*महुआडांड़ में पेयजल व्यवस्था फेल, मिस्त्री की भारी कमी से ठप पड़ी जलमिनार मरम्मत, विभाग पर लीपापोती का आरोप* *महुआडांड़ में पेयजल व्यवस्था फेल, महुआडांड़ प्रखंड में गर्मी की शुरुआत के साथ ही पेयजल व्यवस्था की पोल खुलने लगी है। प्रखंड क्षेत्र में खराब पड़े जलमिनार और चापाकलों की मरम्मत समय पर नहीं हो पा रही है, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है। मिस्त्रियों की भारी कमी के कारण मरम्मत कार्य ठप पड़ा हुआ है और लोग पानी के लिए परेशान हो रहे हैं।ग्रामीणों का आरोप है कि संबंधित विभाग केवल खानापूर्ति और कागजी कार्रवाई तक सीमित है।जमीनी स्तर पर खराब पड़े जलमिनार और चापाकलों को ठीक करने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। कई गांवों में जलमिनार महीनों से खराब पड़े हैं, लेकिन विभागीय उदासीनता के कारण समस्या जस की तस बनी हुई है महुआडांड़ प्रखंड में कुल 14 पंचायत और लगभग 50 गांव शामिल हैं, लेकिन पूरे क्षेत्र में मरम्मत के लिए मिस्त्रियों की संख्या बेहद कम है। ऐसे में पूरे प्रखंड में समय पर पेयजल व्यवस्था दुरुस्त करना विभाग के लिए चुनौती बन गया हैग्रामीणों ने बताया कि पीएचडी विभाग द्वारा पहले दावा किया गया था कि गर्मी के मौसम में पेयजल संकट नहीं होने दिया जाएगा, लेकिन वर्तमान हालात विभागीय दावों की पोल खोल रहे हैं। कई गांवों में लोग दूर-दराज से पानी लाने को मजबूर हैं, वहीं कुछ जगहों पर हैंडपंप भी जवाब दे चुके हैं।गर्मी बढ़ने के साथ हालात और बिगड़ने की आशंका है, लेकिन विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल अतिरिक्त मिस्त्री की नियुक्ति करने और खराब जलमिनार व चापाकलों को जल्द दुरुस्त कराने की मांग की है।यदि जल्द व्यवस्था नहीं सुधरी, तो आने वाले दिनों में महुआडांड़ प्रखंड में गंभीर पेयजल संकट उत्पन्न हो सकता है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभाग की होगी।
*महुआडांड़ में पेयजल व्यवस्था फेल, मिस्त्री की भारी कमी से ठप पड़ी जलमिनार मरम्मत, विभाग पर लीपापोती का आरोप* *महुआडांड़ में पेयजल व्यवस्था फेल, महुआडांड़ प्रखंड में गर्मी की शुरुआत के साथ ही पेयजल व्यवस्था की पोल खुलने लगी है। प्रखंड क्षेत्र में खराब पड़े जलमिनार और चापाकलों की मरम्मत समय पर नहीं
हो पा रही है, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है। मिस्त्रियों की भारी कमी के कारण मरम्मत कार्य ठप पड़ा हुआ है और लोग पानी के लिए परेशान हो रहे हैं।ग्रामीणों का आरोप है कि संबंधित विभाग केवल खानापूर्ति और कागजी कार्रवाई तक सीमित है।जमीनी स्तर पर खराब पड़े जलमिनार और
चापाकलों को ठीक करने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। कई गांवों में जलमिनार महीनों से खराब पड़े हैं, लेकिन विभागीय उदासीनता के कारण समस्या जस की तस बनी हुई है महुआडांड़ प्रखंड में कुल 14 पंचायत और लगभग 50 गांव शामिल हैं, लेकिन पूरे क्षेत्र में
मरम्मत के लिए मिस्त्रियों की संख्या बेहद कम है। ऐसे में पूरे प्रखंड में समय पर पेयजल व्यवस्था दुरुस्त करना विभाग के लिए चुनौती बन गया हैग्रामीणों ने बताया कि पीएचडी विभाग द्वारा पहले दावा किया गया था कि गर्मी के मौसम में पेयजल संकट नहीं होने दिया जाएगा, लेकिन वर्तमान हालात
विभागीय दावों की पोल खोल रहे हैं। कई गांवों में लोग दूर-दराज से पानी लाने को मजबूर हैं, वहीं कुछ जगहों पर हैंडपंप भी जवाब दे चुके हैं।गर्मी बढ़ने के साथ हालात और बिगड़ने की आशंका है, लेकिन विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है ग्रामीणों
ने प्रशासन से तत्काल अतिरिक्त मिस्त्री की नियुक्ति करने और खराब जलमिनार व चापाकलों को जल्द दुरुस्त कराने की मांग की है।यदि जल्द व्यवस्था नहीं सुधरी, तो आने वाले दिनों में महुआडांड़ प्रखंड में गंभीर पेयजल संकट उत्पन्न हो सकता है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभाग की होगी।
