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कोटा जेईई-मेन जनवरी सेशन में कोटा का दबदबा: 12 में से 7 स्टूडेंट्स को 100 पर्सेन्टाइल, कबीर छिल्लर ने बनाए 300 में 300 अंक
Dushyant singh gehlot (journalist)
कोटा जेईई-मेन जनवरी सेशन में कोटा का दबदबा: 12 में से 7 स्टूडेंट्स को 100 पर्सेन्टाइल, कबीर छिल्लर ने बनाए 300 में 300 अंक
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- कोटा। सर्व समाज संस्था की ओर से जमीयतुल मंसूरियन धर्मशाला में 11 जोड़ों का निःशुल्क सामूहिक विवाह सम्मेलन आयोजित किया गया। इस आयोजन में राजस्थान के विभिन्न जिलों के साथ-साथ मध्य प्रदेश से भी जोड़े शामिल हुए। कार्यक्रम में कई जोड़ों का विवाह पूरी तरह निःशुल्क संपन्न कराया गया। संस्था के अध्यक्ष अकरम खान ने बताया कि संस्था का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों का सम्मानपूर्वक विवाह कराना है, ताकि किसी पर आर्थिक बोझ न पड़े। उन्होंने जानकारी दी कि संस्था द्वारा आगामी 29 मार्च और 12 अप्रैल को भी इसी प्रकार के सामूहिक विवाह सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक जरूरतमंद परिवारों को लाभ मिल सके।1
- कोटा शहर के कंसुआ इलाके में 8वीं शताब्दी के ऐतिहासिक कर्णेश्वर महादेव मंदिर परिसर में एक पुराने कमरे की छत अचानक भरभराकर गिर गई। शुक्र है कि उस वक्त वहां कोई नहीं था, वरना बड़ा हादसा हो सकता था। यह जगह उस कुंड के ठीक बगल में है, जहां रोजाना बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं स्नान करने आते हैं और दीवार के पास बैठते हैं। कल ही महाशिवरात्रि पर यहां हजारों भक्तों की भीड़ उमड़ी थी।1
- कोटा सरस डेयरी बूथ विकास समिति की ओर से सरस डेयरी बूथ संचालकों की समस्याओं को लेकर एक ज्ञापन लोकसभा अध्यक्ष एवं कोटा–बूंदी सांसद श्री ओम बिरला को सौंपा गया। ज्ञापन में प्रशासन द्वारा की जा रही कथित दमनकारी नीतियों एवं अनुचित कार्रवाइयों पर रोक लगाने की मांग की गई है। समिति ने बताया कि कोटा शहर में संचालित सरस डेयरी बूथ हजारों परिवारों की आजीविका का मुख्य साधन हैं। बूथ संचालक सीमित आय में सरस दूध एवं दुग्ध उत्पादों का विक्रय कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं। वर्तमान में सरस डेयरी द्वारा दूध पर मात्र 2 रुपये प्रति किलो का लाभ दिया जा रहा है, जबकि किराया, बिजली बिल सहित अन्य खर्च जोड़ने पर प्रति माह 4 से 5 हजार रुपये तक का अतिरिक्त भार पड़ता है। इससे बूथ संचालकों के लिए परिवार का भरण-पोषण करना अत्यंत कठिन होता जा रहा है। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि कई बूथ संचालक आर्थिक तंगी के कारण कर्ज में डूबते जा रहे हैं। वहीं प्रशासन द्वारा आए दिन अतिक्रमण, अवैध सामग्री विक्रय जैसे आरोप लगाकर कार्रवाई की जाती है, जिससे बूथ संचालकों को मानसिक व आर्थिक परेशानी झेलनी पड़ रही है। चोरी, चकारी एवं आगजनी जैसी घटनाओं का भय भी लगातार बना रहता है। समिति ने सांसद से मांग की कि सरस डेयरी बूथ संचालकों के हित में हस्तक्षेप कर प्रशासनिक उत्पीड़न पर रोक लगाई जाए, लाभांश में वृद्धि की जाए तथा बूथ संचालकों को भयमुक्त वातावरण में कार्य करने का अवसर प्रदान किया जाए।1
- Post by VKH NEWS1
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