कुशीनगर के कसया में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के देशव्यापी आह्वान पर गुरुवार को परिषदीय शिक्षकों ने टेट की अनिवार्यता के विरोध में एक विशाल पैदल मार्च निकाला। इस प्रदर्शन में जिले के हजारों शिक्षक शामिल हुए, जिन्होंने बीएसए कार्यालय से जिलाधिकारी कार्यालय तक पैदल चलकर मुख्यमंत्री, भारत सरकार के शिक्षा मंत्री और प्रधानमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से सौंपा। उनकी प्रमुख मांग कार्यरत शिक्षकों को टेट की अनिवार्यता से तत्काल मुक्त करना था। जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचने पर शिक्षकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने अपर जिलाधिकारी (एडीएम) वैभव मिश्रा को ज्ञापन सौंपा। एडीएम ने शिक्षकों को आश्वासन दिया कि उनकी मांगों को उचित माध्यम से प्रधानमंत्री तक पहुंचाया जाएगा। शिक्षकों का कहना था कि उन्हें 20 से 25 वर्ष हो चुके हैं नौकरी करते हुए और उन्होंने अपनी नियुक्ति के समय सभी निर्धारित अर्हताएं पूरी की थीं। इसके बावजूद, अब टेट परीक्षा अनिवार्य किए जाने से देशभर के हजारों शिक्षकों के सामने नौकरी का संकट उत्पन्न हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह स्थिति सुप्रीम कोर्ट में गलत तथ्य प्रस्तुत किए जाने के कारण पैदा हुई है। मंडल अध्यक्ष राजेश शुक्ल ने इस अनिवार्यता को दशकों से सेवा दे रहे शिक्षकों के लिए न्यायोचित नहीं बताया। उन्होंने राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की ओर से मांग की कि केंद्र सरकार मानसून सत्र में अध्यादेश लाकर कार्यरत शिक्षकों को टेट की अनिवार्यता से मुक्ति दिलाए, क्योंकि शिक्षक वर्षों से शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं और उनके अनुभव व सेवा का सम्मान किया जाना चाहिए। महासंघ ने यह भी स्पष्ट किया कि वह शिक्षकों के सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए लगातार संघर्ष करता रहेगा। जिला अध्यक्ष अविनाश शुक्ला ने कहा कि यह निर्णय गलत तथ्यों के आधार पर आया है और सरकार ने प्रभावी ढंग से पक्ष नहीं रखा, इसलिए प्रधानमंत्री से कानून बनाकर कार्यरत शिक्षकों को न्याय दिलाने की मांग की जा रही है। कार्यवाहक महामंत्री दिलीप पांडेय ने भी वर्षों से सेवा दे रहे पुराने शिक्षकों को टेट की अनिवार्यता से मुक्त करने का आह्वान किया। महासंघ पदाधिकारियों ने जानकारी दी कि यह आंदोलन पूरे देश में राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के आह्वान पर एक साथ आयोजित किया गया, जिसमें विभिन्न राज्यों और जिलों के शिक्षकों ने जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन कर अपनी मांगों के समर्थन में ज्ञापन सौंपा। इस दौरान दिलीप सिंह, अनिरुद्ध त्रिपाठी, महेश कर्णधार, अमिताभ त्रिपाठी, हरेंद्र चौरसिया, नागेंद्र तिवारी, श्याम सुंदर तिवारी, अनूप गुप्ता, संजय मिश्र, सुशीला पाण्डेय, उदय सिंह, केशव गोविंद राव, राहुल उपाध्याय, राकेश मणि, रवि राय, संदीप तिवारी, संतोष गौड़, राजेश तिवारी, श्रीधर पांडे, गोपेश्वर पटेल, अरुण गोविंद राव, सुधीर श्रीवास्तव, शंकर दयाल पाठक, प्रेमचंद गौतम, आशीष मिश्रा, अखिलेश मिश्रा, अजिताभ तिवारी, परमानंद पांडे, अभिषेक तिवारी, विजय कन्नौजिया, दुर्गेश त्रिपाठी, रामगति प्रजापति, वैभव पांडे, देवानंद दुबे, रविन्द्र पांडेय, अजिताभ त्रिपाठी, पंकज गौड़, कृष्ण कुमार, अनुराग पांडे, तस्लीम अंसारी, ब्रजभूषण पांडेय, मनोज सिंह, अजीत गुप्ता, संजय यादव, संजय शाही, अनिल सिंह, सुमित सिंगर, राजवंत सिंह, विश्वजीत सिंह, सुनील सिंह, रवि भूषण भारती, अनूप श्रीवास्तव, धनंजय पांडे, कल्पना ओझा, सुनीता सिंह, सुनील वर्मा, रवि गुप्ता, अनामिका शाही, मीना सिंह, नीतीश चौधरी, उमेश यादव, शैलेश कुमार, यशशिन्द्र त्रिपाठी, विजय कुशवाहा, वरुण राय, अनिल मिश्रा, जोधा यादव, प्रमोद, राहुल देव, विजय सोनकर, प्रभुनाथ सिंह, सुधीर उपाध्याय, रामानुज शुक्ल सहित बड़ी संख्या में शिक्षक उपस्थित रहे।
