बगीचा/जशपुर: बगीचा के सन्ना क्षेत्र में बीती रात राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा को निशाना बनाकर तोड़ दिया गया। अज्ञात उपद्रवियों ने बापू की मूर्ति पर अपनी वीरगाथा लिखते हुए यह साबित कर दिया कि एक सीमेंट और प्लास्टर की मूर्ति से आज भी कुछ बुजदिलों की रूह कांपती है। घटना की खबर फैलते ही इलाके में तनाव और आक्रोश का माहौल है। पुलिस-प्रशासन हमेशा की तरह "जांच जारी है" और "दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा" वाला पुराना टेप बजा रहा है। अहिंसा के आगे फिर हारा 'कायरता का हथौड़ा' महात्मा गांधी ने लाठी के बल पर ब्रिटिश हुकूमत उखाड़ फेंकी थी, लेकिन सन्ना के इन 'शूरवीरों' ने अंधेरे का फायदा उठाकर एक बेज़ुबान मूर्ति पर अपना पराक्रम दिखाया है। जरा सोचिए, जिस इंसान ने पूरी जिंदगी अहिंसा का पाठ पढ़ाया, उसकी मूर्ति तोड़ने के लिए भी उपद्रवियों को हथौड़े और अंधेरे का सहारा लेना पड़ा! यह घटना सिर्फ एक मूर्ति का टूटना नहीं है, बल्कि यह इस बात का प्रमाण है कि गांधी के विचार आज भी कुछ लोगों के दिमाग में इतनी जोर से चुभते हैं कि वे रात के अंधेरे में पत्थर तोड़ने को अपनी बड़ी कामयाबी मान बैठते हैं। व्यंग्य: मूर्ति तो तोड़ दी, जरा विचार तोड़कर दिखाओ! गांधी जी की मूर्ति तोड़ने वाले महानुभावों को शायद लगता होगा कि मूर्ति का सिर या हाथ खंडित कर देने से बापू का वजूद खत्म हो जाएगा। एक सुझाव उपद्रवियों के लिए: मूर्ति तोड़ना तो बहुत आसान और कायरतापूर्ण काम है। अगर वाकई दम है, तो गांधी के 'सत्य', 'अहिंसा' और 'सद्भाव' के विचारों को तोड़कर दिखाइए। बधाई हो समाज को: हम उस दौर में जी रहे हैं जहां जिंदा इंसान को रोजगार और सुरक्षा मिले न मिले, लेकिन लोहे और पत्थर के पुतलों से हमारी "महान राष्ट्रीय भावनाएं" आहत भी होती हैं और तुष्ट भी होती हैं। पुलिस विभाग को राहत: चलिए, कम से कम प्रशासन को दो-चार दिन मुस्तैद दिखने, शांति समिति की बैठकें करने और चाय-समोसे के साथ "कड़ी निंदा" करने का एक और मौका मिल गया। बड़ा सवाल: नफरत का यह जहर कब तक? सन्ना की यह घटना कोई अकेली घटना नहीं है। यह उस नफरती सोच का नतीजा है जो पिछले कुछ समय से समाज की जड़ों में घोली जा रही है। किसी की मूर्ति पर हमला करना असल में हमारी लोकतांत्रिक सोच और सामाजिक ताने-बाने पर हमला है। अगर पुलिस प्रशासन वाकई इस मामले में गंभीर है, तो सिर्फ केस दर्ज करने का औपचारिक खेल न खेले। उन कायरों को ढूंढकर बेनकाब करे, जिन्होंने रात के अंधेरे में अपनी घटिया मानसिकता का प्रदर्शन किया है। बापू की मूर्ति तो कल फिर नई बन जाएगी, लेकिन समाज के दिमाग में जो नफरत का दरार आया है, उसे मरम्मत करने में सदियां लग जाएंगी।
