एटा और जलेसर के बीच अवैध खनन का सिलसिला लगातार जारी है, जिसके गंभीर आरोप लगाए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, तमाम वीडियो साक्ष्य और जीपीएस छायाचित्रों के वायरल होने व अधिकारियों को दिखाए जाने के बावजूद प्रशासन की आँखों पर कथित तौर पर काला पर्दा पड़ा हुआ है। इस स्थिति का कारण 'रिश्वत रूपी काला पर्दा' बताया गया है, जिसके चलते अवैध मिट्टी खुदाई पर कठोर कार्यवाही नहीं की जाती, बल्कि कई बार संबंधित अधिकारी फोन भी बंद कर लेते हैं। खनन माफिया पर कार्रवाई न होने को लेकर प्रशासनिक उदासीनता पर सवाल उठ रहे हैं। जनपद मुखिया को जब साक्ष्य के रूप में जीपीएस छायाचित्र और वीडियो दिखाए जाते हैं, तो उन्हें 'जांच होगी' का घिसा-पिटा उत्तर देकर टाल दिया जाता है। यहां तक कि पर्यावरण दिवस पर जिलाधिकारी से इस संबंध में पूछे जाने पर उन्होंने भी नजर चुराते हुए केवल जांच कर कार्यवाही करने का आश्वासन ही दिया। रिपोर्ट में तीखे लहजे में सवाल उठाया गया है कि क्या यह प्रशासन की मूक सहमति है, और व्यंग्यपूर्ण तरीके से कहा गया है कि यदि ऐसा है तो प्रशासन सीधे अवैध खनन को अनुमति देकर उसे वैध क्यों नहीं करार देता ताकि पत्रकारों के सवालों से बचा जा सके। भू-खनन माफिया और कलमकारों के बीच खिंची इस लकीर के मिटने का भविष्य समय ही बताएगा। हालांकि, रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि प्रशासन की 'कुम्भकर्णीय नींद' को जगाने का प्रयास जारी रहेगा और जब तक कलम में स्याही रहेगी, कलम इस मुद्दे पर लिखती रहेगी।
एटा और जलेसर के बीच अवैध खनन का सिलसिला लगातार जारी है, जिसके गंभीर आरोप लगाए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, तमाम वीडियो साक्ष्य और जीपीएस छायाचित्रों के वायरल होने व अधिकारियों को दिखाए जाने के बावजूद प्रशासन की आँखों पर कथित तौर पर काला पर्दा पड़ा हुआ है। इस स्थिति का कारण 'रिश्वत रूपी काला पर्दा' बताया गया है, जिसके चलते अवैध मिट्टी खुदाई पर कठोर कार्यवाही नहीं की जाती, बल्कि कई बार संबंधित अधिकारी फोन भी बंद कर लेते हैं। खनन माफिया पर कार्रवाई न होने को लेकर प्रशासनिक उदासीनता पर सवाल उठ रहे हैं। जनपद मुखिया को जब साक्ष्य के रूप में जीपीएस छायाचित्र और वीडियो दिखाए जाते हैं, तो उन्हें 'जांच होगी' का घिसा-पिटा उत्तर देकर टाल दिया जाता है। यहां तक कि पर्यावरण दिवस पर जिलाधिकारी से इस संबंध में पूछे जाने पर उन्होंने भी नजर चुराते हुए केवल जांच कर कार्यवाही करने का आश्वासन ही दिया। रिपोर्ट में तीखे लहजे में सवाल उठाया गया है कि क्या यह प्रशासन की मूक सहमति है, और व्यंग्यपूर्ण तरीके से कहा गया है कि यदि ऐसा है तो प्रशासन सीधे अवैध खनन को अनुमति देकर उसे वैध क्यों नहीं करार देता ताकि पत्रकारों के सवालों से बचा जा सके। भू-खनन माफिया और कलमकारों के बीच खिंची इस लकीर के मिटने का भविष्य समय ही बताएगा। हालांकि, रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि प्रशासन की 'कुम्भकर्णीय नींद' को जगाने का प्रयास जारी रहेगा और जब तक कलम में स्याही रहेगी, कलम इस मुद्दे पर लिखती रहेगी।
- सीजेपी प्रमुख अभिजीत दीपके इंद्रा गांधी एयरपोर्ट जंतर-मंतर पर धरना प्रदर्शन करने पहुँचे हैं। इस दौरान, वे शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करेंगे। यह जानकारी क्राइम इंडिया न्यूज़ के सौरभ द्वारा उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले के बहोरनपुर गाँव से दी गई है।1
