भिंड जिले के गोहद में चंबल अंचल की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को नई पहचान दिलाने के लिए चल रहे "गौ-हद धाम अभियान" को अब संत समाज का भी समर्थन मिल गया है। खनेता धाम स्थित प्राचीन श्री रघुनाथ जी मंदिर के महंत एवं महामंडलेश्वर परम पूज्य श्री रामभूषण दास जी महाराज ने गोहद की धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता पर जोर देते हुए इसे श्रीकृष्ण गमन पथ से जोड़ने की आवश्यकता जताई है। महंत श्री रामभूषण दास जी महाराज ने बताया कि गोहद वैष्णव परंपरा, संत संस्कृति और जनआस्था का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। स्थानीय परंपराओं और प्राचीन मान्यताओं के अनुसार, गोहद का संबंध भगवान श्रीकृष्ण की गौ-चारण लीलाओं से है, जिसके कारण इसे "गौ-हद" यानी गऊओं की अंतिम सीमा या गोचारण क्षेत्र की हद के रूप में जाना जाता है। उन्होंने गोहद के कई प्राचीन मंदिरों और धार्मिक स्थलों, जैसे राजगुरु की जग्गा, कालिया कंठ की जग्गा, रघुनाथ जी की जग्गा, मदनमोहन जी की जग्गा, नरसिंह जी की जग्गा और लक्ष्मण जी मंदिर का उल्लेख किया, जो ब्रज और वृंदावन की वैष्णव परंपरा से जुड़े हैं। महंत श्री ने मध्यप्रदेश शासन से आग्रह किया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा घोषित श्रीकृष्ण गमन पथ योजना में गोहद को शामिल करने पर गंभीरता से विचार किया जाए। उन्होंने कहा कि मथुरा और वृंदावन की तरह चंबल अंचल की यह भूमि भी अपनी लोकपरंपराओं, संत परंपराओं और धार्मिक धरोहरों के कारण विशेष महत्व रखती है और इसके संरक्षण एवं विकास की आवश्यकता है। इस अवसर पर गौ-हद धाम अभियान से जुड़े एक प्रतिनिधिमंडल ने महंत श्री से भेंट की और अभियान की रूपरेखा पर चर्चा की। प्रतिनिधिमंडल ने गोहद, मितावली, पढ़ावली, काकनमठ, शनिधाम, कुंतलपुर और कर्णकुंड सहित क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों को जोड़कर एक धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन सर्किट विकसित करने का प्रस्ताव भी रखा है। अभियान से जुड़े कार्यकर्ताओं का मानना है कि इन स्थलों के एकीकृत विकास से क्षेत्र की धार्मिक पहचान मजबूत होगी, पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
भिंड जिले के गोहद में चंबल अंचल की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को नई पहचान दिलाने के लिए चल रहे "गौ-हद धाम अभियान" को अब संत समाज का भी समर्थन मिल गया है। खनेता धाम स्थित प्राचीन श्री रघुनाथ जी मंदिर के महंत एवं महामंडलेश्वर परम पूज्य श्री रामभूषण दास जी महाराज ने गोहद की धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता पर जोर देते हुए इसे श्रीकृष्ण गमन पथ से जोड़ने की आवश्यकता जताई है। महंत श्री रामभूषण दास जी महाराज ने बताया कि गोहद वैष्णव परंपरा, संत संस्कृति और जनआस्था का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। स्थानीय परंपराओं और प्राचीन मान्यताओं के अनुसार, गोहद का संबंध भगवान श्रीकृष्ण की गौ-चारण लीलाओं से है, जिसके कारण इसे "गौ-हद" यानी गऊओं की अंतिम सीमा या गोचारण क्षेत्र की हद के रूप में जाना जाता है। उन्होंने गोहद के कई प्राचीन मंदिरों और धार्मिक स्थलों, जैसे राजगुरु की जग्गा, कालिया कंठ की जग्गा, रघुनाथ जी की जग्गा, मदनमोहन जी की जग्गा, नरसिंह जी की जग्गा और लक्ष्मण जी मंदिर का उल्लेख किया, जो ब्रज और वृंदावन की वैष्णव परंपरा से जुड़े हैं। महंत श्री ने मध्यप्रदेश शासन से आग्रह किया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा