आईटीआई में गुणवत्ता बढ़े, हर माह लगें दो रोजगार मेले - डीएम युवाओं को कौशल के साथ रोजगार से जोड़ने की कवायद तेज, लापरवाही पर कार्रवाई की चेतावनी देवरिया। जिलाधिकारी मधुसूदन हुल्गी ने सोमवार को कलेक्ट्रेट कार्यकक्ष में श्रम, सेवायोजन, कौशल विकास एवं आईटीआई विभागों की समीक्षा बैठक की। उन्होंने अधिकारियों को युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने वाली योजनाओं का प्रभावी एवं समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। डीएम ने स्पष्ट कहा कि योजनाओं के संचालन में किसी भी स्तर पर लापरवाही मिलने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। जिलाधिकारी ने जिले के सभी राजकीय आईटीआई के प्रधानाचार्यों को निर्देशित किया कि प्रत्येक ट्रेड में प्रशिक्षण की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाए। प्रशिक्षणार्थियों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखते हुए व्यावहारिक और तकनीकी दक्षता प्रदान की जाए, जिससे प्रशिक्षण पूरा करने के बाद वे रोजगार के लिए पूरी तरह तैयार हो सकें। स्थानीय जरूरत के अनुसार तैयार हों प्रशिक्षण कार्यक्रम कौशल विकास विभाग की समीक्षा के दौरान डीएम ने अधिक से अधिक युवाओं को कौशल विकास योजनाओं से जोड़ने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि युवाओं की रुचि और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध रोजगार की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण दिया जाए। आवश्यकता के अनुसार नए ट्रेड विकसित करने और प्रशिक्षण के बाद युवाओं को रोजगार से जोड़ने की प्रक्रिया को भी प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। सात आईटीआई में हर माह दो रोजगार मेले जिलाधिकारी ने जनपद के सभी सात राजकीय आईटीआई में प्रत्येक माह कम से कम दो रोजगार मेले आयोजित कराने के निर्देश दिए। उन्होंने रोजगार मेलों में अधिक से अधिक युवाओं के साथ निजी क्षेत्र के प्रतिष्ठानों और रोजगारदाताओं की भागीदारी सुनिश्चित करने को कहा। इसका उद्देश्य प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे और प्रशिक्षण पूरा कर चुके युवाओं को उनकी योग्यता एवं कौशल के अनुरूप रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है। श्रमिकों को योजनाओं का मिले समय से लाभ श्रम विभाग की समीक्षा में जिलाधिकारी ने श्रमिकों के हित में संचालित योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार कराने के निर्देश दिए। उन्होंने पात्र श्रमिकों का पंजीयन बढ़ाने तथा योजनाओं के तहत लाभार्थियों को समय से हितलाभ उपलब्ध कराने पर जोर दिया। विभागीय योजनाओं की नियमित समीक्षा कर प्रगति में सुधार लाने के भी निर्देश दिए गए। बैठक में आईटीआई देवरिया के प्रधानाचार्य समेत जनपद के अन्य राजकीय आईटीआई के प्रधानाचार्य, कौशल विकास विभाग के अधिकारी और संबंधित कर्मचारी मौजूद रहे।
आईटीआई में गुणवत्ता बढ़े, हर माह लगें दो रोजगार मेले - डीएम युवाओं को कौशल के साथ रोजगार से जोड़ने की कवायद तेज, लापरवाही पर कार्रवाई की चेतावनी देवरिया। जिलाधिकारी मधुसूदन हुल्गी ने सोमवार को कलेक्ट्रेट कार्यकक्ष में श्रम, सेवायोजन, कौशल विकास एवं आईटीआई विभागों की समीक्षा बैठक की। उन्होंने अधिकारियों को युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने वाली योजनाओं का प्रभावी एवं समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। डीएम ने स्पष्ट कहा कि योजनाओं के संचालन में किसी भी स्तर पर लापरवाही मिलने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। जिलाधिकारी ने जिले के सभी राजकीय आईटीआई के प्रधानाचार्यों को निर्देशित किया कि प्रत्येक ट्रेड में प्रशिक्षण की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाए। प्रशिक्षणार्थियों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखते हुए व्यावहारिक और तकनीकी दक्षता प्रदान की जाए, जिससे प्रशिक्षण पूरा करने के बाद वे रोजगार के लिए पूरी तरह तैयार हो सकें। स्थानीय जरूरत के अनुसार तैयार हों प्रशिक्षण कार्यक्रम कौशल विकास विभाग की समीक्षा के दौरान डीएम ने अधिक से अधिक युवाओं को कौशल विकास योजनाओं से जोड़ने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि युवाओं की रुचि और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध रोजगार की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण दिया जाए। आवश्यकता के अनुसार नए ट्रेड विकसित करने और प्रशिक्षण के बाद युवाओं को रोजगार से जोड़ने की प्रक्रिया को भी प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। सात आईटीआई में हर माह दो रोजगार मेले जिलाधिकारी ने जनपद के सभी सात राजकीय आईटीआई में प्रत्येक माह कम से कम दो रोजगार मेले आयोजित कराने के निर्देश दिए। उन्होंने रोजगार मेलों में अधिक से अधिक युवाओं के साथ निजी क्षेत्र के प्रतिष्ठानों और रोजगारदाताओं की भागीदारी सुनिश्चित करने को कहा। इसका उद्देश्य प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे और प्रशिक्षण पूरा कर चुके युवाओं को उनकी योग्यता एवं कौशल के अनुरूप रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है। श्रमिकों को योजनाओं का मिले समय से लाभ श्रम विभाग की समीक्षा में जिलाधिकारी ने श्रमिकों के हित में संचालित योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार कराने के निर्देश दिए। उन्होंने पात्र श्रमिकों का पंजीयन बढ़ाने तथा योजनाओं के तहत लाभार्थियों को समय से हितलाभ उपलब्ध कराने पर जोर दिया। विभागीय योजनाओं की नियमित समीक्षा कर प्रगति में सुधार लाने के भी निर्देश दिए गए। बैठक में आईटीआई देवरिया के प्रधानाचार्य समेत जनपद के अन्य राजकीय आईटीआई के प्रधानाचार्य, कौशल विकास विभाग के अधिकारी और संबंधित कर्मचारी मौजूद रहे।
- धारा 34 के लंबित मामलों के निस्तारण को सितंबर में चलेगा विशेष अभियान डीएम ने कर-करेत्तर एवं राजस्व कार्यों की समीक्षा कर अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश सरकारी भूमि से अवैध कब्जे हटाने, पुराने वादों के समयबद्ध निस्तारण और राजस्व वसूली में तेजी लाने पर जोर देवरिया। जिलाधिकारी मधुसूदन हुल्गी की अध्यक्षता में सोमवार को कलेक्ट्रेट सभागार में कर-करेत्तर, राजस्व, रिट, ऑडिट तथा सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे से संबंधित मामलों की समीक्षा बैठक हुई। बैठक में जिलाधिकारी ने विभागवार राजस्व प्राप्तियों और निर्धारित लक्ष्यों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को लक्ष्य के अनुरूप प्रगति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। राजस्व न्यायालयों में लंबित वादों की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने पुराने मामलों को प्राथमिकता के आधार पर गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध तरीके से निस्तारित करने को कहा। उन्होंने विशेष रूप से धारा 34 के लंबित मामलों के निस्तारण के लिए सितंबर माह में विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए। साथ ही धारा 24, 116, 67 और 80 सहित अन्य लंबित राजस्व प्रकरणों का भी प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण सुनिश्चित करने को कहा। जिलाधिकारी ने कहा कि राजस्व मामलों के निस्तारण में अनावश्यक विलंब नहीं होना चाहिए। जनसामान्य को समय से न्याय और राहत दिलाना अधिकारियों की प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने लंबित मामलों की नियमित समीक्षा करते हुए प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए। रिट मामलों में समय से जवाब दाखिल करने