महुए का शौक़ीन बाघ-शिकार ना मिला तो ना सही महुआ का झोला उठाकर चल दिया जंगल का राजा। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के पनपथा रेंज के बंदर चुई इलाके से एक अनोखी घटना सामने आई है जहां पर एक बाघ महुआ बीन रहे ग्रामीण का थैला उठाकर चलते बना जिसे देखने वाले हैरत के साथ-साथ इस घटनाक्रम को देखकर मुस्कुराने से भी नहीं चूक रहे जहां पर एक हिंसक जानवर ऐसी मस्खरी पूर्ण हरकत कर सकता है , जिसका वीडियो आज सोमवार को सोशल प्लेटफॉर्म पर तेजी से वायरल हो रहा है बताया जाता है कि एक ग्रामीण जंगल में महुआ बीनने गया हुआ था और महुआ को बीनकर एक थैले में एकत्र कर किनारे रख रहा था तभी वहां पर बाघ ने एंट्री मारी जिसे देखकर ग्रामीण ना तो भाग सकता था और ना ही रूक सकता था वह एक बुत सा बना दूर खड़े रहकर तमाशा देखने मजबूर था। ऐसे में उक्त टाइगर महुआ के पेड़ के पास ही कुछ दूरी पर बैठ गया और कुछ देर आराम फरमाने के बाद बाघ उठकर खड़ा हुआ और फिर ग्रामीण का वह थैला जिसमें उसने महुआ बीनकर एकत्रित किया था उसे अपने मुंह में दबाकर चुपचाप वहां से वापस जंगल की ओर चलता बना तब जाकर उस ग्रामीण की जान में जान आई। सूत्रों की माने तो उक्त वीडियो किसी पर्यटक के द्वारा ही बनाया गया है जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है वहीं इसकी जानकारी लगने के बाद संबंधित रेंज ऑफिसर प्रतीक श्रीवास्तव ने इलाके में चौकसी बढ़ा दी है और ग्रामीणों को सतर्क रहने की हिदायत दी है साथ ही उक्त टाइगर की सर्चिंग भी की जा रही है। इस पूरी घटना को देखकर यही बात कहीं जा सकती है कि उक्त बाघ महुआ का शौकीन है और जंगल की खाक छानने के बाद भले ही शिकार नहीं मिला तो अपना पसंदीदा महुआ लेकर ही संतुष्ट हो गया।
महुए का शौक़ीन बाघ-शिकार ना मिला तो ना सही महुआ का झोला उठाकर चल दिया जंगल का राजा। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के पनपथा रेंज के बंदर चुई इलाके से एक अनोखी घटना सामने आई है जहां पर एक बाघ महुआ बीन रहे ग्रामीण का थैला उठाकर चलते बना जिसे देखने वाले हैरत के साथ-साथ इस घटनाक्रम को देखकर मुस्कुराने से भी नहीं चूक रहे जहां पर एक हिंसक जानवर ऐसी मस्खरी पूर्ण हरकत कर सकता है , जिसका वीडियो
आज सोमवार को सोशल प्लेटफॉर्म पर तेजी से वायरल हो रहा है बताया जाता है कि एक ग्रामीण जंगल में महुआ बीनने गया हुआ था और महुआ को बीनकर एक थैले में एकत्र कर किनारे रख रहा था तभी वहां पर बाघ ने एंट्री मारी जिसे देखकर ग्रामीण ना तो भाग सकता था और ना ही रूक सकता था वह एक बुत सा बना दूर खड़े रहकर तमाशा देखने मजबूर था। ऐसे में उक्त टाइगर महुआ के पेड़
के पास ही कुछ दूरी पर बैठ गया और कुछ देर आराम फरमाने के बाद बाघ उठकर खड़ा हुआ और फिर ग्रामीण का वह थैला जिसमें उसने महुआ बीनकर एकत्रित किया था उसे अपने मुंह में दबाकर चुपचाप वहां से वापस जंगल की ओर चलता बना तब जाकर उस ग्रामीण की जान में जान आई। सूत्रों की माने तो उक्त वीडियो किसी पर्यटक के द्वारा ही बनाया गया है जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा
