Shuru
Apke Nagar Ki App…
आदिवासी जोहार
More news from झारखंड and nearby areas
- Post by आदिवासी जोहार1
- Post by AAM JANATA1
- Post by Bikesh Oraon3
- Post by Sonesh Oraon1
- *महुआडांड़ में पेयजल व्यवस्था फेल, महुआडांड़ प्रखंड में गर्मी की शुरुआत के साथ ही पेयजल व्यवस्था की पोल खुलने लगी है। प्रखंड क्षेत्र में खराब पड़े जलमिनार और चापाकलों की मरम्मत समय पर नहीं हो पा रही है, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है। मिस्त्रियों की भारी कमी के कारण मरम्मत कार्य ठप पड़ा हुआ है और लोग पानी के लिए परेशान हो रहे हैं।ग्रामीणों का आरोप है कि संबंधित विभाग केवल खानापूर्ति और कागजी कार्रवाई तक सीमित है।जमीनी स्तर पर खराब पड़े जलमिनार और चापाकलों को ठीक करने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। कई गांवों में जलमिनार महीनों से खराब पड़े हैं, लेकिन विभागीय उदासीनता के कारण समस्या जस की तस बनी हुई है महुआडांड़ प्रखंड में कुल 14 पंचायत और लगभग 50 गांव शामिल हैं, लेकिन पूरे क्षेत्र में मरम्मत के लिए मिस्त्रियों की संख्या बेहद कम है। ऐसे में पूरे प्रखंड में समय पर पेयजल व्यवस्था दुरुस्त करना विभाग के लिए चुनौती बन गया हैग्रामीणों ने बताया कि पीएचडी विभाग द्वारा पहले दावा किया गया था कि गर्मी के मौसम में पेयजल संकट नहीं होने दिया जाएगा, लेकिन वर्तमान हालात विभागीय दावों की पोल खोल रहे हैं। कई गांवों में लोग दूर-दराज से पानी लाने को मजबूर हैं, वहीं कुछ जगहों पर हैंडपंप भी जवाब दे चुके हैं।गर्मी बढ़ने के साथ हालात और बिगड़ने की आशंका है, लेकिन विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल अतिरिक्त मिस्त्री की नियुक्ति करने और खराब जलमिनार व चापाकलों को जल्द दुरुस्त कराने की मांग की है।यदि जल्द व्यवस्था नहीं सुधरी, तो आने वाले दिनों में महुआडांड़ प्रखंड में गंभीर पेयजल संकट उत्पन्न हो सकता है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभाग की होगी।6
- Japan ka chidiyaghar Kya ek Bandar1
- Post by Sanjay kumar1
- महुआडांड़ स्थित संत जेवियर कॉलेज में राष्ट्रीय सेवा योजना (एन.एस.एस.) इकाई के तत्वावधान में “टीबी मुक्त भारत” अभियान के अंतर्गत एक व्यापक जागरूकता कार्यक्रम एवं शपथ ग्रहण समारोह का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य क्षय रोग (टीबी) के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना तथा इसके उन्मूलन के लिए सामूहिक संकल्प को सुदृढ़ करना था। कार्यक्रम की शुरुआत स्वागत भाषण के साथ हुई, जिसमें टीबी जैसी गंभीर और संक्रामक बीमारी के प्रति समाज को सचेत रहने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया गया। इसके पश्चात महाविद्यालय के प्राध्यापकों, एन.एस.एस. स्वयंसेवकों एवं छात्र-छात्राओं को “टीबी मुक्त भारत” की शपथ दिलाई गई। शपथ के दौरान सभी ने यह संकल्प लिया कि वे टीबी के लक्षणों के प्रति सजग रहेंगे, समय पर जांच कराएंगे तथा अपने आसपास के लोगों को भी इसके प्रति जागरूक करेंगे। इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. फादर एम. के. जोस ने अपने प्रेरणादायी संबोधन में कहा— टीबी केवल एक बीमारी नहीं, बल्कि यह सामाजिक जागरूकता की कमी का भी परिणाम है। जब तक हम इसके लक्षणों, कारणों और उपचार के प्रति पूरी तरह जागरूक नहीं होंगे, तब तक इसे जड़ से समाप्त करना संभव नहीं है। ‘टीबी मुक्त भारत’ अभियान तभी सफल होगा, जब समाज का हर व्यक्ति इसमें अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करेगा। हमारा उद्देश्य केवल शपथ लेना नहीं, बल्कि इसे अपने व्यवहार में उतारना है। एन.एस.एस. स्वयंसेवकों की जिम्मेदारी और भी महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि वे समाज में परिवर्तन के वाहक होते हैं। विद्यार्थियों को चाहिए कि वे अपने गांव, परिवार एवं आसपास के क्षेत्रों में जाकर लोगों को टीबी के लक्षण—जैसे लगातार खांसी, वजन घटना, बुखार आदि—के बारे में जागरूक करें तथा जरूरत पड़ने पर उन्हें जांच और उपचार के लिए प्रेरित करें। यह ध्यान रखना आवश्यक है कि टीबी का इलाज पूरी तरह संभव है और सरकार द्वारा इसके लिए निःशुल्क दवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। यदि हम सब मिलकर प्रयास करें, तो टीबी मुक्त भारत का सपना अवश्य साकार होगा। कार्यक्रम के दौरान एन.एस.एस. कॉर्डिनेटर विक्रम रजत डुंगडुंग ने भी अपने संबोधन में कहा— “शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल ज्ञान अर्जित करना नहीं, बल्कि समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझना और उन्हें निभाना भी है। इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम विद्यार्थियों में सामाजिक चेतना, सेवा भाव और उत्तरदायित्व की भावना को विकसित करते हैं। एन.एस.एस. के स्वयंसेवकों को चाहिए कि वे इस अभियान को जन-जन तक पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाएं और समाज में सकारात्मक परिवर्तन के वाहक बनें।” इस कार्यक्रम में उपप्राचार्य फादर समीर टोप्पो, फादर लियो, सिस्टर चन्द्रोदया, फादर राजीप, प्रो. मनीषा, प्रो. बंसति, प्रो. अंकिता, प्रो. आदिति, प्रो. रेचेल, प्रो. सुष्मिता, प्रो. सुकुट, प्रो. रोनित, प्रो. शशि, प्रो. मन्नू, प्रो. जामेश, प्रो. मोनिका सहित अन्य शिक्षकों की गरिमामयी उपस्थिति रही। अंत में धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया। यह आयोजन न केवल विद्यार्थियों में जागरूकता बढ़ाने में सफल रहा, बल्कि उन्हें समाज सेवा के प्रति प्रेरित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी सिद्ध हुआ।1