Shuru
Apke Nagar Ki App…
विधायक जयवर्धन सिंह और वार्ड पार्षद मसूक जैन के संयुक्त प्रयासों से वार्डवासियों को मूलभूत सुविधाओं का भरपूर लाभ मिल रहा है। इन महत्वपूर्ण सुविधाओं का पूरा फायदा मिलने पर वार्डवासियों ने दोनों जनप्रतिनिधियों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया है।
Deemesh jain
विधायक जयवर्धन सिंह और वार्ड पार्षद मसूक जैन के संयुक्त प्रयासों से वार्डवासियों को मूलभूत सुविधाओं का भरपूर लाभ मिल रहा है। इन महत्वपूर्ण सुविधाओं का पूरा फायदा मिलने पर वार्डवासियों ने दोनों जनप्रतिनिधियों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया है।
More news from मध्य प्रदेश and nearby areas
- विधायक जयवर्धन सिंह और वार्ड पार्षद मसूक जैन के संयुक्त प्रयासों से वार्डवासियों को मूलभूत सुविधाओं का भरपूर लाभ मिल रहा है। इन महत्वपूर्ण सुविधाओं का पूरा फायदा मिलने पर वार्डवासियों ने दोनों जनप्रतिनिधियों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया है।2
- साइबर अपराधों के बढ़ते खतरों के मद्देनज़र, गुना पुलिस ने ज़िलेभर में एक व्यापक जनजागरूकता अभियान शुरू किया है। पुलिस मुख्यालय भोपाल के निर्देशों पर, 24 जून से 8 जुलाई 2026 तक चलने वाले विशेष "सेफ क्लिक-2026" अभियान के तहत, पुलिस अधिकारी विभिन्न स्कूलों, कॉलेजों, छात्रावासों, कोचिंग संस्थानों और सार्वजनिक स्थलों पर पहुंचकर लोगों को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक कर रहे हैं। पुलिस अधीक्षक श्रीमती हितिका वासल के निर्देशन में संचालित इस अभियान का मुख्य उद्देश्य आमजन, विद्यार्थियों और युवाओं को ऑनलाइन ठगी, फर्जी कॉल, डिजिटल अरेस्ट, निवेश धोखाधड़ी और सोशल मीडिया अपराधों से बचाव की विस्तृत जानकारी प्रदान करना है। अभियान के दूसरे दिन, 25 जून को, ज़िले के अलग-अलग क्षेत्रों में पुलिस अधिकारियों द्वारा जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों में सीएसपी आनंद राय, एसडीओपी दीपा डोडवे, एसडीओपी विवेक अस्थाना सहित कई थाना प्रभारियों और पुलिस अधिकारियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। उन्होंने स्कूलों, छात्रावासों, कॉलेजों और कोचिंग संस्थानों में विद्यार्थियों एवं नागरिकों को साइबर सुरक्षा के महत्वपूर्ण पहलुओं से अवगत कराया। उपस्थित लोगों को विशेष रूप से आगाह किया गया कि वे किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और अपनी ओटीपी, पासवर्ड, बैंकिंग जानकारी या आधार संबंधी जानकारी किसी के साथ साझा न करें। साथ ही, सोशल मीडिया का सावधानीपूर्वक उपयोग करने और अपनी डिजिटल पहचान को सुरक्षित रखने की सलाह भी दी गई। पुलिस अधिकारियों ने डिजिटल अरेस्ट, ऑनलाइन निवेश ठगी, पॉलिसी फ्रॉड, गेमिंग फ्रॉड, फर्जी कॉल और अन्य साइबर अपराधों के तरीकों की जानकारी देते हुए उनसे बचाव के उपाय भी विस्तार से समझाए। अभियान के दौरान जागरूकता बढ़ाने के लिए पोस्टर और पंपलेट वितरित किए गए, और लोगों से यह अपील भी की गई कि वे अपने परिवार और परिचितों को भी साइबर अपराधों के प्रति जागरूक करें। गुना पुलिस का मानना है कि साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण केवल पुलिस कार्रवाई से नहीं, बल्कि आमजन की व्यापक जागरूकता से ही संभव है। इसी उद्देश्य के साथ, ज़िलेभर में आगामी दिनों में भी विभिन्न स्थानों पर ऐसे जागरूकता कार्यक्रम लगातार आयोजित किए जाएंगे।2
- मध्य प्रदेश में मानसून अब पूरी तरह से सक्रिय हो चुका है। इसी के चलते मौसम विभाग ने प्रदेश के कई जिलों के लिए भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है।1
