धरमजयगढ़ क्षेत्र के संगरा में नदी किनारे रखा कोयला, परिवहन व जिम्मेदारी को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं ? धरमजयगढ़ क्षेत्र के ग्राम संगरा में नदी किनारे खुदाई के दौरान बरामद कोयले के ढेर को अभी तक खुदाई वाले स्थान में ही रखे जाने रखे जाने की बात सामने आई है। जबकि इसे बरामद किये लगभग एक सप्ताह हो गये हैं लेकिन यह कोयला अब तक किसी सुरक्षित भंडारण स्थल या निर्धारित गंतव्य तक परिवहन नहीं किया गया है, जिससे स्थानीय स्तर पर विभिन्न प्रश्न उठ रहे हैं। कोयले की सुरक्षा के उद्देश्य से संगरा से नदी की ओर जाने वाले मार्ग पर एक बड़ा गड्ढा बनाया गया है, जिससे वाहनों की आवाजाही रोकी जा सके। ग्रामीणों के अनुसार यह गड्ढा किसी विभाग द्वारा बनाया गया है, हालांकि इस संबंध में किसी भी विभाग की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कोयला लंबे समय से नदी किनारे रखा हुआ है और यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा कि कोयले के रख-रखाव की जिम्मेदारी किस विभाग के अंतर्गत आती है, इसे सुरक्षित स्थान तक ले जाने की प्रक्रिया कब और किसके द्वारा पूरी की जाएगी, तथा इस पूरे मामले में वन विभाग, राजस्व विभाग या खनिज विभाग में से किसकी भूमिका निर्धारित है। यह भी गौरतलब है कि कोयले को खुले स्थान पर रखने से सुरक्षा और पर्यावरण से जुड़े पहलुओं पर ध्यान दिया जाना आवश्यक है। ऐसे में प्रशासन से अपेक्षा है कि संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर स्थिति को स्पष्ट किया जाए और आवश्यक कार्रवाई की जाए। फिलहाल, कोयले के परिवहन और जिम्मेदारी को लेकर आधिकारिक जानकारी का इंतजार किया जा रहा है, ताकि स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सके और किसी भी प्रकार की असमंजस की स्थिति समाप्त हो।
धरमजयगढ़ क्षेत्र के संगरा में नदी किनारे रखा कोयला, परिवहन व जिम्मेदारी को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं ? धरमजयगढ़ क्षेत्र के ग्राम संगरा में नदी किनारे खुदाई के दौरान बरामद कोयले के ढेर को अभी तक खुदाई वाले स्थान में ही रखे जाने रखे जाने की बात सामने आई है। जबकि इसे बरामद किये लगभग एक सप्ताह हो गये हैं लेकिन यह कोयला अब तक किसी सुरक्षित भंडारण स्थल या निर्धारित
गंतव्य तक परिवहन नहीं किया गया है, जिससे स्थानीय स्तर पर विभिन्न प्रश्न उठ रहे हैं। कोयले की सुरक्षा के उद्देश्य से संगरा से नदी की ओर जाने वाले मार्ग पर एक बड़ा गड्ढा बनाया गया है, जिससे वाहनों की आवाजाही रोकी जा सके। ग्रामीणों के अनुसार यह गड्ढा किसी विभाग द्वारा बनाया गया है, हालांकि इस संबंध में किसी भी विभाग की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। स्थानीय लोगों
का कहना है कि कोयला लंबे समय से नदी किनारे रखा हुआ है और यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा कि कोयले के रख-रखाव की जिम्मेदारी किस विभाग के अंतर्गत आती है, इसे सुरक्षित स्थान तक ले जाने की प्रक्रिया कब और किसके द्वारा पूरी की जाएगी, तथा इस पूरे मामले में वन विभाग, राजस्व विभाग या खनिज विभाग में से किसकी भूमिका निर्धारित है। यह भी गौरतलब है कि कोयले को खुले स्थान पर
रखने से सुरक्षा और पर्यावरण से जुड़े पहलुओं पर ध्यान दिया जाना आवश्यक है। ऐसे में प्रशासन से अपेक्षा है कि संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर स्थिति को स्पष्ट किया जाए और आवश्यक कार्रवाई की जाए। फिलहाल, कोयले के परिवहन और जिम्मेदारी को लेकर आधिकारिक जानकारी का इंतजार किया जा रहा है, ताकि स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सके और किसी भी प्रकार की असमंजस की स्थिति समाप्त हो।
