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चुरू शहर में भारी बारिश ने विकराल रूप ले लिया है। सफेद घंटाघर के पास के क्षेत्रों में बारिश का तांडव ऐसा रहा कि सड़कों पर पानी नदियों की तरह उफान पर आ गया, जिससे एक मार्मिक और हृदयविदारक दृश्य उत्पन्न हो गया।

5 hrs ago
user_Bhajan lal sharma
Bhajan lal sharma
Farmer चूरू, चूरू, राजस्थान•
5 hrs ago

चुरू शहर में भारी बारिश ने विकराल रूप ले लिया है। सफेद घंटाघर के पास के क्षेत्रों में बारिश का तांडव ऐसा रहा कि सड़कों पर पानी नदियों की तरह उफान पर आ गया, जिससे एक मार्मिक और हृदयविदारक दृश्य उत्पन्न हो गया।

More news from राजस्थान and nearby areas
  • झुंझुनूं में इलाई समाज द्वारा मोहर्रम की चांद तारीख पूरे उत्साह के साथ निकाली गई, जिसे मुस्लिम समाज में 'आलमसाद' के नाम से भी जाना जाता है। इस पावन अवसर पर, सभी मुस्लिम भाइयों ने ढोल-ताशे के साथ एकजुट होकर एक भव्य जमावड़ा किया और अपने नए साल के आगमन का गर्मजोशी से स्वागत किया, एक नई शुरुआत का शानदार आगाज करते हुए।
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    झुंझुनूं में इलाई समाज द्वारा मोहर्रम की चांद तारीख पूरे उत्साह के साथ निकाली गई, जिसे मुस्लिम समाज में 'आलमसाद' के नाम से भी जाना जाता है। इस पावन अवसर पर, सभी मुस्लिम भाइयों ने ढोल-ताशे के साथ एकजुट होकर एक भव्य जमावड़ा किया और अपने नए साल के आगमन का गर्मजोशी से स्वागत किया, एक नई शुरुआत का शानदार आगाज करते हुए।
    user_Saleem shekh
    Saleem shekh
    मंडावा, झुंझुनू, राजस्थान•
    9 hrs ago
  • चिड़ावा रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और बढ़ती चोरी तथा अन्य अप्रिय घटनाओं पर अंकुश लगाने की मांग को लेकर, रेलवे स्टेशन सलाहकार समिति के एक प्रतिनिधिमंडल ने पूर्व भाजपा नगर मंडल अध्यक्ष बाबूलाल वर्मा के नेतृत्व में स्टेशन अधीक्षक आजाद सिंह को ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में स्टेशन पर रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के कम से कम एक जवान की स्थायी नियुक्ति की प्रमुख मांग की गई है। प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि स्टेशन पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में यात्रियों की आवाजाही रहती है, लेकिन पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था न होने के कारण यात्रियों में असुरक्षा की भावना बढ़ रही है। इस पर स्टेशन अधीक्षक ने आश्वासन दिया कि ज्ञापन को उच्च अधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा। इस दौरान नरेंद्र सैनी, सोहनलाल वर्मा और कन्हैयालाल लाठ सहित अन्य सदस्य भी उपस्थित थे।
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    चिड़ावा रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और बढ़ती चोरी तथा अन्य अप्रिय घटनाओं पर अंकुश लगाने की मांग को लेकर, रेलवे स्टेशन सलाहकार समिति के एक प्रतिनिधिमंडल ने पूर्व भाजपा नगर मंडल अध्यक्ष बाबूलाल वर्मा के नेतृत्व में स्टेशन अधीक्षक आजाद सिंह को ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में स्टेशन पर रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के कम से कम एक जवान की स्थायी नियुक्ति की