- मैनपुरी जिले के कुर्रा थाना क्षेत्र से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहाँ जमीन पर कब्जे को लेकर हुए विवाद के दौरान फायरिंग का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। यह घटना जनपद मैनपुरी के ग्राम रैपुरा, पोस्ट धरमंगदपुर की बताई जा रही है। इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि मैनपुरी में दबंगों को किसी प्रशासन का खौफ नहीं है। वायरल वीडियो में जमीन पर कब्जा करने के विवाद के दौरान फायरिंग किए जाने का आरोप है। पत्रकार मोहित गुप्ता, संपादक जनपद मैनपुरी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, स्थानीय प्रशासन और पुलिस से इस मामले में तत्काल कार्रवाई की मांग की जा रही है ताकि दबंगों के बढ़ते हौसले पर लगाम लगाई जा सके।1
- राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का शक्ति प्रदर्शन जारी है, जहाँ विरोध स्थल 'गोदी मीडिया चोर है' जैसे नारों से गूंज उठा। कॉकरोच जनता पार्टी, जिसमें AISF और अभिजीत दिपके भी शामिल हैं, अपनी विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रही है। इस प्रदर्शन के माध्यम से कार्यकर्ता संबंधित मुद्दों पर सरकार का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास कर रहे हैं। मौके पर बड़ी संख्या में समर्थक मौजूद हैं और यह प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से जारी है।1
- NEET UG 2026 परीक्षा में कथित पेपर लीक और धांधली के आरोपों को लेकर देश के छात्रों और युवाओं का गुस्सा चरम पर है। इसी कड़ी में, दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' के बैनर तले सैकड़ों छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एक बड़ा और शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। इस आंदोलन में प्रमुख एक्टिविस्ट अभिजीत दिपके ने भी शिरकत कर छात्रों की आवाज को बुलंद किया। प्रदर्शनकारी हाथों में बाबासाहेब अंबेडकर और शहीद भगत सिंह की तस्वीरें थामे हुए थे, और उन्होंने देश के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तत्काल इस्तीफे की मांग की। छात्रों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलता और नीट परीक्षा में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं होती, तब तक यह विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।1
- मैनपुरी जिले के दल्लीपुर गाँव में एक हैंडपंप खराब पड़ा है, जिससे लगातार गंदा पानी निकल रहा है। ग्रामीणों को इस समस्या से जूझना पड़ रहा है, लेकिन अभी तक इस टूटे हैंडपंप की मरम्मत के लिए कोई भी नहीं आया है।1
- एटा में आगामी आरक्षी भर्ती परीक्षा को निष्पक्ष, पारदर्शी और सकुशल संपन्न कराने के उद्देश्य से अपर पुलिस अधीक्षक एटा श्री श्वेताभ पाण्डेय ने 6 जून, शनिवार को थाना कोतवाली नगर क्षेत्र के विभिन्न परीक्षा केंद्रों का सघन निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था, परीक्षार्थियों की सुविधाओं, स्वच्छता, पेयजल, विद्युत आपूर्ति और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं का जायजा लिया। साथ ही, उन्होंने परीक्षा केंद्रों पर स्थापित कंट्रोल रूम का भी निरीक्षण किया और अधिकारियों व कर्मचारियों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए। एएसपी ने परीक्षा केंद्रों के आसपास सतर्क निगरानी बनाए रखने, संदिग्ध व्यक्तियों पर कड़ी नजर रखने और यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के विशेष निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी व्यवस्थाएं समयबद्ध और निर्धारित मानकों के अनुरूप सुनिश्चित की जाएं, ताकि यह भर्ती परीक्षा शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सके।1
