सुभाष कुमार पाण्डेय संभाग प्रमुख, रीवा सीधी। मध्य प्रदेश के सीधी जिले के कोतवाली थाना क्षेत्रांतर्गत से एक ऐसा मामला सामने आया है, जो सिर्फ अपराध नहीं बल्कि व्यवस्था की संवेदनहीनता की भी कहानी कहता है। शिकायतकर्ता महिला के अनुसार, आरोपी अशोक तिवारी, पिता लालबिहारी तिवारी, निवासी पटेहरा सोन तीर ने उसके नौनिहाल बच्चों को जान से मारने की धमकी देकर न केवल दुष्कर्म किया, बल्कि वर्षों तक भय और ब्लैकमेल का जाल बुनता रहा। आरोप है कि आरोपी ने चोरी-छिपे आपत्तिजनक तस्वीरें लेकर महिला को सोशल मीडिया पर बदनाम करने की धमकी दी और जब पीड़िता नहीं झुकी, तो कथित तौर पर गांव के ग्राम पंचायत के व्हाट्सएप ग्रुप से लेकर फेसबुक स्टोरी तक “इंसाफ” का नया डिजिटल मॉडल पेश कर दिया। सवाल यह है कि क्या अब न्याय भी वायरल होकर ही मिलेगा? शिकायतकर्ता महिला का कहना है कि लगभग 6 माह से अधिक समय से कोतवाली थाने में शिकायत, एसपी कार्यालय में आवेदन, जनसुनवाई में गुहार—सब कुछ किया, लेकिन कार्रवाई का पहिया शायद छुट्टी पर है। उल्टा, आरोपी और उसका भाई जितेंद्र तिवारी घर में घुसकर मारपीट और शिकायत वापस लेने की धमकियां देते रहे। मदद के लिए 112 पर कॉल करें तो जवाब मिलता है—“आपके कहने से किसी को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता”, और गाड़ी का इंतजार करते-करते दिन से रात हो जाती है। मामले में नया मोड़ तब आता है जब आरोपी को फरार कराने में उसके जीजा रामाश्रय मिश्रा, निवासी ग्राम गाड़ा, थाना कोतवाली सीधी का नाम सामने आता है, जो खुद शहडोल जिले में बस कंडक्टर है और वह भी शिकायत वापस लेने का दबाव बनाने के लिए जान से मारने की धमकियों का सिलसिला जारी रखे हुए है। अब पुलिस का वही पुराना बयान—“जल्द गिरफ्तारी होगी, कड़ी कार्रवाई की जाएगी।” सवाल सिर्फ इतना है—यह “जल्द” आखिर किस कैलेंडर में आता है?
सुभाष कुमार पाण्डेय संभाग प्रमुख, रीवा सीधी। मध्य प्रदेश के सीधी जिले के कोतवाली थाना क्षेत्रांतर्गत से एक ऐसा मामला सामने आया है, जो सिर्फ अपराध नहीं बल्कि व्यवस्था की संवेदनहीनता की भी कहानी कहता है। शिकायतकर्ता महिला के अनुसार, आरोपी अशोक तिवारी, पिता लालबिहारी तिवारी, निवासी पटेहरा सोन तीर ने उसके नौनिहाल बच्चों को जान से मारने की धमकी देकर न केवल दुष्कर्म किया, बल्कि वर्षों तक भय और ब्लैकमेल का जाल बुनता रहा। आरोप है कि आरोपी ने चोरी-छिपे आपत्तिजनक तस्वीरें लेकर महिला को सोशल मीडिया पर बदनाम करने की धमकी दी और जब पीड़िता नहीं झुकी, तो कथित तौर पर गांव के ग्राम पंचायत के व्हाट्सएप ग्रुप से लेकर फेसबुक स्टोरी तक “इंसाफ” का नया डिजिटल मॉडल पेश कर दिया। सवाल यह है कि क्या अब न्याय भी वायरल होकर ही मिलेगा? शिकायतकर्ता महिला का कहना है कि लगभग 6 माह से अधिक समय से कोतवाली थाने में शिकायत, एसपी कार्यालय में आवेदन, जनसुनवाई में गुहार—सब कुछ किया, लेकिन कार्रवाई का पहिया शायद छुट्टी पर है। उल्टा, आरोपी और उसका भाई जितेंद्र तिवारी घर में घुसकर मारपीट और शिकायत वापस लेने की धमकियां देते रहे। मदद के लिए 112 पर कॉल करें तो जवाब मिलता है—“आपके कहने से किसी को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता”, और गाड़ी का इंतजार करते-करते दिन से रात हो जाती है। मामले में नया मोड़ तब आता है जब आरोपी को फरार कराने में उसके जीजा रामाश्रय मिश्रा, निवासी ग्राम गाड़ा, थाना कोतवाली सीधी का नाम सामने आता है, जो खुद शहडोल जिले में बस कंडक्टर है और वह भी शिकायत वापस लेने का दबाव बनाने के लिए जान से मारने की धमकियों का सिलसिला जारी रखे हुए है। अब पुलिस का वही पुराना बयान—“जल्द गिरफ्तारी होगी, कड़ी कार्रवाई की जाएगी।” सवाल सिर्फ इतना है—यह “जल्द” आखिर किस कैलेंडर में आता है?
