लखनऊ: मामूली टक्कर के बाद पुलिसकर्मी पर युवक के दोनों हाथ तोड़ने का आरोप, CCTV वायरल राजधानी लखनऊ के इंदिरा नगर थाना क्षेत्र से पुलिस की कथित दबंगई का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोप है कि एक पुलिसकर्मी ने मामूली टक्कर के बाद युवक के साथ बेरहमी से मारपीट की, जिससे उसके दोनों हाथ टूट गए। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है और अब इसका CCTV फुटेज भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि मामूली कहासुनी और टक्कर के बाद पुलिसकर्मी ने अपना रौब दिखाते हुए युवक पर हमला कर दिया। मारपीट इतनी गंभीर थी कि युवक के दोनों हाथों में फ्रैक्चर हो गया। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि आरोपों के मुताबिक, जब पीड़ित इंदिरा नगर पुलिस के पास पहुंचा तो उसे तत्काल मदद देने के बजाय कहा गया कि “पहले जांच होगी, फिर मेडिकल कराया जाएगा।” उधर, दर्द से कराह रहा पीड़ित खुद ही इलाज और मेडिकल के लिए बलरामपुर अस्पताल पहुंचा, जहां वह अपनी चोटों का परीक्षण करवा रहा है। इस बीच, घटना का CCTV फुटेज वायरल होने के बाद मामला और तूल पकड़ता जा रहा है। वायरल वीडियो में कथित तौर पर वर्दीधारी पुलिसकर्मी की दबंगई साफ नजर आ रही है, जिससे पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि अगर आम नागरिकों की सुरक्षा के जिम्मेदार ही कानून को हाथ में लेने लगें, तो जनता आखिर न्याय के लिए किसके पास जाए? अब देखना होगा कि लखनऊ पुलिस इस मामले में क्या कार्रवाई करती है—क्या आरोपी पुलिसकर्मी पर निष्पक्ष जांच के बाद सख्त कदम उठेगा या मामला दबाने की कोशिश होगी? जनता के सवाल क्या पीड़ित को समय पर मेडिकल न कराना पुलिस की लापरवाही है? वायरल CCTV के बाद क्या आरोपी पुलिसकर्मी पर होगी कार्रवाई? क्या विभागीय जांच निष्पक्ष होगी?
लखनऊ: मामूली टक्कर के बाद पुलिसकर्मी पर युवक के दोनों हाथ तोड़ने का आरोप, CCTV वायरल राजधानी लखनऊ के इंदिरा नगर थाना क्षेत्र से पुलिस की कथित दबंगई का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोप है कि एक पुलिसकर्मी ने मामूली टक्कर के बाद युवक के साथ बेरहमी से मारपीट की, जिससे उसके दोनों हाथ टूट गए। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है और अब इसका CCTV फुटेज भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि मामूली कहासुनी और टक्कर के बाद पुलिसकर्मी ने अपना रौब दिखाते हुए युवक पर हमला कर दिया। मारपीट इतनी गंभीर थी कि युवक के दोनों हाथों में फ्रैक्चर हो गया। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि आरोपों के मुताबिक, जब पीड़ित इंदिरा नगर पुलिस के पास पहुंचा तो उसे तत्काल मदद देने के बजाय कहा गया कि “पहले जांच होगी, फिर मेडिकल कराया जाएगा।” उधर, दर्द से कराह रहा पीड़ित खुद ही इलाज और मेडिकल के लिए बलरामपुर अस्पताल पहुंचा, जहां वह अपनी चोटों का परीक्षण करवा रहा है। इस बीच, घटना का CCTV फुटेज वायरल होने के बाद मामला और तूल पकड़ता जा रहा है। वायरल वीडियो में कथित तौर पर वर्दीधारी पुलिसकर्मी की दबंगई साफ नजर आ रही है, जिससे पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि अगर आम नागरिकों की सुरक्षा के जिम्मेदार ही कानून को हाथ में लेने लगें, तो जनता आखिर न्याय के लिए किसके पास जाए? अब देखना होगा कि लखनऊ पुलिस इस मामले में क्या कार्रवाई करती है—क्या आरोपी पुलिसकर्मी पर निष्पक्ष जांच के बाद सख्त कदम उठेगा या मामला दबाने की कोशिश होगी? जनता के सवाल क्या पीड़ित को समय पर मेडिकल न कराना पुलिस की लापरवाही है? वायरल CCTV के बाद क्या आरोपी पुलिसकर्मी पर होगी कार्रवाई? क्या विभागीय जांच निष्पक्ष होगी?