घोषित श्रीकृष्ण गमन पथ योजना में गोहद को शामिल करने पर गंभीरता से विचार किया जाए। उन्होंने कहा कि मथुरा और वृंदावन की तरह चंबल अंचल की यह भूमि भी अपनी लोकपरंपराओं, संत परंपराओं और धार्मिक धरोहरों के कारण विशेष महत्व रखती है और इसके संरक्षण एवं विकास की आवश्यकता है। इस अवसर पर गौ-हद धाम अभियान से जुड़े एक प्रतिनिधिमंडल ने महंत श्री से भेंट की और अभियान की रूपरेखा पर चर्चा की। प्रतिनिधिमंडल ने गोहद, मितावली, पढ़ावली, काकनमठ, शनिधाम, कुंतलपुर और कर्णकुंड सहित क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों को जोड़कर एक धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन सर्किट विकसित करने का प्रस्ताव भी रखा है। अभियान से जुड़े कार्यकर्ताओं का मानना है कि इन स्थलों के एकीकृत विकास से क्षेत्र की धार्मिक पहचान मजबूत होगी, पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
- चंबल का संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की सुरक्षा : डॉ. मनोज जैन चंबल का संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की सुरक्षा : डॉ. मनोज जैन कनकपुरा (भिंड), 17 जून। विश्व मगरमच्छ दिवस एवं मरुस्थलीकरण और सूखे का मुकाबला करने के लिए विश्व दिवस के अवसर पर सामाजिक संस्था सुप्रयास द्वारा कनकपुरा स्थित चंबल नदी तट पर जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जल संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन तथा चंबल नदी के संरक्षण का संकल्प लिया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सुप्रयास के सचिव एवं पर्यावरणविद् डॉ. मनोज जैन ने कहा कि चंबल नदी केवल एक नदी नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों और असंख्य जीव-जंतुओं की जीवनरेखा है। चंबल में पाए जाने वाले मगरमच्छ, घड़ियाल, कछुए एवं अन्य जलीय जीव इस क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता के प्रतीक हैं। इनके संरक्षण के बिना पर्यावरणीय संतुलन की कल्पना नहीं की जा सकती। डॉ. जैन ने कहा कि जलवायु परिवर्तन, घटते जल स्रोत और बढ़ता मरुस्थलीकरण मानव सभ्यता के सामने गंभीर चुनौती बनकर उभर रहे हैं। ऐसे समय में जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, वृक्षारोपण तथा नदियों की स्वच्छता को जनआंदोलन का स्वरूप देना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि प्रकृति संरक्षण केवल पर्यावरण का विषय नहीं, बल्कि मानव अस्तित्व और भावी पीढ़ियों की सुरक्षा का प्रश्न है। उन्होंने उपस्थित नागरिकों से जल के विवेकपूर्ण उपयोग, नदियों एवं जलाशयों के संरक्षण तथा अधिकाधिक वृक्षारोपण का आह्वान किया। कार्यक्रम में प्रतिभागियों ने "जल बचेगा-जीवन बचेगा", "नदी बचेगी-मगरमच्छ बचेगा" तथा "धरती बचेगी-भविष्य बचेगा" के संकल्प के साथ पर्यावरण संरक्षण हेतु सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया। इस अवसर पर गिरीश शर्मा, अनिल सिंह भदोरिया, रघुराज सिंह भदोरिया, रघुवीर सिंह भदोरिया, कप्तान सिंह भदोरिया, दशरथ सिंह भदोरिया, गुड्डू सिंह भदोरिया, लाखन सिंह भदोरिया, भीम शंकर सिंह भदोरिया, विश्राम सिंह भदोरिया, मंगल सिंह भदोरिया, कल्लू सिंह भदोरिया ने भाग लिया और चंबल नदी और उसके वन्यजीवों के संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।3
- दतिया में आयोजित जनसंवाद कार्यक्रम के दौरान पुलिस अधीक्षक मयूर खंडेलवाल ने नागरिकों की समस्याओं को सुना। यह जानकारी दतिया से जिला ब्यूरो चीफ संजीव रिछारिया की रिपोर्ट में दी गई है। कार्यक्रम में उपस्थित नागरिकों ने अपनी विभिन्न परेशानियाँ पुलिस अधीक्षक के सामने रखीं।1
