Shuru
Apke Nagar Ki App…
मोहर्रम के पवित्र अवसर को देखते हुए पडरौना कोतवाली में पीस कमेटी की एक बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में शांति और सौहार्द के वातावरण को बनाए रखने पर ज़ोर देना था, जिसके लिए सभी उपस्थित लोगों से विशेष अपील की गई।
MANOJ KUMAR YADAV
मोहर्रम के पवित्र अवसर को देखते हुए पडरौना कोतवाली में पीस कमेटी की एक बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में शांति और सौहार्द के वातावरण को बनाए रखने पर ज़ोर देना था, जिसके लिए सभी उपस्थित लोगों से विशेष अपील की गई।
More news from उत्तर प्रदेश and nearby areas
- मोहर्रम के पवित्र अवसर को देखते हुए पडरौना कोतवाली में पीस कमेटी की एक बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में शांति और सौहार्द के वातावरण को बनाए रखने पर ज़ोर देना था, जिसके लिए सभी उपस्थित लोगों से विशेष अपील की गई।1
- कुशीनगर जिले के सुकरौली विकासखंड क्षेत्र की ग्राम सभा पिडरा से ग्रामीण विकास योजनाओं की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करने वाला एक मामला सामने आया है। आरोप है कि गांव में लगभग पांच वर्षों बाद खड़ंजा सड़क का निर्माण कराया गया, लेकिन एक व्यक्ति के घर तक जाने वाला रास्ता छोड़ दिया गया, जबकि आसपास के अन्य घरों तक सड़क बनाई गई है। शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्हें जानबूझकर विकास कार्य से वंचित किया गया है। पीड़ित ने इस मामले की शिकायत आईजीआरएस और मुख्यमंत्री पोर्टल पर की, जिसके बाद विकासखंड कार्यालय से ए.डी.ओ. पंचायत द्वारा जांच की गई। शिकायतकर्ता के मुताबिक, जांच के दौरान उन्हें समस्या के समाधान का आश्वासन मिला था। हालांकि, कुछ दिनों बाद उन्हें सूचित किया गया कि यह कार्य वर्ष 2026 की कार्ययोजना में शामिल किया गया है, लेकिन ग्राम प्रधान का कार्यकाल खत्म होने और प्रशासक नियुक्त होने के कारण अब इसे पूरा नहीं किया जा सकता। अब बड़ा सवाल यह है कि यदि सड़क निर्माण कार्ययोजना के तहत होना था, तो एक परिवार को छोड़कर बाकी लोगों तक विकास कार्य कैसे पहुंच गया? शिकायतकर्ता न्याय और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं, ताकि यह पता चल सके कि क्या सरकारी योजनाओं का लाभ सभी पात्र लोगों को समान रूप से मिलना चाहिए और विकास कार्यों में भेदभाव की कोई गुंजाइश होनी चाहिए या नहीं।1
- उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के एक गाँव में पिछले दस सालों से सड़क की स्थिति बेहद खराब है, जिससे ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। विशेषकर बरसात के मौसम में इस जर्जर रास्ते के कारण आए दिन दुर्घटनाएँ हो रही हैं। ग्रामीणों ने इस संबंध में कई बार शिकायतें की हैं, लेकिन 'प्रधानमंत्री गड्ढा मुक्त योजना' के तहत भी इस सड़क का निर्माण नहीं हो पाया है, जिससे स्थानीय लोगों में निराशा है।1
- ईरान ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण बयान जारी करते हुए कहा है कि पूरा कश्मीर भारत का हिस्सा है। इस घोषणा के साथ ही, ईरान ने यह भी कहा है कि अब पाकिस्तान को भारत बनाने का समय आ गया है।1
- राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के देशव्यापी आह्वान पर गुरुवार को कुशीनगर जिले के परिषदीय शिक्षकों ने टेट की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग को लेकर एक बड़ा प्रदर्शन किया। जिले भर से आए 500 से अधिक शिक्षकों ने बीएसए कार्यालय से जिलाधिकारी कार्यालय तक पैदल मार्च निकाला, जिसके बाद जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री, केंद्रीय शिक्षा मंत्री और प्रधानमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन सौंपा गया। जिलाधिकारी कार्यालय में शिक्षकों के प्रतिनिधिमंडल ने अपर जिलाधिकारी (एडीएम) वैभव मिश्रा को ज्ञापन सौंपा। एडीएम ने शिक्षकों को उनकी मांग उचित माध्यम से प्रधानमंत्री तक पहुंचाने का आश्वासन दिया। महासंघ के पदाधिकारियों ने अपनी बात रखते हुए कहा कि बड़ी संख्या में शिक्षक पिछले 20 से 25 वर्षों से अपनी सेवाएँ दे रहे हैं। इन शिक्षकों ने अपनी नियुक्ति के समय तत्कालीन नियमों के अनुसार सभी निर्धारित शैक्षिक और प्रशिक्षण संबंधी अर्हताएं पूरी की थीं। इसके बावजूद, अब टेट परीक्षा की अनिवार्यता से हजारों कार्यरत शिक्षकों के सामने सेवा संबंधी संकट उत्पन्न हो गया है, जिसे देखते हुए उनके अनुभव और सेवा का सम्मान किया जाना चाहिए। मंडल अध्यक्ष राजेश शुक्ल ने जोर देकर कहा कि दशकों से अध्यापन कार्य कर रहे वरिष्ठ और बुजुर्ग शिक्षकों के लिए टेट परीक्षा को अनिवार्य करना न्यायसंगत नहीं है। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की मुख्य मांग है कि केंद्र सरकार संसद के मानसून सत्र में अध्यादेश या आवश्यक विधायी व्यवस्था के माध्यम से कार्यरत शिक्षकों को टेट की अनिवार्यता से तत्काल राहत प्रदान करे। जिलाध्यक्ष अविनाश शुक्ला ने कार्यरत शिक्षकों को न्याय दिलाने के लिए आवश्यक कदम उठाने की बात कही, जबकि कार्यवाहक महामंत्री दिलीप पांडेय ने वर्षों से सेवा दे रहे पुराने शिक्षकों को टेट की अनिवार्यता से मुक्त करने पर बल दिया। महासंघ पदाधिकारियों ने बताया कि संगठन के आह्वान पर देशभर के जिला मुख्यालयों पर एक साथ ऐसे ही प्रदर्शन और ज्ञापन कार्यक्रम आयोजित किए गए थे। इस प्रदर्शन में दिलीप सिंह, अनिरुद्ध त्रिपाठी, महेश कर्णधार, अमिताभ त्रिपाठी, हरेंद्र चौरसिया, नागेंद्र तिवारी, श्याम सुंदर तिवारी, अनूप गुप्ता, संजय मिश्र, सुशीला पाण्डेय, दुदही के अध्यक्ष उदय सिंह, केशव गोविंद राव, राहुल उपाध्याय, राकेश मणि और रवि राय सहित कई अन्य शिक्षक उपस्थित रहे।4
- उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है। पाठक ने अखिलेश यादव से बाबरी मस्जिद के निर्माण के लिए मिले चंदे के बारे में सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि जो लोग राम भक्तों पर गोली चलवाते हैं और दंगे फैलाते हैं, वे खुद सवालों के घेरे में हैं, ऐसे में वे दूसरों से क्या सवाल पूछेंगे। डिप्टी सीएम पाठक ने अखिलेश यादव से सीधे तौर पर बाबरी मस्जिद के लिए मिले चंदे का हिसाब और विस्तृत जानकारी सार्वजनिक करने की माँग की।3
- कुशीनगर के कसया में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के देशव्यापी आह्वान पर गुरुवार को परिषदीय शिक्षकों ने टेट की अनिवार्यता के विरोध में एक विशाल पैदल मार्च निकाला। इस प्रदर्शन में जिले के हजारों शिक्षक शामिल हुए, जिन्होंने बीएसए कार्यालय से जिलाधिकारी कार्यालय तक पैदल चलकर मुख्यमंत्री, भारत सरकार के शिक्षा मंत्री और प्रधानमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से सौंपा। उनकी प्रमुख मांग कार्यरत शिक्षकों को टेट की अनिवार्यता से तत्काल मुक्त करना था। जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचने पर शिक्षकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने अपर जिलाधिकारी (एडीएम) वैभव मिश्रा को ज्ञापन सौंपा। एडीएम ने शिक्षकों को