- *महुआडांड़ में पेयजल व्यवस्था फेल, महुआडांड़ प्रखंड में गर्मी की शुरुआत के साथ ही पेयजल व्यवस्था की पोल खुलने लगी है। प्रखंड क्षेत्र में खराब पड़े जलमिनार और चापाकलों की मरम्मत समय पर नहीं हो पा रही है, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है। मिस्त्रियों की भारी कमी के कारण मरम्मत कार्य ठप पड़ा हुआ है और लोग पानी के लिए परेशान हो रहे हैं।ग्रामीणों का आरोप है कि संबंधित विभाग केवल खानापूर्ति और कागजी कार्रवाई तक सीमित है।जमीनी स्तर पर खराब पड़े जलमिनार और चापाकलों को ठीक करने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। कई गांवों में जलमिनार महीनों से खराब पड़े हैं, लेकिन विभागीय उदासीनता के कारण समस्या जस की तस बनी हुई है महुआडांड़ प्रखंड में कुल 14 पंचायत और लगभग 50 गांव शामिल हैं, लेकिन पूरे क्षेत्र में मरम्मत के लिए मिस्त्रियों की संख्या बेहद कम है। ऐसे में पूरे प्रखंड में समय पर पेयजल व्यवस्था दुरुस्त करना विभाग के लिए चुनौती बन गया हैग्रामीणों ने बताया कि पीएचडी विभाग द्वारा पहले दावा किया गया था कि गर्मी के मौसम में पेयजल संकट नहीं होने दिया जाएगा, लेकिन वर्तमान हालात विभागीय दावों की पोल खोल रहे हैं। कई गांवों में लोग दूर-दराज से पानी लाने को मजबूर हैं, वहीं कुछ जगहों पर हैंडपंप भी जवाब दे चुके हैं।गर्मी बढ़ने के साथ हालात और बिगड़ने की आशंका है, लेकिन विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल अतिरिक्त मिस्त्री की नियुक्ति करने और खराब जलमिनार व चापाकलों को जल्द दुरुस्त कराने की मांग की है।यदि जल्द व्यवस्था नहीं सुधरी, तो आने वाले दिनों में महुआडांड़ प्रखंड में गंभीर पेयजल संकट उत्पन्न हो सकता है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभाग की होगी।6
- Post by Mohd Sameer Khan aimim1
- मनिका लातेहार: मनिक प्रखंड के नामुदाग उर्दू मध्य विद्यालय में 500 बच्चो को पढ़ाने के लिए 2 शिक्षक उपलब्ध है इस विद्यालय के प्रतिनियोजित प्रधानाचार्य श्री उदय कुमार ने बताया कि इस विद्यालय में कक्षा के हिसाब से देखे तो 8 शिक्षकों का होना अनिवार्य है ,पर यहां 4 ही शिक्षक है ज़िसमे दो शिक्षकों का तबादला कर दिया गया है,जब मैं इस में 9 जुलाई 2025 का आया था तब चार ही शिक्षक थे ,पर आज यहां 2 शिक्षक है| श्री उदय कुमार जब शिक्षक समारोह में शामिल होने गए थे तब इन्होंने जिला शिक्षा अधीक्षक से मुलाकात कर शिक्षकों का मांग को रखा , और जिला शिक्षा अधीक्षक महोदय ने भी आश्वासन दिया| प्रधानाचार्य महोदय ने स्कूल प्रबंधन समिति और नामुदाग के लोगों को भी आगे बढ़कर स्कूल के विषय में बात करने सोचने और शिक्षकों मांग करने को कहा1
- गारु :गारु प्रखंड के मायापुर छोटी बारेसाढ़ में तीन दिवसीय श्रीराम कथा सह सुंदरकांड पाठ का भव्य आयोजन 31 मार्च 2026 (मंगलवार) से 2 अप्रैल 2026 तक किया जा रहा है। इस धार्मिक आयोजन को लेकर पूरे क्षेत्र में श्रद्धा और उत्साह का माहौल बना हुआ है।इस पावन अवसर पर मानस मणि दीप सेवा संस्थान, सरनाधाम आश्रम से पधार रहे प्रख्यातकथावाचक श्री रमेश जी महाराज द्वारा श्रीराम कथा का रसपान कराया जा रहा है। कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को धर्म, भक्ति एवं मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के आदर्शों से अवगत कराया जा रहा है।आयोजन की शुरुआत भव्य कलश यात्रा के साथ हुई, जिसमें श्रद्धालुओं ने चापाचुवा नाला से जल उठाकर छोटी मायापुर स्थित मंदिर में विधिवत चढ़ाया। इस दौरान पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं द्वारा “जय श्रीराम” एवं अन्य जयकारों के उद्घोष से वातावरण गूंज उठा। कलश यात्रा में बड़ी संख्या में महिलाओं एवं श्रद्धालुओं ने भाग लेकर माहौल को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया।आयोजन को सफल बनाने में स्थानीय ग्रामीणों एवं समिति के सदस्यों की अहम भूमिका है। प्रमुख रूप से सीताराम सिंह, सुखदेव सिंह, सुमंत सिंह, दीपक कुमार, विकास कार्यकर्ता लालदेव सिंह, अंतु सिंह, जगदीश सिंह, बिनेश सिंह, गोविंद सिंह, आदर्श सिंह, विकास सिंह एवं कृष्णा कुमार सहित कई लोग सक्रिय रूप से जुटे हुए हैं।आयोजन समिति ने क्षेत्र के सभी श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर श्रीराम कथा एवं सुंदरकांड पाठ का लाभ उठाने की अपील की है।2