कुशीनगर के कसया में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के देशव्यापी आह्वान पर गुरुवार को परिषदीय शिक्षकों ने टेट की अनिवार्यता के विरोध में एक विशाल पैदल मार्च निकाला। इस प्रदर्शन में जिले के हजारों शिक्षक शामिल हुए, जिन्होंने बीएसए कार्यालय से जिलाधिकारी कार्यालय तक पैदल चलकर मुख्यमंत्री, भारत सरकार के शिक्षा मंत्री और प्रधानमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से सौंपा। उनकी प्रमुख मांग कार्यरत शिक्षकों को टेट की अनिवार्यता से तत्काल मुक्त करना था। जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचने पर शिक्षकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने अपर जिलाधिकारी (एडीएम) वैभव मिश्रा को ज्ञापन सौंपा। एडीएम ने शिक्षकों को आश्वासन दिया कि उनकी मांगों को उचित माध्यम से प्रधानमंत्री तक पहुंचाया जाएगा। शिक्षकों का कहना था कि उन्हें 20 से 25 वर्ष हो चुके हैं नौकरी करते हुए और उन्होंने अपनी नियुक्ति के समय सभी निर्धारित अर्हताएं पूरी की थीं। इसके बावजूद, अब टेट परीक्षा अनिवार्य किए जाने से देशभर के हजारों शिक्षकों के सामने नौकरी का संकट उत्पन्न हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह स्थिति सुप्रीम कोर्ट में गलत तथ्य प्रस्तुत किए जाने के कारण पैदा हुई है। मंडल अध्यक्ष राजेश शुक्ल ने इस अनिवार्यता को दशकों से सेवा दे रहे शिक्षकों के लिए न्यायोचित नहीं बताया। उन्होंने राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की ओर से मांग की कि केंद्र सरकार मानसून सत्र में अध्यादेश लाकर कार्यरत शिक्षकों को टेट की अनिवार्यता से मुक्ति दिलाए, क्योंकि शिक्षक वर्षों से शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं और उनके अनुभव व सेवा का सम्मान किया जाना चाहिए। महासंघ ने यह भी स्पष्ट किया कि वह शिक्षकों के सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए लगातार संघर्ष करता रहेगा। जिला अध्यक्ष अविनाश शुक्ला ने कहा कि यह निर्णय गलत तथ्यों के आधार पर आया है और सरकार ने प्रभावी ढंग से पक्ष नहीं रखा, इसलिए प्रधानमंत्री से कानून बनाकर कार्यरत शिक्षकों को न्याय दिलाने की मांग की जा रही है। कार्यवाहक महामंत्री दिलीप पांडेय ने भी वर्षों से सेवा दे रहे पुराने शिक्षकों को टेट की अनिवार्यता से मुक्त करने का आह्वान किया। महासंघ पदाधिकारियों ने जानकारी दी कि यह आंदोलन पूरे देश में राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के आह्वान पर एक साथ आयोजित किया गया, जिसमें विभिन्न राज्यों और जिलों के शिक्षकों ने जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन कर अपनी मांगों के समर्थन में ज्ञापन सौंपा। इस दौरान दिलीप सिंह, अनिरुद्ध त्रिपाठी, महेश कर्णधार, अमिताभ त्रिपाठी, हरेंद्र चौरसिया, नागेंद्र तिवारी, श्याम सुंदर तिवारी, अनूप गुप्ता, संजय मिश्र, सुशीला पाण्डेय, उदय सिंह, केशव गोविंद राव, राहुल उपाध्याय, राकेश मणि, रवि राय, संदीप तिवारी, संतोष गौड़, राजेश तिवारी, श्रीधर पांडे, गोपेश्वर पटेल, अरुण गोविंद राव, सुधीर