- Post by Dharmendra Kumar1
- लखनऊ: जनेश्वर मिश्र पार्क के पास भीषण हादसातेज रफ्तार बाइकों की जोरदार भिड़ंत बिजली विभाग के AE के बेटे की हादसे में मौत बाइकर्स ग्रुप के साथ राइडिंग करते वक्त हादसा बाइक ग्रुप के साथ नैतिक कर रहा था राइडिंग।1
- BREAKING: पुलिस ने इतना पीटा, पत्रकार के दोनों हाथ में फ्रैक्चर - लखनऊ का मामला - शिकायत के बाद भी FIR नहीं होने का आरोप - उसी इंदिरानगर थाने में तैनात है आरोपी सिपाही..!2
- लखनऊ पीजीआई थाना क्षेत्र में इन दिनों अवैध रिकवरी एजेंटों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। क्षेत्र में कई लोगों से जबरन वसूली किए जाने के मामले सामने आ रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद पुलिस की ओर से कोई ठोस कार्रवाई होती नहीं दिख रही है। सूत्रों के मुताबिक विकास रावत, प्रशांत सिंह और दुर्गेश शुक्ला नाम के कुछ लोग कथित तौर पर रिकवरी के नाम पर लोगों से अवैध वसूली कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि ये लोग क्षेत्र में दबाव बनाकर लोगों से पैसा वसूलते हैं, जिससे आम जनता में भय का माहौल बना हुआ है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इन लोगों को कथित रूप से कुछ कारखासों का संरक्षण भी प्राप्त है, जिसके चलते इनके हौसले बुलंद हैं और खुलेआम वसूली का खेल जारी है। क्षेत्रीय नागरिकों का कहना है कि यदि जल्द ही इस मामले में जांच कर सख्त कार्रवाई नहीं की गई तो आने वाले समय में हालात और बिगड़ सकते हैं। अब देखना यह होगा कि पुलिस प्रशासन इस पूरे मामले में क्या कदम उठाता है और क्षेत्र में चल रही अवैध वसूली पर कब तक रोक लगती है।1
- सुल्तानपुर के अखण्डनगर थाना क्षेत्र के कल्याणपुर गांव में मामूली विवाद को लेकर दबंगों ने एक परिवार के घर पर हमला बोल दिया। आरोप है कि हमलावरों ने मारपीट के बाद कई राउंड फायरिंग की, जिसमें एक युवक को गोली लग गई। घायल समेत अन्य लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है, पुलिस मामले की जांच में जुटी है।1
- लखनऊ उत्तर प्रदेश ऑटो-लोडर संयुक्त कल्याण समिति (रजि०)ने परिवहन आयुक्त कार्यलय पर दिया ज्ञापन उत्तर प्रदेश ऑटो-लोडर संयुक्त कल्याण समिति (रजि०)के प्रदेश अध्यक्ष: राजीव जायसवाल (विक्की)ने निम्नलिखित मांगों. को लेकर ज्ञापन सौंप दिया उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार द्वारा हम हल्के भार वाहन वालों पर वन टाइम टैक्स (एकमुस्त टैक्स) योजना से लागू होने से हम छोटी गाड़ी वालों पर अतिरिक्त बोझ पड़ने से हम आत्म हत्या करने कि कगार पर आकर खड़े हो गए है इस वन टाइम टैक्स (एकमुस्त) टैक्स प्राणली को पुराने हल्के भार वाहनों पर लागू न किया इसको नई गाड़ियों पर लगाया जाए ताकि आगे भविष्य मे आम जनमानस अपनी जीविका आराम से चला सके इसमे जमा होने वाला पैसा 1 से 2 लाख रुपये वो कहा से लाएगा ये नियम लागू होने से छोटी गाड़ी वाले भुखमरी कि कगार पर आकर खड़े हो जायगे इस नियम को पुराने वाहनों पर निरस्त किया जाए । 2. केंद्र सरकार व उत्तर प्रदेश सरकार परिवहन विभाग द्वारा फिटनेस कार्य प्राणली को निजी कंपनी ATS को देने से हम गाड़ी वालों का खर्चा 10 गुना ज्यादा हो गया गया है फिटनेस निजी करण से पहले हम गाड़ी वालों को 1000/- से 2000/- रुपये मे फिटनेस हो जाया करती थी वही अब निजी करण के बाद फिटनेस 8000/- से 10000/- रुपए देना पड़ रहा है तब जाकर कही फिटनेस होती है हम छोटी गाड़ी वालों को अपना जीवन यापन करना बहुत कठिन हो गया है हम गाड़ी वाले अतिरिक्त बोझ से असहाये होते जा रहे है। 3. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार हम हल्के भार वाहन 7500 जीवीडबल्यू के अंदर लाइसेन्स निरस्त करने का कोई प्रावधान नहीं है पर आर टी ओ द्वारा जुर्माना बढ़ाने के लिए ड्राइवर के उपर 314 कि धारा लगा कर उससे 5000/- रुपए जबरन जमा कराया जाता और धमकी दी जाती है लाइसेन्स जमा करो वरना निरस्त कर दिया जाएगा . हम छोटी गाड़ी वाले लाइट मोटर अधिनियम के तहत आते है तो हम पर परमिट लागू क्यों होता है जब कि परिवहन विभाग द्वारा 7500 जीवीडबल्यू के अंदर कि गड़िया हल्के भार वाहन में लिया जाता हमारी गाड़ियों 4800 जीवीडबल्यू से लेकर 5800 जीवीडबल्यू तक ही होती है उसपर न तो परमिट लागू होता और ना ही नो इंट्री लागू होती है इसका समाधान कराया कराया जाए । 1 5. 30/07/2020 मोटर अधिनियम कानून में बदलाव होने के कारण हम पिकप डाला व हल्के भार वाहन जो 7500 जीवीडबल्यू के अंदर का लोड लेकर बड़े जनपद से छोटे जनपद व ग्रामीण छेत्रो से जनउपयोगी जैसे फल दूध सब्जी राशन लेकर जाते है हम पिकप डाला व हल्के भार वालों से 1988 मोटर अधिनियम कानून के तहत ही जुर्माना राशि वसूला जाए । 6. उत्तर प्रदेश ऑटो लोडर संयुक्त कल्याण समिति रजि० ने बीते वर्ष में दो से तीन बार पत्रांक संख्या 572/09/25 कार्यलय में ज्ञापन दिया था जिसका मेरी संस्था को लिखित कोई जवाब नहीं दिया गया। अतः आपसे निवेदन है कि मेरी संस्था उत्तर प्रदेश ऑटो लोडर संयुक्त कल्याण समिति रजि० को मेरे दिए हुए ज्ञापन पर क्या कार्यवाई हुई है जिससे हम सम्पूर्ण प्रदेश के गाड़ी वालों को बता सके उनके भलाई के लिए सरकार ने क्या राहत दी है। प्रदेश उपाध्यक्षः पीयूष प्रशान्त सिंह (अंकित) मो० 9076767777 जिला अध्यक्ष लखनऊः हरवंश सिंह (अनुज) जिला महामंडी: मनीष पाल1
- "बच्चे किताबें नहीं खोलें ना खोले इनको देखकर कच्छा जरूर खोल लेंगे... कोटा के एक CBSE बोर्ड स्कूल में हों रहें कार्यक्रम का दृश्य..! इसे कहते हैं 'मॉडर्न एजुकेशन'! बच्चे किताब खोलें न खोलें, पर स्टेज पर तौलिये खोलकर आग लगानी जरूर सीख रहे हैं। मज़े की बात यह कि पोस्टर में बड़े गर्व से लिखा है CBSE से संबद्ध Jeeban Jyoti Model School जिसमें नर्सरी से 10th तक की पढ़ाई होती है। क्या यही भविष्य है 🔥1
- राजधानी लखनऊ के इंदिरा नगर थाना क्षेत्र से पुलिस की कथित दबंगई का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोप है कि एक पुलिसकर्मी ने मामूली टक्कर के बाद युवक के साथ बेरहमी से मारपीट की, जिससे उसके दोनों हाथ टूट गए। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है और अब इसका CCTV फुटेज भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि मामूली कहासुनी और टक्कर के बाद पुलिसकर्मी ने अपना रौब दिखाते हुए युवक पर हमला कर दिया। मारपीट इतनी गंभीर थी कि युवक के दोनों हाथों में फ्रैक्चर हो गया। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि आरोपों के मुताबिक, जब पीड़ित इंदिरा नगर पुलिस के पास पहुंचा तो उसे तत्काल मदद देने के बजाय कहा गया कि “पहले जांच होगी, फिर मेडिकल कराया जाएगा।” उधर, दर्द से कराह रहा पीड़ित खुद ही इलाज और मेडिकल के लिए बलरामपुर अस्पताल पहुंचा, जहां वह अपनी चोटों का परीक्षण करवा रहा है। इस बीच, घटना का CCTV फुटेज वायरल होने के बाद मामला और तूल पकड़ता जा रहा है। वायरल वीडियो में कथित तौर पर वर्दीधारी पुलिसकर्मी की दबंगई साफ नजर आ रही है, जिससे पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि अगर आम नागरिकों की सुरक्षा के जिम्मेदार ही कानून को हाथ में लेने लगें, तो जनता आखिर न्याय के लिए किसके पास जाए? अब देखना होगा कि लखनऊ पुलिस इस मामले में क्या कार्रवाई करती है—क्या आरोपी पुलिसकर्मी पर निष्पक्ष जांच के बाद सख्त कदम उठेगा या मामला दबाने की कोशिश होगी? जनता के सवाल क्या पीड़ित को समय पर मेडिकल न कराना पुलिस की लापरवाही है? वायरल CCTV के बाद क्या आरोपी पुलिसकर्मी पर होगी कार्रवाई? क्या विभागीय जांच निष्पक्ष होगी?1