जनता का दिल जीत रहे एसडीएम अनुराग सिंह जनपद बाराबंकी की तहसील रामसनेहीघाट में तैनात तेज-तर्रार, ईमानदार और न्यायप्रिय एसडीएम अनुराग सिंह इन दिनों आम जनता के बीच अपनी कार्यशैली को लेकर चर्चा में हैं। अपने संवेदनशील और सरल व्यवहार के कारण वे लोगों का भरोसा जीतते जा रहे हैं। प्रतिदिन सुबह 10 बजे से तहसील कार्यालय में बैठकर वे स्वयं फरियादियों की समस्याएं सुनते हैं और समयबद्ध तरीके से उनके निस्तारण के निर्देश देते हैं। खास बात यह है कि यदि कोई फरियादी किसी कारणवश देर से भी पहुंचता है, तब भी वे उसे मिलने का अवसर देते हैं। तहसील कार्यालय में पर्याप्त समय देकर वे यह सुनिश्चित करते हैं कि कोई भी व्यक्ति निराश होकर वापस न लौटे। स्थानीय लोगों का कहना है कि पूर्व में कुछ अधिकारी ऐसे भी रहे, जिनसे मिल पाना आमजन के लिए कठिन था। लेकिन अनुराग सिंह की कार्यशैली बिल्कुल अलग है—वे अफसरशाही से दूर रहकर जनसेवा को प्राथमिकता देते हैं। आज तहसील में एक भावुक दृश्य देखने को मिला। एक गरीब किसान अपनी समस्या लेकर पहुंचा, उसके साथ उसका छोटा नौनिहाल बेटा भी था। किसान की बात गंभीरता से सुनकर एसडीएम ने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। इसके बाद उन्होंने किसान के बेटे को अपने पास बुलाया। मासूम बच्चा जैसे ही पास पहुंचा, वह उनके चरण छूने लगा। इस स्नेहिल पल ने वहां मौजूद सभी लोगों का दिल छू लिया। एसडीएम अनुराग सिंह ने बच्चे को गले लगाकर आशीर्वाद दिया, उसे किशमिश खिलाई और उसके साथ फोटो खिंचवाकर विदा किया। यह दृश्य न केवल मानवीय संवेदना का प्रतीक था, बल्कि यह भी दर्शाता है कि प्रशासनिक पद पर रहते हुए भी इंसानियत और अपनापन सबसे बड़ी ताकत है। जनता के बीच बढ़ती लोकप्रियता इस बात का प्रमाण है कि जब अधिकारी संवेदनशीलता और ईमानदारी के साथ कार्य करें, तो प्रशासन और आमजन के बीच विश्वास की डोर और मजबूत हो जाती है। जनता का दिल जीत रहे एसडीएम अनुराग सिंह जनपद बाराबंकी की तहसील रामसनेहीघाट में तैनात तेज-तर्रार, ईमानदार और न्यायप्रिय एसडीएम अनुराग सिंह इन दिनों आम जनता के बीच अपनी कार्यशैली को लेकर चर्चा में हैं। अपने संवेदनशील और सरल व्यवहार के कारण वे लोगों का भरोसा जीतते जा रहे हैं। प्रतिदिन सुबह 10 बजे से तहसील कार्यालय में बैठकर वे स्वयं फरियादियों की समस्याएं सुनते हैं और समयबद्ध तरीके से उनके निस्तारण के निर्देश देते हैं। खास बात यह है कि यदि कोई फरियादी किसी कारणवश देर से भी पहुंचता है, तब भी वे उसे मिलने का अवसर देते हैं। तहसील कार्यालय में पर्याप्त समय देकर वे यह सुनिश्चित करते हैं कि कोई भी व्यक्ति निराश होकर वापस न लौटे। स्थानीय लोगों का कहना है कि पूर्व में कुछ अधिकारी ऐसे भी रहे, जिनसे मिल पाना आमजन के लिए कठिन था। लेकिन अनुराग सिंह की कार्यशैली बिल्कुल अलग है—वे अफसरशाही से दूर रहकर जनसेवा को प्राथमिकता देते हैं। आज तहसील में एक भावुक दृश्य देखने को मिला। एक गरीब किसान अपनी समस्या लेकर पहुंचा, उसके साथ उसका छोटा नौनिहाल बेटा भी था। किसान की बात गंभीरता से सुनकर एसडीएम ने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। इसके बाद उन्होंने किसान के बेटे को अपने पास बुलाया। मासूम बच्चा जैसे ही पास पहुंचा, वह उनके चरण छूने लगा। इस स्नेहिल पल ने वहां मौजूद सभी लोगों का दिल छू लिया। एसडीएम अनुराग सिंह ने बच्चे को गले लगाकर आशीर्वाद दिया, उसे किशमिश खिलाई और उसके साथ फोटो खिंचवाकर विदा किया। यह दृश्य न केवल मानवीय संवेदना का प्रतीक था, बल्कि यह भी दर्शाता है कि प्रशासनिक पद पर रहते हुए भी इंसानियत और अपनापन सबसे बड़ी ताकत है। जनता के बीच बढ़ती लोकप्रियता इस बात का प्रमाण है कि जब अधिकारी संवेदनशीलता और ईमानदारी के साथ कार्य करें, तो प्रशासन और आमजन के बीच विश्वास की डोर और मजबूत हो जाती है।