- सुभाष कुमार पाण्डेय संभाग प्रमुख, रीवा सीधी। मध्य प्रदेश के सीधी जिले के कोतवाली थाना क्षेत्रांतर्गत से एक ऐसा मामला सामने आया है, जो सिर्फ अपराध नहीं बल्कि व्यवस्था की संवेदनहीनता की भी कहानी कहता है। शिकायतकर्ता महिला के अनुसार, आरोपी अशोक तिवारी, पिता लालबिहारी तिवारी, निवासी पटेहरा सोन तीर ने उसके नौनिहाल बच्चों को जान से मारने की धमकी देकर न केवल दुष्कर्म किया, बल्कि वर्षों तक भय और ब्लैकमेल का जाल बुनता रहा। आरोप है कि आरोपी ने चोरी-छिपे आपत्तिजनक तस्वीरें लेकर महिला को सोशल मीडिया पर बदनाम करने की धमकी दी और जब पीड़िता नहीं झुकी, तो कथित तौर पर गांव के ग्राम पंचायत के व्हाट्सएप ग्रुप से लेकर फेसबुक स्टोरी तक “इंसाफ” का नया डिजिटल मॉडल पेश कर दिया। सवाल यह है कि क्या अब न्याय भी वायरल होकर ही मिलेगा? शिकायतकर्ता महिला का कहना है कि लगभग 6 माह से अधिक समय से कोतवाली थाने में शिकायत, एसपी कार्यालय में आवेदन, जनसुनवाई में गुहार—सब कुछ किया, लेकिन कार्रवाई का पहिया शायद छुट्टी पर है। उल्टा, आरोपी और उसका भाई जितेंद्र तिवारी घर में घुसकर मारपीट और शिकायत वापस लेने की धमकियां देते रहे। मदद के लिए 112 पर कॉल करें तो जवाब मिलता है—“आपके कहने से किसी को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता”, और गाड़ी का इंतजार करते-करते दिन से रात हो जाती है। मामले में नया मोड़ तब आता है जब आरोपी को फरार कराने में उसके जीजा रामाश्रय मिश्रा, निवासी ग्राम गाड़ा, थाना कोतवाली सीधी का नाम सामने आता है, जो खुद शहडोल जिले में बस कंडक्टर है और वह भी शिकायत वापस लेने का दबाव बनाने के लिए जान से मारने की धमकियों का सिलसिला जारी रखे हुए है। अब पुलिस का वही पुराना बयान—“जल्द गिरफ्तारी होगी, कड़ी कार्रवाई की जाएगी।” सवाल सिर्फ इतना है—यह “जल्द” आखिर किस कैलेंडर में आता है?1
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- मऊगंज जिले के देवतालाब विधानसभा में जल जीवन मिशन की पानी की टंकी भ्रष्टाचार की भेंट: टेस्टिंग के दौरान ही भरभरा कर धराशाई, कार्यपालन यंत्री और ठेकेदार की मिलीभगत से हर घर जल का सपना हुआ चकनाचूर, ग्राम पंचायत को हैंडओवर से पहले ही धराशाई पानी टंकी1
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- देवी स्थल के नाम पर वसूली का खेल! कुंदवार चौकी क्षेत्र में बैरिकेडिंग लगाकर ₹300 वसूली का आरोप, वीडियो बनाते ही पुलिसकर्मी बौखलाए सिंगरौली। मध्यप्रदेश के सिंगरौली जिले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। चितरंगी क्षेत्र के कुंदवार चौकी अंतर्गत बैनाकुंनण्ड पहाड़ी स्थित देवी स्थल जाने वाले मार्ग पर पुलिस द्वारा कथित रूप से अवैध वसूली किए जाने का मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार, कुंदवार चौकी में पदस्थ पुलिसकर्मी दिलीप कुमार त्रिपाठी, जो स्वयं को चौकी प्रभारी का रिश्तेदार बताकर कार्यवाही कर रहे थे, देवी स्थल से करीब 2 किलोमीटर पहले बैरिकेडिंग लगाकर बाइक सवारों को रोकना शुरू कर दिया। आरोप है कि मंदिर तक वाहन ले जाने के नाम पर प्रत्येक बाइक चालक से ₹300 की मांग की जा रही थी। इसी दौरान सी न्यूज के एक पत्रकार भी बाइक से देवी स्थल की ओर जा रहे थे। पुलिसकर्मियों ने उन्हें पहचान नहीं पाया और उनसे भी अन्य लोगों की तरह ₹300 की मांग की। जब पत्रकार ने पैसे देने से इनकार किया और इस वसूली पर सवाल उठाए, तो मौके पर तीखी बहस शुरू हो गई। मामला तब और गर्मा गया जब पत्रकार ने पूरी घटना का वीडियो बनाना शुरू कर दिया। आरोप है कि वीडियो बनता देख पुलिसकर्मी भड़क गए और पहले तो पत्रकार का ही वीडियो बनाने लगे, इसके बाद दौड़कर उनका कैमरा छीन लिया। पत्रकार ने मौके पर ही