बगीचा/जशपुर: बगीचा के सन्ना क्षेत्र में बीती रात राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा को निशाना बनाकर तोड़ दिया गया। अज्ञात उपद्रवियों ने बापू की मूर्ति पर अपनी वीरगाथा लिखते हुए यह साबित कर दिया कि एक सीमेंट और प्लास्टर की मूर्ति से आज भी कुछ बुजदिलों की रूह कांपती है। घटना की खबर फैलते ही इलाके में तनाव और आक्रोश का माहौल है। पुलिस-प्रशासन हमेशा की तरह "जांच जारी है" और "दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा" वाला पुराना टेप बजा रहा है। अहिंसा के आगे फिर हारा 'कायरता का हथौड़ा' महात्मा गांधी ने लाठी के बल पर ब्रिटिश हुकूमत उखाड़ फेंकी थी, लेकिन सन्ना के इन 'शूरवीरों' ने अंधेरे का फायदा उठाकर एक बेज़ुबान मूर्ति पर अपना पराक्रम दिखाया है। जरा सोचिए, जिस इंसान ने पूरी जिंदगी अहिंसा का पाठ पढ़ाया, उसकी मूर्ति तोड़ने के लिए भी उपद्रवियों को हथौड़े और अंधेरे का सहारा लेना पड़ा! यह घटना सिर्फ एक मूर्ति का टूटना नहीं है, बल्कि यह इस बात का प्रमाण है कि गांधी के विचार आज भी कुछ लोगों के दिमाग में इतनी जोर से चुभते हैं कि वे रात के अंधेरे में पत्थर तोड़ने को अपनी बड़ी कामयाबी मान बैठते हैं। व्यंग्य: मूर्ति तो तोड़ दी, जरा विचार तोड़कर दिखाओ! गांधी जी की मूर्ति तोड़ने वाले महानुभावों को शायद लगता होगा कि मूर्ति का सिर या हाथ खंडित कर देने से बापू का वजूद खत्म हो जाएगा। एक सुझाव उपद्रवियों के लिए: मूर्ति तोड़ना तो बहुत आसान और कायरतापूर्ण काम है। अगर वाकई दम है, तो गांधी के 'सत्य', 'अहिंसा' और 'सद्भाव' के विचारों को तोड़कर दिखाइए। बधाई हो समाज को: हम उस दौर में जी रहे हैं जहां जिंदा इंसान को रोजगार और सुरक्षा मिले न मिले, लेकिन लोहे और पत्थर के पुतलों से हमारी "महान राष्ट्रीय भावनाएं" आहत भी होती हैं और तुष्ट भी होती हैं। पुलिस विभाग को राहत: चलिए, कम से कम प्रशासन को दो-चार दिन मुस्तैद दिखने, शांति समिति की बैठकें करने और चाय-समोसे के साथ "कड़ी निंदा" करने का एक और मौका मिल गया। बड़ा सवाल: नफरत का यह जहर कब तक? सन्ना की यह घटना कोई अकेली घटना नहीं है। यह उस नफरती सोच का नतीजा है जो पिछले कुछ समय से समाज की जड़ों में घोली जा रही है। किसी की मूर्ति पर हमला करना असल में हमारी लोकतांत्रिक सोच और सामाजिक ताने-बाने पर हमला है। अगर पुलिस प्रशासन वाकई इस मामले में गंभीर है, तो सिर्फ केस दर्ज करने का औपचारिक खेल न खेले। उन कायरों को ढूंढकर बेनकाब करे, जिन्होंने रात के अंधेरे में अपनी घटिया मानसिकता का प्रदर्शन किया है। बापू की मूर्ति तो कल फिर नई बन जाएगी, लेकिन समाज के दिमाग में जो नफरत का दरार आया है, उसे मरम्मत करने में सदियां लग जाएंगी।
- देवगढ़ में चार माह से राशन नहीं मिलने का आरोप, ग्रामीणों का हंगामा फिंगर लगवाने के बाद भी चावल नहीं देने का आरोप; खाद्य निरीक्षक ने पूर्व संचालक पर 25 लाख रुपये के गबन की बात कही, वसूली नहीं होने पर FIR की चेतावनी सीतापुर। देवगढ़ पंचायत में सार्वजनिक वितरण प्रणाली की राशन दुकान को लेकर शनिवार को उस समय हंगामे की स्थिति निर्मित हो गई, जब बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने तीन से चार माह से राशन का चावल नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए आक्रोश जताया। मौके पर बड़ी संख्या में महिलाएं भी मौजूद थीं। ग्रामीणों का कहना है कि उनके परिवार सरकारी राशन के चावल पर निर्भर हैं। कई महीनों से चावल नहीं मिलने के कारण उनके सामने भोजन का संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीणों ने कहा कि “हम इसी चावल के भरोसे जीते हैं, चावल नहीं मिलेगा तो हमारे बच्चे