जनता का दिल जीत रहे एसडीएम अनुराग सिंह जनपद बाराबंकी की तहसील रामसनेहीघाट में तैनात तेज-तर्रार, ईमानदार और न्यायप्रिय एसडीएम अनुराग सिंह इन दिनों आम जनता के बीच अपनी कार्यशैली को लेकर चर्चा में हैं। अपने संवेदनशील और सरल व्यवहार के कारण वे लोगों का भरोसा जीतते जा रहे हैं। प्रतिदिन सुबह 10 बजे से तहसील कार्यालय में बैठकर वे स्वयं फरियादियों की समस्याएं सुनते हैं और समयबद्ध तरीके से उनके निस्तारण के निर्देश देते हैं। खास बात यह है कि यदि कोई फरियादी किसी कारणवश देर से भी पहुंचता है, तब भी वे उसे मिलने का अवसर देते हैं। तहसील कार्यालय में पर्याप्त समय देकर वे यह सुनिश्चित करते हैं कि कोई भी व्यक्ति निराश होकर वापस न लौटे। स्थानीय लोगों का कहना है कि पूर्व में कुछ अधिकारी ऐसे भी रहे, जिनसे मिल पाना आमजन के लिए कठिन था। लेकिन अनुराग सिंह की कार्यशैली बिल्कुल अलग है—वे अफसरशाही से दूर रहकर जनसेवा को प्राथमिकता देते हैं। आज तहसील में एक भावुक दृश्य देखने को मिला। एक गरीब किसान अपनी समस्या लेकर पहुंचा, उसके साथ उसका छोटा नौनिहाल बेटा भी था। किसान की बात गंभीरता से सुनकर एसडीएम ने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। इसके बाद उन्होंने किसान के बेटे को अपने पास बुलाया। मासूम बच्चा जैसे ही पास पहुंचा, वह उनके चरण छूने लगा। इस स्नेहिल पल ने वहां मौजूद सभी लोगों का दिल छू लिया। एसडीएम अनुराग सिंह ने बच्चे को गले लगाकर आशीर्वाद दिया, उसे किशमिश खिलाई और उसके साथ फोटो खिंचवाकर विदा किया। यह दृश्य न केवल मानवीय संवेदना का प्रतीक था, बल्कि यह भी दर्शाता है कि प्रशासनिक पद पर रहते हुए भी इंसानियत और अपनापन सबसे बड़ी ताकत है। जनता के बीच बढ़ती लोकप्रियता इस बात का प्रमाण है कि जब अधिकारी संवेदनशीलता और ईमानदारी के साथ कार्य करें, तो प्रशासन और आमजन के बीच विश्वास की डोर और मजबूत हो जाती है। जनता का दिल जीत रहे एसडीएम अनुराग सिंह जनपद बाराबंकी की तहसील रामसनेहीघाट में तैनात तेज-तर्रार, ईमानदार और न्यायप्रिय एसडीएम अनुराग सिंह इन दिनों आम जनता के बीच अपनी कार्यशैली को लेकर चर्चा में हैं। अपने संवेदनशील और सरल व्यवहार के कारण वे लोगों का भरोसा जीतते जा रहे हैं। प्रतिदिन सुबह 10 बजे से तहसील कार्यालय में बैठकर वे स्वयं फरियादियों की समस्याएं सुनते हैं और समयबद्ध तरीके से उनके निस्तारण के निर्देश देते हैं। खास बात यह है कि यदि कोई फरियादी किसी कारणवश देर से भी पहुंचता है, तब भी वे उसे मिलने का अवसर देते हैं। तहसील कार्यालय में पर्याप्त समय देकर वे यह सुनिश्चित करते हैं कि कोई भी व्यक्ति निराश होकर वापस न लौटे। स्थानीय लोगों का कहना है कि पूर्व में कुछ अधिकारी ऐसे भी रहे, जिनसे मिल पाना आमजन के लिए कठिन था। लेकिन अनुराग सिंह की कार्यशैली बिल्कुल अलग है—वे अफसरशाही से दूर रहकर जनसेवा को प्राथमिकता देते हैं। आज तहसील में एक भावुक दृश्य देखने को मिला। एक गरीब किसान अपनी समस्या लेकर पहुंचा, उसके साथ उसका छोटा नौनिहाल बेटा भी था। किसान की बात गंभीरता से सुनकर एसडीएम ने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। इसके बाद उन्होंने किसान के बेटे को अपने पास बुलाया। मासूम बच्चा जैसे ही पास पहुंचा, वह उनके