प्रमुख मांग की गई है। प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि स्टेशन पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में यात्रियों की आवाजाही रहती है, लेकिन पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था न होने के कारण यात्रियों में असुरक्षा की भावना बढ़ रही है। इस पर स्टेशन अधीक्षक ने आश्वासन दिया कि ज्ञापन को उच्च अधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा। इस दौरान नरेंद्र सैनी, सोहनलाल वर्मा और कन्हैयालाल लाठ सहित अन्य सदस्य भी उपस्थित थे।
    user_Amit Sharma
    Amit Sharma
    पत्रकार झुंझुनू, झुंझुनू, राजस्थान•
    8 hrs ago
  • मंडावा में नगर पालिका प्रशासन द्वारा सरकार के निर्देश पर शहरी सेवा शिविर वार्डवार आयोजित किए जा रहे हैं, इसके बावजूद कस्बे में हाईलैंड हाउस के पीछे वाले रास्ते की हालत बेहद खराब है। नालियों की साफ-सफाई न होने के कारण जगह-जगह गंदे पानी का भराव हो रखा है और रास्ते पर कचरा फैला हुआ है, जो स्वच्छता अभियान की पोल खोल रहा है। गंदगी और बदबू के चलते पैदल राहगीरों का निकलना दूभर हो गया है, और आने वाले मानसून से स्थिति के और खराब होने की आशंका है। ऐसा प्रतीत होता है कि नगरपालिका प्रशासन या तो सफाई अभियान को लेकर गंभीर नहीं है, या कर्मचारियों द्वारा वार्डवार निगरानी ठीक से नहीं हो रही है। हाईलैंड हाउस के पीछे की यह समस्या काफी पुरानी है; कपड़े रंगने वाले लोग रास्ते पर ही पानी बहाते हैं। इस समस्या के समाधान के लिए नगर पालिका ने पहले संबंधित लोगों को पाबंद करने और समाधान की बात कही थी, लेकिन धरातल पर आज तक कुछ नहीं हुआ। स्थानीय लोग गंदगी में रहने को मजबूर हैं। इसके साथ ही, इस रास्ते पर लोगों ने अवैध अतिक्रमण भी कर रखा है, जिससे मुख्य रास्ता संकरा हो गया है और आमजन को आवागमन में परेशानी उठानी पड़ रही है। परेशानी और समस्या की सुनवाई न होने के कारण लोगों में भारी आक्रोश है और वे यह मांग कर रहे हैं कि इस समस्या से आखिर कब तक निजात मिलेगी।
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    मंडावा में नगर पालिका प्रशासन द्वारा सरकार के निर्देश पर शहरी सेवा शिविर वार्डवार आयोजित किए जा रहे हैं, इसके बावजूद कस्बे में हाईलैंड हाउस के पीछे वाले रास्ते की हालत बेहद खराब है। नालियों की साफ-सफाई न होने के कारण जगह-जगह गंदे पानी का भराव हो रखा है और रास्ते पर कचरा फैला हुआ है, जो स्वच्छता अभियान की पोल खोल रहा है।

गंदगी और बदबू के चलते पैदल राहगीरों का निकलना दूभर हो गया है, और आने वाले मानसून से स्थिति के और खराब होने की आशंका है। ऐसा प्रतीत होता है कि नगरपालिका प्रशासन या तो सफाई अभियान को लेकर गंभीर नहीं है, या कर्मचारियों द्वारा वार्डवार निगरानी ठीक से नहीं हो रही है। हाईलैंड हाउस के पीछे की यह समस्या काफी पुरानी है; कपड़े रंगने वाले लोग रास्ते पर ही पानी बहाते हैं। इस समस्या के समाधान के लिए नगर पालिका ने पहले संबंधित लोगों को पाबंद करने और समाधान की बात कही थी, लेकिन धरातल पर आज तक कुछ नहीं हुआ।

स्थानीय लोग गंदगी में रहने को मजबूर हैं। इसके साथ ही, इस रास्ते पर लोगों ने अवैध अतिक्रमण भी कर रखा है, जिससे मुख्य रास्ता संकरा हो गया है और आमजन को आवागमन में परेशानी उठानी पड़ रही है। परेशानी और समस्या की सुनवाई न होने के कारण लोगों में भारी आक्रोश है और वे यह मांग कर रहे हैं कि इस समस्या से आखिर कब तक निजात मिलेगी।