- अशोकनगर जिले में एक जीप के अंदर एक युवक और एक युवती के शव मिलने से हड़कंप मच गया है। पुलिस को प्रारंभिक तौर पर आशंका है कि दोनों की मौत गोली लगने से हुई है। इस घटना को जिले का सबसे बड़ा मामला माना जा रहा है। पुलिस ने इस संबंध में जाँच शुरू कर दी है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि यह हत्या का मामला है या आत्महत्या का।1
- मध्यप्रदेश के सिरोंज में छतरी नाके पर स्थित संजीवनी हॉस्पिटल के संचालक पर इलाज के दौरान एक नाबालिग बालिका से छेड़छाड़ और गलत हरकतें करने का गंभीर आरोप बालिका के परिजनों ने लगाया है। परिजनों की शिकायत के आधार पर पुलिस ने डॉक्टर संजीव माथुर के विरुद्ध विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। इसी घटनाक्रम में, डॉक्टर संजीव माथुर के सिर में चोट लगने के कारण वे लहूलुहान भी हो गए हैं। बताया जा रहा है कि उनके साथ मारपीट भी हुई है, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें चिकित्सकीय परीक्षण के लिए अस्पताल भेजा है। इस पूरे मामले पर बालिका के पिता और पुत्र सहित थाना प्रभारी ने विस्तार से जानकारी दी है।2
- सिरोंज में एक निजी अस्पताल संचालक पर छेड़खानी का गंभीर आरोप लगा है। संजीवनी अस्पताल के डॉ. संजीव माथुर के खिलाफ एक युवती की शिकायत पर मुकदमा दर्ज किया गया है, जिसने आरोप लगाया है कि डॉक्टर ने इलाज के दौरान उसके साथ छेड़खानी की। बताया गया है कि आरोपी डॉक्टर 24 जून को इलाज के बहाने युवती के घर पहुंच गया था। इस घटना के बाद पुलिस को बुलाया गया और डॉक्टर को थाने ले जाया गया। युवती की शिकायत के आधार पर डॉ. संजीव माथुर के खिलाफ BNS की धारा 74, 75(1), (i) के तहत मामला दर्ज किया गया है। हालांकि, रात में डॉक्टर के साथ मारपीट करने के आरोप में युवती के परिजनों के खिलाफ भी एक अलग मामला दर्ज किया गया है।4
- फतेहगढ़ क्षेत्र के ग्राम महुगरा में बुधवार को गंभीर पेयजल संकट से जूझ रहे ग्रामीणों का आक्रोश सड़क पर फूट पड़ा। महीनों से पानी की किल्लत झेल रहे ग्रामीणों ने स्टेट हाईवे SH-23 पर चक्काजाम कर विरोध प्रदर्शन किया, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं अपने घरों से खाली घड़े, बाल्टियां और अन्य बर्तन लेकर सड़क पर बैठ गईं। इस दौरान महिलाओं ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। ग्रामीणों ने बताया कि गांव में लंबे समय से पेयजल संकट बना हुआ है, और नल-जल योजना के तहत पानी की आपूर्ति के दावे के बावजूद उन्हें पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है। गांव में लगे कई हैंडपंप भी खराब पड़े हैं, जिससे ग्रामीणों को पानी के लिए काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। उनका आरोप है कि जनप्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों को कई बार समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन आज तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला। ग्रामीणों के अनुसार, गांव में बनी पानी की टंकी सूखी पड़ी है और पूरी पेयजल व्यवस्था केवल एक ट्यूबवेल के भरोसे चल रही है, जो गर्मी के मौसम और बढ़ती मांग के कारण अपर्याप्त साबित हो रहा है। चक्काजाम के कारण स्टेट हाईवे SH-23 पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों को भी परेशानी हुई। सूचना मिलने पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों से बातचीत की। अधिकारियों ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि गांव में पानी