चरण छूने लगा। इस स्नेहिल पल ने वहां मौजूद सभी लोगों का दिल छू लिया। एसडीएम अनुराग सिंह ने बच्चे को गले लगाकर आशीर्वाद दिया, उसे किशमिश खिलाई और उसके साथ फोटो खिंचवाकर विदा किया। यह दृश्य न केवल मानवीय संवेदना का प्रतीक था, बल्कि यह भी दर्शाता है कि प्रशासनिक पद पर रहते हुए भी इंसानियत और अपनापन सबसे बड़ी ताकत है। जनता के बीच बढ़ती लोकप्रियता इस बात का प्रमाण है कि जब अधिकारी संवेदनशीलता और ईमानदारी के साथ कार्य करें, तो प्रशासन और आमजन के बीच विश्वास की डोर और मजबूत हो जाती है।
- इंसानों से ज्यादा बढ़ रही बंदरों की जनसंख्या ग्रामीण अंचल से लेकर शहर तक बढ़ती बंदरों की जनसंख्या ने लोगों का जीना दुश्वार कर दिया है वन विभाग की तरफ से इनको पकड़ने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है ब्यूरो चीफ रामानंद सागर2
- UP: गोंडा में सर्राफा व्यापारी समर कसौधन को बाइक सवार बदमाशों ने गोली मार दी और ज्वेलरी का भरा बैग लूट कर ले गए1
- बहराइच के मटेरा थाना क्षेत्र में शंकरपुर चौराहा चौकी पर भारी जाम की स्थिति बन गई है। पेट्रोल पंप पर तेल भरवाने के लिए वाहनों की लंबी कतार लगी हुई है, जिससे खासकर नानपारा की ओर से आने-जाने वाले लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। 👉 जाम के कारण सड़क पर वाहनों की रफ्तार धीमी हो गई है 👉 कई जगहों पर लंबी दूरी तक गाड़ियों की लाइन देखी जा रही है 📍 स्थानीय प्रशासन से अपील है कि जल्द से जल्द यातायात व्यवस्था को सुचारू कराया जाए।1
- सड़क हादसे में महिला की मौत, तीन घायल बाराबंकी जनपद के थाना बड्डूपुर क्षेत्र के रीवा सीवा गांव के पास एक दर्दनाक सड़क हादसे में एक महिला की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक ही परिवार के तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसा उस समय हुआ जब महमूदाबाद निवासी कपिल गुप्ता अपने परिवार के साथ मोटरसाइकिल से लखनऊ जा रहे थे। जानकारी के अनुसार, कपिल गुप्ता पुत्र सुरेश गुप्ता अपनी माताजी, बहन और डेढ़ साल के भांजे के साथ बाइक से सफर कर रहे थे। इसी दौरान सामने से आ रहे तेज रफ्तार डंफर ने उनकी मोटरसाइकिल को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि सभी लोग सड़क पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे में कपिल गुप्ता की माताजी की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि कपिल, उनकी बहन रीना और छोटा बच्चा गंभीर रूप से घायल हो गए। सूचना मिलते ही स्थानीय लोग और पुलिस मौके पर पहुंची और सभी घायलों को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र घुंघटेर पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। पुलिस ने मृतका के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और डंफर चालक की तलाश शुरू कर दी है। घटना के बाद परिजनों में कोहराम मचा हुआ है और इलाके में शोक की लहर है।1
- संवाददाता रवि रावत बाराबंकी के फतेहपुर थाना क्षेत्र में सोमवार को एक सड़क हादसे में दो लोग घायल हो गए। तेज रफ्तार कार ने एक बाइक को टक्कर मार दी, जिसके बाद कार चालक मौके से फरार हो गया। पुलिस के अनुसार, मोहम्मदपुर खाला थाना क्षेत्र के सुंदर नगर हेतमापुर निवासी दिनेश (55) अपने भाई राम सुचित (50), जो फतेहपुर थाना क्षेत्र के मसूदपुर के रहने वाले हैं, के साथ एक विवाह समारोह से लौट रहे थे। दशरथपुर गांव के पास सामने से आ रही एक तेज रफ्तार कार ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। टक्कर के कारण दोनों भाई सड़क पर गिर