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तीजा तिहार में मायके पहुंची बेटियां,रखा निर्जला उपवास : करू भात से व्रत की शुरुआत.. शिव-पार्वती की पूजा कर मांगा सुखी दांपत्य और परिवार की खुशहाली का आशीर्वाद गरियाबंद। छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, परंपरा और पारिवारिक भावनाओं से गहराई से जुड़ा तीजा तिहार गरियाबंद जिले में श्रद्धा, आस्था और उल्लास के साथ मनाया गया। तीजा पर्व को लेकर गांवों से लेकर शहर तक घर-आंगन में उत्सव का माहौल रहा। ससुराल में रहने वाली विवाहित बेटियां तीजा मनाने अपने मायके पहुंचीं तो लंबे समय बाद बेटियों के घर लौटने से मायके में भी खुशी की रौनक दिखाई दी। कहीं भाई अपनी बहन को लेने ससुराल पहुंचे तो कहीं पिता ने बेटी को मायके लाकर तीजा की खुशियों में शामिल किया। तीजा तिहार छत्तीसगढ़ में केवल धार्मिक व्रत नहीं, बल्कि बेटी और मायके के बीच के अटूट स्नेह, भाई-बहन के प्रेम और पारिवारिक आत्मीयता का पर्व माना जाता है। यही वजह है कि तीजा के दिनों में मायके पहुंचे बेटियों के साथ घर-परिवार की पुरानी यादें भी ताजा हो जाती हैं। गांवों में तो तीजा की अलग ही रौनक देखने को मिली। महिलाएं एक-दूसरे के घर पहुंचकर पर्व की शुभकामनाएं देती नजर आईं और तीजा के पारंपरिक गीतों के बीच पर्व का उल्लास साझा किया। करू भात के साथ शुरू हुई तीजा की तैयारी तीजा पर्व की शुरुआत एक दिन पहले करू भात की परंपरा से होती है। महिलाओं ने करेले की सब्जी के साथ करू भात ग्रहण कर अगले दिन रखे जाने वाले कठिन व्रत की तैयारी की। करू भात के बाद महिलाएं तीजा के दिन निर्जला व्रत रखती हैं। पूरे दिन अन्न और जल का त्याग कर महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना करती हैं। सुबह से ही महिलाओं ने स्नान कर नये वस्त्र धारण किए और पारंपरिक श्रृंगार किया। कई घरों में पूजा के लिए विशेष तैयारियां की गईं। शिव-पार्वती की पूजा कर महिलाओं ने अपने पति की दीर्घायु, सुखी दांपत्य जीवन और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। तीजा पर्व की सबसे खास बात यह है कि विवाहित बेटियों को मायके बुलाने की परंपरा आज भी छत्तीसगढ़ के गांवों में पूरी आत्मीयता के साथ निभाई जाती है। सालभर अपने ससुराल में रहने वाली बेटियों के लिये तीजा मायके लौटने का विशेष अवसर होता है। बेटी के आने से मां के चेहरे पर खुशी और भाई-बहनों में उत्साह दिखाई देता है। कई परिवारों में बेटी के आने से पहले ही घर की साफ-सफाई, पकवान और अन्य तैयारियां शुरू हो जाती हैं। बेटी के पसंद के व्यंजन बनाए जाते हैं और उसके आने के बाद परिवार के सदस्य मिलकर पर्व की खुशियां मनाते हैं। महिलाओं ने कहा—तीजा सिर्फ व्रत नहीं, मायके से जुड़ने का अवसर तीजा पर्व को लेकर महिलाओं में खासा उत्साह रहा। गरियाबंद की एक महिला ने कहा कि तीजा हमारे लिए केवल व्रत और पूजा का पर्व नहीं है। इस दिन मायके आने की खुशी सबसे अलग होती है। सालभर ससुराल में रहने के बाद जब तीजा पर माता-पिता और भाई-बहनों से मिलने का मौका मिलता है तो बचपन की यादें ताजा हो जाती हैं। व्रत के साथ परिवार के साथ समय बिताना ही इस पर्व को खास बनाता है। महिलाओं ने साझा की तीजा की खुशी गारियाबंद में महिलाओं ने छत्तीसगढ़ी बोली में कहा कि “तीजा के दिन मायके आने के खुशी अलग ही रहिथे। सालभर ससुराल म रहिथन, लेकिन तीजा म जब घर वाले लाने बर आथें, त मन म बहुत खुशी होथे। मया-ममता, परिवार के संग बैठना अउ बचपन के दिन याद आ जाना, ये सब तीजा के खुशी ल अउ बढ़ा देथे। हमन ल तीजा के हर साल बेसब्री से इंतजार रहिथे। करू भात खाके दूसरे दिन निर्जला व्रत रखथन अउ शिव-पार्वती जी के पूजा करके परिवार के सुख-समृद्धि के कामना करथन। तीजा हमर बर सिरिफ व्रत नइ, बल्कि मायके अउ परिवार से जुड़ने के एक खास मौका आय।” आजकल समय बहुत बदल गे हे, लेकिन तीजा के परंपरा अभी घलो वैसे ही बने हे। बेटी के तीजा म मायके आना अउ घर म चहल-पहल होना बहुत सुखद लगथे। हम चाहथन कि हमर आने वाली पीढ़ी भी छत्तीसगढ़ के ये सुंदर परंपरा अउ तीजा के