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जय बद्री विशाल प्रभु सभी भक्तों पर कृपा कीजिए जय श्री बद्री विशाल
शैल शक्ति
जय बद्री विशाल प्रभु सभी भक्तों पर कृपा कीजिए जय श्री बद्री विशाल
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- • डीएसबी छात्र संघ चुनाव: त्रिकोणीय मुकाबले के बीच मतदान शुरू, भारी पुलिस बल तैनात कुमाऊं विश्वविद्यालय के डीएसबी परिसर में छात्र संघ चुनाव के लिए मतदान मंगलवार सुबह 10 बजे से शुरू हो गया है। दोपहर 3 बजे तक वोट डाले जाएंगे, जिसके तुरंत बाद मतगणना शुरू होगी। इस बार परिसर में 12 पदों पर 16 प्रत्याशी मैदान में हैं। सबसे दिलचस्प मुकाबला अध्यक्ष पद पर है, जहाँ हिमांशु आर्या, शुभम कुमार और भानु प्रताप सिंह चौहान के बीच त्रिकोणीय टक्कर है। शांतिपूर्ण चुनाव के लिए परिसर में भारी पुलिस बल तैनात है। मुख्य गेट पर वैध आईकार्ड चेकिंग के बाद ही छात्रों को प्रवेश दिया जा रहा है।1
- तेज पिघल रहे ग्लेशियर तो धरती के ध्रुवों से गायब होने लगी है बर्फ धरती के ध्रुवों से गायब होने लगी है बर्फ, 12.5 ट्रिलियन मीट्रिक टन बर्फ बनी पानी, बढ़ा समुद्र का जलस्तर एक ओर हिमालय के ग्लेशियरों के पिघलने की रफ्तार तेज हुई है तो दूसरी ओर ध्रुवों की बर्फ का समुद्र में समाने का क्रम जारी है। पृथ्वी के वातावरण के लिए यह खबरें चिंताजनक है। एक नए शोध के अनुसार धरती के ध्रुवों से 12.5 ट्रिलियन मीट्रिक टन बर्फ गायब हो चुकी है। जिसे विलुप्त होने में करीब 50 साल का समय लगा है। उधर थर्ड पोल हिमालय के ग्लेशियरों को देखें तो वह पिघलकर पीछे खिसकने लगे हैं। आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान एरीज के वरिष्ठ वायुमंडलीय वैज्ञानिक डॉ नरेंद्र सिंह बताते हैं कि वर्ष 2018 में ग्लेशियरों के पीछे खिसकने को लेकर अध्ययन किया गया था, जो प्रतिवर्ष 20 मीटर पीछे खिसक रहे थे, लेकिन इसके बाद खिसकने की दर अधिक तेज हो चली है, जो अब प्रति वर्ष 25 मीटर पीछे खिसकने लगे हैं। ग्लेशियरों के पिघलने से हिमालय से निकलने वाली नदियों के लिए खतरा उत्पन्न होने लगे है। स्थिति यही रही तो भविष्य में नदियों में जल की मात्रा घट जाएगी और कई छोटी नदियां सूख जाएंगी। इस परिस्थिति में उत्तर भारत समेत बांग्लादेश व नेपाल समेत कुछ अन्य हिस्से प्रभावित होंगे, जो हिमालय से निकलने वाली नदियों के जल पर निर्भर हैं। उन्हें पलायन के मजबूर होना पड़ेगा। डा नरेंद्र सिंह ग्लेशियर पिघलने की मुख्य वजह ग्लोबल वार्मिंग बताते हैं। वह कहते हैं कि अभी तक हुए तमाम शोध बताते हैं कि ग्लोबल वार्मिंग का सावधिक प्रभाव बर्फीले क्षेत्रों पर पड़ रहा है। हिमालय में वैश्विक तापमान बढ़ने की दर दूसरे क्षेत्रों की अपेक्षा कहीं अधिक है। हालिया शोध बताते हैं कि हिमालय में ग्लोबल वॉर्मिंग 2 डिग्री सेल्सियस पहुंच गई है, जो वास्तव में चिंताजनक है और इस सदी के अंत तक हिमालय क्षेत्र में वैश्विक तापमान 5 से 7 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ने का पूर्वानुमान है। यदि यह स्थिति रही तो हिमालय के ग्लेशियरों की स्थिति और बर्फ का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। अब जो खबर पृथ्वी के ध्रुवों से आ रही है, वह सचेत करने वाली है। नए शोध से पता चला है कि ग्रीनलैंड और अंटार्कटिका की विशाल बर्फ की मोटी चादरों में पिछले करीब पांच दशकों में भारी कमी दर्ज की गई है। वैज्ञानिकों का कहना है कि 