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चम्पावत:256 करोड़ की लागत से बन रहे प्रदेश के प्रथम महिला स्पोर्ट्स कॉलेज का मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने किया स्थलीय निरीक्षण*
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चम्पावत:256 करोड़ की लागत से बन रहे प्रदेश के प्रथम महिला स्पोर्ट्स कॉलेज का मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने किया स्थलीय निरीक्षण*
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- नैनीताल: मौसम का जो स्वरूप इस बार सर्दियों में देखने को मिला है, शायद ही कभी देखने को मिला हो, नैनीताल मुक्तेश्वर सरीखी चोटियां बर्फविहीन हो चली हैं, तो इस बार केदारघाटी भी बर्फ से विरक्त हो चली है। इन सबके बीच विराट हिमालय की सफेद ऊंची चोटियां की सफेदी फीकी हो चली हैं तो कुछ समझ में आ रहा होगा कि भविष्य की राह बेहद नहीं बल्कि खतरनाक कठिन होने जा रही है। जलसंकट से तो जूझना ही पड़ेगा, कृषि भी बुरी तरह प्रभावित होगी। इसके सबसे बड़ी वजह कमजोर पश्चिमी विक्षोभ हैं और जलवायु की मार पश्चिमी विक्षोभों की कमर तोड़ने में लगी हुई है। अब पश्चिमी विक्षोभ बादलों तक सीमित होकर रहने लगे हैं। गढ़वाल कुमाऊं की हसीन वादियों रंग इस बार बदरंग नजर आने लगा है। दिसंबर सूखे की भेंट चढ़ गया। जनवरी में दो दिन की बारिश और बर्फबारी प्रदेश की औसत बारिश 42 मिमी की भरपाई सिर्फ दो दिन में पूरा कर गई। फरवरी का आज आखिरी दिन है और ये महीना भी मायूस कर सूखे के साथ गुजर गया। रविवार से मार्च की शुरुवात होगी तो प्री मानसून की शुरूआत को लेकर उम्मीदें जगने लगी हैं, लेकिन संशय बना हुआ है कि पश्चिमी विक्षोभों की तरह प्री मानसून भी धोखा न दे जाय। यदि ऐसा कुछ हुआ तो गर्मी में जलसंकट को लेकर तैयारियां रहना होगा। क्योंकि यह सब हमारा ही किया धरा है उत्तराखंड और हिमाचल के पहाड़ों के साथ दखल अंदाजी का दंश सभी को झेलना होगा। पर्यावरण वैज्ञानिकों की चेतावनियां तभी से शुरू हो गई थी, जब ग्लोबल वार्मिंग का पारा चढ़ना शुरू हुआ था। करीब ढाई दशक पहले वैज्ञानिकों का समूह आवाज देने लगा था और किसी ने सुनी भी तो अनसुनी करदी। इसका नतीजा है कि इस बार पर्वतों की रौनक गायब है। पेड़ पोंधे की पत्तियां हरियाली को तरसने लगे है। अबोध पेड़ पत्तों की पुकार, शायद ही कोई सुने। बिगड़ते हालातों के बीच आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान एरीज, नैनीताल के पर्यावरण पर नजर रखने वाले वैज्ञानिक डा नरेंद्र सिंह कहते हैं कि वो कौनसे हालात थे, जो शुक्र और मंगल ग्रह के सागर निगल गए। हमें सोचना तो पड़ेगा, समझना भी पड़ेगा और साथ में चेतना भी होगा। बिगड़ते हालातों को संभालने के लिए आज नहीं बल्कि अभी से सामूहिक प्रयास करने होंगे।1
- Post by Surendra Kumar1
- Post by शैल शक्ति1
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