के निर्देश रिट से संबंधित प्रकरणों की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने प्रभावी पैरवी करने और समय से जवाब दाखिल कराने के निर्देश दिए। ऑडिट आपत्तियों का भी नियमानुसार निस्तारण सुनिश्चित करने को कहा। जिन मामलों में संबंधित विभाग या अधिकारियों से कार्रवाई अपेक्षित है, उनमें आपसी समन्वय के साथ तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए। सरकारी भूमि पर कब्जा मिला तो होगी कार्रवाई सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने अधिकारियों को सरकारी भूमि को चिह्नित कर अवैध कब्जों के खिलाफ नियमानुसार प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कब्जा हटाए जाने के बाद दोबारा अतिक्रमण न हो, इसके लिए नियमित निगरानी की जाए। साथ ही सरकारी भूमि से संबंधित अभिलेखों को अद्यतन रखने पर भी जोर दिया। राजस्व वसूली में तेजी लाने के निर्देश कर-करेत्तर राजस्व की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों को निर्धारित लक्ष्यों की नियमित समीक्षा करने और राजस्व वसूली में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शासन की प्राथमिकताओं के अनुरूप सभी कार्यों का समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। किसी भी स्तर पर लापरवाही अथवा अनावश्यक विलंब पाए जाने पर संबंधित की जिम्मेदारी तय की जाएगी। बैठक में अपर जिलाधिकारी प्रशासन प्रेम नारायण सिंह, अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व राम शंकर सहित संबंधित विभागों और राजस्व विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।1
- देवरिया के बेड पीजी महाविद्यालय में 15 दिवसीय फल संरक्षण प्रशिक्षण कार्यक्रम का हुआ आयोजन, छात्र-छात्राओं ने लिया बढ़-चढ़कर हिस्सा *15 दिवसीय फल संरक्षण प्रक्षिक्षण कार्यक्रम* देवरिया: बी आर डी पी जी कॉलेज देवरिया में फल संरक्षण केंद्र, देवरिया के सहयोग से 15 दिवसीय फल संरक्षण प्रक्षिक्षण कार्यक्रम का आयोजन महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर प्रताप नारायण सिंह के दिशा निर्देशन में प्रारंभ हुआ। कार्यक्रम के समन्वयक श्री विवेक कुमार सिंह ने बताया कि उक्त प्रक्षिक्षण कार्यक्रम में अगले 15 दिन फल और सब्जियों के संरक्षण, प्रबंधन, प्रसंस्करण के साथ साथ उनसे बनने वाले उत्पादों के द्वारा कैसे हम रोजगार के अवसर सृजित कर सकते है, के बारे में प्रक्षिक्षण दिया जायेगा। आज के प्रथम दिन के मुख्य वक्ता प्रक्षिक्षण फल संरक्षण केंद्र, देवरिया प्रभारी श्री राजन प्रसाद यादव द्वारा प्रशिक्षुओं को फल संरक्षण की स्थाई और अस्थाई विधियों के बारे में अवगत कराया। कार्यक्रम का सफल संचालन प्रोफेसर सतेंद्र कुमार सिंह ने किया। इस अवसर पर सभी प्रशिक्षु छात्र छात्राएं उपस्थित रही।1
- थाना सुरौली पुलिस की तत्परता से सड़क पर गिरे पेड़ को हटाकर यातायात व्यवस्था की गई बहाल थाना सुरौली पुलिस की तत्परता से सड़क पर गिरे पेड़ को हटाकर यातायात व्यवस्था की गई बहाल जनपद में हुई बारिश के उपरान्त थाना सुरौली क्षेत्रान्तर्गत कतरारी से पकड़ी जाने वाले ग्राम सिंघही रोड पर पीपल का विशाल पेड़ गिर जाने के कारण आवागमन पूर्णतः बाधित हो गया। सड़क पर पेड़ गिरने की सूचना प्राप्त होते ही थाना सुरौली पुलिस द्वारा तत्काल मौके पर पहुंचकर आवश्यक कार्रवाई की गई। थाना सुरौली की उपनिरीक्षक ममता मिश्रा, आरक्षी राजू गुप्ता, आरक्षी गोविन्द यादव एवं महिला होमगार्ड सुमन द्वारा स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से सड़क पर गिरे पीपल के पेड़ को हटवाने का कार्य कराया गया। पुलिस टीम एवं ग्रामीणों के संयुक्त प्रयास से सड़क को शीघ्र ही अवरोधमुक्त कराते हुए यातायात व्यवस्था को पुनः सुचारु रूप से बहाल कराया गया। पुलिस की त्वरित कार्रवाई से मार्ग पर आवागमन सामान्य हो गया तथा राहगीरों एवं स्थानीय लोगों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ा। स्थानीय ग्रामीणों द्वारा थाना सुरौली पुलिस की तत्परता एवं सहयोगात्मक कार्य की सराहना की गई।1