1970 से लेकर 2023 तक के आंकड़ों के आधार पर 12.5 ट्रिलियन अमेरिकी टन (लगभग 11.3 ट्रिलियन मीट्रिक टन) बर्फ कम हो चुकी है। यह शोध उपग्रहों से लिए आंकड़ों के आधार पर किया गया है और यह शोध सबसे लंबे समय के रिकार्ड पर आधारित है। इस शोध में 27 उपग्रहों के मिशनों से लिए गए आंकड़ों का विश्लेषण है। इससे वैश्विक समुद्र के जल स्तर में लगभग 3.1 सेंटीमीटर की वृद्धि हुई है। यह अध्ययन Ice Sheet Mass Balance Inter-comparison Exercise (IMBIE) के तहत किया गया। अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक टीम ने 42 स्वतंत्र उपग्रह सर्वेक्षणों और 27 उपग्रह मिशनों से मिले आंकड़ों को एक साथ विश्लेषित किया। रिकॉर्ड में ग्रीनलैंड के लिए 1972 और अंटार्कटिका के लिए 1979 से लेकर 2023 तक के आंकड़े शामिल हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार बर्फ का नुकसान केवल सतह के पिघलने से नहीं हुआ। करीब 84 प्रतिशत बर्फ नुकसान तेज गति से समुद्र की ओर बहने वाले ग्लेशियरों के कारण हुआ, जबकि लगभग 16 प्रतिशत नुकसान सतह पर बर्फ पिघलने से जुड़ा है। गर्म समुद्री पानी के कारण बर्फ चादरों के किनारों और नीचे की ओर होने वाले बदलाव भी ग्लेशियरों की गति बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। 1990 के दशक के बाद बढ़ी बर्फ घटने की रफ्तार आंकड़ों में 1990 के दशक के बाद बर्फ नुकसान की गति में स्पष्ट तेजी दिखाई देती है। ग्रीनलैंड में 1980 के दशक के दौरान सालाना करीब 60 अरब मीट्रिक टन बर्फ कम हो रही थी, जो 2010 के दशक में बढ़कर लगभग 264 अरब टन प्रति वर्ष हो गई। अंटार्कटिका में भी इसी अवधि में बर्फ नुकसान की दर बढ़ी। हालांकि 2020 से 2023 के बीच बर्फ नुकसान में कुछ अस्थायी कमी देखी गई। वैज्ञानिकों के अनुसार पूर्वी अंटार्कटिका में अधिक बर्फबारी और ग्रीनलैंड में अपेक्षाकृत कम सतही पिघलाव ने इस अवधि में कुल नुकसान को कुछ हद तक कम किया। इसे दीर्घकालिक बर्फ नुकसान की प्रवृत्ति में बदलाव नहीं माना गया है। छह से नौ करोड़ नहीं, 60 से 90 लाख लोग अतिरिक्त जोखिम में समुद्र स्तर में करीब तीन सेंटीमीटर की वृद्धि छोटी लग सकती है, लेकिन IMBIE के सह-संस्थापक और नॉर्थम्ब्रिया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर एंड्रयू शेफर्ड के अनुसार इससे लगभग 60 से 90 लाख अतिरिक्त लोग तटीय बाढ़ और कटाव के जोखिम में आ सकते हैं। निचले तटीय क्षेत्रों में समुद्र स्तर बढ़ने से बाढ़ और तटीय कटाव की संवेदनशीलता बढ़ती है। वैज्ञानिकों के लिए इस अध्ययन की खास अहमियत इसलिए है क्योंकि उपग्रहों से प्राप्त आधी सदी के आंकड़े बर्फ चादरों में हो रहे बदलाव को लगातार समझने में मदद करते हैं। भविष्य में समुद्र स्तर बढ़ने के अनुमानों को बेहतर बनाने के लिए ऐसे लंबे उपग्रह रिकॉर्ड महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। स्रोत: ESA, Northumbria University, IMBIE ESA की रिपोर्ट और आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान एरीज के पर्यावरण वैज्ञानिक डॉ नरेंद्र सिंह। फोटो कैप्शन: ग्रीनलैंड में बर्फीली चादर और ग्लेशियर। वैज्ञानिकों के अनुसार ग्रीनलैंड और अंटार्कटिका से 1970 के दशक के बाद से 12.5 ट्रिलियन अमेरिकी टन के बराबर बर्फ कम हुई है। फोटो क्रेडिट: Dr Sammie Buzzard संपादन: रमेश चंद्रा।2
- मस्जिद के सामने हनुमान चालीसा के ऐलान पर विरोध, पिंकी चौधरी की गिरफ्तारी की मांग1