- User9519Raigarh, Chhattisgarh👏4 hrs ago
- User9519Raigarh, Chhattisgarh💣4 hrs ago
- User9519Raigarh, Chhattisgarh💣4 hrs ago
- User9519Raigarh, Chhattisgarh💣4 hrs ago
- User9519Raigarh, Chhattisgarh👏4 hrs ago
- User9519Raigarh, Chhattisgarh😡4 hrs ago
- User9519Raigarh, Chhattisgarh💣4 hrs ago
- धरमजयगढ़–रायगढ़ मुख्य मार्ग पर स्थित एचपी गैस एजेंसी के सामने पीपल के पेड़ पर वर्षों से मधुमक्खियों का बड़ा झुंड बना हुआ है, जो आए दिन राहगीरों पर हमला कर रहा है। इस कारण लोगों में भय का माहौल बना हुआ है और हमेशा जान का खतरा मंडराता रहता है। यह मार्ग नगर के सबसे व्यस्ततम रास्तों में से एक है, जहां से होकर बैंक, स्कूल, साप्ताहिक बाजार सहित कई मोहल्लों का आवागमन होता है। शनिवार को एक बार फिर अचानक मधुमक्खियों ने हमला कर दिया, जिससे दर्जनों लोग घायल हो गए। घायलों में से कुछ की हालत गंभीर होने पर उन्हें अस्पताल ले जाना पड़ा। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इस समस्या की जानकारी पूर्व में भी दी जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। यदि समय रहते मधुमक्खियों के झुंड को सुरक्षित तरीके से हटाने या अन्य आवश्यक उपाय नहीं किए गए, तो भविष्य में कभी भी बड़ी दुर्घटना घटित हो सकती है।2
- Post by Dhanesh yadav1
- Post by Manmohan Babu1
- Post by DEOKI PURI GOSVAMI1
- देव होटल के पास हवाई फायर, आरोपी पर मामला दर्ज सरगुजा /news the gulel/07 फरवरी 2026 देव होटल के पास हवाई फायर की घटना से इलाके में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक व्यक्ति द्वारा बंदूक से फायर किए जाने की सूचना पुलिस को मिली। मामले को गंभीरता से लेते हुए डीआईजी एवं एसएसपी सरगुजा श्री राजेश कुमार अग्रवाल के निर्देशन में पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुंची। जांच के दौरान आसपास के दुकानदारों व लोगों से पूछताछ में हनी सिंह द्वारा हवाई फायर किए जाने की पुष्टि हुई, जिससे क्षेत्र में भय का माहौल बन गया। पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध थाना कोतवाली में अपराध क्रमांक 77/26 के तहत आयुध अधिनियम की धारा 25, 27 एवं 125 बीएनएस में मामला दर्ज कर अग्रिम वैधानिक कार्यवाही शुरू कर दी है। News the gulel के लिए सुनील गुप्ता की रिपोर्ट1
- अंबिकापुर: क्रिकेट के नाम पर लाखों की ठगी करने वाला गिरफ्तार, फर्जी दस्तावेज दिखाकर खिलाड़ी से ऐंठे 15 लाख से अधिक रुपये अंबिकापुर : देश-विदेश में क्रिकेट खिलाने का झांसा देकर खिलाड़ियों के भविष्य और मेहनत की कमाई के साथ खिलवाड़ करने वाले एक शातिर जालसाज को सरगुजा पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपी मृगांक सिन्हा ने एक क्रिकेट खिलाड़ी को ऊंचे सपने दिखाकर और फर्जी दस्तावेज तैयार कर 15 लाख 38 हजार रुपये की ठगी की थी। साइबर सेल और थाना कोतवाली की संयुक्त टीम ने आरोपी को पकड़कर सलाखों के पीछे भेज दिया है। नेपाल में मुलाकात और झांसे का जाल मामले का विवरण देते हुए पुलिस ने बताया कि प्रार्थी अजय कुमार वर्मा, जो हरदोई (उत्तरप्रदेश) का निवासी और एक क्रिकेट खिलाड़ी है, की मुलाकात मार्च 2021 में नेपाल में एक टूर्नामेंट के दौरान मृगांक सिन्हा (निवासी त्रिकोण चौक, अंबिकापुर) से हुई थी। मृगांक ने खुद को एक बड़े क्रिकेट संघ से जुड़ा बताकर अजय को देश-विदेश के टूर्नामेंट्स में खिलाने का