की आपूर्ति जल्द से जल्द सुचारु की जाएगी और खराब पड़े हैंडपंपों की मरम्मत सहित अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं भी की जाएंगी। प्रशासन के इस आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने अपना प्रदर्शन समाप्त कर चक्काजाम खोल दिया। हालांकि, ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि पानी की समस्या का जल्द ही कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया तो वे दोबारा आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। उनकी मांग है कि उन्हें केवल आश्वासन नहीं, बल्कि नियमित और पर्याप्त पेयजल व्यवस्था चाहिए ताकि गांव के लोगों को रोजमर्रा की परेशानियों से राहत मिल सके।2
- गुना जिले में प्रशासनिक और पुलिस महकमे में उस समय हलचल मच गई, जब बमोरी में पदस्थ रह चुके पूर्व एसडीओ सुरेश अहिरवार के खिलाफ एक महिला की शिकायत पर दुष्कर्म का मामला दर्ज होने की जानकारी सामने आई। शिकायतकर्ता महिला ने आरोप लगाया है कि सुरेश अहिरवार ने उसे शादी का झांसा देकर लंबे समय तक शारीरिक संबंध बनाए और बाद में विवाह करने से इनकार कर दिया। महिला पूर्व एसडीओ के यहां खाना बनाने का काम करती थी। पुलिस सूत्रों के अनुसार, महिला की शिकायत पर प्रकरण दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आरोपों की निष्पक्ष जांच की जा रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सुरेश अहिरवार का नाम इससे पहले भी एक विवादित मामले में सामने आ चुका है। वर्ष 2024 में बमोरी थाने में पदस्थ रही तत्कालीन महिला आरक्षक की शिकायत पर उनके खिलाफ बमोरी थाने में FIR दर्ज की गई थी। उस FIR के अनुसार, 16 फरवरी 2024 को सुबह करीब 5 बजे महिला आरक्षक के मोबाइल पर कॉल करने वाले ने स्वयं को तत्कालीन एसडीओ बमोरी सुरेश अहिरवार बताया था और बातचीत के दौरान कथित रूप से अनुचित एवं आपत्तिजनक बातें की थीं। महिला आरक्षक ने आरोप लगाया था कि विरोध करने पर भी अशोभनीय बातचीत जारी रही, जिसके बाद उन्होंने फोन काट दिया। इस शिकायत के आधार पर 20 फरवरी 2024 को बमोरी पुलिस ने सुरेश अहिरवार के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 354(ए) और 509 के तहत प्रकरण दर्ज किया था, जिसकी जांच तत्कालीन जांच अधिकारी एएसआई असलम खान को सौंपी गई थी। उस समय इस प्रकरण से जुड़ा कथित ऑडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिससे यह मामला चर्चा का विषय बन गया था। अब दुष्कर्म के आरोप में नया मामला दर्ज होने के बाद सुरेश अहिरवार से जुड़े पुराने विवादों की भी चर्चा फिर से शुरू हो गई है। प्रशासनिक और सामाजिक हल्कों में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है, और लोग पुलिस जांच तथा आगे की कानूनी कार्रवाई पर अपनी निगाहें टिकाए हुए हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान मामले में सभी तथ्यों, दस्तावेजों और साक्ष्यों की जांच की जा रही है, और जांच पूरी होने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकेगा। पुलिस के अनुसार, शिकायत प्राप्त होने के बाद वैधानिक प्रक्रिया के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है और विवेचना जारी है; जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। समाचार में वर्णित आरोप शिकायतकर्ताओं के हैं, और आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्धारण पुलिस जांच एवं न्यायालयीन प्रक्रिया के बाद ही होगा। आरोपी को कानूनन तब तक दोषी नहीं माना जा सकता, जब तक सक्षम न्यायालय द्वारा दोष सिद्ध न कर दिया जाए।1