मैथन स्थित हाईटेक रोड फैक्ट्री में बिना किसी पूर्व सूचना के लगभग 200 मजदूरों को काम से हटाने की कोशिश को समाजसेवी रंजीत महतो के हस्तक्षेप के बाद टाल दिया गया है। मजदूरों के बुलावे पर फैक्ट्री पहुंचे रंजीत महतो ने प्रबंधन से बातचीत की, जिसके बाद एक महीने की मोहलत पर सहमति बनी। रंजीत महतो ने फैक्ट्री प्रबंधन को स्पष्ट रूप से बताया कि बिना पूर्व सूचना दिए मजदूरों को हटाना या फैक्ट्री बंद करना श्रम कानूनों का उल्लंघन है और नियमों के उल्लंघन पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी। सकारात्मक वार्ता के बाद, फैक्ट्री प्रबंधन एक महीने तक वर्तमान व्यवस्था के अनुसार संचालन जारी रखने पर सहमत हो गया। साथ ही यह भी तय हुआ कि एक महीने बाद पुनः बैठक कर आगे की स्थिति पर निर्णय लिया जाएगा। रंजीत महतो ने सभी मजदूरों को भरोसा दिलाया कि वे उनके अधिकारों और रोजगार की रक्षा के लिए हमेशा उनके साथ खड़े रहेंगे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जब मजदूरों के पेट और रोज़ी-रोटी का सवाल हो, तब सभी दलों और संगठनों को राजनीति से ऊपर उठकर एकजुट होकर उनके हित और सम्मान के लिए आवाज़ उठानी चाहिए।
मैथन स्थित हाईटेक रोड फैक्ट्री में बिना किसी पूर्व सूचना के लगभग 200 मजदूरों को काम से हटाने की कोशिश को समाजसेवी रंजीत महतो के हस्तक्षेप के बाद
टाल दिया गया है। मजदूरों के बुलावे पर फैक्ट्री पहुंचे रंजीत महतो ने प्रबंधन से बातचीत की, जिसके बाद एक महीने की मोहलत पर सहमति बनी। रंजीत महतो ने
फैक्ट्री प्रबंधन को स्पष्ट रूप से बताया कि बिना पूर्व सूचना दिए मजदूरों को हटाना या फैक्ट्री बंद करना श्रम कानूनों का उल्लंघन है और नियमों के उल्लंघन
पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी। सकारात्मक वार्ता के बाद, फैक्ट्री प्रबंधन एक महीने तक वर्तमान व्यवस्था के अनुसार संचालन जारी रखने पर सहमत हो गया। साथ
ही यह भी तय हुआ कि एक महीने बाद पुनः बैठक कर आगे की स्थिति पर निर्णय लिया जाएगा। रंजीत महतो ने सभी मजदूरों को भरोसा दिलाया कि वे
उनके अधिकारों और रोजगार की रक्षा के लिए हमेशा उनके साथ खड़े रहेंगे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जब मजदूरों के पेट और रोज़ी-रोटी का सवाल
हो, तब सभी दलों और संगठनों को राजनीति से ऊपर उठकर एकजुट होकर उनके हित और सम्मान के लिए आवाज़ उठानी चाहिए।
- मैथन स्थित हाईटेक रोड फैक्ट्री में बिना किसी पूर्व सूचना के लगभग 200 मजदूरों को काम से हटाने की कोशिश को समाजसेवी रंजीत महतो के हस्तक्षेप के बाद टाल दिया गया है। मजदूरों के बुलावे पर फैक्ट्री पहुंचे रंजीत महतो ने प्रबंधन से बातचीत की, जिसके बाद एक महीने की मोहलत पर सहमति बनी। रंजीत महतो ने फैक्ट्री प्रबंधन को स्पष्ट रूप से बताया कि बिना पूर्व सूचना दिए मजदूरों को हटाना या फैक्ट्री बंद करना श्रम कानूनों का उल्लंघन है और नियमों के उल्लंघन पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी। सकारात्मक वार्ता के बाद, फैक्ट्री प्रबंधन एक महीने तक वर्तमान व्यवस्था के अनुसार संचालन जारी रखने पर सहमत हो गया। साथ ही यह भी तय हुआ कि एक महीने बाद पुनः बैठक कर आगे की स्थिति पर निर्णय लिया जाएगा। रंजीत महतो ने सभी मजदूरों को भरोसा दिलाया कि वे उनके अधिकारों और रोजगार की रक्षा के लिए हमेशा उनके साथ खड़े रहेंगे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जब मजदूरों के पेट और रोज़ी-रोटी का सवाल हो, तब सभी दलों और संगठनों को राजनीति से ऊपर उठकर एकजुट होकर उनके हित और सम्मान के लिए आवाज़ उठानी चाहिए।7
- गोबिंदपुर ऊपर बाजार में ट्रैफिक पुलिस ने एक विशेष अभियान चलाया। इस अभियान के दौरान, ट्रैफिक पुलिस ने गलत दिशा में वाहन चला रहे बाइक सवारों को रोका। उन्हें नियमों का उल्लंघन करने के लिए फटकार लगाई गई और भविष्य में सही दिशा में चलने की हिदायत भी दी गई।1