गए और गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद मौके पर भीड़ जमा हो गई। स्थानीय लोगों ने तुरंत घायलों को सड़क किनारे पहुंचाया और उनके परिजनों को सूचना दी। परिजनों के पहुंचने के बाद एंबुलेंस से दोनों घायलों को फतेहपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। वहां चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार किया। डॉ. हिमांशु ने बताया कि दिनेश के पैर में गंभीर चोटें आई हैं, जिसमें अत्यधिक रक्तस्राव और कई फ्रैक्चर शामिल हैं। उनकी गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। राम सुचित को मामूली चोटें आई थीं, जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। घटना की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी है। हालांकि, खबर लिखे जाने तक परिजनों की ओर से कोई लिखित शिकायत दर्ज नहीं कराई गई थी। पुलिस फरार कार चालक की तलाश कर रही है।1
- Post by Anoop singh1
- *थाना परसपुर क्षेत्रांतर्गत हुई फायरिंग की घटना व पुलिस कार्यवाही के संबंध में अपर पुलिस अधीक्षक पूर्वी की बाइट*1
- 👉 पत्रकार रामजी दीक्षित कि रिपोर्ट बाराबंकी नमस्कार मित्रों, सर श्रीराम जयंती के अवसर पर आपका स्वागत करना मेरे लिए परम सौभाग्य की बात है। सर श्रीराम भारत के उन जाने माने व्यक्तियों में से हैं, जिन्हे देश के उद्योगपति, महान वैज्ञानिक, अर्थशास्त्री, शिक्षाबादी एवं समाजसेवी सभी बगों के लोग, उनके प्रेरणादायक आदशों के कारण आज भी हृदय से सम्मान देते हैं सर श्रीराम ने अपने करियर की शुरुआत एक बहुत ही साधारण आर्थिक पृष्ठभूमि के साथ की, लेकिन अपनी बसाधारण बुद्धिमत्ता, आसामान्य व्यावसायिक कौशल, दूरदर्शिता, दृढ़ संकल्प और अयक परिश्रम से उन्होंने न केवल अपने जीवनकाल में एक विशाल व्यापारिक साम्राज्य का निर्माण किया, बल्कि स्वतंत्र भारत के नव निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। सर श्रीराम स्वयं एक अत्यंत बुद्धिमान व्यक्तित्व होने के साथ साथ अपार विनम्रता के धनी थे। जहां एक ओर वे अपनी कुशाग्रता से कठिन से कठिन फैसले लेने में समर्थ थे, नहीं ने दूसरों के लिए फैसलों का बहुत विनम्रता से सम्मान करते थे। वह निःस्वार्थ मेजबान भी थे उनके परस्पर लेन-देन के रवैये ने उन्हें एक मिलनसार व्यक्ति बना दिया। 22, कर्जन रोब, न केवल उनका घर था, यह दिल्ली का सबसे बढ़ा गेस्ट हाउस था और शायद भारत का भी, जहां जीवन के सभी क्षेत्रों के लोगों, विनम्र पुरुष और विद्वान, कलाकार, वैज्ञानिक, अर्थशास्त्री, उद्योगपति, चिकित्सा विशेषज्ञ, राजनीतिक नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, बैंकरों सभी का उनके द्वारा गर्मजोशी से स्वागत किया गया। सर श्रीराम का जीवन अध्ययन किसी भी अभ्यासरत प्रबंधक और प्रबंधन छात्र के लिए बहुत लाभकारी साबित हो सकता है। इस देश में व्यवसाय प्रबंधन को औपचारिक विषय के रूप में मान्यता मिलने से बहुत पहले, उन्होंने प्रबंधन के कई सिद्धांतों को पूरी तरह से अपने सामान्य ज्ञान और दुर्लभ व्यावसायिक कौशल के आधार पर लागू किया। सर श्रीराम दिल से मानवतावादी थे, मानवीय संबंधों के लिए उनकी चिंता की बराबरी बहुत कम लोग कर सकते थे। उन्होंने कर्मचारियों के बैंक और विवाह कोष की शुरुवात की, पीएफ सुबिधाओं को कानून के तहत अनिवार्य होने से बहुत पहले डीसीएम में पेश किया गया था। एक सच्चे मानवतावादी, सर श्रीराम ने रिवायती कैंटीन, चिकित्सा सहायता आदि जैसे कल्याणकारी उपायों की शुरुआत की। ➡️राधा सीड एण्ड पेस्टीसाइड्स श्री राम कॉलोनी1