राजस्थान के झालावाड़ में गढ़ परिसर स्थित ऐतिहासिक भवानी नाट्यशाला ने अपनी स्थापना के 105 वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस ऐतिहासिक अवसर पर पर्यटन विकास समिति झालावाड़ द्वारा नाट्यशाला परिसर में एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के दौरान शहर के प्रबुद्ध नागरिकों और पर्यटन प्रेमियों ने इस ऐतिहासिक धरोहर को वर्ष भर पर्यटकों के लिए खुला रखने, इसके रख-रखाव के लिए सरकार से पर्याप्त बजट देने और यहाँ एक नाट्य अकादमी शुरू करने की पुरजोर माँग की है। उत्तर भारत की प्रसिद्ध ओपेरा शैली में बनी इस नाट्यशाला की स्थापना झालावाड़ रियासत के तत्कालीन महाराज राणा भवानी सिंह जी ने ब्रिटिश काल के दौरान वर्ष 1921 में की थी। इस भव्य नाट्यशाला में ब्रिटिश काल के दौरान कई प्रसिद्ध नाटकों का मंचन हुआ, जिसमें महाकवि कालिदास रचित 'अभिज्ञान शाकुंतलम' का पहली बार मंचन भी शामिल है। इसकी वास्तुकला, झरोखे और मेहराब सैलानियों के लिए बेहद आकर्षक और दर्शनीय हैं। नाटकों का दौर खत्म होने के बाद कुछ समय तक इसमें पिक्चर हॉल और बाद में बैडमिंटन हॉल भी चलाया गया था। वर्तमान में पर्याप्त बजट के अभाव के कारण इस ऐतिहासिक इमारत की स्थिति खस्ताहाल हो चुकी है, जिसके चलते प्रशासन और पुरातत्व विभाग ने इस पर ताला लगा दिया है और इसे केवल विशेष अवसरों पर ही खोला जाता है। संगोष्ठी के दौरान इतिहासकार ललित शर्मा ने जिला प्रशासन से माँग की है कि वह इस नाट्यशाला का प्रबंधन अपने हाथों में ले ताकि इसे प्रतिदिन पर्यटकों और स्थानीय लोगों के भ्रमण के लिए खोला जा सके। पर्यटन विकास समिति के संयोजक ओम पाठक ने भी इसके ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करते हुए इसके नियमित संचालन और बेहतर बजट की आवश्यकता पर बल दिया है।
राजस्थान के झालावाड़ में गढ़ परिसर स्थित ऐतिहासिक भवानी नाट्यशाला ने अपनी स्थापना के 105 वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस ऐतिहासिक अवसर पर पर्यटन विकास समिति झालावाड़ द्वारा नाट्यशाला परिसर में एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के दौरान शहर के प्रबुद्ध नागरिकों और पर्यटन प्रेमियों ने इस ऐतिहासिक धरोहर को वर्ष भर पर्यटकों के लिए खुला रखने, इसके रख-रखाव के लिए सरकार से पर्याप्त बजट देने और
यहाँ एक नाट्य अकादमी शुरू करने की पुरजोर माँग की है। उत्तर भारत की प्रसिद्ध ओपेरा शैली में बनी इस नाट्यशाला की स्थापना झालावाड़ रियासत के तत्कालीन महाराज राणा भवानी सिंह जी ने ब्रिटिश काल के दौरान वर्ष 1921 में की थी। इस भव्य नाट्यशाला में ब्रिटिश काल के दौरान कई प्रसिद्ध नाटकों का मंचन हुआ, जिसमें महाकवि कालिदास रचित 'अभिज्ञान शाकुंतलम' का पहली बार मंचन भी शामिल है। इसकी वास्तुकला,
झरोखे और मेहराब सैलानियों के लिए बेहद आकर्षक और दर्शनीय हैं। नाटकों का दौर खत्म होने के बाद कुछ समय तक इसमें पिक्चर हॉल और बाद में बैडमिंटन हॉल भी चलाया गया था। वर्तमान में पर्याप्त बजट के अभाव के कारण इस ऐतिहासिक इमारत की स्थिति खस्ताहाल हो चुकी है, जिसके चलते प्रशासन और पुरातत्व विभाग ने इस पर ताला लगा दिया है और इसे केवल विशेष अवसरों पर ही खोला
जाता है। संगोष्ठी के दौरान इतिहासकार ललित शर्मा ने जिला प्रशासन से माँग की है कि वह इस नाट्यशाला का प्रबंधन अपने हाथों में ले ताकि इसे प्रतिदिन पर्यटकों और स्थानीय लोगों के भ्रमण के लिए खोला जा सके। पर्यटन विकास समिति के संयोजक ओम पाठक ने भी इसके ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करते हुए इसके नियमित संचालन और बेहतर बजट की आवश्यकता पर बल दिया है।
