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नरसिंहपुर जिले के गाडरवारा में किसानों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर एक बड़ा शक्ति प्रदर्शन किया। इस दौरान हजारों किसान ट्रैक्टरों, बैलगाड़ियों और पैदल मार्च के साथ सड़कों पर उतरे। उन्होंने मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपते हुए सरकार से अपनी मांगों पर जल्द कार्रवाई करने की मांग की।
पत्रकार आशीष कुमार दुबे
नरसिंहपुर जिले के गाडरवारा में किसानों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर एक बड़ा शक्ति प्रदर्शन किया। इस दौरान हजारों किसान ट्रैक्टरों, बैलगाड़ियों और पैदल मार्च के साथ सड़कों पर उतरे। उन्होंने मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपते हुए सरकार से अपनी मांगों पर जल्द कार्रवाई करने की मांग की।
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- नरसिंहपुर जिले के गाडरवारा में किसानों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर एक बड़ा शक्ति प्रदर्शन किया। इस दौरान हजारों किसान ट्रैक्टरों, बैलगाड़ियों और पैदल मार्च के साथ सड़कों पर उतरे। उन्होंने मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपते हुए सरकार से अपनी मांगों पर जल्द कार्रवाई करने की मांग की।1
- आज गाडरवारा में युवाओं ने एसडीएम कार्यालय को पूरी तरह से घेर लिया था।1
- नगर के वार्ड क्रमांक 12, साईंखेड़ा में देवाधिदेव महादेव और संकटमोचन हनुमान जी का प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव शनिवार को भक्ति, श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हो गया। विद्वान आचार्य शिवेंद्र जी त्रिवेदी और उनके सहयोगी विद्वान मंडल ने वैदिक मंत्रोच्चार तथा शास्त्रोक्त विधि-विधान से भगवान महादेव एवं हनुमान जी के विग्रहों की प्राण-प्रतिष्ठा कराई। इस शुभ अवसर पर नगर और आसपास के क्षेत्र से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित होकर नव प्रतिष्ठित विग्रहों के दर्शन कर पुण्य लाभ प्राप्त किया। प्राण-प्रतिष्ठा के उपरांत महाआरती एवं पूर्णाहुति का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने पूरे भक्तिभाव से हिस्सा लिया। इसके बाद एक विशाल भंडारा आयोजित हुआ, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने महाप्रसाद ग्रहण किया। पूरे आयोजन के दौरान, मंदिर परिसर और आसपास का वातावरण लगातार "हर-हर महादेव" और "जय श्रीराम" के जयघोष से गूँजता रहा। इस दिव्य आयोजन में परमपूज्य अंघोरा वाले पागल बाबा जी, पूज्य श्री सुतीक्ष्ण दास जी महाराज सहित परमपूज्य पांसी वाले संतों का सान्निध्य और आशीर्वाद भक्तों को मिला। संतों ने इस अवसर पर धर्म, सेवा और सनातन संस्कृति के संरक्षण का संदेश दिया, साथ ही सभी भक्तों को शुभाशीष प्रदान किए। उल्लेखनीय है कि महोत्सव के अंतर्गत एक दिन पूर्व भगवान की भव्य शोभायात्रा भी निकाली गई थी, जिसमें नगरभर के श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया था। यह धार्मिक आयोजन समस्त वार्डवासियों और आयोजन समिति के सहयोग से संपन्न हुआ, जो श्रद्धा, सामाजिक एकता और सनातन परंपरा का एक प्रेरणादायी उदाहरण बना। आयोजन समिति ने कार्यक्रम की सफलता सुनिश्चित करने वाले सभी श्रद्धालुओं, संत-महात्माओं और सहयोगियों के प्रति अपना आभार व्यक्त किया।2
