कोटा में चंबल नदी के किनारे, विशेष रूप से कोटा बैराज और जवाहर सागर के बीच, दुर्लभ और संकटग्रस्त वन्यजीव प्रजाति 'स्मूथ-कोटेड ओटर' या 'जल मानुष' का एक पूरा परिवार अठखेलियां करता नजर आया है। इस नजारे ने वन्यजीव प्रेमियों और पर्यावरणविदों को बेहद रोमांचित कर दिया है, खासकर जब चंबल नदी एक बार फिर दुर्लभ जीवों के लिए सुरक्षित घर बन रही है। हाल ही में इन ऊदबिलावों का चंबल किनारे मस्ती करते और मछलियों का शिकार करते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ है। 'रिवर डॉग्स' के नाम से भी मशहूर ये अर्ध-जलीय जीव दिखने में मासूम पर बेहद चालाक और फुर्तीले शिकारी होते हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, ऊदबिलाव हमेशा झुंड में रहते हैं और एक साथ होने पर इतने आक्रामक व शक्तिशाली हो जाते हैं कि मगरमच्छ और पानी के किनारे आने वाले पैंथर तक को चुनौती दे सकते हैं। कोटा बैराज के पास हाल ही में ऐसा ही एक दृश्य देखा गया, जहाँ पूरा कुनबा मिलकर मछलियों का शिकार कर रहा था और किनारे पर आए स्ट्रीट डॉग्स को खदेड़ रहा था। इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (IUCN) ने ऊदबिलाव की तेजी से घटती संख्या के कारण इसे अपनी 'रेड लिस्ट' में 'संकटग्रस्त' श्रेणी में शामिल किया था। एक समय इनकी कीमती खाल के लिए बड़े पैमाने पर शिकार होने के कारण ये भरतपुर के केवलादेव नेशनल पार्क जैसे कई प्राकृतिक आवासों से पूरी तरह विलुप्त हो गए थे। हालांकि, हाल के वर्षों में कोटा से लेकर रावतभाटा के बीच चंबल की साफ और गहरी जलधाराओं में इनकी संख्या में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी नदी में ऊदबिलावों की उपस्थिति उस जलस्रोत की अच्छी सेहत का सूचक है, क्योंकि ये जीव केवल साफ पानी और पर्याप्त भोजन (मछलियां और केकड़े) वाले स्थानों पर ही जीवित रह सकते हैं। चंबल नदी मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के कोर एरिया से होकर भी गुजरती है, जो इनके पनपने के लिए अत्यंत अनुकूल जगह है। 'कोटा स्टोरीलाइन' का संदेश है कि ये 'जल मानुष' कोटा के इको-टूरिज्म और जलीय जैव-विविधता की शान हैं, और नदी में प्लास्टिक कचरा, केमिकल या गंदगी न बहाकर चंबल के इस अनोखे वन्यजीवन को हमेशा सुरक्षित व फलता-फूलता रखना चाहिए।
कोटा में चंबल नदी के किनारे, विशेष रूप से कोटा बैराज और जवाहर सागर के बीच, दुर्लभ और संकटग्रस्त वन्यजीव प्रजाति 'स्मूथ-कोटेड ओटर' या 'जल मानुष' का एक पूरा परिवार अठखेलियां करता नजर आया है। इस नजारे ने वन्यजीव प्रेमियों और पर्यावरणविदों को बेहद रोमांचित कर दिया है, खासकर जब चंबल नदी एक बार फिर दुर्लभ जीवों के लिए सुरक्षित घर बन रही है। हाल ही में इन ऊदबिलावों का चंबल किनारे मस्ती करते और मछलियों का शिकार करते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ है। 'रिवर डॉग्स' के नाम से भी मशहूर ये अर्ध-जलीय जीव दिखने में मासूम पर बेहद चालाक और फुर्तीले शिकारी होते हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, ऊदबिलाव हमेशा झुंड में रहते हैं और एक साथ होने पर इतने आक्रामक व शक्तिशाली हो जाते हैं कि मगरमच्छ और पानी के किनारे आने वाले पैंथर तक को चुनौती दे सकते हैं। कोटा बैराज के पास हाल ही में ऐसा ही एक दृश्य देखा गया, जहाँ पूरा कुनबा मिलकर मछलियों का शिकार कर रहा था और किनारे पर आए स्ट्रीट डॉग्स को खदेड़ रहा था। इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (IUCN) ने ऊदबिलाव की तेजी से घटती संख्या के कारण इसे अपनी 'रेड लिस्ट' में 'संकटग्रस्त' श्रेणी में शामिल किया था। एक समय इनकी कीमती खाल के लिए बड़े पैमाने पर शिकार होने के कारण ये भरतपुर के केवलादेव नेशनल पार्क जैसे कई प्राकृतिक आवासों से पूरी तरह विलुप्त हो गए थे। हालांकि, हाल के वर्षों में कोटा से लेकर रावतभाटा के बीच चंबल की साफ और गहरी जलधाराओं में इनकी संख्या में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी नदी में ऊदबिलावों की उपस्थिति उस जलस्रोत की अच्छी सेहत का सूचक है, क्योंकि ये जीव केवल साफ पानी और पर्याप्त भोजन (मछलियां और केकड़े) वाले स्थानों पर ही जीवित रह सकते हैं। चंबल नदी मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के कोर एरिया से होकर भी गुजरती है, जो इनके पनपने के लिए अत्यंत अनुकूल जगह है। 'कोटा स्टोरीलाइन' का संदेश है कि ये 'जल मानुष' कोटा के इको-टूरिज्म और जलीय जैव-विविधता की शान हैं, और नदी में प्लास्टिक कचरा, केमिकल या गंदगी न बहाकर चंबल के इस अनोखे वन्यजीवन को हमेशा सुरक्षित व फलता-फूलता रखना चाहिए।
- केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने घोषणा की है कि दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे का लगभग 80 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। उन्होंने बताया कि लगभग 1 लाख 10 हजार करोड़ रुपये की लागत से बन रही यह महत्वाकांक्षी परियोजना पूरी होने के बाद दिल्ली से मुंबई के नरीमन पॉइंट और जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट (जेएनपीटी) तक की यात्रा मात्र 12 घंटे में पूरी की जा सकेगी। गडकरी ने भरोसा दिलाया कि अगले दो वर्षों में यह सपना साकार हो जाएगा। बुधवार को कोटा के दरा टनल स्थित गोपालपुरा माताजी परिसर में आयोजित एक सभा को संबोधित करते हुए गडकरी ने कहा कि सरकार जो वादा करती है, उसे पूरा करके दिखाती है। इससे पहले, केंद्रीय मंत्री ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के साथ दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे का निरीक्षण भी किया। उनका काफिला बूंदी के लबान इंटरचेंज से रवाना होकर करीब 90 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए कोटा की दरा टनल तक पहुँचा। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों से परियोजना की प्रगति और सुरक्षा व्यवस्थाओं की जानकारी ली गई। गडकरी ने यह भी बताया कि एक्सप्रेसवे को और अधिक सुरक्षित एवं सुविधाजनक बनाने के लिए जहाँ आवश्यकता होगी, वहाँ सुधार कार्य भी किए जाएँगे। उन्होंने अलवर के पिनान रेस्ट एरिया में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक कर एक्सप्रेसवे पर नियमित गश्त बढ़ाने के निर्देश दिए। मंत्री ने स्पष्ट कहा कि हाईवे पर किसी भी स्थान पर ट्रकों की अवैध पार्किंग नहीं होनी चाहिए तथा यातायात व्यवस्था पूरी तरह सुरक्षित और सुचारु रहनी चाहिए। केंद्रीय मंत्री के दौरे से पहले, एनएचएआई के अधिकारी और निर्माण एजेंसी के कर्मचारी एक्सप्रेसवे की साफ-सफाई, सुरक्षा व्यवस्था और अन्य तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटे रहे, ताकि निरीक्षण के दौरान किसी प्रकार की कमी नजर न आए।4
- सड़क मंत्री नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री भजनलाल के आगमन की बात सामने आई है।1
- केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे का निरीक्षण किया। उनका काफिला अभी-अभी लबान से रवाना होकर दरा टनल की ओर बढ़ रहा है। इस दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा, शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर और ऊर्जा राज्य मंत्री हीरालाल नागर उनके साथ मौजूद हैं।1
- मंगलवार आधी रात कोटा रेल मंडल में एक बड़ा रेल हादसा टल गया। मुंबई-हरिद्वार देहरादून एक्सप्रेस (19019) का कपलर रणथंभौर और मखोली स्टेशन के बीच अचानक उखड़ गया, जिसके कारण ट्रेन दो हिस्सों में बंट गई। इस घटना के बाद रेलवे अधिकारियों में हड़कंप मच गया। ट्रेन के आगे के डिब्बों को मखोली स्टेशन ले जाया गया, जबकि पीछे के हिस्से को रणथंभौर स्टेशन वापस लाया गया। पूरी रात ट्रेन को फिर से रवाना करने की कोशिशें जारी रहीं, और क्षतिग्रस्त कोच की जगह कोटा से दूसरा कोच मंगाने की तैयारी की गई। राहत की बात यह रही कि इस हादसे में कोई भी यात्री घायल नहीं हुआ।1