    user_Jitender singh
    Jitender singh
    Artist Jhunjhunun, Rajasthan•
    11 hrs ago
  • बगड़ न्यूज़ द्वारा 23 जून 2026 को प्रसारित अपनी टॉप 10 खबरों की सुर्खियों के अनुसार, मोहर्रम के आयोजन से पहले एक सीएलजी (कम्युनिटी लाइजन ग्रुप) बैठक आयोजित की गई।
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    बगड़ न्यूज़ द्वारा 23 जून 2026 को प्रसारित अपनी टॉप 10 खबरों की सुर्खियों के अनुसार, मोहर्रम के आयोजन से पहले एक सीएलजी (कम्युनिटी लाइजन ग्रुप) बैठक आयोजित की गई।
    user_BAGAR NEWS RAJASTHAN
    BAGAR NEWS RAJASTHAN
    Media company झुंझुनू, झुंझुनू, राजस्थान•
    23 hrs ago
  • बीकानेर के श्री डूंगरगढ़ में पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस को कुछ ऐसे नोट मिले, जिन्हें देखकर वे खुद भी हैरान रह गए। असली नोटों के साथ कूट रचित नोट भी बरामद हुए, जो वास्तव में सिर्फ कागज के टुकड़े थे। पुलिस ने इन दो आरोपियों को दबोच लिया है।
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    बीकानेर के श्री डूंगरगढ़ में पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस को कुछ ऐसे नोट मिले, जिन्हें देखकर वे खुद भी हैरान रह गए। असली नोटों के साथ कूट रचित नोट भी बरामद हुए, जो वास्तव में सिर्फ कागज के टुकड़े थे। पुलिस ने इन दो आरोपियों को दबोच लिया है।
    user_News 7 NETWORK
    News 7 NETWORK
    पत्रकार श्रीडूंगरगढ़, बीकानेर, राजस्थान•
    7 hrs ago
  • भारत में स्वास्थ्य सेवाओं और दवाइयों का भारी खर्च आम आदमी की आर्थिक कमर तोड़ रहा है, जिससे कई परिवार कर्ज में डूब जाते हैं। खास तौर पर डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, हृदय रोग और थायरॉइड जैसी जीवनभर चलने वाली बीमारियों की दवाओं का बोझ बहुत अधिक होता है। इसी समस्या को हल करने और हर नागरिक को सस्ती व सुलभ स्वास्थ्य सेवाएँ मुहैया कराने के लिए भारत सरकार ने 'प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना' (PMBJP) शुरू की है। इसका मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी गरीब या मध्यम वर्गीय व्यक्ति पैसों की कमी के कारण दवाइयों से वंचित न रहे। जन औषधि केंद्रों पर मिलने वाली दवाइयाँ ब्रांडेड दवाओं की तुलना में 50% से 90% तक सस्ती होती हैं, लेकिन इनकी गुणवत्ता में कोई कमी नहीं होती। दवा का असली असर उसके अंदर मौजूद केमिकल फॉर्मूला यानी 'सॉल्ट' पर निर्भर करता है, न कि किसी बड़े ब्रांड नाम पर। जेनेरिक दवा बनाने वाली कंपनियों को रिसर्च, डेवलपमेंट और भारी मार्केटिंग पर करोड़ों रुपये खर्च नहीं करने पड़ते, जिसके कारण वे दवाइयाँ काफी कम कीमत पर उपलब्ध करा पाती हैं। जन औषधि केंद्रों पर उपलब्ध सभी दवाइयाँ विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस (GMP) द्वारा प्रमाणित कंपनियों से खरीदी जाती हैं। इन दवाओं के प्रत्येक बैच का NABL मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में कड़ा परीक्षण किया जाता है, जिससे उनकी शुद्धता और गुणवत्ता 100% सुनिश्चित होती है। यह योजना आम जनता के लिए बड़ी आर्थिक