- नरसिंहपुर जिले के गाडरवारा में किसानों ने मूंग खरीदी के मुद्दे को लेकर एक विशाल प्रदर्शन किया। हजारों की संख्या में किसान अपने ट्रैक्टरों और बैलगाड़ियों के साथ पहले जवाहर कृषि उपज मंडी पहुंचे, जहाँ एक जनसभा को संबोधित किया गया, जिसके बाद वे एसडीएम कार्यालय पहुंचे। किसानों ने सरकार की इस घोषणा पर तीव्र नाराजगी जताई कि इस बार केवल 25 फीसदी मूंग की खरीदी की जाएगी, जबकि पिछले साल 100 प्रतिशत मूंग खरीदी गई थी। किसानों ने अपने ज्ञापन में इस वर्ष भी 100 प्रतिशत मूंग की खरीदी सुनिश्चित करने की मांग की है। प्रदर्शन के दौरान, किसानों ने मूंग खरीदी की प्रक्रिया, पंजीयन और उपज की खरीद को लेकर अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए जमकर नारेबाजी की। इस जंगी प्रदर्शन को देखते हुए, प्रशासन ने बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया था। किसानों ने प्रशासन के सामने स्थानीय स्तर पर आने वाली समस्याओं को भी रखा, जिनमें खाद टोकन व्यवस्था बंद करने और पेट्रोल-डीजल की पर्याप्त पूर्ति जैसी मांगें शामिल थीं। किसानों ने मुख्यमंत्री के नाम एसडीएम को एक ज्ञापन सौंपा और स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि मूंग खरीदी से संबंधित उनकी मांगों पर जल्द कोई निर्णय नहीं लिया गया, तो आने वाले समय में उनके आंदोलन को और भी बड़ा किया जाएगा।1
- जिला चिकित्सालय में पल्स पोलियो अभियान का शुभारंभ किया गया है। इस अभियान के अंतर्गत, शून्य से पाँच वर्ष तक की आयु के बच्चों को दवा पिलाई गई।1
- नरसिंहपुर पुलिस ने एक नया अभियान शुरू किया है, जिसका उद्देश्य "डिजिटल फॉरेस्ट" नामक गतिविधि के संबंध में जनता को जागरूक करना है। इस अभियान के तहत पुलिस ने स्पष्ट किया है कि "डिजिटल फॉरेस्ट" कोई कानूनी गतिविधि नहीं है, बल्कि यह असल में एक साइबर फ्रॉड है।1
- डिजिटल इंडिया और विकास के बड़े-बड़े दावों के बावजूद, नरसिंहपुर जिले की गोटेगांव जनपद पंचायत के अंतर्गत ग्राम पंचायत मुआंर के अटावारी गांव से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जहाँ देश को आजाद हुए सात दशक से भी अधिक समय बीत जाने के बाद भी एक सुरक्षित और पक्की सड़क नहीं बन पाई है। यह स्थिति प्रशासनिक दावों और जनप्रतिनिधियों के वादों की पोल खोलती है, जिससे ग्रामीण आज भी एक बुनियादी सुविधा से वंचित हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव के समय जनप्रतिनिधि वोट मांगने तो आते हैं और बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही वे अपनी सुख-सुविधाओं में व्यस्त हो जाते हैं और गाँव को भूल जाते हैं। शासन-प्रशासन की इस लगातार उपेक्षा से तंग आकर ग्रामीण हर साल अपनी किस्मत खुद बदलने पर मजबूर होते हैं। बरसात का मौसम आते ही गाँव की कच्ची सड़क दलदल में बदल जाती है, ऐसी मजबूरी में ग्रामवासी आपस में चंदा इकट्ठा करते हैं और पूरे गाँव के लोग मिलकर श्रमदान कर सड़क पर मुरम या ककंड डालकर उसे कम से कम पैदल चलने लायक बनाते हैं। यह सिलसिला सालों से यूं ही चला आ रहा है। इस सड़कविहीन स्थिति का सबसे बुरा असर गाँव के बच्चों और बीमार बुजुर्गों पर पड़ रहा है। बारिश के दिनों में रास्ता पूरी तरह बंद हो जाने के कारण बच्चे स्कूल नहीं जा पाते, जिससे उनकी पढ़ाई का भारी नुकसान होता है। वहीं, अगर गाँव में कोई अचानक बीमार हो जाए या किसी गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाना हो, तो ग्रामीणों के पसीने छूट जाते हैं, और कई बार समय पर इलाज न मिलने से स्थिति बेहद नाजुक हो जाती है। तमाम परेशानियों और प्रशासनिक उपेक्षा से जूझ रहे अटावारी के ग्रामीणों का सब्र अब जवाब दे चुका है, और उन्होंने एक स्वर में जिला कलेक्टर से गुहार लगाई है कि वे स्वयं संज्ञान लेकर ग्राम अटावारी के लिए पक्की सड़क मार्ग के निर्माण की स्वीकृति दें और उन्हें इस नारकीय जीवन से मुक्ति दिलाएँ। अब देखना यह होगा कि क्या जिला प्रशासन ग्रामीणों की इस जायज और बुनियादी मांग को गंभीरता से लेता है, या फिर अटावारी के लोग इस साल भी कीचड़ और दलदल के बीच अपनी जिंदगी गुजारने को मजबूर होंगे।1
- यह पोस्ट 'एक्सप्रेस एमपी सीजी न्यूज़' से संबंधित है।1