण जिले के योगापट्टी प्रखंड, धधवा ग्राम पंचायत और नवलपुर पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आने वाले दधियावा गांव में 'दधियावा घाव रोड' की स्थिति अत्यंत दयनीय है। इस सड़क की खराब हालत को देखते हुए, स्थानीय लोगों ने सरकार से विनम्र निवेदन किया है कि इसका निर्माण जल्द से जल्द करवाया जाए।1
- अपनी मांगों को लेकर वैश्य समाज ने जोरदार आवाज उठाई है, जिसमें उन्हें अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) में शामिल करने की मांग प्रमुख है। इस मांग को लेकर वैश्य समाज की हुंकार सुपौल से लेकर देश की राजधानी दिल्ली तक गूंजी है, जो समुदाय के दृढ़ संकल्प को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।1
- बेतिया से एक सनसनीखेज घटना सामने आई है, जहाँ पति-पत्नी के बीच चल रहे विवाद ने कथित तौर पर गोलीबारी का रूप ले लिया। साठी थाना क्षेत्र के पांडे टोला में देर रात करीब दो बजे ताबड़तोड़ फायरिंग से इलाके में दहशत फैल गई। बताया गया कि दो बाइक पर सवार तीन युवक गांव में पहुँचे और अचानक आधा दर्जन राउंड फायरिंग कर फरार हो गए। रात के सन्नाटे में गोलियों की आवाज सुनकर ग्रामीणों में अफरा-तफरी मच गई और घटनास्थल पर भीड़ जुट गई। सूचना मिलते ही साठी थाना पुलिस, नरकटियागंज एसडीपीओ जय प्रकाश सिंह और एफएसएल की टीम मौके पर पहुँची और जाँच शुरू कर दी। पुलिस आसपास के लोगों से पूछताछ कर रही है, साथ ही क्षेत्र में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है ताकि फायरिंग करने वालों की पहचान की जा सके। इस घटना का संबंध एक पारिवारिक विवाद से बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, स्थानीय निवासी संजय पांडे के पुत्र चुन्नू पांडे की शादी इसी वर्ष 19 फरवरी को नरकटियागंज की एक युवती से हुई थी। शादी के कुछ ही दिनों बाद दोनों पक्षों के बीच विवाद शुरू हो गया था, जो बढ़कर थाने तक पहुँच गया और एक प्राथमिकी भी दर्ज कराई गई थी। चुन्नू पांडे का आरोप है कि देर रात हुई गोलीबारी के पीछे ससुराल पक्ष का हाथ हो सकता है, क्योंकि शादी के बाद से लगातार विवाद चल रहा था और संबंधित मामले में जल्द ही सुनवाई भी होनी थी। इस बीच हुई फायरिंग की घटना कई सवाल खड़े कर रही है। नरकटियागंज एसडीपीओ जय प्रकाश सिंह ने फायरिंग की घटना की पुष्टि करते हुए कहा है कि आवेदन मिलने के बाद विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी। पुलिस फिलहाल किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुँची है और हर पहलू को ध्यान में रखते हुए सभी संभावित एंगल से मामले की जाँच कर रही है, ताकि जल्द ही घटना के पीछे की सच्चाई सामने लाई जा सके। फिलहाल, पांडे टोला में दहशत का माहौल है और लोग यह जानने को लेकर चिंतित हैं कि आधी रात गाँव में गोलियाँ चलाने वाले कौन थे और उनका मकसद क्या था। अब सबकी नजर पुलिस जाँच पर टिकी है।1
- पश्चिम चंपारण जिले के बगहा अनुमंडल अंतर्गत चौतरवा थाना क्षेत्र में रविवार को एक युवती के मोबाइल टावर पर चढ़ने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। लक्ष्मीपुर गांव के समीप हुई इस घटना की सूचना मिलते ही चारों ओर हड़कंप मच गया और मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई। लोग किसी अनहोनी की आशंका से चिंतित दिखे, वहीं प्रशासनिक महकमे में भी हलचल तेज हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, युवती काफी ऊंचाई तक मोबाइल टावर पर चढ़ गई थी, जिसके बाद ग्रामीणों ने तुरंत चौतरवा थाना पुलिस को सूचित किया। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और पूरे क्षेत्र को नियंत्रण में लेते हुए युवती को सुरक्षित नीचे उतारने की कवायद शुरू की। इस दौरान टावर के आसपास सैकड़ों नहीं बल्कि हजारों की संख्या में लोग जमा हो गए, जो यह जानने को उत्सुक थे कि आखिर युवती ने ऐसा कदम क्यों उठाया। करीब एक घंटे से अधिक समय तक टावर के नीचे हाई-वोल्टेज ड्रामा चलता रहा, जहाँ पुलिसकर्मी, स्थानीय जनप्रतिनिधि और ग्रामीण लगातार युवती से बातचीत कर उसे समझाने का प्रयास करते रहे। काफी मशक्कत, धैर्य और सूझबूझ के बाद युवती नीचे उतरने के लिए तैयार हुई और उसके सुरक्षित नीचे आते ही वहां मौजूद लोगों और पुलिस प्रशासन ने राहत की सांस ली। बाद में युवती की पहचान प्रियंका कुमारी के रूप में हुई। शुरुआत में इस घटना को प्रेम प्रसंग से जोड़कर देखा जा रहा था, लेकिन बगहा एसडीपीओ निहार भूषण ने पुष्टि करते हुए बताया कि मामला पति-पत्नी के रिश्ते से जुड़ा है। पुलिस की जांच में सामने आया कि प्रियंका उत्तर प्रदेश की रहने वाली है और उसने चौतरवा क्षेत्र के एक युवक से प्रेम विवाह किया था। विवाह के बाद दोनों के बीच दूरियां बढ़ गई थीं और युवक रोजगार के लिए दूसरे प्रदेश चला गया था। प्रियंका अपने पति से मिलने और बातचीत करने की उम्मीद में उत्तर प्रदेश से चौतरवा पहुंची थी, लेकिन उससे मुलाकात न होने और जानकारी न मिलने पर वह भावनात्मक रूप से आहत हो गई, जिसके चलते मानसिक तनाव और निराशा में उसने मोबाइल टावर पर चढ़ने जैसा बड़ा कदम उठाया। इस पूरी घटना के दौरान पुलिस ने बेहद संयम और सतर्कता का परिचय दिया। पुलिसकर्मियों ने जल्दबाजी से बचते हुए पहले युवती का विश्वास जीता और लगातार बातचीत के जरिए स्थिति को बिना किसी नुकसान के नियंत्रित किया। यदि समय रहते पुलिस और स्थानीय लोगों की सक्रियता नहीं होती, तो कोई बड़ा हादसा हो सकता था। युवती को सुरक्षित नीचे उतारने के बाद पुलिस ने उसे अपने संरक्षण में लिया और विस्तृत पूछताछ की। पुलिस अब पूरे मामले की जांच कर रही है तथा युवती और उसके पति से जुड़े तथ्यों को खंगाल रही है। फिलहाल, यह घटना पूरे बगहा और चौतरवा क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। मोबाइल टावर पर चढ़ी युवती को सुरक्षित बचाने में पुलिस की तत्परता और सूझबूझ की सराहना की जा रही है, क्योंकि समय रहते किए गए प्रयासों से एक बड़ी अनहोनी टल गई। यह घटना रिश्तों में संवाद और समझ की अहमियत के साथ-साथ संकट की घड़ी में प्रशासन की त्वरित कार्रवाई के महत्व को भी उजागर करती है।1