महत्व ल समझे अउ आगे बढ़ाए।” इसी प्रकार जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में तीजा पर्व की पारंपरिक रंगत विशेष रूप से देखने को मिली। महिलाएं सोलह श्रृंगार कर पूजा-अर्चना में शामिल हुईं। कई जगहों पर महिलायें समूह में एकत्र हुईं और तीजा से जुड़ी परंपराओं तथा लोकगीतों के माध्यम से पर्व का आनंद लिया। बुजुर्ग महिलाओं ने नई पीढ़ी की महिलाओं और बेटियों को तीजा की परंपराओं और रीति-रिवाजों के बारे में बताया। इस तरह पर्व ने केवल धार्मिक आस्था को ही नहीं, बल्कि पीढ़ियों के बीच छत्तीसगढ़ी संस्कृति और परंपराओं को आगे बढ़ाने का काम भी किया है। तीजा के अवसर पर मायके पहुंची बेटियों के कारण घर-आंगन में विशेष चहल-पहल रही। कहीं मां अपनी बेटी के लिए पसंद के पकवान बनाती नजर आईं तो कहीं भाई अपनी बहन के साथ बचपन की यादें साझा करते दिखे। रिश्तेदारों के आने-जाने से भी घरों में उत्सव जैसा माहौल रहा।

13 hrs ago
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Www.Chirghar.com
पत्रकार Bindranavagarh(Gariyaband), Chhattisgarh•
13 hrs ago
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तीजा तिहार में मायके पहुंची बेटियां,रखा निर्जला उपवास : करू भात से व्रत की शुरुआत.. शिव-पार्वती की पूजा कर मांगा सुखी दांपत्य और परिवार की खुशहाली का आशीर्वाद गरियाबंद। छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, परंपरा और पारिवारिक भावनाओं से गहराई से जुड़ा तीजा तिहार गरियाबंद जिले में श्रद्धा, आस्था और उल्लास के साथ मनाया गया। तीजा पर्व को लेकर गांवों से लेकर शहर तक घर-आंगन में उत्सव का माहौल रहा। ससुराल में रहने वाली विवाहित बेटियां तीजा मनाने अपने मायके पहुंचीं तो लंबे समय बाद बेटियों के घर लौटने से मायके में भी खुशी की रौनक दिखाई दी। कहीं भाई अपनी बहन को लेने ससुराल पहुंचे तो कहीं पिता ने बेटी को मायके लाकर तीजा की खुशियों में शामिल किया। तीजा तिहार छत्तीसगढ़ में केवल धार्मिक व्रत नहीं, बल्कि बेटी और मायके के बीच के अटूट स्नेह, भाई-बहन के प्रेम और पारिवारिक आत्मीयता का पर्व माना जाता है। यही वजह है कि तीजा के दिनों में मायके पहुंचे बेटियों के साथ घर-परिवार की पुरानी यादें भी ताजा हो जाती हैं। गांवों में तो तीजा की अलग ही रौनक देखने को मिली। महिलाएं एक-दूसरे के घर पहुंचकर पर्व की शुभकामनाएं देती नजर आईं और तीजा के पारंपरिक गीतों के बीच पर्व का उल्लास साझा किया। करू भात के साथ शुरू हुई तीजा की तैयारी तीजा पर्व की शुरुआत एक दिन पहले करू भात की परंपरा से होती है। महिलाओं ने करेले की सब्जी के साथ करू भात ग्रहण कर अगले दिन रखे जाने वाले कठिन व्रत की तैयारी की। करू भात के बाद महिलाएं तीजा के दिन निर्जला व्रत रखती हैं। पूरे दिन अन्न और जल का त्याग कर महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना करती हैं। सुबह से ही महिलाओं ने स्नान कर नये वस्त्र धारण किए और पारंपरिक श्रृंगार किया। कई घरों में पूजा के लिए विशेष तैयारियां की गईं। शिव-पार्वती की पूजा कर महिलाओं ने अपने पति की दीर्घायु, सुखी दांपत्य जीवन और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। तीजा पर्व की सबसे खास बात यह है कि विवाहित बेटियों को मायके बुलाने की परंपरा आज भी छत्तीसगढ़ के गांवों में पूरी आत्मीयता के साथ निभाई जाती है। सालभर अपने ससुराल में रहने वाली बेटियों के लिये तीजा मायके लौटने का विशेष अवसर होता है। बेटी के आने से मां के चेहरे पर खुशी और भाई-बहनों में उत्साह दिखाई देता है। कई परिवारों में बेटी के आने से पहले ही घर की साफ-सफाई, पकवान और अन्य तैयारियां शुरू हो जाती हैं। बेटी के पसंद के व्यंजन बनाए जाते हैं