है वहीं इसकी जानकारी लगने के बाद संबंधित रेंज ऑफिसर प्रतीक श्रीवास्तव ने इलाके में चौकसी बढ़ा दी है और ग्रामीणों को सतर्क रहने की हिदायत दी है साथ ही उक्त टाइगर की सर्चिंग भी की जा रही है। इस पूरी घटना को देखकर यही बात कहीं जा सकती है कि उक्त बाघ महुआ का शौकीन है और जंगल की खाक छानने के बाद भले ही शिकार नहीं मिला तो अपना पसंदीदा महुआ लेकर ही संतुष्ट हो गया।
- *पर्यटन नियमों के सख्त पालन के निर्देश* *वाहन मालिकों, गाइड और ड्राइवरों की बीच अहम बैठक संपन्न* *उमरिया मार्ग से ताला के बीच जंगल में गाड़ी बिल्कुल न रोकें* उमरिया _ बांधवगढ़ टाईगर रिजर्व के ईको सेंटर में पर्यटन व्यवस्था को बेहतर बनाने और नियमों के कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में पर्यटन जोन के एसडीओ सहित सभी रेंजर, वाहन मालिक, गाइड और वाहन चालक उपस्थित रहे। अधिकारियों ने स्पष्ट रूप से निर्देश दिए कि पर्यटन गतिविधियों के दौरान किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। बैठक की अध्यक्षता कर रहे एसडीओ ने कहा कि पर्यटन क्षेत्र में अनुशासन बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि यह न केवल पर्यटकों की सुरक्षा से जुड़ा है, बल्कि वन्यजीवों और पर्यावरण संरक्षण के लिए भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने सभी जिप्सी चालकों और गाइडों को निर्देशित किया कि वे निर्धारित मार्गों का ही उपयोग करें और किसी भी परिस्थिति में नियमों की अनदेखी न करें। अधिकारियों ने बताया कि कई बार यह देखा गया है कि कुछ वाहन उमरिया मार्ग से ताला के बीच जंगल में गाड़ी को रोक कर जंगली जानवरों के रहवास में खलल डालने जैसे कृत्य करते हैं।साथ ही पर्यटन जोन के अंदर भी चालक तेज गति से वाहन चलाते हैं या निर्धारित समय और मार्गों का पालन नहीं करते, जिससे दुर्घटना की संभावना बढ़ जाती है और वन्यजीवों को भी खतरा उत्पन्न होता है। ऐसे मामलों को गंभीरता से लेते हुए अब निगरानी और सख्ती बढ़ाई जाएगी। बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि सभी गाइडों को पर्यटकों को सही जानकारी देने और उन्हें नियमों के प्रति जागरूक करने की जिम्मेदारी निभानी होगी। यदि कोई पर्यटक नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसकी सूचना तुरंत संबंधित अधिकारियों को देना अनिवार्य होगा। वन विभाग के रेंजरों ने कहा कि नियमित रूप से चेकिंग अभियान चलाए जाएंगे और दोषी पाए जाने पर जुर्माना, लाइसेंस निलंबन या अन्य दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने जिप्सी मालिकों से अपील की कि वे अपने ड्राइवरों को नियमों के प्रति पूरी तरह प्रशिक्षित करें और समय-समय पर उनकी निगरानी भी करें। बैठक के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने पर्यटन नियमों का पालन करने और क्षेत्र की गरिमा बनाए रखने का संकल्प लिया। अधिकारियों ने उम्मीद जताई कि इस पहल से पर्यटन व्यवस्था में सुधार आएगा और पर्यटकों को सुरक्षित एवं बेहतर अनुभव प्राप्त होगा।2
- Post by पत्रकारिता1
