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रादौर के छोटा बांस गांव की बस्ती में एक बड़ी कार्रवाई की गई है, जहाँ 'पीला पंजा' चलाया गया। यह कार्रवाई विशेष रूप से उस बस्ती पर केंद्रित थी जिसने सीआईए (CIA) पर पथराव किया था। गौरतलब है कि रादौर के छोटा बांस गांव की इसी बस्ती में पहले भी पुलिस पर हमले हो चुके हैं, जिसके बाद यह महत्वपूर्ण कार्रवाई अमल में लाई गई।
KL MEDIA 24 - KARNAL LOCAL NEWS
रादौर के छोटा बांस गांव की बस्ती में एक बड़ी कार्रवाई की गई है, जहाँ 'पीला पंजा' चलाया गया। यह कार्रवाई विशेष रूप से उस बस्ती पर केंद्रित थी जिसने सीआईए (CIA) पर पथराव किया था। गौरतलब है कि रादौर के छोटा बांस गांव की इसी बस्ती में पहले भी पुलिस पर हमले हो चुके हैं, जिसके बाद यह महत्वपूर्ण कार्रवाई अमल में लाई गई।
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- हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अनुसूचित जाति (SC) विभाग में कृष्ण कुटेल को कार्यकारी चेयरमैन नियुक्त किया गया है।1
- लोगों ने अधिकारियों के समक्ष शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें उन्होंने एक मेले को रोकने की मांग की है। इस शिकायत के बाद अब सभी की नजरें प्रशासन के आगामी फैसले पर टिकी हुई हैं।1
- भोजपुर, बिहार से आ रही जानकारी के अनुसार, भरत तिवारी का पहले सरेंडर के बाद भी एनकाउंटर हुआ था। अब इस मामले में उनके पिता और भाई पर भी एफआईआर दर्ज कर ली गई है।1
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- रादौर के गांव छोटा बांस में प्रशासन द्वारा बुलडोज़र चलाकर कार्रवाई की गई है।1
- जनपद शामली के थानाभवन थाना क्षेत्र के ग्राम नांगल में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ पाँच परिवारों ने एक दबंग पड़ोसी पर रास्ता बंद करने का आरोप लगाते हुए अपने ही मकानों पर 'पलायन को मजबूर' होने के बैनर लगा दिए हैं। पीड़ित परिवारों का आरोप है कि गाँव के दबंग श्याम सिंह ने कब्जे की नीयत से उनके पुश्तैनी रास्ते पर मलबा डालकर उसे पूरी तरह बंद कर दिया है, जिससे इन परिवारों का घर से बाहर निकलना तक मुश्किल हो गया है। पीड़ित दीपक पुत्र सेवाराम और उनके परिवार के सदस्य, जिनमें देवेंद्र, जोगिंदर, प्रमोद और बिजेंद्र शामिल हैं, पिछले कई वर्षों से लगभग 16 वर्गगज की एक साझा गैलरी को अपने घरों तक पहुँचने के मुख्य मार्ग के रूप में इस्तेमाल करते आ रहे थे। परिवार के अनुसार, इस गैलरी के ऊपर की पुरानी और जर्जर छत अचानक गिर गई, जिससे रास्ता मलबे से भर गया। दीपक का आरोप है कि उन्हें मलबा हटाने और रास्ता साफ करने नहीं दिया गया, जिससे पाँच परिवारों का एकमात्र रास्ता बंद हो गया। इसके कारण बच्चों को स्कूल भेजने, बाजार जाने और अन्य दैनिक कार्यों में भारी परेशानी हो रही है, जिसका सबसे अधिक असर बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों पर पड़ रहा है। परिवार ने यह भी आरोप लगाया है कि रास्ता खुलवाने की मांग करने पर उन्हें धमकियाँ दी जा रही हैं। पीड़ित परिवार का कहना है कि वे दबंग आरोपी श्याम सिंह की कथित दबंगई से पिछले लगभग 10 महीनों से परेशान हैं। उन्होंने जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक समेत कई आला अधिकारियों को प्रार्थना पत्र सौंपकर न्याय की गुहार लगाई है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। मीडिया से बात करते हुए दीपक ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही समस्या का समाधान नहीं हुआ तो उनका परिवार गाँव छोड़ने को मजबूर हो जाएगा, क्योंकि रास्ता बंद होने से उनका सामान्य जीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है और वे मानसिक तनाव में रह रहे हैं। परिवार की एक महिला सदस्य पिंकी ने भी मीडिया के सामने अपनी व्यथा सुनाते हुए बताया कि संबंधित अधिकारियों से शिकायत के बावजूद समस्या बनी हुई है। गाँव में पलायन का बैनर लगने के बाद यह मामला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है। अब लोगों की निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं और सभी को इंतजार है कि आखिर पीड़ित परिवार को कब राहत मिलेगी तथा वर्षों पुराने रास्ते का यह विवाद किस प्रकार सुलझाया जाएगा।1
