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भटेरा रेलवे क्रॉसिंग के पास घायल मिले व्यक्ति की इलाज के दौरान मौत 20 साल से अकेले रह रहा था मृतक, चोट लगने के कारणों की जांच में जुटी पुलिस
Samarpit sahu
भटेरा रेलवे क्रॉसिंग के पास घायल मिले व्यक्ति की इलाज के दौरान मौत 20 साल से अकेले रह रहा था मृतक, चोट लगने के कारणों की जांच में जुटी पुलिस
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- Post by दधिवल मानव1
- तिरोड़ी तहसील क्षेत्र के अंतिम छोर पर स्थित ग्राम गोरेघाट में सोमवार की दोपहर 03 बजे किसानों को प्राकृतिक खेती और गौ-पालन का प्रशिक्षण दिया गया। पठार क्षेत्र में लगातार गिरती कृषि आय और बंजर होती ज़मीन को बचाने के लिए एक नई क्रांति का आगाज करते हुए कोसुम्बा ग्राम विकास समिति के तत्वावधान में कृषकों के लिए शिविर आयोजित किया गया। जिसमें ग्राम कुड़वा, हेट्टी, संग्रामपुर और भोंडकी के किसानों ने हिस्सा लिया1
- कोटेश्वर मंदिर परिसर में मधुमक्खी का आतंक: घायल श्रद्धालुओं को सिविल अस्पताल में कराया गया भर्ती लांजी। नगर मुख्यालय अंतर्गत आने वाले कोटेश्वर मंदिर परिसर में स्थित बरगद के पेड़ पर बने मधुमक्खी के छत्ते सोमवार 4 मई को कोटेश्वर मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं के लिये दर्दनाक कहर बन गये, जानकारी के अनुसार प्रति सोमवार कोटेश्वर मंदिर में शिवलिंग के दर्शन व पूजन के लिये लोगों की भीड़ रहती है, लेकिन 4 मई को सुबह लगभग 9.30 बजे के दरम्यानी अचानक मधुमक्खी आक्रोशित होकर वहां मौजूद लोगों को अपना शिकार बनाने लगी, ऐसे में लगभग 10 से 15 लोग मधुमक्खी के डंक से घायल हो गये, जिन्हे उपचार के लिये सिविल अस्पताल लांजी लाया गया, जहां चिकित्सकीय टीम के द्वारा उपचार प्रारंभ कर दिया गया। वहीं लांजी पार्षद किशोर रामटेक्कर ने बताया कि किसी अज्ञात शख्स के द्वारा रात के समय कोटेश्वर मंदिर परिसर स्थित इन मधुमक्खी के छातों से शहर निकाला गया जिसके बाद से मधुमक्खी आसपास उड़ रही थी और अचानक सुबह जब श्रद्धालु मंदिर पंहुचने लगे तो उन पर हमला कर दिया।1
- नरवाई की आग बनी आफत ,परिवार की पूरी गृहस्थी खाक था, 3 दिन बाद भी नहीं मिली मदद। मामला कुरई क्षेत्र के ग्राम हरपुर का मामला1
- “BJP की बड़ी जीत—सिवनी में जश्न, ढोल-नगाड़ों पर झूमे कार्यकर्ता!”1
- “फाइलों में शेर जिंदा हैं… जंगल में क्यों नहीं?” Kanha National Park—जिसे देश-विदेश में टाइगर लैंड के नाम से जाना जाता है—आज वही अपनी पहचान बचाने के लिए जूझ रहा है। सिर्फ 15 दिनों में 6 बाघों की मौत, और ताज्जुब ये कि सिस्टम अब भी “जांच जारी है” के भरोसे चल रहा है। 📄 कुछ दिन पहले ही पत्रकारों ने कलेक्टर कार्यालय में ज्ञापन सौंपा, उम्मीद थी कि जिम्मेदार जागेंगे… लेकिन लगता है फाइलों की नींद, बाघों की जिंदगी से ज्यादा गहरी है। 🐅 हर नई मौत के साथ एक सवाल और बड़ा होता जा रहा है— क्या कान्हा में बाघ सुरक्षित हैं या सिर्फ आंकड़ों में जिंदा रखे गए हैं? ⚠️ प्रशासन की खामोशी अब सवालों के घेरे में है— क्या ये सिर्फ लापरवाही है, या फिर जिम्मेदारी से बचने का आसान तरीका? ✊ अब जिले के वरिष्ठ पत्रकार चुप नहीं बैठेंगे— कल से अनिश्चितकालीन धरना शुरू होगा। ये धरना सिर्फ विरोध नहीं, बल्कि उस सिस्टम को जगाने की कोशिश है जो हर घटना के बाद “जांच” के पीछे छिप जाता है। 🛑 जब तक वन विभाग और प्रशासन ठोस और सख्त कार्रवाई नहीं करता, ये आंदोलन जारी रहेगा। 🐾 कान्हा सिर्फ एक नेशनल पार्क नहीं, मंडला की पहचान है यहां के बाघ सिर्फ वन्यजीव नहीं, बल्कि इस क्षेत्र की शान, पर्यटन और अस्तित्व हैं। 👉 अगर अब भी कार्रवाई नहीं हुई, तो इतिहास में ये दर्ज होगा कि— “बाघ मरते रहे… और सिस्टम नोटिंग करता रहा।” अब वक्त है— जवाबदेही का, कार्रवाई का, और सच्ची संरक्षण नीति का।1
- Post by Samarpit sahu1