- *पर्यटन नियमों के सख्त पालन के निर्देश* *वाहन मालिकों, गाइड और ड्राइवरों की बीच अहम बैठक संपन्न* *उमरिया मार्ग से ताला के बीच जंगल में गाड़ी बिल्कुल न रोकें* उमरिया _ बांधवगढ़ टाईगर रिजर्व के ईको सेंटर में पर्यटन व्यवस्था को बेहतर बनाने और नियमों के कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में पर्यटन जोन के एसडीओ सहित सभी रेंजर, वाहन मालिक, गाइड और वाहन चालक उपस्थित रहे। अधिकारियों ने स्पष्ट रूप से निर्देश दिए कि पर्यटन गतिविधियों के दौरान किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। बैठक की अध्यक्षता कर रहे एसडीओ ने कहा कि पर्यटन क्षेत्र में अनुशासन बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि यह न केवल पर्यटकों की सुरक्षा से जुड़ा है, बल्कि वन्यजीवों और पर्यावरण संरक्षण के लिए भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने सभी जिप्सी चालकों और गाइडों को निर्देशित किया कि वे निर्धारित मार्गों का ही उपयोग करें और किसी भी परिस्थिति में नियमों की अनदेखी न करें। अधिकारियों ने बताया कि कई बार यह देखा गया है कि कुछ वाहन उमरिया मार्ग से ताला के बीच जंगल में गाड़ी को रोक कर जंगली जानवरों के रहवास में खलल डालने जैसे कृत्य करते हैं।साथ ही पर्यटन जोन के अंदर भी चालक तेज गति से वाहन चलाते हैं या निर्धारित समय और मार्गों का पालन नहीं करते, जिससे दुर्घटना की संभावना बढ़ जाती है और वन्यजीवों को भी खतरा उत्पन्न होता है। ऐसे मामलों को गंभीरता से लेते हुए अब निगरानी और सख्ती बढ़ाई जाएगी। बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि सभी गाइडों को पर्यटकों को सही जानकारी देने और उन्हें नियमों के प्रति जागरूक करने की जिम्मेदारी निभानी होगी। यदि कोई पर्यटक नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसकी सूचना तुरंत संबंधित अधिकारियों को देना अनिवार्य होगा। वन विभाग के रेंजरों ने कहा कि नियमित रूप से चेकिंग अभियान चलाए जाएंगे और दोषी पाए जाने पर जुर्माना, लाइसेंस निलंबन या अन्य दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने जिप्सी मालिकों से अपील की कि वे अपने ड्राइवरों को नियमों के प्रति पूरी तरह प्रशिक्षित करें और समय-समय पर उनकी निगरानी भी करें। बैठक के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने पर्यटन नियमों का पालन करने और क्षेत्र की गरिमा बनाए रखने का संकल्प लिया। अधिकारियों ने उम्मीद जताई कि इस पहल से पर्यटन व्यवस्था में सुधार आएगा और पर्यटकों को सुरक्षित एवं बेहतर अनुभव प्राप्त होगा।2
- Post by Durgesh Kumar Gupta2
- महुआ नहीं मिला… तो थैला ही उठा ले गया जंगल का महाराज बांधवगढ़ के जंगल में बाघ की अजीब हरकत, ग्रामीण बना मूक दर्शक उमरिया तपस गुप्ता जिले के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के पनपथा बफर क्षेत्र के बंदर चुई इलाके से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसे सुनकर लोग हैरान भी हैं और मुस्कुरा भी रहे हैं। यहां एक बाघ ने शिकार नहीं, बल्कि महुआ से भरा थैला ही अपना टारगेट बना लिया। दरअसल, एक ग्रामीण आराम से पेड़ के नीचे बैठकर महुआ बीन रहा था। मेहनत से इकट्ठा किया गया महुआ उसने एक थैले में भरकर पास में रख दिया। तभी अचानक जंगल का असली मालिक एंट्री मारता है। बाघ साहब चुपचाप आए, पहले थोड़ी देर