- झालावाड़ शहर के द्वारकाधीश मंदिर के समीप चौपाटी पर गुरुवार को ‘राज सखी मार्ट एंड कैफे’ का शानदार शुभारंभ किया गया। जिला कलेक्टर अजय सिंह राठौड़ ने महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए इस विशेष केंद्र का उद्घाटन किया। राजीविका के तत्वावधान में संचालित होने वाले इस केंद्र पर स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा तैयार किए गए विभिन्न उत्पाद बिक्री के लिए उपलब्ध रहेंगे, जिसमें हस्तशिल्प, सजावटी सामग्री, घरेलू उपयोग के उत्पाद और खाद्य पदार्थ शामिल हैं। इस अवसर पर जिला कलेक्टर ने कहा कि यह पहल ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ “वोकल फॉर लोकल” को बढ़ावा देगी। मार्ट के साथ संचालित होने वाले कैफे में गोमती सागर के मनोहारी दृश्य के बीच लोग पारंपरिक व्यंजनों का आनंद ले सकेंगे। इस कैफे में आने वाले लोगों को पूड़ी-सब्जी, दाल-बाटी-चूरमा और चाय-कॉफी सहित कई स्वादिष्ट पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद चखने को मिलेगा।1
- झालावाड़ के झालरापाटन में सुबह प्रथम गणिनी आर्यिका यशस्विमती माता के संघ का मंगल प्रवेश हुआ। वे दिगंबर जैन वात्सल्य रत्नाकर आचार्य विमल सागर मुनि महाराज और मर्यादा शिष्योतम आचार्य भरत सागर महाराज की शिष्या हैं। दिगंबर जैन समाज के तत्वावधान में आज सुबह लंका दरवाजा पर आर्यिका संघ की अगवानी की गई। यहां से बैंड-बाजों के साथ जुलूस के रूप में संघ को नगर में प्रवेश करवाया गया। जुलूस में समाज के पुरुष, महिलाएं, युवक और युवतियां 'अहिंसा धर्म', 'जियो और जीने दो' तथा 'आर्यिका संघ का जयकारा' लगाते हुए चल रहे थे। यह जुलूस लंका दरवाजा से सूर्य मंदिर, चौपड़िया बाजार, पीपली बाजार और नगर पालिका तिराहा होते हुए शांतिनाथ मंदिर पहुंचा। मार्ग में विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और व्यापारिक संगठनों ने पुष्प वर्षा कर जुलूस का स्वागत किया। इस दौरान कई श्रावकों ने अपने घरों और प्रतिष्ठानों के बाहर माता जी का पाद प्रक्षालन कर आरती भी की। सरावगी जैन समाज अध्यक्ष कमल अजमेरा ने बताया कि आर्यिका संघ का चातुर्मास झालरापाटन में ही होगा।2
- राजस्थान के बारां जिले के छीपाबड़ौद में एक किराना दुकान पर समुद्र मंथन प्राणायाम किया गया।1
- बारां जिले के छीपाबड़ौद में सालपुरा रोड पर लहसुन मंडी के पास स्थित मैसर्स गोविंद इंडियन ऑयल पेट्रोल पंप पर महज 8 दिन के भीतर दिनदहाड़े दो बार चोरी की घटनाओं से पेट्रोल पंप संचालक और स्थानीय लोगों में गहरा डर समा गया है। पहली वारदात 6 जुलाई 2026 को हुई, जब अज्ञात चोर पेट्रोल पंप से कंप्रेसर और बिजली के पोलों की लगभग 120 मीटर लंबी केबल काटकर ले गए। इस मामले की रिपोर्ट 11 जुलाई 2026 को कर्मचारियों द्वारा संचालक को सूचित किए जाने के बाद स्थानीय पुलिस थाने में दर्ज कराई गई थी। इसके बाद 14 जुलाई 2026 को चोरों ने दोबारा दिनदहाड़े आकर फिर से केबल चोरी कर ली, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। पेट्रोल पंप संचालक गोविंद सिंह यादव ने जयपुर से एक्सपर्ट बुलाकर दोनों दिन की सीसीटीवी फुटेज पेन ड्राइव में रिकॉर्ड करवाकर छीपाबड़ौद पुलिस को सौंप दी है। संचालक ने स्थानीय और जिला प्रशासन से अपनी और पेट्रोल पंप परिसर में कार्यरत कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। थानाधिकारी से मुलाकात के बाद पुलिस ने मामले की हर एंगल से जांच कर जल्द खुलासा करने और सुरक्षा का आश्वासन दिया है, जिसके बाद संचालक ने थोड़ी राहत की सांस ली है। हालांकि, लगातार हो रही इन चोरियों से क्षेत्र की कानून व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंताएं बनी हुई हैं।3