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और उसके आने के बाद परिवार के सदस्य मिलकर पर्व की खुशियां मनाते हैं। महिलाओं ने कहा—तीजा सिर्फ व्रत नहीं, मायके से जुड़ने का अवसर तीजा पर्व को लेकर महिलाओं में खासा उत्साह रहा। गरियाबंद की एक महिला ने कहा कि तीजा हमारे लिए केवल व्रत और पूजा का पर्व नहीं है। इस दिन मायके आने की खुशी सबसे अलग होती है। सालभर ससुराल में रहने के बाद जब तीजा पर माता-पिता और भाई-बहनों से मिलने का मौका मिलता है तो बचपन की यादें ताजा हो जाती हैं। व्रत के साथ परिवार के साथ समय बिताना ही इस पर्व को खास बनाता है। महिलाओं ने साझा की तीजा की खुशी गारियाबंद में महिलाओं ने छत्तीसगढ़ी बोली में कहा कि “तीजा के दिन मायके आने के खुशी अलग ही रहिथे। सालभर ससुराल म रहिथन, लेकिन तीजा म जब घर वाले लाने बर आथें, त मन म बहुत खुशी होथे। मया-ममता, परिवार के संग बैठना अउ बचपन के दिन याद आ जाना, ये सब तीजा के खुशी ल अउ बढ़ा देथे। हमन ल तीजा के हर साल बेसब्री से इंतजार रहिथे। करू भात खाके दूसरे दिन निर्जला व्रत रखथन अउ शिव-पार्वती जी के पूजा करके परिवार के सुख-समृद्धि के कामना करथन। तीजा हमर बर सिरिफ व्रत नइ, बल्कि मायके अउ परिवार से जुड़ने के एक खास मौका आय।” आजकल समय बहुत बदल गे हे, लेकिन तीजा के परंपरा अभी घलो वैसे ही बने हे। बेटी के तीजा म मायके आना अउ घर म चहल-पहल होना बहुत सुखद लगथे। हम चाहथन कि हमर आने वाली पीढ़ी भी छत्तीसगढ़ के ये सुंदर परंपरा अउ तीजा के महत्व ल समझे अउ आगे बढ़ाए।” इसी प्रकार जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में तीजा पर्व की पारंपरिक रंगत विशेष रूप से देखने को मिली। महिलाएं सोलह श्रृंगार कर पूजा-अर्चना में शामिल हुईं। कई जगहों पर महिलायें समूह में एकत्र हुईं और तीजा से जुड़ी परंपराओं तथा लोकगीतों के माध्यम से पर्व का आनंद लिया। बुजुर्ग महिलाओं ने नई पीढ़ी की महिलाओं और बेटियों को तीजा की परंपराओं और रीति-रिवाजों के बारे में बताया। इस तरह पर्व ने केवल धार्मिक आस्था को ही नहीं, बल्कि पीढ़ियों के बीच छत्तीसगढ़ी संस्कृति और परंपराओं को आगे बढ़ाने का काम भी किया है। तीजा के अवसर पर मायके पहुंची बेटियों के कारण घर-आंगन में विशेष चहल-पहल रही। कहीं मां अपनी बेटी के लिए पसंद के पकवान बनाती नजर आईं तो कहीं भाई अपनी बहन के साथ बचपन की यादें साझा करते दिखे। रिश्तेदारों के आने-जाने से भी घरों में उत्सव जैसा माहौल रहा।

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    ऋषि पंचमी पर निकली साँपों की शोभायात्रा,

ढोल और नगाड़े की थाप पर सांवरा समाज के लोग निकालते हैं शोभायात्रा,
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गुरु साँवरा पाठशाला में होता है साल भर होता है सर्प दंश के उपचार का प्रशिक्षण,
ऋषि पंचमी पर होता हैं दीक्षांत समारोह,
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वर्षों से ऋषि पंचमी के दिन होते आ रहा है आयोजन,
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    user_नागेन्द्र निषाद
    नागेन्द्र निषाद
    राजिम, गरियाबंद, छत्तीसगढ़•
    10 hrs ago
  • त्योहारी सीजन में यातायात व्यवस्था को लेकर पुलिस-व्यापारी बैठक बाजारों में बढ़ते यातायात दबाव और पार्किंग पर चर्चा, पुलिस ने किया पैदल पेट्रोलिंग धमतरी। आगामी त्योहारी सीजन में शहर की यातायात व्यवस्था सुगम एवं व्यवस्थित रखने पुलिस और व्यापारी संघ की बैठक हुई। एसपी भावना पांडेय के निर्देश पर एएसपी डीसी पटेल एवं डीएसपी साइबर भानू प्रताप चंद्राकर ने व्यापारियों से यातायात व्यवस्था को लेकर सुझाव लिए। बाजार क्षेत्रों में बढ़ने वाली भीड़, पार्किंग, प्रमुख चौक-चौराहों और आमजन की सुविधा पर चर्चा हुई। पुलिस एवं व्यापारियों ने आपसी समन्वय से व्यवस्था बनाए रखने पर सहमति जताई। बैठक के बाद पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने मकई चौक से सदर बाजार होते हुए इतवारी बाजार तक पैदल पेट्रोलिंग की। इस दौरान यातायात दबाव वाले स्थानों का जायजा लेकर आवश्यक व्यवस्थाओं पर चर्चा की गई। पुलिस ने त्योहारी दिनों में बाजार क्षेत्रों में विशेष निगरानी, आवश्यकतानुसार पुलिस बल की तैनाती और यातायात नियंत्रण की व्यवस्था प्रभावी करने की बात कही। व्यापारियों से दुकानों के सामने अनावश्यक वाहन खड़े नहीं करने और यातायात व्यवस्था में सहयोग की अपील की गई। बैठक में व्यापारी संघ के पदाधिकारी एवं पुलिस अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।