बैरिकेडिंग, सुरक्षा व्यवस्था और वसूली के संबंध में लिखित आदेश की मांग की, लेकिन पुलिसकर्मी कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे सके। इस पूरी घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिससे पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। सवालों के घेरे में व्यवस्था इस घटनाक्रम ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं—क्या वास्तव में देवी स्थल के नाम पर वसूली की जा रही थी? क्या बैरिकेडिंग और चेकिंग के लिए कोई वैध आदेश था? और सबसे बड़ा सवाल, क्या आम जनता के साथ इस तरह का व्यवहार जायज है? प्रशासन से कार्रवाई की मांग सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद स्थानीय लोगों और पत्रकारों ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।1
- सीधी: राजनीति में शब्द कभी सिर्फ शब्द नहीं होते, वे आने वाले तूफानों का संकेत होते हैं। विंध्य के कद्दावर नेता और चुरहट के 'टाइगर' कहे जाने वाले अजय सिंह 'राहुल' ने हाल ही में जो कहा, उसने मध्य प्रदेश की सियासी फिजां में एक अजीब सी बेचैनी पैदा कर दी है। क्या यह एक अनुभवी नेता की अपनी पार्टी को खरी-खरी चेतावनी है, या फिर विंध्य के आसमान में किसी नए राजनीतिक सूर्योदय की आहट? अजय सिंह ने कैमरे के सामने बेहद गंभीर लहजे में एक 'डेडलाइन' खींचते हुए कहा कि "28 में यदि हम लोग हारे, तो उसके बाद मध्य प्रदेश में कांग्रेस पार्टी का कोई चांस नहीं है।" राजनैतिक गलियारों में इस बयान के कई मायने निकाले जा रहे हैं। जहां कांग्रेस कार्यकर्ता इसे 'अस्तित्व के संकट' के तौर पर देख रहे हैं, वहीं विश्लेषक इसे राहुल भैया का अपनी ही पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को दिया गया एक कड़ा 'अल्टीमेटम' मान रहे हैं। सवाल यह है कि क्या यह हार का डर है, या संगठन को जगाने के लिए आखिरी शंखनाद? मजे की बात यह है कि अजय सिंह अब राजनीति में 'विपक्ष' और 'सत्ता' के बीच की लकीरों को धुंधला करते नजर आ रहे हैं। उनका यह कहना कि "ऐसी लाइन न खींचो कि विपक्ष और सत्ता अलग-अलग दिखे", कई अनसुलझे सवाल छोड़ जाता है। कैलाश विजयवर्गीय, प्रहलाद पटेल और उमा भारती से लेकर शिवराज सिंह चौहान तक से उनके 'बेहतर संबंधों' का सार्वजनिक बखान क्या केवल शिष्टाचार है, या फिर ये 'मधुर संबंध' किसी नई राजनीतिक केमिस्ट्री की ओर इशारा कर रहे हैं? जब बात गुटबाजी की आई, तो उन्होंने इसे छिपाने के बजाय बड़ी बेबाकी से स्वीकार किया। यह स्वीकारोक्ति कांग्रेस की अंदरूनी कलह को उजागर तो करती ही है, साथ ही यह भी बताती है कि अजय सिंह अब किसी भी 'दबाव' से मुक्त होकर अपनी अलग राह की टोह ले रहे हैं। उनकी बातों में अपनी 'उपेक्षा' की टीस भी साफ़ झलकती है। उनका यह कहना कि "जब राय मांगी जाती है तभी देता हूँ", उनकी खामोश नाराजगी को बयां करता है। लेकिन असली सस्पेंस तब शुरू होता है जब वे वर्तमान सरकार के काम की तारीफ करते हुए कहते हैं कि "सरकार जमीनी स्तर पर अच्छा काम कर रही है।" हालांकि उन्होंने 'गांधी जी की फोटो' (भ्रष्टाचार का सांकेतिक तंज) का जिक्र कर संतुलन बनाने की कोशिश की, लेकिन तारीफ के सुर कहीं ज्यादा ऊंचे सुनाई दिए। विंध्य की जनता और राजनीतिक पंडित अब एक ही सवाल पूछ रहे हैं—क्या चुरहट के 'टाइगर' का मन वाकई बदल रहा है? 2028 की हार का डर महज एक 'एग्जिट प्लान' की भूमिका है या कांग्रेस को पुनर्जीवित करने का कोई कड़वा नुस्खा? अजय सिंह राहुल के ये बदले हुए तेवर किसी बड़े उलटफेर का संकेत हैं या सिर्फ एक अनुभवी नेता का अपनी जमीन सुरक्षित करने का तरीका, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा। फिलहाल, विंध्य की राजनीति का यह ऊंट किस करवट बैठेगा, इसका सस्पेंस बरकरार है।1