- रादौर में सीआइए टीम पर डेहा बस्ती के लोगों द्वारा पथराव किए जाने के कुछ दिन बाद, शनिवार को प्रशासन ने 'योगी सरकार की तर्ज पर' बड़ी कार्रवाई करते हुए डेहा बस्ती में 100 से अधिक अस्थायी घरों को ध्वस्त कर दिया। इस कार्रवाई के माध्यम से दशकों से नगरपालिका की भूमि पर हुए अवैध कब्जों को भारी पुलिस बल की सहायता से मुक्त कराया गया। इस अभियान के लिए जिला उपायुक्त ने कृषि विभाग के एसडीओ आशु कांबोज को ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त किया था। नगरपालिका की ओर से अवैध कब्जे हटवाने के लिए चार जेसीबी मशीनें मंगवाई गईं, जिनसे अस्थायी कब्जों को ढहाया गया। थाना रादौर प्रभारी इंस्पेक्टर राजेश राणा के नेतृत्व में 100 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात थे। कार्रवाई के दौरान कुछ लोगों ने विरोध किया तो पुलिस ने उन्हें मौके से खदेड़ दिया, और डेहा बस्ती से गुजरने वाली सड़क को दोनों ओर से बंद रखा गया। नगरपालिका सचिव सुरेंद्र मलिक के अवकाश पर होने के कारण एमई संदीप शर्मा, अकाउंटेंट नीरज कांबोज, बीआई आदित्य कांबोज और एसआई सुमित बैंस ने मोर्चा संभाला। नपा दरोगा जितेंद्र सिंह बिट्टू और विपिन वाल्मीकि के नेतृत्व में 50 से अधिक सफाई कर्मचारियों की टीम ने घरों से फ्रिज, कूलर, वाशिंग मशीन, चारपाइयां और सिलेंडर सहित अन्य सामान निकालकर नपा की ट्रॉलियों में लोड किया, जिसे जब्त कर नगरपालिका कार्यालय भिजवाया गया। साथ ही, बिजली निगम की टीम ने अवैध कब्जाधारियों को बिजली आपूर्ति न मिल सके, इसके लिए अस्थायी घरों की बिजली काट दी। यह बड़ी कार्रवाई मंगलवार, 16 जून को हुई एक घटना के बाद की गई। उस दिन सीआइए असंध की टीम करनाल निवासी नशा तस्कर राजेंद्र कुमार को डेहा बस्ती में गिरफ्तार करने आई थी, लेकिन बस्ती के लोगों ने गिरफ्तारी का विरोध किया। उन्होंने पुलिस पर ईंट-पत्थर बरसाए, उन्हें घायल किया और उनकी गाड़ी के शीशे तोड़ते हुए नशा तस्कर राजेंद्र कुमार को पुलिस हिरासत से भागने में मदद की। इसी घटना के बाद प्रशासन ने नशा तस्करों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए डेहा बस्ती में 100 से अधिक अस्थायी घरों पर बुलडोजर चलवाकर नगरपालिका की भूमि को कब्जा मुक्त करवाया। दशकों से छोटाबांस में नगरपालिका की भूमि पर अवैध रूप से घर बनाकर रह रहे डेहा बस्ती के लोगों के खिलाफ न तो कभी गांव रादौरी की पंचायत ने और न ही तत्कालीन नगरपालिका ने कोई बड़ी कार्रवाई की। 'वोटों की राजनीति' के चलते यह बस्ती अस्तित्व में आई, जहां पहले कम लोग रहते थे, लेकिन बाद में अवैध कब्जे बढ़ते गए और किसी ने विरोध नहीं किया। 2016 में रादौर को नगरपालिका का दर्जा मिलने के बाद छोटाबांस को इसमें शामिल किया गया, हालांकि स्थानीय लोगों ने इसका विरोध भी किया था। नगरपालिका के कार्यकाल में भी डेहा बस्ती में भारी संख्या में अवैध कब्जे हुए और नगरपालिका की एक-एक इंच भूमि पर कब्जा कर लिया गया, जिसके खिलाफ नगरपालिका ने कोई कार्रवाई नहीं की थी। हालांकि, डेहा बस्ती में बिक रहे नशीले पदार्थों और पुलिस पर पथराव की घटना के बाद नगरपालिका के पार्षदों ने प्रशासन के अधिकारियों को कार्रवाई का प्रस्ताव दिया। शुक्रवार को नपा चेयरमैन रजनीश मेहता शालू के नेतृत्व में शहर के पार्षदों ने एसडीएम रादौर से मिलकर ज्ञापन सौंपा और कार्रवाई की मांग की। ज्ञापन देने के 24 घंटे के भीतर ही प्रशासन ने डेहा बस्ती में शनिवार को यह बड़ी कार्रवाई की। इस कार्रवाई के चलते डेहा बस्ती के 100 से अधिक घरों में रह रहे लोग बेघर हो गए और सड़कों पर आ गए। बस्ती के अधिकतर लोग अपने घरों को ताला लगाकर कई दिनों से फरार चल रहे हैं, जिनकी पुलिस तलाश कर रही है। कार्रवाई के दौरान बस्ती के लोग नशा तस्कर राजेंद्र कुमार को कोसते नजर आए, जिसकी वजह से उन्हें दशकों से रह रहे अपने घरों से हाथ धोना पड़ा।1
- रादौर के छोटा बांस गांव की बस्ती में एक बड़ी कार्रवाई की गई है, जहाँ 'पीला पंजा' चलाया गया। यह कार्रवाई विशेष रूप से उस बस्ती पर केंद्रित थी जिसने सीआईए (CIA) पर पथराव किया था। गौरतलब है कि रादौर के छोटा बांस गांव की इसी बस्ती में पहले भी पुलिस पर हमले हो चुके हैं, जिसके बाद यह महत्वपूर्ण कार्रवाई अमल में लाई गई।1