- मुसहर बस्ती में पहुंची योजनाओं की चौपाल, दस्तावेजों की कमी दूर कर एक सप्ताह में सरकारी लाभ दिलाने के निर्देश1
- *युवाओं में राष्ट्रभाव और भारतीय संस्कार का होना जरूरी : संकर्षण जी* *बरहज में आयोजित हुआ "युवा संवाद" कार्यक्रम* *बरहज।* नगर स्थित बाबा राघवदास भगवानदास स्नातकोत्तर महाविद्यालय आश्रम बरहज, देवरिया के बाबा राघवदास सभागार में सोमवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तत्वावधान में ‘युवा संवाद’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में युवाओं की भूमिका, राष्ट्रनिर्माण, भारतीय संस्कृति एवं संस्कार सहित समसामयिक विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विमर्श गोरक्ष प्रांत के प्रांत प्रमुख तथा गोरखपुर विभाग के विभाग बौद्धिक शिक्षण प्रमुख संकर्षण जी ने कहा कि युवा देश के भविष्य ही नहीं, वर्तमान की सबसे बड़ी शक्ति हैं। युवाओं को अपने जीवन में राष्ट्र को सर्वोपरि रखते हुए भारतीय संस्कृति एवं संस्कारों के साथ आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि युवा अपनी ऊर्जा, प्रतिभा और सामर्थ्य का उपयोग व्यक्तिगत सफलता के साथ-साथ समाज और राष्ट्र के निर्माण में करें। संस्कारवान एवं चरित्रवान युवा ही सशक्त और समर्थ भारत के निर्माण का आधार बन सकते हैं। अध्यक्षीय उद्बोधन में महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. शम्भुनाथ तिवारी ने कहा कि युवा शक्ति किसी भी राष्ट्र की दिशा और दशा निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि युवाओं में चरित्र, कर्तव्यबोध, अनुशासन और सामाजिक उत्तरदायित्व का विकास करना भी है। भारतीय संस्कृति के मूल्यों को आत्मसात कर युवा समाज में सकारात्मक परिवर्तन के वाहक बन सकते हैं। कार्यक्रम का संचालन राजनीति विज्ञान विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अरविन्द पाण्डेय ने किया। कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। प्रारंभ में राष्ट्रगान तथा समापन राष्ट्रगीत के साथ किया गया। इस अवसर पर डॉ. मंजू यादव, सह जिला प्रचारक दौलत जी, नगर कार्यवाह भवेश बरनवाल, डॉ. विनय तिवारी, हरिप्रकाश जायसवाल, संदीप मद्देशिया, विवेक वर्मा, प्रदुम्न वर्मा, किशन मद्देशिया, विनय मिश्र, रामकुमार 'संत जी', तेजनारायण यादव, डॉ.रामकुमार जी, सत्यनारायण पांडेय, सोनाली सोनकर, खुशबू सोनकर सहित महाविद्यालय के शिक्षक, स्वयंसेवक एवं बड़ी संख्या में युवा उपस्थित रहे।3
- एम एस आई इन्टर कॉलेज में साप्ताहिक उर्दू जल्सा, ब-यादगारः-वारिसे लौह ओ कलम मुहिब्बे उर्दू , मोहम्मद हामिद अली बैत बाज़ी मुकाबला-2026, एवं शरीके मुक़ाबला इदारा, इमामबाड़ा मुस्लिम गर्ल्स इण्टर कॉलेज मियाँ बाजार, एवं एम एस आई इण्टर कॉलेज, वष्शीपुर मौलाना आजाद गर्ल्स इण्टर कॉलेज गोरखनाथ इस्लामिक नर्सरी व गर्ल्स जु.ह. स्कूल, रहमत नगर इसलामिक एकेडमी, निजामपुर मॉडल एजुकेशनल इंस्टीट्यूट, घासीकटरा जे. एफ. एफ. गोरखनाथ माउन्ट सीना गोरखनाथ इस्लामिया गर्ल्स स्कूल गोरखनाथ अलबनात, काजीपुर खुर्द चौधरी पब्लिक गर्ल्स स्कूल गोरखनाथ आमना गर्ल्स इण्टर कॉलेज, बहरामपुर एवं काज़ी तवस्सुल हुसैन (सदर) Mahboob Sayeed 'हारिस' (सेक्रेटरी) सौजन्य से :- साजिद अली मेमोरियल कमेटी, गोरखपुर (उ०प्र०) दिनांक 7,8,9 ,2026,तीन दिवसीय कार्यक्रम गोरखपुर के आडिटोरियम् हाल एम. एस. आई. इण्टर कालेज बख़्शीपुर, गोरखपुर आयोजित हुआ1
- हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की समय पर पहचान और प्रबंधन जरूरी पीएचसी बरहज में स्टाफ नर्स, सीएचओ और एएनएम को दिया गया प्रशिक्षण, सुरक्षित प्रसव पर जोर देवरिया। हाई रिस्क प्रेगनेंसी (एचआरपी) वाली गर्भवती महिलाओं की समय से पहचान कर उनका उचित प्रबंधन मातृ एवं शिशु मृत्यु दर कम करने में महत्वपूर्ण है। इसी उद्देश्य से अरमान सहयोगी संस्था के सहयोग से सोमवार को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बरहज के सभागार में एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में स्टाफ नर्स, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) और एएनएम को इंटीग्रेटेड हाई रिस्क प्रेगनेंसी ट्रैकिंग एंड मैनेजमेंट के संबंध में प्रशिक्षण दिया गया। कार्यशाला की अध्यक्षता एमओआईसी डॉ मृणाल ने की। इस दौरान गर्भवती महिलाओं की नियमित प्रसव पूर्व जांच, हाई रिस्क गर्भावस्था की समय पर पहचान और आवश्यकता के अनुसार उपचार एवं रेफरल की प्रक्रिया की जानकारी दी गई। अरमान संस्था के प्रशिक्षक नकुल ने गुणवत्तापूर्ण प्रसव पूर्व जांचों पर जोर देते हुए कहा कि गर्भावस्था के दौरान जटिलताओं की समय रहते पहचान होने पर गंभीर स्थिति से बचा जा सकता है। हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की नियमित निगरानी और समय पर उपचार सुनिश्चित करना आवश्यक है। जिला मातृ स्वास्थ्य परामर्शदाता विश्वनाथ मल्ल ने बताया कि जिन गर्भवती महिलाओं में खून की कमी, उच्च रक्तचाप, दौरे की समस्या, मधुमेह, 145 सेंटीमीटर से कम लंबाई, 35 किलोग्राम से कम वजन, 18 वर्ष से कम या 35 वर्ष से अधिक आयु जैसी जटिलताएं पाई जाती हैं, उन्हें उच्च जोखिम वाली गर्भवती की श्रेणी में रखा जाता है। गंभीर स्थिति में ऐसी महिलाओं को तत्काल उच्च स्वास्थ्य केंद्र पर रेफर किया जाना चाहिए। उन्होंने एमओ और स्टाफ नर्स को हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं के प्रबंधन और रेफरल की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी। प्रशिक्षण के दौरान मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने, गर्भवती महिलाओं की नियमित ट्रैकिंग करने तथा संस्थागत एवं सुरक्षित प्रसव को बढ़ावा देने पर भी चर्चा हुई। कार्यशाला में डॉ इमाम हुसैन, बीसीपीएम अजीत, स्टाफ नर्स, सीएचओ, एएनएम सहित स्वास्थ्य विभाग के अन्य कर्मचारी मौजूद रहे।1
- सत्य निकेतन में पांच मंजिला पीजी इमारत ढही, सात की मौत; अवैध निर्माण और प्रशासनिक लापरवाही पर उठे सवाल 27 घंटे तक चला रेस्क्यू ऑपरेशन, मलबे से निकाले गए शव; बेसमेंट में चल रहा था मरम्मत का काम, G+1 की अनुमति पर खड़ी कर दी गईं पांच मंजिलें नई दिल्ली। दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार, 6 सितंबर 2026 को एक दर्दनाक हादसे में छात्रों के लिए संचालित पांच मंजिला पीजी इमारत अचानक भरभराकर ढह गई। हादसे के समय इमारत में कई छात्र मौजूद थे। देखते ही देखते पूरी इमारत मलबे में तब्दील हो गई और कई लोग उसके नीचे दब गए। हादसे में सात लोगों की मौत हो गई, जबकि कई लोग घायल हुए। घटना के बाद करीब 27 घंटे तक बड़े पैमाने पर राहत एवं बचाव अभियान चलाया गया। हादसे की सूचना मिलते ही दिल्ली पुलिस, दिल्ली फायर सर्विस, एनडीआरएफ, डीडीएमए, सिविल डिफेंस समेत अन्य राहत एजेंसियां मौके पर पहुंचीं। मलबा काफी भारी और इमारत की संरचना अस्थिर होने के कारण बचाव कार्य बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। राहतकर्मियों ने आधुनिक उपकरणों की मदद से मलबे को सावधानीपूर्वक हटाया और एक-एक कर फंसे लोगों को बाहर निकाला। घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। बेसमेंट में चल रहा था मरम्मत का काम प्रारंभिक जांच में हादसे को लेकर कई गंभीर तथ्य सामने आए हैं। बताया जा रहा है कि करीब 40 से 50 वर्ष पुरानी इमारत के बेसमेंट और ग्राउंड फ्लोर पर मरम्मत अथवा रेनोवेशन का काम चल रहा था। बेसमेंट में लंबे समय से पानी का रिसाव और सीलन होने