- मध्य प्रदेश के गोहद में चंबल अंचल की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को नया आयाम देने के लिए चलाए जा रहे "गौ-हद धाम अभियान" को अब संत समाज का भी समर्थन मिल गया है। खनेता धाम स्थित प्राचीन श्री रघुनाथ जी मंदिर के महंत महामंडलेश्वर परम पूज्य श्री रामभूषण दास जी महाराज ने गोहद की धार्मिक और ऐतिहासिक महत्ता पर अपने विचार व्यक्त करते हुए इसे प्राचीन वैष्णव परंपराओं, संत संस्कृति और जनआस्था का केंद्र बताया। महंत श्री ने कहा कि स्थानीय परंपराओं और प्राचीन मान्यताओं के अनुसार, गोहद का संबंध भगवान श्रीकृष्ण की गौ-चारण लीलाओं से है, जिसके कारण इस क्षेत्र को "गौ-हद" यानी गऊओं की अंतिम सीमा या गोचारण क्षेत्र की हद के रूप में जाना जाता है। उन्होंने बताया कि गोहद के कई प्राचीन मंदिरों और धार्मिक संस्थाओं का संबंध ब्रज एवं वृंदावन की वैष्णव परंपरा से रहा है, जिसमें राजगुरु की जग्गा, कालिया कंठ की जग्गा, रघुनाथ जी की जग्गा, मदनमोहन जी की जग्गा, नरसिंह जी की जग्गा और लक्ष्मण जी मंदिर सहित सैकड़ों प्राचीन मंदिर इस क्षेत्र की आध्यात्मिक विरासत के साक्षी हैं। महंत श्री रामभूषण दास जी ने मध्य प्रदेश शासन से आग्रह किया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा घोषित श्रीकृष्ण गमन पथ योजना में गोहद को शामिल करने पर गंभीरता से विचार किया जाए। उन्होंने जोर दिया कि यदि मथुरा और वृंदावन भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं के प्रमुख केंद्र हैं, तो चंबल अंचल की यह भूमि भी अपनी लोकपरंपराओं, संत परंपराओं और धार्मिक धरोहरों के कारण विशेष अध्ययन और संरक्षण की पात्र है। गौ-हद धाम अभियान से जुड़े प्रतिनिधि मंडल ने महंत श्री से मुलाकात कर अभियान की रूपरेखा साझा की। इस अवसर पर, कार्यकर्ताओं ने गोहद, मितावली, पढ़ावली, काकनमठ, शनिधाम, कुंतलपुर और कर्ण कुंड को जोड़कर एक धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन सर्किट विकसित करने की आवश्यकता पर भी चर्चा की।1
- मध्य प्रदेश के डबरा में वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप जी के 486वें जन्म महोत्सव के अवसर पर एक भव्य चल समारोह निकाला गया। यह आयोजन रावत राजपूत क्षत्रिय समाज सेवा समिति, संभाग ग्वालियर द्वारा किया गया, जिसमें सैकड़ों की संख्या में लोग मौजूद थे। कार्यक्रम का आरंभ शुगर मिल जयशिव गार्डन में अतिथि सम्मान और एक सभा के साथ हुआ, जिसमें साधु-संतों का भी आगमन हुआ। इसके बाद चल समारोह शुरू हुआ, जो डबरा के मुख्य मार्गों से होते हुए महाराणा प्रताप चौराहा, झांसी रोड, बल्ला का डेरा पर जाकर समाप्त हुआ। इस दौरान जगह-जगह चल समारोह का भव्य स्वागत किया गया।2
- ग्वालियर के वरिष्ठ भाजपा युवा नेता सादिक खान मेव शानू ने भोपाल में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल जी से मुलाकात की। इस अवसर पर सादिक खान मेव शानू ने प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल जी का स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत और सम्मान किया।1
- एक युवती ने दिल्ली के एक मसाज सेंटर में चल रहे कथित सेक्स रैकेट का चौंकाने वाला काला सच उजागर किया है। युवती ने बताया कि यह अवैध धंधा प्रशासन की मिलीभगत और सांठगांठ से बेखौफ संचालित हो रहा था।1