क्या खाएंगे।” ग्रामीणों का आरोप है कि चना और शक्कर का वितरण भी उन्हें नहीं मिल रहा है। पहले फिंगर लगवाने, फिर चावल नहीं देने का आरोप हितग्राहियों ने राशन दुकान के सेल्समैन पर आरोप लगाया कि राशन देने के नाम पर पहले उनका फिंगरप्रिंट लगवा लिया जाता है। उन्हें बताया जाता है कि फिंगर नहीं लगाएंगे तो राशन नहीं मिलेगा। ग्रामीणों का आरोप है कि फिंगर लगवाने के बाद भी उन्हें चावल उपलब्ध नहीं कराया जाता। ग्रामीणों के अनुसार, जब उन्होंने खाद्य विभाग के अधिकारी से शिकायत की तो यह कहा गया कि फिंगर लग चुका है, इसका मतलब राशन मिल चुका है। इसी बात को लेकर ग्रामीणों में काफी नाराजगी देखी गई। ग्रामीणों ने की पहले लंबित राशन देने की मांग आक्रोशित ग्रामीणों की मांग थी कि जिन हितग्राहियों का फिंगर पहले ही लग चुका है, उन्हें सबसे पहले संबंधित अवधि का पूरा राशन उपलब्ध कराया जाए। इसके बाद ही नए सिरे से फिंगर लगवाकर आगामी राशन का वितरण किया जाए। स्थिति बिगड़ने पर कुछ ग्रामीणों ने यह तक कहा कि जिन लोगों का फिंगर लग चुका है, उन्हें उनका 35-35 किलो चावल तत्काल दिया जाए। खाद्य निरीक्षक को दोबारा बुलाना पड़ा ग्रामीणों के अनुसार खाद्य निरीक्षक मौके पर पहुंचे थे। लेकिन आक्रोशित भीड़ और बिगड़ती स्थिति को देखते हुए वे वहां से चले गए। बाद में मामला अधिक गरमाने पर उन्हें पुनः फोन कर बुलाया गया। खाद्य निरीक्षक बतौली से वापस देवगढ़ पहुंचे और ग्रामीणों से चर्चा की। पूर्व संचालक पर 25 लाख रुपये के गबन की बात मौके पर खाद्य निरीक्षक द्वारा ग्रामीणों को कथित रूप से बताया गया कि पूर्व राशन दुकान संचालक के कार्यकाल में लगभग 25 लाख रुपये के गबन का मामला सामने आया है। निरीक्षक के अनुसार उक्त राशि की व्यक्तिगत रूप से संबंधित पूर्व संचालक से भरपाई कराई जानी है। खाद्य निरीक्षक ने यह भी बताया कि मामले की जानकारी अनुविभागीय दंडाधिकारी (SDM) को दे दी गई है। यदि पूर्व संचालक द्वारा कथित गबन की राशि की भरपाई नहीं की जाती है तो मामले में FIR दर्ज कराने की कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, 25 लाख रुपये के कथित गबन, जिम्मेदारी तय होने तथा राशन वितरण में अनियमितता के आरोपों की पुष्टि संबंधित विभाग के दस्तावेजों और जांच के बाद ही हो सकेगी। ग्रामीणों के आरोपों की जांच की मांग ग्रामीणों ने राशन वितरण की पूरी व्यवस्था की जांच की मांग की है। उनका आरोप है कि कई हितग्राहियों के फिंगर लगने के बावजूद उन्हें राशन नहीं मिला। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि राशन की कालाबाजारी में जिम्मेदार लोगों की मिलीभगत हो सकती है। अब जांच का मुख्य बिंदु यह होगा कि ई-पॉस मशीन में जिन हितग्राहियों के फिंगर लगे हैं, उनके नाम पर कितनी मात्रा में राशन दर्ज हुआ और वास्तविक रूप से उन्हें कितना राशन वितरित किया गया। साथ ही स्टॉक रजिस्टर, वितरण रजिस्टर और खाद्यान्न उठाव के रिकॉर्ड की जांच से वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है। देवगढ़ के ग्रामीणों को अब लंबित राशन कब मिलेगा और कथित 25 लाख रुपये के गबन मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।4