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    त्योहारी सीजन में यातायात व्यवस्था को लेकर पुलिस-व्यापारी बैठक
बाजारों में बढ़ते यातायात दबाव और पार्किंग पर चर्चा, पुलिस ने किया पैदल पेट्रोलिंग
धमतरी। आगामी त्योहारी सीजन में शहर की यातायात व्यवस्था सुगम एवं व्यवस्थित रखने पुलिस और व्यापारी संघ की बैठक हुई। एसपी भावना पांडेय के निर्देश पर एएसपी डीसी पटेल एवं डीएसपी साइबर भानू प्रताप चंद्राकर ने व्यापारियों से यातायात व्यवस्था को लेकर सुझाव लिए। बाजार क्षेत्रों में बढ़ने वाली भीड़, पार्किंग, प्रमुख चौक-चौराहों और आमजन की सुविधा पर चर्चा हुई। पुलिस एवं व्यापारियों ने आपसी समन्वय से व्यवस्था बनाए रखने पर सहमति जताई।
बैठक के बाद पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने मकई चौक से सदर बाजार होते हुए इतवारी बाजार तक पैदल पेट्रोलिंग की। इस दौरान यातायात दबाव वाले स्थानों का जायजा लेकर आवश्यक व्यवस्थाओं पर चर्चा की गई। पुलिस ने त्योहारी दिनों में बाजार क्षेत्रों में विशेष निगरानी, आवश्यकतानुसार पुलिस बल की तैनाती और यातायात नियंत्रण की व्यवस्था प्रभावी करने की बात कही। व्यापारियों से दुकानों के सामने अनावश्यक वाहन खड़े नहीं करने और यातायात व्यवस्था में सहयोग की अपील की गई। बैठक में व्यापारी संघ के पदाधिकारी एवं पुलिस अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।
    user_यशवंत गंजीर
    यशवंत गंजीर
    Local News Reporter धमतरी, धमतरी, छत्तीसगढ़•
    10 hrs ago
  • *✰कौन हैं आदि गणेश और उनकी वास्तविक भक्ति विधि क्या है?✰* अधिक जानकारी के लिए अवश्य देखिए *SANT RAMPAL JI MAHARAJ* YouTube Channel *✰कौन हैं आदि गणेश और उनकी वास्तविक भक्ति विधि क्या है?✰* अधिक जानकारी के लिए अवश्य देखिए *SANT RAMPAL JI MAHARAJ* YouTube Channel
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    *✰कौन हैं आदि गणेश और उनकी वास्तविक भक्ति विधि क्या है?✰*

अधिक जानकारी के लिए अवश्य देखिए *SANT RAMPAL JI MAHARAJ* YouTube Channel
*✰कौन हैं आदि गणेश और उनकी वास्तविक भक्ति विधि क्या है?✰*
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    user_सतभक्ति संदेश
    सतभक्ति संदेश
    Fraternal organization केसकाल, कोंडागांव, छत्तीसगढ़•
    5 hrs ago
  • भेजामैदानी मे सामूहिक रूप से मनाया गया तीज महोत्सव, 1 हजार महिलाओ को खिलाया गया करुभात हरतालिका तीजा पर्व के एक दिन पहले महिलाओं द्वारा सामूहिक रूप से करेला और चावल करू भात खाकर व्रत का संकल्प लेने की परंपरा है,ऐसे मे यहां भी युवा संगठन और ग्रामवासियों के सहयोग से लगभग 1 हजार महिलाओ को सामूहिक रूप से करुभात खिलाया गया। छत्तीसगढ़ी बोली मे करू का अर्थ कड़वा यानि करेला और भात का अर्थ पके हुए चावल से है। तीजा के निर्जला उपवास को शुरू करने से पहले महिलाएं कड़वा भोजन खाकर जीवन के कड़वे अनुभवों को स्वीकारने और व्रत का संकल्प लेती है। यह आयोजन तीजा पोला मिलन समारोह के रूप मे भी मनाया जाता है, जिससे महिलाओ मे आपसी भाईचारा और सांस्कृतिक जुड़ाव बढ़ता है। महिलाओं ने बताया कि तीज महोत्सव मुख्य रूप से महिलाओं द्वारा मनाया जाने वाला एक पारंपरिक और सांस्कृतिक त्योहार है, जो भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन को समर्पित है। इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की दीर्घायु और सुख समृद्धि के लिए बिना अन्न जल ग्रहण किए निर्जला व्रत रखती है।
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    भेजामैदानी मे सामूहिक रूप से मनाया गया तीज महोत्सव,  1 हजार महिलाओ को खिलाया गया करुभात 