श्रीवास्तव, शंकर दयाल पाठक, प्रेमचंद गौतम, आशीष मिश्रा, अखिलेश मिश्रा, अजिताभ तिवारी, परमानंद पांडे, अभिषेक तिवारी, विजय कन्नौजिया, दुर्गेश त्रिपाठी, रामगति प्रजापति, वैभव पांडे, देवानंद दुबे, रविन्द्र पांडेय, अजिताभ त्रिपाठी, पंकज गौड़, कृष्ण कुमार, अनुराग पांडे, तस्लीम अंसारी, ब्रजभूषण पांडेय, मनोज सिंह, अजीत गुप्ता, संजय यादव, संजय शाही, अनिल सिंह, सुमित सिंगर, राजवंत सिंह, विश्वजीत सिंह, सुनील सिंह, रवि भूषण भारती, अनूप श्रीवास्तव, धनंजय पांडे, कल्पना ओझा, सुनीता सिंह, सुनील वर्मा, रवि गुप्ता, अनामिका शाही, मीना सिंह, नीतीश चौधरी, उमेश यादव, शैलेश कुमार, यशशिन्द्र त्रिपाठी, विजय कुशवाहा, वरुण राय, अनिल मिश्रा, जोधा यादव, प्रमोद, राहुल देव, विजय सोनकर, प्रभुनाथ सिंह, सुधीर उपाध्याय, रामानुज शुक्ल सहित बड़ी संख्या में शिक्षक उपस्थित रहे।
- कुशीनगर में मेडिकल कॉलेज की व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने के निर्देश दिए गए हैं। यह पहल कॉलेज में प्रदान की जा रही सुविधाओं और प्रबंधन को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से की गई है, ताकि यहाँ के छात्रों और मरीजों को उच्च गुणवत्ता वाली सेवाएँ मिल सकें।1
- कुशीनगर में गोवंशीय पशुओं की तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत, पटहेरवा थाना पुलिस ने दो अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। इनकी पहचान बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले के धनहा थाना अंतर्गत दहवा निवासी नबी हसन अंसारी पुत्र मुस्तफा और मखलूक अंसारी उर्फ भुट्टू पुत्र मुस्तफा के रूप में हुई है। पुलिस ने इनके पास से 02 गोवंशीय बछड़े, 01 संशोधित बोलेरो (रजि. नं. UP57D0090), 01 लकड़ी का ठीहा, 02 बांका और 01 चाकू बरामद किया है। बरामदगी और गिरफ्तारी के आधार पर पटहेरवा थाने में मु0अ0सं0-183/2026 धारा: 3/5/5ए/8 गोवध अधिनियम, 11 पशु क्रूरता अधिनियम और धारा 4/25 आर्म्स एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। गौरतलब है कि इसी मुकदमे में 16.06.2026 को भी दो अभियुक्तों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। पूछताछ में अभियुक्तों ने बताया कि उनका एक संगठित गिरोह है और वे दोनों बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले के रहने वाले हैं। वे कुशीनगर-बिहार सीमा से सटे क्षेत्रों में घूमने वाले आवारा गोवंशीय पशुओं को चुराकर रात के समय पैदल ही बिहार ले जाते थे। वहाँ इन पशुओं का वध कर मांस बेचा जाता था और इससे कमाए गए पैसों को वे आपस में बांट लेते थे।2
- कुशीनगर जिले के चौराखास थाना क्षेत्र के बड़हरा चौराहा पर देर रात एक दीवान का बिजली संविदा कर्मी को गाली देते हुए वीडियो वायरल हो रहा है। बताया जा रहा है कि दीवान बृजकिशोर सिंह, दो होमगार्डों के साथ मिलकर देर रात गाड़ी चेकिंग के नाम पर बिजली कर्मी को गालियां दे रहे थे। वायरल वीडियो में दीवान बृजकिशोर सिंह बिजली कर्मी को कैमरे पर खबर चलवाने और बिगाड़ लेने की चुनौती भी देते हुए दिखाई दे रहे हैं। जानकारी के अनुसार, बिजली संविदा कर्मी रात के समय बिजली फाल्ट ठीक करने जा रहे थे, तभी यह घटना हुई।1
- उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के एक गाँव में पिछले दस सालों से सड़क की स्थिति बेहद खराब है, जिससे ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। विशेषकर बरसात के मौसम में इस जर्जर रास्ते के कारण आए दिन दुर्घटनाएँ हो रही हैं। ग्रामीणों ने इस संबंध में कई बार शिकायतें की हैं, लेकिन 'प्रधानमंत्री गड्ढा मुक्त योजना' के तहत भी इस सड़क का निर्माण नहीं हो पाया है, जिससे स्थानीय लोगों में निराशा है।1