- [18/09, 17:05] null: हवन, जप और कृतज्ञता से जीवन को दें सही दिशा 🙏🏻 [18/09, 17:05] null: हवन, जप और कृतज्ञता से जीवन को दें सही दिशा 🙏🏻1
- *बसिया में झामुमो का एक दिवसीय धरना: MMDR संशोधन बिल 2026 वापस लेने की मांग, आंदोलन की दी चेतावनी बसिया (गुमला): प्रखंड मुख्यालय में शनिवार को झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) द्वारा प्रखंड अध्यक्ष सुकरात उरांव की अध्यक्षता में एक दिवसीय धरना प्रदर्शन का आयोजन किया गया। इस दौरान झामुमो कार्यकर्ताओं और नेताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और केंद्र सरकार से हाल ही में लाए गए 'एमएमडीआर (MMDR) संशोधन बिल 2026' को तत्काल वापस लेने की पुरजोर मांग की। धरना को संबोधित करते हुए प्रखंड अध्यक्ष सुकरात उरांव ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा झारखंड में लागू किया गया एमएमडीआर संशोधन बिल राज्य के हित में नहीं है। खनिज संसाधनों से मिलने वाला राजस्व झारखंड के विकास का मुख्य आधार है। यदि केंद्र सरकार इस संशोधन बिल को लागू करती है, तो इससे राज्य के राजस्व पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा और झारखंड का विकास कार्य पूरी तरह से ठप्प हो जाएगा। इस दौरान प्रखंड सचिव जयंत दास में ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि केंद्र सरकार उनकी मांगों को जल्द स्वीकार कर इस बिल को वापस नहीं लेती है, तो पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के निर्देशानुसार आगे और भी जोरदार व चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा। इस धरना प्रदर्शन में झामुमो के केंद्रीय सदस्य अलीम खान, प्रखंड सचिव जयंत दास, सोनू पाण्डेय, एमलेन कुल्लू सहित बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता व स्थानीय लोग उपस्थित थे।2
- सिसई : घाघरा - कोटाम के लिए सीधी बस सेवा शुरू, यात्रियों को मिलेगी बड़ी राहत रांची से कोटाम वाया सिसई बरगांव, अरंगी, पुटो, खरका और घाघरा चलेगी न्यू सिसई रोडवेज बस; रांची से कोटाम आना -जाना हुआ आसान सिसई (गुमला)। क्षेत्रवासियों के लिए आवागमन को लेकर राहत भरी खबर है। ग्रामीण यात्रियों की लंबे समय से चली आ रही मांग को देखते हुए रांची से कोटाम वाया सिसई, बरगांव, अरंगी, पुटो, खरका और घाघरा के लिए न्यू सिसई रोडवेज बस सेवा का शनिवार को सिसई बस स्टैंड से शुभारंभ किया गया। बस सेवा शुरू होने से सिसई समेत आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के यात्रियों को घाघरा और कोटाम आने-जाने में समय और किराये की बचत होगी। बस सेवा के शुभारंभ से पहले सिसई अंजुमन इस्लामिया की ओर से बस के सफल एवं सुरक्षित संचालन के लिए विशेष दुआ की गई। इसके बाद विधायक प्रतिनिधि सह कुदरा पंचायत मुखिया प्रकाश उरांव, सिसई सदर सलमान अली, आजाद अंसारी, जाकिर अली, बैबुल अंसारी, राजा अंसारी, समाजसेवी मुकेश श्रीवास्तव डेविड, मनोज वर्मा और निलेश उरांव ने संयुक्त रूप से विधिवत् फीता काटकर बस को रवाना किया। इस अवसर पर बस ऑनर राशिद करीम सहित स्थानीय लोग और यात्री मौजूद रहे। बस सेवा शुरू होने से लोगों में उत्साह देखने को मिला। निर्धारित समय से होगा परिचालन बस रांची से सुबह 7:40 बजे