जंगल के बीच आस्था का केंद्र बांधवाधीश मंदिर, जन्माष्टमी पर गूंजे जयकारे,रखरखाव को लेकर विधायक ने उठाई आवाज उमरिया बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की घनी हरियाली, पहाड़ियों और ऐतिहासिक विरासत के बीच स्थित भगवान बांधवाधीश मंदिर में जन्माष्टमी के अवसर पर श्रद्धा का माहौल देखने को मिला। भगवान के दर्शन के लिए श्रद्धालु मंदिर पहुंचे। मंदिर में दर्शन व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित रही। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वन विभाग एवं प्रशासन के अधिकारी-कर्मचारी मुस्तैदी से ड्यूटी पर तैनात रहे। मंदिर परिसर में स्वच्छता, अनुशासन और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए भी पर्याप्त इंतजाम किए गए। जन्माष्टमी के पावन अवसर पर सिरमौर विधायक दिव्यराज सिंह ने सबसे पहले भगवान बांधवाधीश की पूजा-अर्चना कर दर्शन किए। उन्होंने विधि-विधान से पूजा की और क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की। इसके बाद उन्होंने मंदिर की व्यवस्थाओं का जायजा लिया और मीडिया से चर्चा की। चार साल से नहीं हुई मंदिर की पुताई मीडिया से बातचीत के दौरान विधायक दिव्यराज सिंह ने मंदिर के रखरखाव को लेकर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि पहले भगवान बांधवाधीश मंदिर की समय-समय पर पुताई कराई जाती थी, लेकिन पिछले करीब चार वर्षों से प्रशासन द्वारा मंदिर की पुताई तक नहीं कराई गई है। विधायक ने कहा कि बांधवाधीश मंदिर केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि बांधवगढ़ की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान से भी जुड़ा हुआ है। ऐसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल की नियमित देखरेख होना चाहिए। उन्होंने मीडिया के माध्यम से प्रशासन से मांग की कि मंदिर की पुताई कार्य भी कराए जाएं। रामायण काल से जुड़ी है बांधवगढ़ की मान्यता बांधवगढ़ का इतिहास प्राचीन मान्यताओं से जुड़ा हुआ है। स्थानीय मान्यता के अनुसार भगवान श्रीराम ने बांधवगढ़ का किला अपने भाई लक्ष्मण को प्रदान किया था। इसी कारण इसे ‘बांधवगढ़’ नाम मिलने की बात कही जाती है। किले में स्थित भगवान बांधवाधीश मंदिर इसी धार्मिक और ऐतिहासिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। जन्माष्टमी के दिन भगवान बांधवाधीश की विशेष पूजा-अर्चना मंदिर की धार्मिक महत्ता को और बढ़ा देती है। प्राकृतिक सौंदर्य और प्राचीन विरासत के बीच स्थित यह मंदिर श्रद्धालुओं के लिए आस्था का विशेष केंद्र है। एक ओर जन्माष्टमी पर मंदिर में सुरक्षा और दर्शन की व्यवस्थाएं बेहतर नजर आईं, वहीं चार वर्षों से पुताई नहीं होने का मुद्दा भी सामने आया। विधायक की मांग के बाद अब श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की नजर प्रशासन की कार्रवाई पर है। उम्मीद है कि ऐतिहासिक मंदिर के रखरखाव और सौंदर्यीकरण को लेकर जल्द कदम उठाए जाएंगे।