- मोहर्रम के पवित्र अवसर को देखते हुए पडरौना कोतवाली में पीस कमेटी की एक बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में शांति और सौहार्द के वातावरण को बनाए रखने पर ज़ोर देना था, जिसके लिए सभी उपस्थित लोगों से विशेष अपील की गई।1
- कुशीनगर जिले के सुकरौली विकासखंड क्षेत्र की ग्राम सभा पिडरा से ग्रामीण विकास योजनाओं की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करने वाला एक मामला सामने आया है। आरोप है कि गांव में लगभग पांच वर्षों बाद खड़ंजा सड़क का निर्माण कराया गया, लेकिन एक व्यक्ति के घर तक जाने वाला रास्ता छोड़ दिया गया, जबकि आसपास के अन्य घरों तक सड़क बनाई गई है। शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्हें जानबूझकर विकास कार्य से वंचित किया गया है। पीड़ित ने इस मामले की शिकायत आईजीआरएस और मुख्यमंत्री पोर्टल पर की, जिसके बाद विकासखंड कार्यालय से ए.डी.ओ. पंचायत द्वारा जांच की गई। शिकायतकर्ता के मुताबिक, जांच के दौरान उन्हें समस्या के समाधान का आश्वासन मिला था। हालांकि, कुछ दिनों बाद उन्हें सूचित किया गया कि यह कार्य वर्ष 2026 की कार्ययोजना में शामिल किया गया है, लेकिन ग्राम प्रधान का कार्यकाल खत्म होने और प्रशासक नियुक्त होने के कारण अब इसे पूरा नहीं किया जा सकता। अब बड़ा सवाल यह है कि यदि सड़क निर्माण कार्ययोजना के तहत होना था, तो एक परिवार को छोड़कर बाकी लोगों तक विकास कार्य कैसे पहुंच गया? शिकायतकर्ता न्याय और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं, ताकि यह पता चल सके कि क्या सरकारी योजनाओं का लाभ सभी पात्र लोगों को समान रूप से मिलना चाहिए और विकास कार्यों में भेदभाव की कोई गुंजाइश होनी चाहिए या नहीं।1
- Post by Shrikrishn1
- कुशीनगर जिले के पडरौना स्थित धर्मशाला रोड की स्थिति इन दिनों बदहाल है, जहाँ हर रोज़ भीषण जाम की समस्या उत्पन्न हो रही है। इस सड़क का हाल अब लखनऊ के चारबाग रेलवे स्टेशन जैसा व्यस्त हो गया है, जिससे यह पडरौना की एक बेहद व्यस्त सड़क बन चुकी है। जो भी व्यक्ति गलती से इस रोड पर आ जाता है, उसे घंटों जाम से जूझना पड़ता है। भीषण गर्मी के चलते लोगों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यदि दिन के समय किसी को अचानक कोई स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थिति हो जाए या किसी अन्य तरह की इमरजेंसी पड़ जाए, तो निकलने के लिए कोई रास्ता नहीं मिल पाता। जाम के कारण कई लोग अपने काम पर जाने में देर कर देते हैं। जाम हटने के बाद, नौकरीपेशा लोग अक्सर तेज़ गति से बाइक चलाते हैं ताकि देर से पहुँचने के कारण डाँट खाने से बच सकें, जिससे हमेशा दुर्घटना का डर बना रहता है कि कहीं अचानक कोई सामने न आ जाए। इस जाम का मुख्य कारण सड़क पर बाइक और कई जगहों पर चार-पहिया वाहनों का खड़ा होना है। वीडियो में स्पष्ट देखा जा सकता है कि लोग अपनी बाइक को सड़क के किनारे और सड़क के अगले हिस्से में ही खड़ा करके अपने कामों पर चले जाते हैं। ऐसी स्थिति में, जाम से निजात पाना मुश्किल हो जाता है।2
- एक वायरल वीडियो के सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है, जिसमें एक अवर अभियंता को रुपये लेते हुए स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। इस वीडियो के आधार पर, संबंधित मामले की जांच प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।1