आश्वासन दिया कि उनकी मांगों को उचित माध्यम से प्रधानमंत्री तक पहुंचाया जाएगा। शिक्षकों का कहना था कि उन्हें 20 से 25 वर्ष हो चुके हैं नौकरी करते हुए और उन्होंने अपनी नियुक्ति के समय सभी निर्धारित अर्हताएं पूरी की थीं। इसके बावजूद, अब टेट परीक्षा अनिवार्य किए जाने से देशभर के हजारों शिक्षकों के सामने नौकरी का संकट उत्पन्न हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह स्थिति सुप्रीम कोर्ट में गलत तथ्य प्रस्तुत किए जाने के कारण पैदा हुई है। मंडल अध्यक्ष राजेश शुक्ल ने इस अनिवार्यता को दशकों से सेवा दे रहे शिक्षकों के लिए न्यायोचित नहीं बताया। उन्होंने राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की ओर से मांग की कि केंद्र सरकार मानसून सत्र में अध्यादेश लाकर कार्यरत शिक्षकों को टेट की अनिवार्यता से मुक्ति दिलाए, क्योंकि शिक्षक वर्षों से शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं और उनके अनुभव व सेवा का सम्मान किया जाना चाहिए। महासंघ ने यह भी स्पष्ट किया कि वह शिक्षकों के सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए लगातार संघर्ष करता रहेगा। जिला अध्यक्ष अविनाश शुक्ला ने कहा कि यह निर्णय गलत तथ्यों के आधार पर आया है और सरकार ने प्रभावी ढंग से पक्ष नहीं रखा, इसलिए प्रधानमंत्री से कानून बनाकर कार्यरत शिक्षकों को न्याय दिलाने की मांग की जा रही है। कार्यवाहक महामंत्री दिलीप पांडेय ने भी वर्षों से सेवा दे रहे पुराने शिक्षकों को टेट की अनिवार्यता से मुक्त करने का आह्वान किया। महासंघ पदाधिकारियों ने जानकारी दी कि यह आंदोलन पूरे देश में राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के आह्वान पर एक साथ आयोजित किया गया, जिसमें विभिन्न राज्यों और जिलों के शिक्षकों ने जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन कर अपनी मांगों के समर्थन में ज्ञापन सौंपा। इस दौरान दिलीप सिंह, अनिरुद्ध त्रिपाठी, महेश कर्णधार, अमिताभ त्रिपाठी, हरेंद्र चौरसिया, नागेंद्र तिवारी, श्याम सुंदर तिवारी, अनूप गुप्ता, संजय मिश्र, सुशीला पाण्डेय, उदय सिंह, केशव गोविंद राव, राहुल उपाध्याय, राकेश मणि, रवि राय, संदीप तिवारी, संतोष गौड़, राजेश तिवारी, श्रीधर पांडे, गोपेश्वर पटेल, अरुण गोविंद राव, सुधीर श्रीवास्तव, शंकर दयाल पाठक, प्रेमचंद गौतम, आशीष मिश्रा, अखिलेश मिश्रा, अजिताभ तिवारी, परमानंद पांडे, अभिषेक तिवारी, विजय कन्नौजिया, दुर्गेश त्रिपाठी, रामगति प्रजापति, वैभव पांडे, देवानंद दुबे, रविन्द्र पांडेय, अजिताभ त्रिपाठी, पंकज गौड़, कृष्ण कुमार, अनुराग पांडे, तस्लीम अंसारी, ब्रजभूषण पांडेय, मनोज सिंह, अजीत गुप्ता, संजय यादव, संजय शाही, अनिल सिंह, सुमित सिंगर, राजवंत सिंह, विश्वजीत सिंह, सुनील सिंह, रवि भूषण भारती, अनूप श्रीवास्तव, धनंजय पांडे, कल्पना ओझा, सुनीता सिंह, सुनील वर्मा, रवि गुप्ता, अनामिका शाही, मीना सिंह, नीतीश चौधरी, उमेश यादव, शैलेश कुमार, यशशिन्द्र त्रिपाठी, विजय कुशवाहा, वरुण राय, अनिल मिश्रा, जोधा यादव, प्रमोद, राहुल देव, विजय सोनकर, प्रभुनाथ सिंह, सुधीर उपाध्याय, रामानुज शुक्ल सहित बड़ी संख्या में शिक्षक उपस्थित रहे।1
- एक वायरल वीडियो के सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है, जिसमें एक अवर अभियंता को रुपये लेते हुए स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। इस वीडियो के आधार पर, संबंधित मामले की जांच प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।1