- आगर मालवा के सुसनेर में इंसानियत को झकझोरने वाली एक घटना सामने आई है, जहां एक बुजुर्ग मां को कैद से आखिरकार आजादी मिल गई है। यह बुजुर्ग महिला मोहल्लेवासियों की शिकायत के बाद कैद से बाहर आ सकी हैं।1
- राजस्थान के झालावाड़ में गढ़ परिसर स्थित ऐतिहासिक भवानी नाट्यशाला ने अपनी स्थापना के 105 वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस ऐतिहासिक अवसर पर पर्यटन विकास समिति झालावाड़ द्वारा नाट्यशाला परिसर में एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के दौरान शहर के प्रबुद्ध नागरिकों और पर्यटन प्रेमियों ने इस ऐतिहासिक धरोहर को वर्ष भर पर्यटकों के लिए खुला रखने, इसके रख-रखाव के लिए सरकार से पर्याप्त बजट देने और यहाँ एक नाट्य अकादमी शुरू करने की पुरजोर माँग की है। उत्तर भारत की प्रसिद्ध ओपेरा शैली में बनी इस नाट्यशाला की स्थापना झालावाड़ रियासत के तत्कालीन महाराज राणा भवानी सिंह जी ने ब्रिटिश काल के दौरान वर्ष 1921 में की थी। इस भव्य नाट्यशाला में ब्रिटिश काल के दौरान कई प्रसिद्ध नाटकों का मंचन हुआ, जिसमें महाकवि कालिदास रचित 'अभिज्ञान शाकुंतलम' का पहली बार मंचन भी शामिल है। इसकी वास्तुकला, झरोखे और मेहराब सैलानियों के लिए बेहद आकर्षक और दर्शनीय हैं। नाटकों का दौर खत्म होने के बाद कुछ समय तक इसमें पिक्चर हॉल और बाद में बैडमिंटन हॉल भी चलाया गया था। वर्तमान में पर्याप्त बजट के अभाव के कारण इस ऐतिहासिक इमारत की स्थिति खस्ताहाल हो चुकी है, जिसके चलते प्रशासन और पुरातत्व विभाग ने इस पर ताला लगा दिया है और इसे केवल विशेष अवसरों पर ही खोला जाता है। संगोष्ठी के दौरान इतिहासकार ललित शर्मा ने जिला प्रशासन से माँग की है कि वह इस नाट्यशाला का प्रबंधन अपने हाथों में ले ताकि इसे प्रतिदिन पर्यटकों और स्थानीय लोगों के भ्रमण के लिए खोला जा सके। पर्यटन विकास समिति के संयोजक ओम पाठक ने भी इसके ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करते हुए इसके नियमित संचालन और बेहतर बजट की आवश्यकता पर बल दिया है।4
- कोटा जिले के सुकेत में सलावद के पास आहू नदी के गोगड़ पिकनिक स्पॉट पर एक दर्दनाक हादसा सामने आया है, जहां दोस्तों के साथ पिकनिक मनाने गए 16 वर्षीय किशोर अमीश की नदी में डूबने से मौत हो गई। सुकेत के नयापुरा निवासी अमीश पुत्र इशरद बुधवार को अपने साथियों के साथ इस पिकनिक स्पॉट पर घूमने गया था। नदी में नहाने के दौरान वह अचानक गहरे पानी में चला गया और डूबने लगा। साथियों के चिल्लाने पर आसपास के लोग मौके पर जुटे और पुलिस व परिजनों को घटना की सूचना दी गई। सूचना मिलते ही सुकेत थानाधिकारी महावीर भार्गव पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे और स्थानीय लोगों व बाद में आई रेस्क्यू टीम की मदद से अभियान शुरू कराया। नदी में अत्यधिक गहराई, बड़ी चट्टानों और फिर रात में अंधेरा होने के कारण अभियान में काफी मुश्किलें आईं। आखिरकार, देर रात करीब 3 बजे किशोर का शव नदी से बाहर निकाला जा सका। परिजनों द्वारा पोस्टमार्टम न कराने की लिखित सहमति दिए जाने के बाद पुलिस ने आवश्यक कानूनी कार्रवाई पूरी कर शव उन्हें सौंप दिया है। इस हादसे के बाद से पीड़ित परिवार में शोक का माहौल है।2