हरतालिका तीजा पर्व के एक दिन पहले महिलाओं द्वारा सामूहिक रूप से करेला और चावल करू भात खाकर व्रत का संकल्प लेने की परंपरा है,ऐसे मे यहां भी युवा संगठन और ग्रामवासियों के सहयोग से लगभग 1 हजार महिलाओ को सामूहिक रूप से करुभात खिलाया गया। छत्तीसगढ़ी बोली मे करू का अर्थ कड़वा यानि करेला और भात का अर्थ पके हुए चावल से है। तीजा के निर्जला उपवास को शुरू करने से पहले महिलाएं कड़वा भोजन खाकर जीवन के कड़वे अनुभवों को स्वीकारने और व्रत का संकल्प लेती है। यह आयोजन तीजा पोला मिलन समारोह के रूप मे भी मनाया जाता है, जिससे महिलाओ मे आपसी भाईचारा और सांस्कृतिक जुड़ाव बढ़ता है। महिलाओं ने बताया कि तीज महोत्सव मुख्य रूप से महिलाओं द्वारा मनाया जाने वाला एक पारंपरिक और सांस्कृतिक त्योहार है, जो भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन को समर्पित है। इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की दीर्घायु और सुख समृद्धि के लिए बिना अन्न जल ग्रहण किए निर्जला व्रत रखती है।
    user_खोमेश्वर गुरुपंच
    खोमेश्वर गुरुपंच
    Voice of people गुरुर, बालोद, छत्तीसगढ़•
    17 hrs ago
  • कोंडागांव: दूरस्थ ग्राम खड़पड़ी में राष्ट्रीय पोषण माह के तहत जनजागरूकता कार्यक्रम, ग्रामीणों को दिया स्वस्थ जीवन का संदेश कोंडागांव के दूरस्थ ग्राम खड़पड़ी में 9वें राष्ट्रीय पोषण माह के तहत विशेष जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में स्वस्थ शिशु प्रतियोगिता, महिलाओं के लिए कुर्सी दौड़ और प्रश्न मंच जैसी गतिविधियों के माध्यम से ग्रामीणों को संतुलित आहार, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, एनीमिया और कुपोषण से बचाव के प्रति जागरूक किया गया। महिला एवं बाल विकास विभाग के पोषण आहार स्टॉल में स्थानीय खाद्य पदार्थों से पौष्टिक भोजन तैयार करने की जानकारी भी दी गई।
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    कोंडागांव: दूरस्थ ग्राम खड़पड़ी में राष्ट्रीय पोषण माह के तहत जनजागरूकता कार्यक्रम, ग्रामीणों को दिया स्वस्थ जीवन का संदेश
कोंडागांव के दूरस्थ ग्राम खड़पड़ी में 9वें राष्ट्रीय पोषण माह के तहत विशेष जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में स्वस्थ शिशु प्रतियोगिता, महिलाओं के लिए कुर्सी दौड़ और प्रश्न मंच जैसी गतिविधियों के माध्यम से ग्रामीणों को संतुलित आहार, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, एनीमिया और कुपोषण से बचाव के प्रति जागरूक किया गया।
महिला एवं बाल विकास विभाग के पोषण आहार स्टॉल में स्थानीय खाद्य पदार्थों से पौष्टिक भोजन तैयार करने की जानकारी भी दी गई।
    user_Tomesh Rana
    Tomesh Rana
    Local News Reporter फरसगाँव, कोंडागांव, छत्तीसगढ़•
    5 hrs ago
  • लखनपुरी स्कूल से 290 किलो सरिया चोरी करने वाले चोर को पुलिस ने पकड़ा 15 सितंबर शाम 6 बजे जिला पुलिस मुख्यालय से मिली जानकारी अनुसार,लखनपुरी के शासकीय प्राथमिक स्कूल से करीब, 300 किलो लोहे का सरिया चोरी करने वाले ईतवारी मण्डावी उम्र 38 वर्ष निवासी दल्लीराजहरा,हाल लखनपुरी, थाना चारामा को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपी से 290 किलो सरिया, पिकअप वाहन और कटर मशीन समेत 4 लाख 38 हजार रुपए की संपत्ति बरामद की। 6 सितंबर को रिपोर्ट के बाद पुलिस ने,100 से अधिक संदिग्धों से पूछताछ की। मुखबिर की सूचना पर आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई, जिसमें उसने चोरी कबूल की। सरिया कटर मशीन से काटकर घर में छिपाया गया था। कार्रवाई में निरीक्षक सुरेश कुमार राठौर, प्रशिक्षु उपनिरीक्षक हेमंत मार्गिया, आरक्षक तरुण सिन्हा, भागीरथी मण्डावी और सहायक आरक्षक शंकर खुंटे शामिल रहे।
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    लखनपुरी स्कूल से 290 किलो सरिया चोरी करने वाले चोर को पुलिस ने पकड़ा
15 सितंबर शाम 6 बजे जिला पुलिस मुख्यालय से मिली जानकारी अनुसार,लखनपुरी के शासकीय प्राथमिक स्कूल से करीब, 300 किलो लोहे का सरिया चोरी करने वाले ईतवारी मण्डावी उम्र 38 वर्ष निवासी दल्लीराजहरा,हाल लखनपुरी, थाना चारामा को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपी से 290 किलो सरिया, पिकअप वाहन और कटर मशीन समेत 4 लाख 38 हजार रुपए की संपत्ति बरामद की।