जंगल के बीच आस्था का केंद्र बांधवाधीश मंदिर, जन्माष्टमी पर गूंजे जयकारे,रखरखाव को लेकर विधायक ने उठाई आवाज उमरिया बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की घनी हरियाली, पहाड़ियों और ऐतिहासिक विरासत के बीच स्थित भगवान बांधवाधीश मंदिर में जन्माष्टमी के अवसर पर श्रद्धा का माहौल देखने को मिला। भगवान के दर्शन के लिए श्रद्धालु मंदिर पहुंचे। मंदिर में दर्शन व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित रही। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वन विभाग एवं प्रशासन के अधिकारी-कर्मचारी मुस्तैदी से ड्यूटी पर तैनात रहे। मंदिर परिसर में स्वच्छता, अनुशासन और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए भी पर्याप्त इंतजाम किए
गए। जन्माष्टमी के पावन अवसर पर सिरमौर विधायक दिव्यराज सिंह ने सबसे पहले भगवान बांधवाधीश की पूजा-अर्चना कर दर्शन किए। उन्होंने विधि-विधान से पूजा की और क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की। इसके बाद उन्होंने मंदिर की व्यवस्थाओं का जायजा लिया और मीडिया से चर्चा की। चार साल से नहीं हुई मंदिर की पुताई मीडिया से बातचीत के दौरान विधायक दिव्यराज सिंह ने मंदिर के रखरखाव को लेकर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि पहले भगवान बांधवाधीश मंदिर की समय-समय पर पुताई कराई जाती थी, लेकिन पिछले करीब चार वर्षों से प्रशासन द्वारा मंदिर की पुताई तक नहीं कराई गई है। विधायक ने कहा
कि बांधवाधीश मंदिर केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि बांधवगढ़ की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान से भी जुड़ा हुआ है। ऐसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल की नियमित देखरेख होना चाहिए। उन्होंने मीडिया के माध्यम से प्रशासन से मांग की कि मंदिर की पुताई कार्य भी कराए जाएं। रामायण काल से जुड़ी है बांधवगढ़ की मान्यता बांधवगढ़ का इतिहास प्राचीन मान्यताओं से जुड़ा हुआ है। स्थानीय मान्यता के अनुसार भगवान श्रीराम ने बांधवगढ़ का किला अपने भाई लक्ष्मण को प्रदान किया था। इसी कारण इसे ‘बांधवगढ़’ नाम मिलने की बात कही जाती है। किले में स्थित भगवान बांधवाधीश मंदिर इसी धार्मिक और ऐतिहासिक
विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। जन्माष्टमी के दिन भगवान बांधवाधीश की विशेष पूजा-अर्चना मंदिर की धार्मिक महत्ता को और बढ़ा देती है। प्राकृतिक सौंदर्य और प्राचीन विरासत के बीच स्थित यह मंदिर श्रद्धालुओं के लिए आस्था का विशेष केंद्र है। एक ओर जन्माष्टमी पर मंदिर में सुरक्षा और दर्शन की व्यवस्थाएं बेहतर नजर आईं, वहीं चार वर्षों से पुताई नहीं होने का मुद्दा भी सामने आया। विधायक की मांग के बाद अब श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की नजर प्रशासन की कार्रवाई पर है। उम्मीद है कि ऐतिहासिक मंदिर के रखरखाव और सौंदर्यीकरण को लेकर जल्द कदम उठाए जाएंगे।
- जंगल के बीच आस्था का केंद्र बांधवाधीश मंदिर, जन्माष्टमी पर गूंजे जयकारे,रखरखाव को लेकर विधायक ने उठाई आवाज उमरिया बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की घनी हरियाली, पहाड़ियों और ऐतिहासिक विरासत के बीच स्थित भगवान बांधवाधीश मंदिर में जन्माष्टमी के अवसर पर श्रद्धा का माहौल देखने को मिला। भगवान के दर्शन के लिए श्रद्धालु मंदिर पहुंचे। मंदिर में दर्शन व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित रही। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वन विभाग एवं प्रशासन के अधिकारी-कर्मचारी मुस्तैदी से ड्यूटी पर तैनात रहे। मंदिर परिसर में स्वच्छता, अनुशासन और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए भी पर्याप्त इंतजाम किए गए। जन्माष्टमी के पावन अवसर पर सिरमौर विधायक दिव्यराज सिंह ने सबसे पहले भगवान बांधवाधीश की पूजा-अर्चना कर दर्शन किए। उन्होंने विधि-विधान से पूजा की और क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की। इसके बाद उन्होंने मंदिर की व्यवस्थाओं का जायजा लिया और मीडिया से चर्चा की। चार साल से नहीं हुई मंदिर की पुताई मीडिया से बातचीत के दौरान विधायक दिव्यराज सिंह ने मंदिर के रखरखाव को लेकर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि पहले भगवान बांधवाधीश मंदिर की समय-समय पर पुताई कराई जाती थी, लेकिन पिछले करीब चार वर्षों से प्रशासन द्वारा मंदिर की पुताई तक नहीं कराई गई है। विधायक ने कहा कि बांधवाधीश मंदिर केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि बांधवगढ़ की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान से भी जुड़ा हुआ है। ऐसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल की नियमित देखरेख होना चाहिए। उन्होंने मीडिया के माध्यम से प्रशासन से मांग की कि मंदिर की पुताई कार्य भी कराए जाएं। रामायण काल से जुड़ी है बांधवगढ़ की मान्यता बांधवगढ़ का इतिहास प्राचीन मान्यताओं से जुड़ा हुआ है। स्थानीय मान्यता के अनुसार भगवान श्रीराम ने बांधवगढ़ का किला अपने भाई लक्ष्मण को प्रदान किया था। इसी कारण इसे ‘बांधवगढ़’ नाम मिलने की बात कही जाती है। किले में स्थित भगवान बांधवाधीश मंदिर इसी धार्मिक और ऐतिहासिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। जन्माष्टमी के दिन भगवान बांधवाधीश की विशेष पूजा-अर्चना मंदिर की धार्मिक महत्ता को और बढ़ा देती है। प्राकृतिक सौंदर्य और प्राचीन विरासत के बीच स्थित यह मंदिर श्रद्धालुओं के लिए आस्था का विशेष केंद्र है। एक ओर जन्माष्टमी पर मंदिर में सुरक्षा और दर्शन की व्यवस्थाएं बेहतर नजर आईं, वहीं चार वर्षों से पुताई नहीं होने का मुद्दा भी सामने आया। विधायक की मांग के बाद अब श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की नजर प्रशासन की कार्रवाई पर है। उम्मीद है कि ऐतिहासिक मंदिर के रखरखाव और सौंदर्यीकरण को लेकर जल्द कदम उठाए जाएंगे।4
- कई घंटे बाद रेस्क्यू हुआ सफल,3 किलोमीटर दूर मिला वृद्धा का शव _नौरोजाबाद थाना क्षेत्र के ग्राम कल्दा के समीप गुरुवार सुबह विनोदा नदी में पूजा के दौरान 65 वर्षीय रमोता बाई उफनते नदी के कई घंटे बाद रेस्क्यू हुआ सफल,3 किलोमीटर दूर मिला वृद्धा का शव _नौरोजाबाद थाना क्षेत्र के ग्राम कल्दा के समीप गुरुवार सुबह विनोदा नदी में पूजा के दौरान 65 वर्षीय रमोता बाई उफनते नदी के बहाव में बह गई थी,घण्टों के रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद देर शाम घटनास्थल से लगभग 3 किलोमीटर दूर वृद्धा का शव बरामद कर लिया गया है।हालांकि तेज बहाव के कारण एसडीआरएफ और पुलिस टीम को तलाश में काफी मशक्कत करनी पड़ी।