- दिल्ली के जंतर मंतर पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' द्वारा एक बड़ा प्रदर्शन किया गया है, जिसमें 'अब चुप नहीं बैठेंगे!' का उद्घोष करते हुए जवाबदेही की मांग उठाई गई। इस प्रदर्शन का नेतृत्व अभिजीत दीपके कर रहे हैं, जो बाबासाहेब आंबेडकर की ऑटोबायोग्राफी वाली किताब का प्रदर्शन करके खुद को आंबेडकरवादी साबित करने का प्रयास कर रहे हैं, जिसे एक अच्छी बात बताया गया है। हालांकि, इस संदर्भ में यह भी स्पष्ट किया गया है कि बाबासाहेब अंबेडकर को मानने वाला हर व्यक्ति आंबेडकरवादी नहीं हो सकता। अभिजीत दीपके को चुनौती दी गई है कि यदि उनमें दम है तो वे बाबासाहेब अंबेडकर की 22 प्रतिज्ञाएं दोहराएं। प्रदर्शनकारी 'कॉकरोच जनता पार्टी' से स्पष्ट मांग कर रहे हैं कि वह दलित, आदिवासी और पिछड़ा वर्ग के लिए अपनी नीतियां, खासकर आरक्षण प्रतिनिधित्व पर, साफ करे। चेतावनी दी गई है कि जब तक पार्टी इन नीतियों को स्पष्ट नहीं करती, तब तक दलित, आदिवासी और पिछड़ा वर्ग को इससे दूर रहना चाहिए। अन्यथा, इस आंदोलन को केवल एक 'सुवर्ण आंदोलन' समझा जाएगा। इस बीच, जंतर मंतर पर चल रहे इस प्रदर्शन की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में हैं, जहाँ कई यूजर्स मजाकिया अंदाज में यह कह रहे हैं कि मंच और पोस्टर भले ही साधारण हों, लेकिन प्रदर्शनकारियों का उत्साह और जोश बहुत अधिक है।1
- नदरई हजारा नहर में एक हृदयविदारक हादसा सामने आया है, जहाँ दो सगे भाई पानी में डूब गए। इस दर्दनाक घटना के कारण उनके परिवार में गहरा कोहराम मच गया है, और पूरे परिवार में मातम पसरा है।1
- एटा और जलेसर के बीच अवैध खनन का सिलसिला लगातार जारी है, जिसके गंभीर आरोप लगाए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, तमाम वीडियो साक्ष्य और जीपीएस छायाचित्रों के वायरल होने व अधिकारियों को दिखाए जाने के बावजूद प्रशासन की आँखों पर कथित तौर पर काला पर्दा पड़ा हुआ है। इस स्थिति का कारण 'रिश्वत रूपी काला पर्दा' बताया गया है, जिसके चलते अवैध मिट्टी खुदाई पर कठोर कार्यवाही नहीं की जाती, बल्कि कई बार संबंधित अधिकारी फोन भी बंद कर लेते हैं। खनन माफिया पर कार्रवाई न होने को लेकर प्रशासनिक उदासीनता पर सवाल उठ रहे हैं। जनपद मुखिया को जब साक्ष्य के रूप में जीपीएस छायाचित्र और वीडियो दिखाए जाते हैं, तो उन्हें 'जांच होगी' का घिसा-पिटा उत्तर देकर टाल दिया जाता है। यहां तक कि पर्यावरण दिवस पर जिलाधिकारी से इस संबंध में पूछे जाने पर उन्होंने भी नजर चुराते हुए केवल जांच कर कार्यवाही करने का आश्वासन ही दिया। रिपोर्ट में तीखे लहजे में सवाल उठाया गया है कि क्या यह प्रशासन की मूक सहमति है, और व्यंग्यपूर्ण तरीके से कहा गया है कि यदि ऐसा है तो प्रशासन सीधे अवैध खनन को अनुमति देकर उसे वैध क्यों नहीं करार देता ताकि पत्रकारों के सवालों से बचा जा सके। भू-खनन माफिया और कलमकारों के बीच खिंची इस लकीर के मिटने का भविष्य समय ही बताएगा। हालांकि, रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि प्रशासन की 'कुम्भकर्णीय नींद' को जगाने का प्रयास जारी रहेगा और जब तक कलम में स्याही रहेगी, कलम इस मुद्दे पर लिखती रहेगी।1