6 सितंबर को रिपोर्ट के बाद पुलिस ने,100 से अधिक संदिग्धों से पूछताछ की। मुखबिर की सूचना पर आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई, जिसमें उसने चोरी कबूल की। सरिया कटर मशीन से काटकर घर में छिपाया गया था।
कार्रवाई में निरीक्षक सुरेश कुमार राठौर, प्रशिक्षु उपनिरीक्षक हेमंत मार्गिया, आरक्षक तरुण सिन्हा, भागीरथी मण्डावी और सहायक आरक्षक शंकर खुंटे शामिल रहे।
    user_Ashish parihar
    Ashish parihar
    कांकेर, कांकेर, छत्तीसगढ़•
    9 hrs ago
  • गौर-गौरी विसर्जन के साथ हरितालिका तीज का समापन, दुर्गूकोंदल से लेकर गांवों तक दिखी आस्था और उल्लास की तस्वीर निर्जला व्रत, सोलह शृंगार और तीज गीतों से सजा अंचल गौर-गौरी विसर्जन के साथ हरितालिका तीज का समापन, दुर्गूकोंदल से लेकर गांवों तक दिखी आस्था और उल्लास की तस्वीर कांकेर। सोलह शृंगार में सजी महिलाएं, हाथों में रची मेहंदी, तीज के पारंपरिक गीत और शिव-पार्वती के जयकारे... हरितालिका तीज पर दुर्गूकोंदल अंचल का माहौल आस्था और उल्लास से सराबोर रहा। पति की दीर्घायु, अखंड सौभाग्य और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना को लेकर सुहागिन महिलाओं ने पूरे दिन निर्जला व्रत रखा। पूजा-अर्चना और रातभर चले भजन-कीर्तन के बाद दूसरे दिन गौर-गौरी विसर्जन के साथ पर्व का पारंपरिक समापन हुआ। दुर्गूकोंदल सहित हाटकोंदल, कोदापाखा और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में तीज को लेकर कई दिन पहले से तैयारियां शुरू हो गई थीं। महिलाओं ने रेत और मिट्टी से शिवलिंग के साथ गौर-गौरी की प्रतीक प्रतिमाएं तैयार कीं। पूजा स्थलों को सजाया गया और दीप प्रज्वलित कर भगवान शिव एवं माता पार्वती की विधिवत पूजा की गई। फल और पारंपरिक व्यंजनों का भोग अर्पित कर परिवार की खुशहाली की कामना की गई। कड़ू भात के बाद शुरू हुआ निर्जला व्रत छत्तीसगढ़ में हरितालिका तीज को आम बोलचाल में ‘तीजा’ कहा जाता है। पर्व की शुरुआत व्रत से पहले कड़ू भात खाने की परंपरा से होती है। इसके बाद महिलाएं अन्न-जल त्यागकर शिव-पार्वती की आराधना में लीन हो जाती हैं। दुर्गूकोंदल क्षेत्र में खासकर नवविवाहित महिलाओं में तीज को लेकर खासा उत्साह रहा। सखी-सहेलियों के साथ महिलाओं ने मिलकर तैयारियां कीं। सोलह शृंगार कर पारंपरिक परिधानों में सजी महिलाओं ने पूजा-अर्चना की। कई जगह रातभर भजन-कीर्तन और तीज के पारंपरिक गीतों का दौर चलता रहा। भोर होते ही शुरू हुआ विसर्जन तीजा के दूसरे दिन सुबह करीब 5 बजे से फुलेरा विसर्जन और पूजा-अर्चना का सिलसिला शुरू हुआ। अनुष्ठान पूरा होने के बाद महिलाओं ने व्रत का पारण किया। इसके बाद गौर-गौरी की प्रतिमाएं और पूजा सामग्री लेकर महिलाएं नदी एवं तालाबों के किनारे पहुंचीं। विसर्जन के दौरान तीज गीतों और शिव-पार्वती के जयकारों से घाट गूंज उठे। नदी-तालाबों के किनारे श्रद्धालुओं की भीड़ और पारंपरिक रीति-रिवाजों ने पर्व के माहौल को और खास बना दिया। नवविवाहित महिलाओं में अपने पहले तीज व्रत को लेकर विशेष उत्साह नजर आया। धार्मिक मान्यता के अनुसार सुहागिन महिलाएं अखंड सौभाग्य और सुखी दांपत्य जीवन की कामना से यह व्रत रखती हैं, जबकि अविवाहित युवतियां मनचाहे वर की कामना करती हैं। सुरक्षा के बीच शांतिपूर्ण रहा विसर्जन गौर-गौरी विसर्जन को लेकर पुलिस और प्रशासन ने नदी-तालाब क्षेत्रों में सुरक्षा के आवश्यक इंतजाम किए थे। श्रद्धालुओं की आवाजाही और विसर्जन के दौरान व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात रहा। सुरक्षा व्यवस्था के बीच विसर्जन कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। हरितालिका तीज ने एक बार फिर अंचल में आस्था, लोकपरंपरा, पारिवारिक जुड़ाव और छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति की जीवंत तस्वीर पेश की।
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    गौर-गौरी विसर्जन के साथ हरितालिका तीज का समापन, दुर्गूकोंदल से लेकर गांवों तक दिखी आस्था और उल्लास की तस्वीर
निर्जला व्रत, सोलह शृंगार और तीज गीतों से सजा अंचल