_ _रमोता बाई पाली की रहने वाली थीं और रक्षाबंधन पर अपने भाई के घर आई थीं।गुरुवार सुबह करीब 7 बजे उन्होंने हलछठ की पूजा की।इसके बाद पूजन सामग्री विसर्जित करने के लिए ग्राम कल्दा स्थित विनोदा नदी पहुंचीं।सामग्री विसर्जित करने के दौरान अचानक संतुलन बिगड़ने से वह नदी के तेज बहाव में जा गिरीं और गहरे पानी में बह गईं।सूचना मिलते ही नौरोजाबाद पुलिस और एसडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची। लगातार बारिश के चलते नदी उफान पर थी,जिससे रेस्क्यू अभियान चुनौतीपूर्ण रहा।जवानों ने कई घंटे तक नदी और आसपास के क्षेत्र में तलाश की।देर शाम घटनास्थल से करीब 3 किलोमीटर दूर उनका शव बरामद हुआ।पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी है। हलछठ की पूजा के बाद हुआ यह हादसा परिवार के लिए गहरे सदमे में बदल गया।2
- शहडोल के वार्ड नंबर 15/11 की ग्राउंड रिपोर्टिंग देखिए पंडित कृष्णा मिश्रा पत्रकार की रिपोर्ट शहडोल के वार्ड नंबर 15/11 की ग्राउंड रिपोर्टिंग देखिए पंडित कृष्णा मिश्रा पत्रकार की रिपोर्ट1
- यादव समाज द्वारा जन्माष्टमी पर्व पर जय स्तंभ से निकल गई रैली ढोल डीजे तथा राधा कृष्ण की निकाली गई रैली1
- श्रीवास्तव श्रीवास्तव। आशीष। हित्वा ज्यादा पानीबरसा।के।कारण।यह।खेतों।पानी।ज्यादा।कारण।खेती।नहीं।हो।पाया। हैग्राम पंचायत चित्र के।पाश2
- मॉर्डन इंग्लिश स्कूल किसलपुरी में श्री कृष्ण जन्माष्टमी की धूम *लीलाधर श्री कृष्ण की बाल लीलाओं से गूंजा मॉडर्न इंग्लिश स्कूल किसलपुरी* *अमरपुर/डिंडौरी, दिनांक 04/09/26, दिन शुक्रवार।* माँ विंध्यवासिनी शिक्षा समिति द्वारा संचालित मॉडर्न इंग्लिश स्कूल किसलपुरी में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व हर्षोल्लास से मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ समिति अध्यक्ष एवं संचालिका श्रीमती रुचि पाण्डेय, सचिव अतुल पाठक, सदस्य नन्हे सिंह धुर्वे एवं स्टाफ द्वारा राधा-कृष्ण पूजन-अर्चन से किया गया। नन्हें-मुन्ने बच्चे राधा-कृष्ण की मनमोहक वेशभूषा में आकर्षण का केंद्र रहे। बच्चों ने आकर्षक सांस्कृतिक कार्यक्रम व झांकियां प्रस्तुत कीं। मटकी फोड़ प्रतियोगिता में कक्षा चौथी के छात्र ऋषि ठाकुर ने जीत हासिल की। सभी प्रतिभागी बच्चों को पुरस्कृत किया गया व प्रसाद वितरण किया गया। समापन पर श्रीकृष्ण की जीवन लीला पर प्रकाश डाला गया तथा वीडियो क्लिप दिखाई गई। आभार प्रदर्शन श्रीमती रुचि पाण्डेय ने किया।3
- ये है धनपुरी नगर पालिका का 'विकास' - वार्ड 6/9, धनपुरी नं. 3 बजट करोड़ों का, काम जीरो। स्टेज बच्चे बना रहे हैं, कचरा चारों तरफ, लाइट सालों से बंद, सड़क 8 महीने से खुदी पड़ी है और पार्षद 5 साल से लापता। धनपुरी नगर पालिका - शर्म करो! क्या इसी को कहते हैं स्वच्छ धनपुरी?1
- *बुढ़ार चौक से बस स्टैंड जाने वाली रोड उखाड़ कर फ़ेक दी गई! अब ना तो नव निर्माण हो रहा ना मलबा ही हटाया जा रहा। व्यापारियों की दुर्दशा व्यापारी ही जान रहे! आम आदमी का दुख देखिए-?* *बुढ़ार चौक से बस स्टैंड जाने वाली रोड उखाड़ कर फ़ेक दी गई! अब ना तो नव निर्माण हो रहा ना मलबा ही हटाया जा रहा। व्यापारियों की दुर्दशा व्यापारी ही जान रहे! आम आदमी का दुख देखिए-?*1