राहत लेकर आई है। उदाहरण के तौर पर, डायबिटीज की दवा ग्लिमेपिराइड + मेटफॉर्मिन बाजार में 100-150 रुपये में मिलती है, जबकि जन औषधि केंद्र पर यह 15-25 रुपये में उपलब्ध है। कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित करने वाली एटोरवास्टेटिन (10mg) ब्रांडेड रूप में 80-150 रुपये की आती है, वहीं जन औषधि में इसकी कीमत केवल 10-15 रुपये होती है। इसी प्रकार, गैस्ट्रिक के लिए पैंटोप्राजोल + डोमपेरिडोन (DSR) जो बाजार में 100-140 रुपये में मिलता है, जन औषधि में केवल 20-25 रुपये में उपलब्ध है। एंटीबायोटिक्स और विटामिन सप्लीमेंट्स जैसी दवाइयों में भी इसी तरह 50-90% तक की भारी बचत होती है। एक परिवार का मासिक मेडिकल बिल जो ब्रांडेड दवाओं पर 3000-5000 रुपये तक पहुँच सकता है, जन औषधि से मात्र 500-800 रुपये तक सीमित हो सकता है, जिससे हजारों रुपये की बचत होती है जिसका उपयोग शिक्षा या पोषण पर किया जा सकता है। प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में एक मौन क्रांति साबित हो रही है, जो देश के कोने-कोने में आशा की किरण फैला रही है। लोगों को जागरूक होने की आवश्यकता है और डॉक्टरों से पर्चे पर दवा का ब्रांड नाम लिखने के बजाय 'सॉल्ट का नाम' लिखने का आग्रह करना चाहिए। साथ ही, दवा खरीदते समय फार्मासिस्ट से जेनेरिक विकल्प की उपलब्धता के बारे में पूछना चाहिए। यह जागरूकता न केवल पैसे बचाएगी, बल्कि देश को एक स्वस्थ और आर्थिक रूप से मजबूत भविष्य की ओर भी ले जाएगी, क्योंकि जन औषधि का वादा है – सस्ती दवा, अच्छी दवा।
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    भारत में स्वास्थ्य सेवाओं और दवाइयों का भारी खर्च आम आदमी की आर्थिक कमर तोड़ रहा है, जिससे कई परिवार कर्ज में डूब जाते हैं। खास तौर पर डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, हृदय रोग और थायरॉइड जैसी जीवनभर चलने वाली बीमारियों की दवाओं का बोझ बहुत अधिक होता है। इसी समस्या को हल करने और हर नागरिक को सस्ती व सुलभ स्वास्थ्य सेवाएँ मुहैया कराने के लिए भारत सरकार ने 'प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना' (PMBJP) शुरू की है। इसका मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी गरीब या मध्यम वर्गीय व्यक्ति पैसों की कमी के कारण दवाइयों से वंचित न रहे।

जन औषधि केंद्रों पर मिलने वाली दवाइयाँ ब्रांडेड दवाओं की तुलना में 50% से 90% तक सस्ती होती हैं, लेकिन इनकी गुणवत्ता में कोई कमी नहीं होती। दवा का असली असर उसके अंदर मौजूद केमिकल फॉर्मूला यानी 'सॉल्ट' पर निर्भर करता है, न कि किसी बड़े ब्रांड नाम पर। जेनेरिक दवा बनाने वाली कंपनियों को रिसर्च, डेवलपमेंट और भारी मार्केटिंग पर करोड़ों रुपये खर्च नहीं करने पड़ते, जिसके कारण वे दवाइयाँ काफी कम कीमत पर उपलब्ध करा पाती हैं। जन औषधि केंद्रों पर उपलब्ध सभी दवाइयाँ विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस (GMP) द्वारा प्रमाणित कंपनियों से खरीदी जाती हैं। इन दवाओं के प्रत्येक बैच का NABL मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में कड़ा परीक्षण किया जाता है, जिससे उनकी शुद्धता और गुणवत्ता 100% सुनिश्चित होती है।