गौर-गौरी विसर्जन के साथ हरितालिका तीज का समापन, दुर्गूकोंदल से लेकर गांवों तक दिखी आस्था और उल्लास की तस्वीर
कांकेर।  सोलह शृंगार में सजी महिलाएं, हाथों में रची मेहंदी, तीज के पारंपरिक गीत और शिव-पार्वती के जयकारे... हरितालिका तीज पर दुर्गूकोंदल अंचल का माहौल आस्था और उल्लास से सराबोर रहा। पति की दीर्घायु, अखंड सौभाग्य और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना को लेकर सुहागिन महिलाओं ने पूरे दिन निर्जला व्रत रखा। पूजा-अर्चना और रातभर चले भजन-कीर्तन के बाद दूसरे दिन गौर-गौरी विसर्जन के साथ पर्व का पारंपरिक समापन हुआ।
दुर्गूकोंदल सहित हाटकोंदल, कोदापाखा और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में तीज को लेकर कई दिन पहले से तैयारियां शुरू हो गई थीं। महिलाओं ने रेत और मिट्टी से शिवलिंग के साथ गौर-गौरी की प्रतीक प्रतिमाएं तैयार कीं। पूजा स्थलों को सजाया गया और दीप प्रज्वलित कर भगवान शिव एवं माता पार्वती की विधिवत पूजा की गई। फल और पारंपरिक व्यंजनों का भोग अर्पित कर परिवार की खुशहाली की कामना की गई।
कड़ू भात के बाद शुरू हुआ निर्जला व्रत
छत्तीसगढ़ में हरितालिका तीज को आम बोलचाल में ‘तीजा’ कहा जाता है। पर्व की शुरुआत व्रत से पहले कड़ू भात खाने की परंपरा से होती है। इसके बाद महिलाएं अन्न-जल त्यागकर शिव-पार्वती की आराधना में लीन हो जाती हैं।
दुर्गूकोंदल क्षेत्र में खासकर नवविवाहित महिलाओं में तीज को लेकर खासा उत्साह रहा। सखी-सहेलियों के साथ महिलाओं ने मिलकर तैयारियां कीं। सोलह शृंगार कर पारंपरिक परिधानों में सजी महिलाओं ने पूजा-अर्चना की। कई जगह रातभर भजन-कीर्तन और तीज के पारंपरिक गीतों का दौर चलता रहा।
भोर होते ही शुरू हुआ विसर्जन
तीजा के दूसरे दिन सुबह करीब 5 बजे से फुलेरा विसर्जन और पूजा-अर्चना का सिलसिला शुरू हुआ। अनुष्ठान पूरा होने के बाद महिलाओं ने व्रत का पारण किया। इसके बाद गौर-गौरी की प्रतिमाएं और पूजा सामग्री लेकर महिलाएं नदी एवं तालाबों के किनारे पहुंचीं।
विसर्जन के दौरान तीज गीतों और शिव-पार्वती के जयकारों से घाट गूंज उठे। नदी-तालाबों के किनारे श्रद्धालुओं की भीड़ और पारंपरिक रीति-रिवाजों ने पर्व के माहौल को और खास बना दिया। नवविवाहित महिलाओं में अपने पहले तीज व्रत को लेकर विशेष उत्साह नजर आया।
धार्मिक मान्यता के अनुसार सुहागिन महिलाएं अखंड सौभाग्य और सुखी दांपत्य जीवन की कामना से यह व्रत रखती हैं, जबकि अविवाहित युवतियां मनचाहे वर की कामना करती हैं।
सुरक्षा के बीच शांतिपूर्ण रहा विसर्जन
गौर-गौरी विसर्जन को लेकर पुलिस और प्रशासन ने नदी-तालाब क्षेत्रों में सुरक्षा के आवश्यक इंतजाम किए थे। श्रद्धालुओं की आवाजाही और विसर्जन के दौरान व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात रहा। सुरक्षा व्यवस्था के बीच विसर्जन कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
हरितालिका तीज ने एक बार फिर अंचल में आस्था, लोकपरंपरा, पारिवारिक जुड़ाव और छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति की जीवंत तस्वीर पेश की।
    user_Tokeshwar sahu
    Tokeshwar sahu
    Local News Reporter कांकेर, कांकेर, छत्तीसगढ़•
    10 hrs ago
  • त्योहारी सीजन में यातायात व्यवस्था को लेकर पुलिस-व्यापारी संघ की बैठक बाजारों में भीड़ और पार्किंग व्यवस्था पर चर्चा, मकई चौक से इतवारी बाजार तक पुलिस ने की पैदल पेट्रोलिंग धमतरी। आगामी त्योहारी सीजन को देखते हुए शहर में सुगम, सुरक्षित एवं व्यवस्थित यातायात व्यवस्था सुनिश्चित करने पुलिस ने व्यापारी संघ के पदाधिकारियों के साथ बैठक की। पुलिस अधीक्षक भावना पांडेय के निर्देश पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डीसी पटेल एवं डीएसपी साइबर भानू प्रताप चंद्राकर की मौजूदगी में आयोजित बैठक में बाजार क्षेत्रों में बढ़ने वाले यातायात दबाव, पार्किंग, भीड़भाड़ और आमजन एवं व्यापारियों की सुविधा से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई। व्यापारियों से लिए सुझाव, आपसी समन्वय