- सरस्वती शिशु मंदिर में कोई निबंध प्रतियोगिता विषय था विकसित भारत और विकसित उत्तराखंड 2047 धारी (नैनीताल) सरस्वती शिशु मंदिर गंगुवाचौड़ मैं निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसमें कक्षा 6 कक्षा 8 तक के बच्चों ने भाग लिया विषय रहा विकसित भारत और विकसित उत्तराखंड 2047। जिसमें सभी आचार्य आचार्या ने बच्चों के साथ सहयोग किया।1
- आशाओं ने की मानदेय बढ़ाने और स्थायी कर्मचारी का दर्जा देने की मांग अल्मोड़ा। मानदेय वृद्धि, नियमितीकरण समेत विभिन्न मांगों को लेकर ऐक्टू से संबद्ध उत्तराखंड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन ने मंगलवार को नगर के गांधी पार्क में धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान आशा कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों के जल्द समाधान की मांग उठाई। वक्ताओं ने कहा कि 31 अगस्त 2021 को खटीमा वार्ता में सरकार ने आशाओं को 11,500 रुपये मासिक मानदेय देने का वादा किया था, लेकिन करीब पांच साल बीतने के बाद भी यह प्रस्ताव लागू नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि आशाएं 24 घंटे मातृ-शिशु सुरक्षा से जुड़ी सेवाओं में जुटी रहती हैं, इसके बावजूद उन्हें दैनिक मजदूर से भी कम भुगतान किया जा रहा है। प्रदर्शन के दौरान आशा कार्यकर्ताओं ने दरज़ामंत्री कुंदन लटवाल के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा। ज्ञापन में वर्ष 2021 के प्रस्ताव को तत्काल लागू करने, आशाओं को स्थायी कर्मचारी का दर्जा देने और सेवानिवृत्ति के बाद आजीवन पेंशन की नीति बनाने की मांग की गई। आशाओं ने कहा कि जब तक स्थायी कर्मचारी का दर्जा नहीं दिया जाता, तब तक सेवामुक्त होने वाली आशाओं को 10 लाख रुपये की एकमुश्त राशि दी जाए। इसके अलावा महीनों से लंबित भुगतान जारी करने, पल्स पोलियो अभियान और प्रशिक्षण के लिए 500 रुपये प्रतिदिन का भत्ता देने तथा सरकारी अस्पतालों में आशाओं के साथ होने वाली बदसलूकी पर रोक लगाने की मांग भी की गई। आशा कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन को और उग्र करने के लिए मजबूर होंगी।1
- जिलाधिकारी ने नावकुंड गांव पहुंचकर देवहा नदी के कटान का लिया जायजा संवेदनशील स्थलों पर तत्काल कटानरोधी कार्य कराने के दिए निर्देश पीलीभीत, सूचना विभाग, 29 सितम्बर 2026। जनपद में बीते दिनों हुई भारी बारिश के दृष्टिगत जिलाधिकारी आलोक कुमार ने आज तहसील सदर के ग्राम नावकुंड (नाकुड़) पहुंचकर देवहा नदी द्वारा किए जा रहे भूमि कटान का स्थलीय निरीक्षण किया। जिलाधिकारी ने मौके पर पहुंचकर नदी के जलस्तर, कटान की स्थिति तथा प्रभावित क्षेत्रों का बारीकी से जायजा लिया और ग्रामीणों से भी संवाद कर उनकी समस्याओं एवं स्थिति की जानकारी प्राप्त की। जिलाधिकारी ने सिंचाई विभाग एवं बाढ़ खण्ड के अधिकारियों को संवेदनशील स्थलों पर तत्काल कटानरोधी कार्य प्रारम्भ कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कटान प्रभावित क्षेत्रों में जिओ बैग्स, बांस-बल्लियों सहित आवश्यक तकनीकी उपायों के माध्यम से सुदृढ़ीकरण कार्य कराया जाए, ताकि नदी के कटान को प्रभावी रूप से नियंत्रित किया जा सके और ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित हो। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि बाढ़ खण्ड एवं राजस्व विभाग की संयुक्त टीम प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखे तथा जलस्तर अथवा कटान की स्थिति में किसी भी प्रकार के परिवर्तन की तत्काल सूचना उच्चाधिकारियों को दी जाए। जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए आवश्यकतानुसार तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने ग्रामीणों से संवाद करते हुए कहा कि जिला प्रशासन ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह संवेदनशील एवं सतर्क है। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि किसी भी प्रकार की अफवाह पर ध्यान न दें तथा नदी के जलस्तर एवं कटान की स्थिति को देखते हुए सावधानी बरतें और प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करें। इस दौरान उप जिलाधिकारी सदर, सिंचाई विभाग, बाढ़ खण्ड एवं राजस्व विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।3
- बहेड़ी में अवैध कच्ची शराब बनाते एक आरोपी गिरफ्तार, 25 लीटर शराब बरामद गन्ने के खेत में चल रही थी शराब की भट्ठी, गैस चूल्हे और शराब बनाने के उपकरण भी बरामद; आरोपी के खिलाफ आबकारी अधिनियम में मुकदमा दर्ज बहेड़ी (बरेली)। बरेली जनपद के बहेड़ी थाना क्षेत्र में पुलिस ने अवैध कच्ची शराब बनाने के मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उसके कब्जे से 25 लीटर अवैध कच्ची शराब और शराब बनाने के उपकरण बरामद किए हैं। आरोपी के खिलाफ आबकारी अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर उसे न्यायालय के समक्ष पेश किया गया। पुलिस के मुताबिक, 28 सितंबर को उपनिरीक्षक शिवम कुमार, हेड कांस्टेबल विशेष कुमार, हेड कांस्टेबल देवेश सिंह और कांस्टेबल अर्जुन कुमार क्षेत्र में गश्त कर रहे थे। इसी दौरान मुखबिर से सूचना मिली कि ग्राम खिरनी में मंशाराम के बाग में नाले के दूसरी ओर गन्ने के खेत के पास एक व्यक्ति अवैध कच्ची शराब बनाने की भट्ठी चला रहा है। सूचना पर पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर छापेमारी की और एक व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपी ने अपना नाम मुरारी लाल पुत्र मनीलाल निवासी ग्राम खिरनी, थाना बहेड़ी, जनपद बरेली, उम्र 28 वर्ष बताया। पुलिस ने मौके से 25 लीटर अवैध कच्ची शराब के साथ दो गैस चूल्हे, पाइप लगी एक छोटी पतीली, एक बड़ी पतीली, एक प्लास्टिक की बाल्टी, आधी कटी प्लास्टिक की बोतल, लाल रंग का ड्रम, एक गैस सिलेंडर और एक प्लास्टिक की कैन बरामद की। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने पूछताछ में बताया कि वह कच्ची शराब बनाकर अपने और बच्चों के जीवनयापन के लिए बेचता था। उसके खिलाफ पहले भी आबकारी अधिनियम के तहत मुकदमे दर्ज हैं। बरामदगी के आधार पर थाना बहेड़ी में मुकदमा संख्या 754/2026 धारा 60(2) आबकारी अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध अग्रिम विधिक कार्रवाई करते हुए न्यायालय के समक्ष पेश किया। कार्रवाई करने वाली पुलिस टीम में उपनिरीक्षक शिवम कुमार, हेड कांस्टेबल विशेष कुमार, हेड कांस्टेबल देवेश सिंह और कांस्टेबल अर्जुन कुमार शामिल रहे।1
- आर्मी इंटेलीजेंस बनबसा की सूचना पर चम्पावत पुलिस की बड़ी कार्यवाही MES में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले दो आरोपी गिरफ्तार जनपद चंपावत..... लोगों को आर्मी/MES में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले व्यक्ति व उसके सहयोगी को चंपावत पुलिस द्वारा फर्जी कागजात स्टैंप, पेड,स्कूटी के साथ किया गिरफ्तार.....1