यह योजना आम जनता के लिए बड़ी आर्थिक राहत लेकर आई है। उदाहरण के तौर पर, डायबिटीज की दवा ग्लिमेपिराइड + मेटफॉर्मिन बाजार में 100-150 रुपये में मिलती है, जबकि जन औषधि केंद्र पर यह 15-25 रुपये में उपलब्ध है। कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित करने वाली एटोरवास्टेटिन (10mg) ब्रांडेड रूप में 80-150 रुपये की आती है, वहीं जन औषधि में इसकी कीमत केवल 10-15 रुपये होती है। इसी प्रकार, गैस्ट्रिक के लिए पैंटोप्राजोल + डोमपेरिडोन (DSR) जो बाजार में 100-140 रुपये में मिलता है, जन औषधि में केवल 20-25 रुपये में उपलब्ध है। एंटीबायोटिक्स और विटामिन सप्लीमेंट्स जैसी दवाइयों में भी इसी तरह 50-90% तक की भारी बचत होती है। एक परिवार का मासिक मेडिकल बिल जो ब्रांडेड दवाओं पर 3000-5000 रुपये तक पहुँच सकता है, जन औषधि से मात्र 500-800 रुपये तक सीमित हो सकता है, जिससे हजारों रुपये की बचत होती है जिसका उपयोग शिक्षा या पोषण पर किया जा सकता है।

प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में एक मौन क्रांति साबित हो रही है, जो देश के कोने-कोने में आशा की किरण फैला रही है। लोगों को जागरूक होने की आवश्यकता है और डॉक्टरों से पर्चे पर दवा का ब्रांड नाम लिखने के बजाय 'सॉल्ट का नाम' लिखने का आग्रह करना चाहिए। साथ ही, दवा खरीदते समय फार्मासिस्ट से जेनेरिक विकल्प की उपलब्धता के बारे में पूछना चाहिए। यह जागरूकता न केवल पैसे बचाएगी, बल्कि देश को एक स्वस्थ और आर्थिक रूप से मजबूत भविष्य की ओर भी ले जाएगी, क्योंकि जन औषधि का वादा है – सस्ती दवा, अच्छी दवा।
    user_जन औषधि केन्द्र अजीतगढ़
    जन औषधि केन्द्र अजीतगढ़
    Medical centre श्री माधोपुर, सीकर, राजस्थान•
    6 hrs ago
  • कुछ विशिष्ट जगहों से अतिक्रमण हटाए जाने की स्पष्ट मांग उठाई गई है। इस मुद्दे पर जनसामान्य की राय और टिप्पणियों को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया गया है। एक सामूहिक प्रयास किया जा रहा है ताकि सभी लोगों की यह महत्वपूर्ण राय और विचार प्रशासन तक प्रभावी ढंग से पहुँचाए जा सकें।
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    कुछ विशिष्ट जगहों से अतिक्रमण हटाए जाने की स्पष्ट मांग उठाई गई है। इस मुद्दे पर जनसामान्य की राय और टिप्पणियों को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया गया है। एक सामूहिक प्रयास किया जा रहा है ताकि सभी लोगों की यह महत्वपूर्ण राय और विचार प्रशासन तक प्रभावी ढंग से पहुँचाए जा सकें।
    user_Bhajan lal sharma
    Bhajan lal sharma
    Farmer चूरू, चूरू, राजस्थान•
    7 hrs ago
  • चुरू शहर में भारी बारिश ने विकराल रूप ले लिया है। सफेद घंटाघर के पास के क्षेत्रों में बारिश का तांडव ऐसा रहा कि सड़कों पर पानी नदियों की तरह उफान पर आ गया, जिससे एक मार्मिक और हृदयविदारक दृश्य उत्पन्न हो गया।
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    चुरू शहर में भारी बारिश ने विकराल रूप ले लिया है। सफेद घंटाघर के पास के क्षेत्रों में बारिश का तांडव ऐसा रहा कि सड़कों पर पानी नदियों की तरह उफान पर आ गया, जिससे एक मार्मिक और हृदयविदारक दृश्य उत्पन्न हो गया।
    user_Bhajan lal sharma
    Bhajan lal sharma
    Farmer चूरू, चूरू, राजस्थान•
    5 hrs ago
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