पर बनी सहमति बैठक में व्यापारी संघ के पदाधिकारियों ने यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए विभिन्न व्यावहारिक सुझाव दिए। पुलिस अधिकारियों ने सुझावों पर चर्चा करते हुए त्योहारी दिनों में बाजार क्षेत्रों में बढ़ने वाली भीड़ को देखते हुए पुलिस और व्यापारियों के बीच समन्वय एवं सहयोग से व्यवस्था बनाए रखने पर सहमति जताई। व्यापारियों से दुकानों के सामने अनावश्यक वाहन खड़े नहीं होने देने तथा यातायात व्यवस्था में सहयोग की अपील की गई। बैठक के बाद एएसपी डीसी पटेल, डीएसपी साइबर भानू प्रताप चंद्राकर सहित पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने मकई चौक से सदर बाजार होते हुए इतवारी बाजार तक पैदल पेट्रोलिंग की। इस दौरान प्रमुख मार्गों, चौक-चौराहों और भीड़भाड़ वाले स्थानों का जायजा लेकर यातायात दबाव वाले क्षेत्रों को चिन्हांकित किया गया। पुलिस ने बताया कि त्योहारी अवधि में बाजारों में विशेष निगरानी रखी जाएगी। आवश्यकता के अनुसार पुलिस बल की तैनाती, पेट्रोलिंग और यातायात नियंत्रण की व्यवस्था प्रभावी की जाएगी। बैठक में थाना प्रभारी कोतवाली निरीक्षक राजेश जगत, केआर साहू, कैट जिलाध्यक्ष महेश जसूजा, घड़ी चौक व्यापारी संघ अध्यक्ष ज्ञानचंद लूनावत, सराफा एसोसिएशन अध्यक्ष ललित बरडिया, राजू पंजवानी, चेतन हिंदुजा, कल्याण मुलवानी, देवा अन्दानी, संजय लुंकड़ सहित व्यापारी एवं पुलिस अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।
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    त्योहारी सीजन में यातायात व्यवस्था को लेकर पुलिस-व्यापारी संघ की बैठक
बाजारों में भीड़ और पार्किंग व्यवस्था पर चर्चा, मकई चौक से इतवारी बाजार तक पुलिस ने की पैदल पेट्रोलिंग
धमतरी। आगामी त्योहारी सीजन को देखते हुए शहर में सुगम, सुरक्षित एवं व्यवस्थित यातायात व्यवस्था सुनिश्चित करने पुलिस ने व्यापारी संघ के पदाधिकारियों के साथ बैठक की। पुलिस अधीक्षक भावना पांडेय के निर्देश पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डीसी पटेल एवं डीएसपी साइबर भानू प्रताप चंद्राकर की मौजूदगी में आयोजित बैठक में बाजार क्षेत्रों में बढ़ने वाले यातायात दबाव, पार्किंग, भीड़भाड़ और आमजन एवं व्यापारियों की सुविधा से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई।
व्यापारियों से लिए सुझाव, आपसी समन्वय पर बनी सहमति
बैठक में व्यापारी संघ के पदाधिकारियों ने यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए विभिन्न व्यावहारिक सुझाव दिए। पुलिस अधिकारियों ने सुझावों पर चर्चा करते हुए त्योहारी दिनों में बाजार क्षेत्रों में बढ़ने वाली भीड़ को देखते हुए पुलिस और व्यापारियों के बीच समन्वय एवं सहयोग से व्यवस्था बनाए रखने पर सहमति जताई। व्यापारियों से दुकानों के सामने अनावश्यक वाहन खड़े नहीं होने देने तथा यातायात व्यवस्था में सहयोग की अपील की गई।
बैठक के बाद एएसपी डीसी पटेल, डीएसपी साइबर भानू प्रताप चंद्राकर सहित पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने मकई चौक से सदर बाजार होते हुए इतवारी बाजार तक पैदल पेट्रोलिंग की। इस दौरान प्रमुख मार्गों, चौक-चौराहों और भीड़भाड़ वाले स्थानों का जायजा लेकर यातायात दबाव वाले क्षेत्रों को चिन्हांकित किया गया।
पुलिस ने बताया कि त्योहारी अवधि में बाजारों में विशेष निगरानी रखी जाएगी। आवश्यकता के अनुसार पुलिस बल की तैनाती, पेट्रोलिंग और यातायात नियंत्रण की व्यवस्था प्रभावी की जाएगी। बैठक में थाना प्रभारी कोतवाली निरीक्षक राजेश जगत, केआर साहू, कैट जिलाध्यक्ष महेश जसूजा, घड़ी चौक व्यापारी संघ अध्यक्ष ज्ञानचंद लूनावत, सराफा एसोसिएशन अध्यक्ष ललित बरडिया, राजू पंजवानी, चेतन हिंदुजा, कल्याण मुलवानी, देवा अन्दानी, संजय लुंकड़ सहित व्यापारी एवं पुलिस अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।
    user_यशवंत गंजीर
    यशवंत गंजीर
    Local News Reporter धमतरी, धमतरी, छत्तीसगढ़•
    11 hrs ago
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