- कोटा में चंबल नदी के किनारे, विशेष रूप से कोटा बैराज और जवाहर सागर के बीच, दुर्लभ और संकटग्रस्त वन्यजीव प्रजाति 'स्मूथ-कोटेड ओटर' या 'जल मानुष' का एक पूरा परिवार अठखेलियां करता नजर आया है। इस नजारे ने वन्यजीव प्रेमियों और पर्यावरणविदों को बेहद रोमांचित कर दिया है, खासकर जब चंबल नदी एक बार फिर दुर्लभ जीवों के लिए सुरक्षित घर बन रही है। हाल ही में इन ऊदबिलावों का चंबल किनारे मस्ती करते और मछलियों का शिकार करते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ है। 'रिवर डॉग्स' के नाम से भी मशहूर ये अर्ध-जलीय जीव दिखने में मासूम पर बेहद चालाक और फुर्तीले शिकारी होते हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, ऊदबिलाव हमेशा झुंड में रहते हैं और एक साथ होने पर इतने आक्रामक व शक्तिशाली हो जाते हैं कि मगरमच्छ और पानी के किनारे आने वाले पैंथर तक को चुनौती दे सकते हैं। कोटा बैराज के पास हाल ही में ऐसा ही एक दृश्य देखा गया, जहाँ पूरा कुनबा मिलकर मछलियों का शिकार कर रहा था और किनारे पर आए स्ट्रीट डॉग्स को खदेड़ रहा था। इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (IUCN) ने ऊदबिलाव की तेजी से घटती संख्या के कारण इसे अपनी 'रेड लिस्ट' में 'संकटग्रस्त' श्रेणी में शामिल किया था। एक समय इनकी कीमती खाल के लिए बड़े पैमाने पर शिकार होने के कारण ये भरतपुर के केवलादेव नेशनल पार्क जैसे कई प्राकृतिक आवासों से पूरी तरह विलुप्त हो गए थे। हालांकि, हाल के वर्षों में कोटा से लेकर रावतभाटा के बीच चंबल की साफ और गहरी जलधाराओं में इनकी संख्या में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी नदी में ऊदबिलावों की उपस्थिति उस जलस्रोत की अच्छी सेहत का सूचक है, क्योंकि ये जीव केवल साफ पानी और पर्याप्त भोजन (मछलियां और केकड़े) वाले स्थानों पर ही जीवित रह सकते हैं। चंबल नदी मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के कोर एरिया से होकर भी गुजरती है, जो इनके पनपने के लिए अत्यंत अनुकूल जगह है। 'कोटा स्टोरीलाइन' का संदेश है कि ये 'जल मानुष' कोटा के इको-टूरिज्म और जलीय जैव-विविधता की शान हैं, और नदी में प्लास्टिक कचरा, केमिकल या गंदगी न बहाकर चंबल के इस अनोखे वन्यजीवन को हमेशा सुरक्षित व फलता-फूलता रखना चाहिए।1
- दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर लगातार हो रहे हादसों को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं, जिसमें इसके मूल कारण पर चिंता व्यक्त की गई है। आरोप है कि इन हादसों के पीछे "बड़े भ्रष्टाचारी राजनेताओं के चाटुकार अधिकारियों की मिलीभगत" है, जिसके चलते निर्माण में भारी लापरवाही हुई है। सवाल उठाया गया है कि एक्सप्रेसवे बनने के बाद से अब तक कितनी बार पैच-वर्क हो चुका है और इस लापरवाही का शिकार होकर कितने लोग अपनी जान गँवा चुके हैं। दर्जनों एक्सीडेंट और दर्जनों मौतों का जिम्मेदार कौन है, इस पर जवाबदेही माँगी गई है। यह भी कहा गया है कि कोटा से लबान तक का रास्ता "घटिया सामग्री" का इस्तेमाल कर बनाया गया है, और सार्वजनिक निर्माण विभाग से डेपुटेशन पर लगे अधिकारी का रवैया भी "घटिया" रहा है। आज केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से इस संबंध में सीधा सवाल पूछा जाएगा कि दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर आखिरकार हादसों का कारण क्या है।1
- कोटा जिले में केईडीएल (KEDL) कंपनी की लापरवाही से स्थानीय लोग काफी परेशान हैं। आरोप है कि यह निजी कंपनी एक तरफ तो जबरदस्ती स्मार्ट मीटर लगाकर लोगों की जेब पर डाका डाल रही है, वहीं दूसरी तरफ उपभोक्ताओं की शिकायतों पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दे रही है। उपभोक्ताओं ने लगातार बिजली ट्रिपिंग की समस्या को लेकर पोर्टल पर कई बार शिकायतें दर्ज कराई हैं, लेकिन दो दिनों से इन समस्याओं का कोई समाधान नहीं किया गया है। केईडीएल कंपनी के अधिकारियों की इस घोर लापरवाही के कारण आम उपभोक्ता खासे चिंतित और परेशान हैं।1
- दिल्ली-मुम्बई एक्सप्रेसवे पर एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ है, जिसमें महाकाल के दर्शन कर लौट रहे श्रद्धालुओं में से एक की मौत हो गई। इस दुर्घटना में 15 से अधिक श्रद्धालु घायल हुए हैं, जिन्हें नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। यह घटना केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के दिल्ली-मुम्बई एक्सप्रेसवे के दौरे से ठीक पहले हुई।1