लालच दिया। किस्तों में वसूली और फर्जी दस्तावेज नेपाल से लौटने के बाद आरोपी ने रजिस्ट्रेशन फीस के नाम पर पहले 1480 रुपये लिए, फिर पासपोर्ट और अन्य प्रक्रियाओं के बहाने धीरे-धीरे पेटीएम और गूगल पे के माध्यम से लाखों रुपये मंगवाने शुरू किए। आरोपी इतना शातिर था कि वह खिलाड़ी का विश्वास जीतने के लिए मोबाइल पर टीम सिलेक्शन और विदेशी दौरों की फर्जी सूचियां और कूट रचित (फर्जी) दस्तावेज भेजता रहा। इस तरह उसने प्रार्थी से कुल 15,38,000 रुपये ठग लिए। जब प्रार्थी को ठगी का अहसास हुआ, तो उसने थाना कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने जांच के दौरान ‘छत्तीसगढ़ यूथ यूनाइटेड क्रिकेट संघ’ के संबंध में खेल एवं युवा कल्याण विभाग, रायपुर से जानकारी मांगी। विभाग से खुलासा हुआ कि इस नाम की किसी भी संस्था को मान्यता प्राप्त नहीं है। इसके बाद पुलिस ने आरोपी की तलाश तेज की, जो लगातार फरार चल रहा था। पुलिस की कार्रवाई और गिरफ्तारी डीआईजी एवं एसएसपी सरगुजा राजेश कुमार अग्रवाल के निर्देशन में साइबर सेल और कोतवाली पुलिस ने घेराबंदी कर आरोपी मृगांक सिन्हा (40 वर्ष) को हिरासत में लिया। पूछताछ में आरोपी ने अपना जुर्म कबूल करते हुए बताया कि उसने स्वयं ही फर्जी दस्तावेज तैयार किए थे ताकि वह ठगी कर सके। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ अपराध क्रमांक 589/24 के तहत धारा 420, 467, 468, 471 के अंतर्गत कार्यवाही करते हुए उसे न्यायालय में पेश किया है। इस कार्यवाही में थाना प्रभारी कोतवाली निरीक्षक शशिकान्त सिन्हा, साइबर सेल प्रभारी एएसआई अजीत मिश्रा, विवेक पाण्डेय, प्रधान आरक्षक भोजराज पासवान, विकास सिन्हा और आरक्षक जीतेश साहू व अमनपुरी की मुख्य भूमिका रही।1
- प्रदेश कांग्रेस में पदाधिकारी एवं डीडीसी जिला पंचायत सदस्य जशपुर ने मनरेगा बचाओ संग्राम में खुलकर रखी अपनी बात1
- धरमजयगढ़ क्षेत्र के ग्राम संगरा में नदी किनारे खुदाई के दौरान बरामद कोयले के ढेर को अभी तक खुदाई वाले स्थान में ही रखे जाने रखे जाने की बात सामने आई है। जबकि इसे बरामद किये लगभग एक सप्ताह हो गये हैं लेकिन यह कोयला अब तक किसी सुरक्षित भंडारण स्थल या निर्धारित गंतव्य तक परिवहन नहीं किया गया है, जिससे स्थानीय स्तर पर विभिन्न प्रश्न उठ रहे हैं। कोयले की सुरक्षा के उद्देश्य से संगरा से नदी की ओर जाने वाले मार्ग पर एक बड़ा गड्ढा बनाया गया है, जिससे वाहनों की आवाजाही रोकी जा सके। ग्रामीणों के अनुसार यह गड्ढा किसी विभाग द्वारा बनाया गया है, हालांकि इस संबंध में किसी भी विभाग की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कोयला लंबे समय से नदी किनारे रखा हुआ है और यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा कि कोयले के रख-रखाव की जिम्मेदारी किस विभाग के अंतर्गत आती है, इसे सुरक्षित स्थान तक ले जाने की प्रक्रिया कब और किसके द्वारा पूरी की जाएगी, तथा इस पूरे मामले में वन विभाग, राजस्व विभाग या खनिज विभाग में से किसकी भूमिका निर्धारित है। यह भी गौरतलब है कि कोयले को खुले स्थान पर रखने से सुरक्षा और पर्यावरण से जुड़े पहलुओं पर ध्यान दिया जाना आवश्यक है। ऐसे में प्रशासन से अपेक्षा है कि संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर स्थिति को स्पष्ट किया जाए और आवश्यक कार्रवाई की जाए। फिलहाल, कोयले के परिवहन और जिम्मेदारी को लेकर आधिकारिक जानकारी का इंतजार किया जा रहा है, ताकि स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सके और किसी भी प्रकार की असमंजस की स्थिति समाप्त हो।4