- मोहर्रम के पावन अवसर पर जामताड़ा प्रखंड के फागुडीह गांव में पारंपरिक अखाड़ा खेल और एक भव्य मेले का आयोजन किया गया, जिसने हजारों लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस कार्यक्रम में आसपास के कई गांवों से आए अखाड़ा दलों ने लाठी, तलवार और अपने पारंपरिक युद्ध कौशल का शानदार प्रदर्शन किया। खिलाड़ियों द्वारा दिखाए गए हैरतअंगेज करतबों को देखकर पूरा मैदान तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा, जिससे उपस्थित जनसमूह रोमांचित हो गया।1
- झारखंड के धनबाद से मिली जानकारी के अनुसार, सांसद ढुलू महतो द्वारा दिए गए एक बयान पर निरसा विधायक ने पलटवार किया है। इस खबर को साधना न्यूज के लिए नीरज कुमार ने रिपोर्ट किया है।1
- धनबाद टुडे और KCNTVINDIA के संपादक जहीरूद्दीन खान ने भ्रष्ट व्यवस्था की मजबूत जड़ पर प्रहार करने का आह्वान किया है।1
- अमर शहीद डीएसपी प्रमोद कुमार को उनकी शहादत की 18वीं वर्षगांठ पर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। यह श्रद्धांजलि कार्यक्रम उनकी स्मृति में आयोजित किया गया।1
- धनबाद में नगर निगम चुनाव के महज चार महीने बाद ही निर्वाचित वार्ड पार्षदों का असंतोष निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर खुलकर सामने आ गया है। बुधवार को बेकारबांध में आयोजित एक बैठक में कुल 36 वार्ड पार्षदों ने भाग लिया, जहाँ उन्होंने धनबाद नगर निगम की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए। इन पार्षदों ने आरोप लगाया कि उन्हें विकास कार्यों में पर्याप्त अधिकार नहीं दिए जा रहे हैं। साथ ही, बोर्ड की बैठकों में पारित प्रस्तावों को भी लागू नहीं किया जा रहा है, जिससे उनकी नाराजगी बढ़ गई है। अपनी इस बैठक में वार्ड पार्षदों ने धनबाद नगर निगम की कार्यप्रणाली के खिलाफ आगे की रणनीति पर भी विस्तार से चर्चा की और निगम के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।1
- हूल दिवस के अवसर पर जामताड़ा के आमलाबनी में आयोजित कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन ने शिरकत की। इस दौरान उन्होंने सिद्धू-कान्हू की आदमकद प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की और एक जनसभा को संबोधित करते हुए राज्य सरकार पर कई गंभीर सवाल उठाए। अपने संबोधन में चंपई सोरेन ने कहा कि हूल दिवस जैसे ऐतिहासिक मौके पर सिद्धू-कान्हू के पैतृक गांव भोगनाडीह में कार्यक्रम का आयोजन न होना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने आरोप लगाया कि भोगनाडीह में लोगों की स्वतंत्रता को सीमित किया जा रहा है और भारी संख्या में मजिस्ट्रेट व पुलिस बल की तैनाती कर पूरे क्षेत्र को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। पूर्व मुख्यमंत्री ने यह सवाल भी उठाया कि सिद्धू-कान्हू के वंशजों और स्थानीय लोगों ने ऐसा कौन-सा अपराध किया है कि उन्हें अपना कार्यक्रम आयोजित करने से रोका जा रहा है। उन्होंने बताया कि पिछले साल हुए लाठीचार्ज में कई लोग घायल हुए थे, और इस बार लोगों को कार्यक्रम स्थल तक जाने की भी अनुमति नहीं दी जा रही है। पूर्व मुख्यमंत्री ने आदिवासी समाज से जुड़े मुद्दों पर भी सरकार को घेरा, यह कहते हुए कि एसपीटी और सीएनटी एक्ट सहित आदिवासी जमीन से जुड़े मामलों की लगातार उपेक्षा की जा रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मौजूदा हालात ऐसे ही बने रहे तो राज्य में एक बार फिर आंदोलन की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। हूल दिवस के मौके पर चंपई सोरेन द्वारा दिए गए इन बयानों के बाद क्षेत्र का राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है, और उनके लगाए गए आरोपों को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच चर्चा तेज हो गई है।1