- दतिया जिले के सेंवढ़ा नगर में एक पालतू गधे के आतंक से आमजन परेशान हैं, जिससे राहगीरों, दुकानदारों और वाहन चालकों में भय का माहौल है। बीते कई दिनों से यह गधा नगर की मुख्य सड़कों, बाजार क्षेत्र और आवासीय मोहल्लों में खुलेआम घूम रहा है, जिसके कारण लोगों को काफी असुविधा हो रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार, गधा कई बार राह चलते लोगों के पीछे दौड़ पड़ता है और हमला करने की कोशिश करता है। बाजार क्षेत्र में खरीदारी करने आने वाले लोगों, महिलाओं और बच्चों को खास सावधानी बरतनी पड़ रही है। दुकानदारों ने बताया कि गधा दुकानों के सामने रखे सामान को नुकसान पहुंचा चुका है और ग्राहकों के बीच अफरा-तफरी भी मचाता है। कुछ लोगों का यह भी आरोप है कि गधा सड़क पर खड़े दोपहिया वाहनों और ठेलों के आसपास भी उत्पात मचाता है, जिससे दुर्घटना का खतरा बना रहता है। नगरवासियों का कहना है कि गधे का मालिक उसे खुला छोड़ देता है, जिसके कारण वह पूरे नगर में घूमता रहता है। लोगों ने कई बार मालिक को समझाने का प्रयास किया, लेकिन समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया। स्थानीय नागरिकों ने नगर परिषद और प्रशासन से जल्द से जल्द इस समस्या का समाधान करने की मांग की है। उनकी चिंता है कि अगर समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए तो किसी बड़ी दुर्घटना से इनकार नहीं किया जा सकता, खासकर स्कूल जाने वाले बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर वे चिंतित हैं। लोगों ने नगर परिषद के अधिकारियों से आग्रह किया है कि गधे के मालिक की पहचान कर उसे अपने पशु को नियंत्रित रखने के निर्देश दिए जाएं, साथ ही नगर में आवारा घूम रहे अन्य पशुओं पर भी प्रभावी कार्रवाई की जाए। नगरवासियों को उम्मीद है कि प्रशासन जल्द हस्तक्षेप कर इस समस्या से उन्हें राहत दिलाएगा।1
- दतिया में आयोजित जनसंवाद कार्यक्रम में पुलिस अधीक्षक (एसपी) मयूर खंडेलवाल ने नागरिकों की समस्याओं को सुना। यह जानकारी दतिया से जिला ब्यूरो चीफ संजीव रिछारिया की रिपोर्ट में दी गई है।1
- आज 16 जून 2026 को भिंड जिले के लहार विकासखंड के शिक्षकों ने वर्ष 2009 और 2017 के नियमों में संशोधन की मांग को लेकर अपना विरोध दर्ज कराया। शिक्षकों ने अनुविभागीय अधिकारी राजस्व (एसडीएम) लहार के माध्यम से भारत सरकार के प्रधानमंत्री को एक ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन के माध्यम से शिक्षकों ने मांग की है कि वर्ष 2009 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी परीक्षा की अनिवार्यता से मुक्त किया जाए। शिक्षकों का तर्क है कि उनके पास वर्षों का शैक्षणिक अनुभव है, इसलिए उन्हें इस परीक्षा के दायरे से बाहर रखा जाना चाहिए। इस प्रदर्शन में जानकी नंदन समाधिया, रघुनन्दन सिंह, महेंद्र सिंह, शैलेन्द्र चौधरी, रामेन्द्र सिंह, देवेंद्र प्रजापति, उमाशंकर त्रिपाठी, नाहर सिंह, शिवमंगल दुवे, सौरव ओझा, योगेश श्रीवास्तव, कौशलेंद्र सिंह, चंद्रशेखर पाण्डेय, संजय वर्मा, हरेंद्र सिंह, सतीश श्रीवास्तव, रामजीलाल उपाध्याय, राजेश सिंह चौहान, उमाशंकर शर्मा, इक्षाशंकर शर्मा, अजय शर्मा, भानसिंह, श्रीमती अमिता गुप्ता, धर्मैन्द्र तिवारी, बलिराम दोहरे, सूर्यबली चौहान, हमीद खान, राकेश राठौर, संतोष शर्मा, अजय शर्मा, शशिकांत कुशवाहा, महेश चंद्र दिवाकर, संजय कांकोरिया, हरिद्वार दोहरे, भवानी प्रसाद, धर्मैन्द्र दौहरे और राजा सिंह सहित सैकड़ों शिक्षक शामिल रहे। उपस्थित सभी शिक्षकों ने एकजुट होकर अपनी मांग सरकार तक पहुंचाने और जल्द से जल्द इसका निराकरण करने की अपील की है।1