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जमशेदपुर में खासमहल से परसुडीह, गदरा और गोविंदपुर तक की सड़क अब जनता के लिए मौत का रास्ता बन गई है। सड़क की बदहाली के कारण लोग बेहद परेशान हैं और आए दिन गंभीर सड़क दुर्घटनाएँ हो रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सड़क पिछले 5 साल से बेहद खस्ताहाल स्थिति में है। गड्ढों से भरी इस सड़क पर रोजाना वाहन चलाना जान जोखिम में डालने जैसा है। निवासियों ने कई बार स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से इसकी शिकायत की, लेकिन उनकी समस्याओं पर कोई सुनवाई नहीं हुई। लोगों का आरोप है कि जनप्रतिनिधि केवल चुनाव के समय झूठे आश्वासन देते हैं, जबकि धरातल पर कोई काम नहीं हो रहा है। इस उपेक्षा के कारण आम जनता लगातार सड़क दुर्घटनाओं का शिकार हो रही है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से तुरंत इस सड़क की मरम्मत कराने की जोरदार मांग की है।
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जमशेदपुर में खासमहल से परसुडीह, गदरा और गोविंदपुर तक की सड़क अब जनता के लिए मौत का रास्ता बन गई है। सड़क की बदहाली के कारण लोग बेहद परेशान हैं और आए दिन गंभीर सड़क दुर्घटनाएँ हो रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सड़क पिछले 5 साल से बेहद खस्ताहाल स्थिति में है। गड्ढों से भरी इस सड़क पर रोजाना वाहन चलाना जान जोखिम में डालने जैसा है। निवासियों ने कई बार स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से इसकी शिकायत की, लेकिन उनकी समस्याओं पर कोई सुनवाई नहीं हुई। लोगों का आरोप है कि जनप्रतिनिधि केवल चुनाव के समय झूठे आश्वासन देते हैं, जबकि धरातल पर कोई काम नहीं हो रहा है। इस उपेक्षा के कारण आम जनता लगातार सड़क दुर्घटनाओं का शिकार हो रही है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से तुरंत इस सड़क की मरम्मत कराने की जोरदार मांग की है।
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- अमर शहीद डीएसपी प्रमोद कुमार को उनकी शहादत की 18वीं वर्षगांठ पर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। यह श्रद्धांजलि कार्यक्रम उनकी स्मृति में आयोजित किया गया।1
- मोहर्रम के पावन अवसर पर जामताड़ा प्रखंड के फागुडीह गांव में पारंपरिक अखाड़ा खेल और एक भव्य मेले का आयोजन किया गया, जिसने हजारों लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस कार्यक्रम में आसपास के कई गांवों से आए अखाड़ा दलों ने लाठी, तलवार और अपने पारंपरिक युद्ध कौशल का शानदार प्रदर्शन किया। खिलाड़ियों द्वारा दिखाए गए हैरतअंगेज करतबों को देखकर पूरा मैदान तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा, जिससे उपस्थित जनसमूह रोमांचित हो गया।1
- खराब सड़कों की समस्या के खिलाफ एक शख्स ने अनोखे ढंग से अपना विरोध दर्ज कराया है। इस विरोध प्रदर्शन में शख्स ने 'जलाभिषेक' का तरीका अपनाकर ध्यान आकर्षित किया।1
- धनबाद जिले के निरसा विधानसभा क्षेत्र से विधायक अरूप चटर्जी पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। ठाकुर मांझी नामक व्यक्ति ने विधायक चटर्जी पर आरोप लगाया है कि जब क्षेत्र से कोयला, बालू और लोहा जैसी प्राकृतिक संपदा समाप्त हो जाएगी, तब वह निरसा की जनता की माँ, बहन और बेटियों की आबरू लुटवा देंगे। ठाकुर मांझी ने यह भी दावा किया है कि वह पूर्व में विधायक अरूप चटर्जी के साथ 'लाल पार्टी' में रहकर नेतागिरी करते थे।1
- मैथन स्थित हाईटेक रोड फैक्ट्री में बिना किसी पूर्व सूचना के लगभग 200 मजदूरों को काम से हटाने की कोशिश को समाजसेवी रंजीत महतो के हस्तक्षेप के बाद टाल दिया गया है। मजदूरों के बुलावे पर फैक्ट्री पहुंचे रंजीत महतो ने प्रबंधन से बातचीत की, जिसके बाद एक महीने की मोहलत पर सहमति बनी। रंजीत महतो ने फैक्ट्री प्रबंधन को स्पष्ट रूप से बताया कि बिना पूर्व सूचना दिए मजदूरों को हटाना या फैक्ट्री बंद करना श्रम कानूनों का उल्लंघन है और नियमों के उल्लंघन पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी। सकारात्मक वार्ता के बाद, फैक्ट्री प्रबंधन एक महीने तक वर्तमान व्यवस्था के अनुसार संचालन जारी रखने पर सहमत हो गया। साथ ही यह भी तय हुआ कि एक महीने बाद पुनः बैठक कर आगे की स्थिति पर निर्णय लिया जाएगा। रंजीत महतो ने सभी मजदूरों को भरोसा दिलाया कि वे उनके अधिकारों और रोजगार की रक्षा के लिए हमेशा उनके साथ खड़े रहेंगे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जब मजदूरों के पेट और रोज़ी-रोटी का सवाल हो, तब सभी दलों और संगठनों को राजनीति से ऊपर उठकर एकजुट होकर उनके हित और सम्मान के लिए आवाज़ उठानी चाहिए।7
- गोड्डा में सफाईकर्मियों को एक आउटसोर्सिंग कंपनी के कारण लगातार परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसी परेशानी और नाराजगी के चलते सफाईकर्मियों ने 'मसाला जुलूस' निकाला। आउटसोर्सिंग कंपनी की कार्यप्रणाली से सफाईकर्मी काफी नाराज हैं। इस स्थिति को देखते हुए आम जनता भी यह सवाल उठा रही है कि इस समस्या का समाधान कब और कैसे मिलेगा।1
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- मूल पाठ के अनुसार, झारखंड को एक 'लाशों की फैक्ट्री' बताया गया है, जो एक गंभीर आरोप है। यह टिप्पणी राज्य के मजदूरों की परदेस में हो रही मौतों के संदर्भ में की गई है। इसमें यह मार्मिक सवाल उठाया गया है कि आखिर कब तक झारखंड के मजदूर बाहरी भूमि पर दम तोड़ते रहेंगे।1