पेड़ के नीचे बैठकर माहौल को समझा… मानो सोच रहे हों, क्या सीन चल रहा है? ग्रामीण ने जैसे ही बाघ को देखा, उसकी हालत ना भाग सकते, ना बोल सकते वाली हो गई। वह कुछ दूरी पर खड़ा होकर बस तमाशा देखने लगा। उधर बाघ ने भी कोई जल्दबाजी नहीं दिखाई। पहले आराम से बैठा, फिर नजरें घुमाईं और आखिर में फैसला लिया शिकार नहीं मिला तो थैला ही सही इसके बाद बाघ ने महुआ से भरा थैला अपने मुंह में दबाया और ऐसे चलता बना जैसे जंगल की दुकान से शॉपिंग करके निकला हो। पूरा नजारा किसी फिल्मी सीन से कम नहीं था। इस अनोखी घटना का वीडियो भी सामने आया है, जो सोमवार को सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। लोग मजाक में कह रहे हैं कि बाघ अब ‘डायट चेंज’ कर चुका है और शिकार की जगह महुआ पसंद करने लगा है। हालांकि, वन विभाग इस घटना को हल्के में नहीं ले रहा। पनपथा बफर क्षेत्र के अधिकारी प्रतीक श्रीवास्तव ने बताया कि वीडियो मिलने के बाद इलाके में निगरानी बढ़ा दी गई है। साथ ही ग्रामीणों को सख्त हिदायत दी गई है कि वे अकेले जंगल में महुआ बीनने न जाएं, बल्कि समूह में जाएं और सतर्क रहें। कुल मिलाकर, यह घटना जहां एक तरफ जंगल के खतरे की याद दिलाती है, वहीं दूसरी तरफ यह भी दिखाती है कि जंगल का राजा कब क्या कर जाए, इसका कोई भरोसा नहीं। आज महुआ का थैला गया है… कल को बाघ को कुछ और पसंद आ गया तो?1
- Post by Sumit Singh Chandel1
- बड़वारा शराब दुकान हटाओ को लेकर कलेक्टर महोदय के नाम ज्ञापन सौंपते हुए।1
- बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के पनपथा रेंज के बंदर चुई इलाके से एक अनोखी घटना सामने आई है जहां पर एक बाघ महुआ बीन रहे ग्रामीण का थैला उठाकर चलते बना जिसे देखने वाले हैरत के साथ-साथ इस घटनाक्रम को देखकर मुस्कुराने से भी नहीं चूक रहे जहां पर एक हिंसक जानवर ऐसी मस्खरी पूर्ण हरकत कर सकता है , जिसका वीडियो आज सोमवार को सोशल प्लेटफॉर्म पर तेजी से वायरल हो रहा है बताया जाता है कि एक ग्रामीण जंगल में महुआ बीनने गया हुआ था और महुआ को बीनकर एक थैले में एकत्र कर किनारे रख रहा था तभी वहां पर बाघ ने एंट्री मारी जिसे देखकर ग्रामीण ना तो भाग सकता था और ना ही रूक सकता था वह एक बुत सा बना दूर खड़े रहकर तमाशा देखने मजबूर था। ऐसे में उक्त टाइगर महुआ के पेड़ के पास ही कुछ दूरी पर बैठ गया और कुछ देर आराम फरमाने के बाद बाघ उठकर खड़ा हुआ और फिर ग्रामीण का वह थैला जिसमें उसने महुआ बीनकर एकत्रित किया था उसे अपने मुंह में दबाकर चुपचाप वहां से वापस जंगल की ओर चलता बना तब जाकर उस ग्रामीण की जान में जान आई। सूत्रों की माने तो उक्त वीडियो किसी पर्यटक के द्वारा ही बनाया गया है जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है वहीं इसकी जानकारी लगने के बाद संबंधित रेंज ऑफिसर प्रतीक श्रीवास्तव ने इलाके में चौकसी बढ़ा दी है और ग्रामीणों को सतर्क रहने की हिदायत दी है साथ ही उक्त टाइगर की सर्चिंग भी की जा रही है। इस पूरी घटना को देखकर यही बात कहीं जा सकती है कि उक्त बाघ महुआ का शौकीन है और जंगल की खाक छानने के बाद भले ही शिकार नहीं मिला तो अपना पसंदीदा महुआ लेकर ही संतुष्ट हो गया।4