कोटाम के लिए रवाना होगी। निर्धारित समय के अनुसार बस सिसई सुबह 10 बजे, घाघरा 11 बजे और कोटाम 11:30 बजे पहुंचेगी। वापसी में बस कोटाम से दोपहर 1:30 बजे रवाना होकर घाघरा 2 बजे और सिसई 3:20 बजे पहुंचेगी। इससे इन क्षेत्रों के ग्रामीणों, विद्यार्थियों, व्यापारियों एवं नौकरीपेशा लोगों समेत अन्य यात्रियों को रांची आने - जाने में सुविधा मिलेगी। बस ऑनर मो. राशिद करीम ने बताया कि सिसई से बरगांव और घाघरा होते हुए कोटाम तक यात्री बसों की कमी के कारण ग्रामीणों को काफी परेशानी होती थी। घाघरा जाने वाले यात्रियों को कई बार गुमला होकर जाना पड़ता था, जिससे अतिरिक्त समय के साथ अधिक किराया भी खर्च करना पड़ता था। ग्रामीण लंबे समय से इस मार्ग पर सीधी बस सेवा शुरू करने की मांग कर रहे थे। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की समस्या को देखते हुए इस रूट पर बस सेवा शुरू की गई है। इससे यात्रियों को सीधे और सुविधाजनक आवागमन का विकल्प मिलेगा तथा समय और यात्रा खर्च में भी कमी आएगी। मौके पर युवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष आजाद अंसारी, प्रखंड उप प्रमुख सह कांग्रेस प्रखंड अध्यक्ष निलेश उरांव, पूर्व कांग्रेस प्रखंड अध्यक्ष बैबुल अंसारी, माही बस के ऑनर मुकेश श्रीवास्तव डेविड, मनोज वर्मा, प्रखंड डीलर संघ अध्यक्ष मकीम अंसारी, पंसस जाकिर अली समेत बड़ी संख्या में गणमान्य लोग मौजूद थे।4
- केंद्र सरकार के विरुद्ध झामुमो ने प्रखंड स्तर पर दिया धरना राष्ट्रपति के नाम बीडीओ को दिया ज्ञापन धरना प्रदर्शन कार्यक्रम लोहरदगा जिले के सेन्हा प्रखंड मुख्यालय में प्रखंड स्तर पर झामुमो के बैनर तले खान एवं खनिज संशोधन विधेयक 2026 के विरोध में कार्यकर्ताओं ने शनिवार को धरना-प्रदर्शन कर केंद्र सरकार पर ताना शाही का लगया आरोप कहा राज्य के खनिज संपदा को केंद्र सरकार अपने कब्जे में लेकर जनहित व विकास कार्य को अवरुद्ध करने का कार्य किया है। राज्य में राजस्व की कमी होने की बात बताते हुए राज्य के जनता की विकास पर प्रहार किया है। सहित विभिन्न बिंदुओं पर विचार प्रकट करते हुए खान एवं खनिज संशोधक विधेयक स्थगित नही होने पर बड़े पैमाने पर आंदोलन का घोषणा किया।1
- केंद्र सरकार द्वारा पारित खान व खनिज संशोधन के विरुद्ध में झामुमो का एक दिवसीय धरना प्रदर्शन, राष्ट्रपति के नाम अंचल अधिकारी को सौंपा 6 सूत्री मांग पत्र। सिसई प्रखंड सह अंचल कार्यालय परिसर में शनिवार को झामुमो प्रखंड कमिटी सिसई के द्वारा केंद्र सरकार द्वारा पारित खान व खनिज संशोधन के विरुद्ध में एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया गया। धरना प्रदर्शन में प्रखंड के सभी पंचायत से हाथ में झामुमो का झंडा लेकर भारी संख्या में झामुमो के कार्यकर्ता पहुंचे थे। जो केंद्र सरकार के ख़िलाफ़ जोरदार नारेबाजी कर रहे थे। धरना प्रदर्शन में विधायक प्रतिनिधि प्रकाश उरांव, शशि साहु, विजय लक्ष्मी कुमारी, प्रखंड अध्यक्ष दुर्गेश्वर तिर्की, सलमान अली, मकीन अंसारी, जाकिर अली, उमर फारूक अंसारी, राजा अंसारी, शशि साहु, दिलीप साहु, विकास महली, सहाबीर उरांव, सहित भारी संख्या में झामुमो के कार्यकर्ता उपस्थित थे।1