- Post by आदिवासी जोहार1
- Post by AAM JANATA1
- Post by Bikesh Oraon3
- महुआडांड़ स्थित संत जेवियर कॉलेज में राष्ट्रीय सेवा योजना (एन.एस.एस.) इकाई के तत्वावधान में “टीबी मुक्त भारत” अभियान के अंतर्गत एक व्यापक जागरूकता कार्यक्रम एवं शपथ ग्रहण समारोह का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य क्षय रोग (टीबी) के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना तथा इसके उन्मूलन के लिए सामूहिक संकल्प को सुदृढ़ करना था। कार्यक्रम की शुरुआत स्वागत भाषण के साथ हुई, जिसमें टीबी जैसी गंभीर और संक्रामक बीमारी के प्रति समाज को सचेत रहने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया गया। इसके पश्चात महाविद्यालय के प्राध्यापकों, एन.एस.एस. स्वयंसेवकों एवं छात्र-छात्राओं को “टीबी मुक्त भारत” की शपथ दिलाई गई। शपथ के दौरान सभी ने यह संकल्प लिया कि वे टीबी के लक्षणों के प्रति सजग रहेंगे, समय पर जांच कराएंगे तथा अपने आसपास के लोगों को भी इसके प्रति जागरूक करेंगे। इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. फादर एम. के. जोस ने अपने प्रेरणादायी संबोधन में कहा— टीबी केवल एक बीमारी नहीं, बल्कि यह सामाजिक जागरूकता की कमी का भी परिणाम है। जब तक हम इसके लक्षणों, कारणों और उपचार के प्रति पूरी तरह जागरूक नहीं होंगे, तब तक इसे जड़ से समाप्त करना संभव नहीं है। ‘टीबी मुक्त भारत’ अभियान तभी सफल होगा, जब समाज का हर व्यक्ति इसमें अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करेगा। हमारा उद्देश्य केवल शपथ लेना नहीं, बल्कि इसे अपने व्यवहार में उतारना है। एन.एस.एस. स्वयंसेवकों की जिम्मेदारी और भी महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि वे समाज में परिवर्तन के वाहक होते हैं। विद्यार्थियों को चाहिए कि वे अपने गांव, परिवार एवं आसपास के क्षेत्रों में जाकर लोगों को टीबी के लक्षण—जैसे लगातार खांसी, वजन घटना, बुखार आदि—के बारे में जागरूक करें तथा जरूरत पड़ने पर उन्हें जांच और उपचार के लिए प्रेरित करें। यह ध्यान रखना आवश्यक है कि टीबी का इलाज पूरी तरह संभव है और सरकार द्वारा इसके लिए निःशुल्क दवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। यदि हम सब मिलकर प्रयास करें, तो टीबी मुक्त भारत का सपना अवश्य साकार होगा। कार्यक्रम के दौरान एन.एस.एस. कॉर्डिनेटर विक्रम रजत डुंगडुंग ने भी अपने संबोधन में कहा— “शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल ज्ञान अर्जित करना नहीं, बल्कि समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझना और उन्हें निभाना भी है। इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम विद्यार्थियों में सामाजिक चेतना, सेवा भाव और उत्तरदायित्व की भावना को विकसित करते हैं। एन.एस.एस. के स्वयंसेवकों को चाहिए कि वे इस अभियान को जन-जन तक पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाएं और समाज में सकारात्मक परिवर्तन के वाहक बनें।” इस कार्यक्रम में उपप्राचार्य फादर समीर टोप्पो, फादर लियो, सिस्टर चन्द्रोदया, फादर राजीप, प्रो. मनीषा, प्रो. बंसति, प्रो. अंकिता, प्रो. आदिति, प्रो. रेचेल, प्रो. सुष्मिता, प्रो. सुकुट, प्रो. रोनित, प्रो. शशि, प्रो. मन्नू, प्रो. जामेश, प्रो. मोनिका सहित अन्य शिक्षकों की गरिमामयी उपस्थिति रही। अंत में धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया। यह आयोजन न केवल विद्यार्थियों में जागरूकता बढ़ाने में सफल रहा, बल्कि उन्हें समाज सेवा के प्रति प्रेरित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी सिद्ध हुआ।1