की बात भी सामने आई है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या मरम्मत के दौरान भवन की संरचनात्मक मजबूती प्रभावित हुई और इसी वजह से इमारत अचानक ढह गई। G+1 की अनुमति, पांच मंजिल तक निर्माण का आरोप हादसे के बाद सबसे गंभीर सवाल अवैध निर्माण को लेकर उठ रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार भवन को मूल रूप से ग्राउंड प्लस एक मंजिल (G+1) के लिए अनुमति मिली थी, लेकिन बाद में कथित तौर पर इसमें अतिरिक्त मंजिलें बनाकर इसे करीब पांच मंजिला कर दिया गया। इतनी पुरानी इमारत पर अतिरिक्त निर्माण किए जाने के बावजूद संबंधित विभागों की निगरानी पर सवाल खड़े हो गए हैं। यह भी जांच का विषय है कि भवन में पीजी का संचालन किस आधार पर किया जा रहा था और क्या वहां रहने वाले छात्रों की सुरक्षा के लिए आवश्यक मानकों का पालन किया जा रहा था। मालिक समेत अन्य के खिलाफ मामला दर्ज हादसे के बाद दिल्ली पुलिस ने भवन मालिक हरिराम बंसल और अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी हादसे के वास्तविक कारणों, अवैध निर्माण, मरम्मत कार्य तथा भवन की अनुमति से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रहे हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मामले में मजिस्ट्रेट जांच के निर्देश दिए हैं और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया है। MCD की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में हादसे ने दिल्ली में अवैध निर्माण और पुराने भवनों की सुरक्षा जांच की व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि यदि भवन में स्वीकृत नक्शे के विपरीत अतिरिक्त मंजिलें बनाई गई थीं और वह लंबे समय से जर्जर स्थिति में था तो संबंधित विभागों को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई? छात्रों के रहने के लिए पीजी के रूप में इस्तेमाल होने वाली इमारत की सुरक्षा जांच समय-समय पर क्यों नहीं की गई? हादसे के बाद नगर निगम ने अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई तेज करने और चिन्हित अवैध संरचनाओं को सील करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है तथा लापरवाही सामने आने पर कार्रवाई की बात कही गई है। छात्रों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल सत्य निकेतन दिल्ली का प्रमुख छात्र इलाका है, जहां बड़ी संख्या में विद्यार्थी पीजी और किराये के मकानों में रहते हैं। ऐसे में इस हादसे ने राजधानी में पीजी, हॉस्टल और किराये की इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल हादसे के बाद कार्रवाई करने के बजाय प्रशासन को ऐसे सभी पुराने भवनों का संरचनात्मक ऑडिट कराना चाहिए, जहां बड़ी संख्या में छात्र या अन्य लोग रह रहे हैं। विशेष रूप से उन भवनों की जांच जरूरी है, जिनमें स्वीकृत मानकों से अधिक निर्माण किया गया है। जिम्मेदारी तय होने का इंतजार सत्य निकेतन हादसे ने एक साथ कई सवाल खड़े किए हैं—क्या अवैध निर्माण पर समय रहते कार्रवाई हुई थी? क्या भवन की संरचनात्मक जांच की गई थी? बेसमेंट में चल रहे काम की अनुमति किसने दी? और यदि भवन असुरक्षित था तो उसमें छात्रों के रहने की व्यवस्था कैसे चलती रही? अब लोगों की नजर जांच रिपोर्ट और प्रशासनिक कार्रवाई पर है। हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों के लिए यह अपूरणीय क्षति है। जरूरत है कि जांच निष्पक्ष और समयबद्ध तरीके से पूरी हो तथा केवल भवन मालिक ही नहीं, बल्कि यदि किसी अधिकारी या संबंधित विभाग की लापरवाही सामने आती है तो उसकी भी जवाबदेही तय की जाए। सत्य निकेतन का मलबा हटाने के साथ राहत अभियान भले समाप्त हो गया हो, लेकिन यह हादसा दिल्ली में भवन सुरक्षा और अवैध निर्माण की निगरानी व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल छोड़ गया है।1