- सिसई : खान - खनिज संशोधन कानून के खिलाफ झामुमो का धरना, राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन राज्यों के संवैधानिक अधिकार, झारखंड की वित्तीय स्वायतता और आदिवासी - मूलवासी समाज के अधिकारों की उठाई आवाज़ सिसई (गुमला)। केंद्र सरकार द्वारा पारित खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2026 के विरोध में झामुमो सिसई प्रखंड कमिटी ने शनिवार को प्रखंड सह अंचल कार्यालय परिसर में एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन किया। प्रखंड के विभिन्न पंचायतों से बड़ी संख्या में महिला-पुरुष कार्यकर्ता पार्टी का झंडा लेकर धरना में शामिल हुए और केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। धरने के दौरान झामुमो नेताओं ने राज्यों के संवैधानिक एवं संघीय अधिकारों, झारखंड की वित्तीय स्वायत्तता तथा आदिवासी-मूलवासी समाज के जल, जंगल, जमीन और खनिज अधिकारों की रक्षा की मांग उठाई। प्रदर्शन के बाद प्रखंड विकास पदाधिकारी एवं अंचल अधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम छह सूत्री ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में संशोधन अधिनियम की धारा 9डी के राज्यों के संवैधानिक अधिकारों पर प्रभाव का गंभीर परीक्षण कराने, खनिज उत्पादक राज्यों से संस्थागत परामर्श सुनिश्चित करने तथा राज्यों के खनिज संसाधनों से जुड़े वित्तीय अधिकारों और विकास आवश्यकताओं के बीच संवैधानिक संतुलन कायम करने की मांग की गई। साथ ही झारखंड के लंबित खनन संबंधी आर्थिक दावों के शीघ्र निपटारे, आदिवासी-मूलवासी समाज, विस्थापित परिवारों एवं खनन प्रभावित क्षेत्रों के अधिकारों को खनिज नीति में प्राथमिकता देने की मांग रखी गई। ज्ञापन में 25 जुलाई 2024 को सर्वोच्च न्यायालय की नौ सदस्यीय संविधान पीठ द्वारा मिनिरल एरिया डेवलेपमेंट ऑथोरिटी बनाम स्टील ऑथोरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड मामले में राज्यों के खनिज अधिकारों एवं खनिजयुक्त भूमि पर कराधान संबंधी संवैधानिक शक्तियों पर दिए गए निर्णय को अंगीकार करने की मांग भी की गई। मौके पर विधायक प्रतिनिधि सह कुदरा पंचायत मुखिया प्रकाश उरांव, जिप सदस्य सिसई उत्तरी विजयलक्ष्मी कुमारी, प्रखंड अध्यक्ष दुर्गेश तिर्की, शशि साहू, सलमान अली, मकीम अंसारी, उमर फारूक अंसारी, पंसस जाकिर अली, राजा अंसारी, राशिद करीम, दिलीप साहू, विकास महली, सहाबीर उरांव सहित बड़ी संख्या में झामुमो कार्यकर्ता उपस्थित थे।4
- MMDR संशोधन के विरोध में गारू में झामुमो ने राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन । MMDR संशोधन के विरोध में गारू में झामुमो ने राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन जोहार झारखण्ड/ गारू संवाददाता जल-जंगल-जमीन व खनिज अधिकारों की रक्षा की उठाई मांग, संशोधन के प्रावधानों पर जताई आपत्ति जोहार झारखण्ड/गारू संवाददाता गारू। खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2026 को लेकर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) गारू प्रखंड कमेटी की ओर से विरोध दर्ज कराया गया। शनिवार को झामुमो नेताओं एवं कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रपति के नाम प्रखंड विकास पदाधिकारी/अंचलाधिकारी के माध्यम से ज्ञापन सौंपते हुए झारखंड के संवैधानिक अधिकारों तथा आदिवासी-मूलवासी समाज के जल, जंगल, जमीन एवं खनिज संसाधनों की रक्षा की मांग उठाई। ज्ञापन में कहा गया है कि झारखंड की पहचान उसकी मिट्टी, जंगल, पहाड़, नदियों और खनिज संपदा से जुड़ी हुई है। आदिवासी एवं मूलवासी समाज के लिए प्राकृतिक संसाधन केवल आर्थिक संसाधन नहीं, बल्कि जीवन, संस्कृति, पहचान और अस्तित्व का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ऐसे में खनिज संसाधनों से संबंधित किसी भी कानून या नीति में राज्य के हितों और स्थानीय लोगों के अधिकारों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। राज्य के संवैधानिक अधिकारों पर जताई चिंता झामुमो की ओर से राष्ट्रपति को भेजे गए पत्र में MMDR संशोधन से जुड़े प्रावधानों को लेकर राज्य के अधिकारों पर चिंता व्यक्त की गई है। पत्र में कहा गया है कि खनिज अधिकारों, खनिज-युक्त भूमि तथा उनसे संबंधित कराधान के विषय राज्य के संवैधानिक एवं संघीय अधिकारों से जुड़े हुए हैं। इसलिए इस मामले में संवैधानिक प्रावधानों और राज्यों के अधिकारों को ध्यान में रखते हुए विचार किया जाना आवश्यक है। ज्ञापन में 25 जुलाई 2024 को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा Mineral Area Development Authority बनाम Steel Authority of India Ltd. मामले में दिए गए निर्णय का भी उल्लेख किया गया है। झामुमो ने राष्ट्रपति से इस पूरे विषय के संवैधानिक, संघीय, वित्तीय, सामाजिक एवं पर्यावरणीय पहलुओं पर गंभीरता से विचार करने का आग्रह किया है। आदिवासी-मूलवासी समाज के अधिकारों की रक्षा की मांग पत्र में कहा गया है कि झारखंड के आदिवासी-मूलवासी समाज, विस्थापित परिवारों एवं खनन प्रभावित क्षेत्रों के अधिकारों को खनिज नीति और विकास प्रक्रिया में उचित स्थान मिलना चाहिए। प्राकृतिक संसाधनों से स्थानीय जनता, युवाओं और राज्य के विकास को अधिक लाभ मिलने की भी मांग की गई है। झामुमो ने कहा कि जल-जंगल-जमीन और खनिज संपदा झारखंड के लोगों के जीवन और पहचान से जुड़ी है। इसलिए इन संसाधनों से जुड़े किसी भी निर्णय में स्थानीय समुदायों के हितों और राज्य के संवैधानिक अधिकारों का संरक्षण जरूरी है। राष्ट्रपति से आवश्यक पहल की अपील ज्ञापन के माध्यम से राष्ट्रपति से आग्रह किया गया कि MMDR संशोधन से जुड़े विषयों पर संविधान के तहत उपलब्ध विकल्पों तथा राज्य के अधिकारों को ध्यान में रखते हुए आवश्यक पहल की जाए। झामुमो गारू प्रखंड की ओर से कहा गया कि झारखंड के प्राकृतिक संसाधनों और आदिवासी-मूलवासी समाज के अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लोकतांत्रिक तरीके से उठाया जाता रहेगा। ज्ञापन पर झामुमो प्रखंड अध्यक्ष मो. तौकीर मियां सहित पार्टी के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं के हस्ताक्षर हैं। पत्र में “हेमंत सोरेन जिंदाबाद” एवं “शिबू सोरेन जिंदाबाद” के साथ झारखंड मुक्ति मोर्चा की विचारधारा और राज्य के अधिकारों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से रखा गया है।2
- लोहरदगा नगर परिषद में लगी लंबी कतार sir का फॉर्म जमा करने के लिए1