राजस्थान राज्य सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में जन कल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए चलाए जा रहे 'ग्रामीण सेवा शिविर' का आयोजन सोमवार को पंचायत समिति भूपालसागर की ग्राम पंचायत उसरोल में किया गया। इस शिविर में उपखंड अधिकारी महेश गगोरिया, तहसीलदार अपूर्व गौतम और विकास अधिकारी मुकेश पोरवाल के निर्देशन में ग्रामीणों की समस्याओं का मौके पर ही समाधान किया गया। शिविर की महत्ता को देखते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय जयपुर की अधिकारी मंजू प्रजापत ने इसका औचक निरीक्षण किया, जहाँ उन्होंने विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए काउंटर्स का जायजा लिया, विभागीय प्रगति परखी और आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए। शिविर के दौरान विभिन्न सरकारी विभागों द्वारा आमजन को तत्काल राहत प्रदान की गई। ग्राम पंचायत प्रशासन ने ग्रामीणों को 8 आवासीय पट्टों का वितरण किया, जबकि समाज कल्याण विभाग ने 30 पात्र आवेदकों की नई पेंशन स्वीकृत की। पशुपालन विभाग ने 245 पशुओं का टीकाकरण व चिकित्सा उपचार किया, साथ ही 12 प्रगतिशील पशुपालकों को 'मंगल पशु योजना' के तहत पॉलिसी किट्स वितरित कीं। राजस्व विभाग ने आपसी सहमति से विभाजन के 3 मामलों में 9 ग्रामीणों, खाता शुद्धि के 12 मामलों में 15 ग्रामीणों और 17 नामांतरण के मामलों में 17 लाभार्थियों को सीधे राहत पहुँचाई। इसके अतिरिक्त, सीमा ज्ञान व पत्थरगढ़ी के 6 मामलों का समाधान कर 8 भू-स्वामियों की समस्याएँ दूर की गईं। कृषि विभाग ने 5 कृषकों को बैल जोड़ी तथा 3 किसानों को खेत की तारबंदी के लिए प्रशासनिक स्वीकृति जारी की, वहीं 5 काश्तकारों को 'राज किसान सुविधा ऐप' डाउनलोड करवाकर डिजिटल सेवाओं से जोड़ा। इस शिविर में भाजपा जिला मंत्री देशराज गुर्जर, एसटी मोर्चा के जिला अध्यक्ष व प्रदेश भाजपा सदस्य पन्नालाल भील और ग्राम पंचायत प्रशासक भंवरलाल ढोली सहित कई क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। प्रशासनिक स्तर पर जिला परिषद प्रतिनिधि राजेंद्र सिंह पुरावत, नायब तहसीलदार ललित यादव, अतिरिक्त विकास अधिकारी देवीलाल जाट, सहायक कृषि अधिकारी प्रभुलाल खटीक, पशु चिकित्सा अधिकारी शिवाजी होशेकर, कृषि पर्यवेक्षक मुकेश जाट, पटवारी अशोक सैनी, ग्राम विकास अधिकारी कमलेश बौद्ध, सुमर सिंह चौहान और वरिष्ठ लिपिक भगवान लाल माली सहित ब्लॉक स्तर के समस्त कर्मचारी उपस्थित थे।
राजस्थान राज्य सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में जन कल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए चलाए जा रहे 'ग्रामीण सेवा शिविर' का आयोजन सोमवार को पंचायत समिति भूपालसागर की ग्राम पंचायत उसरोल में किया गया। इस शिविर में उपखंड अधिकारी महेश गगोरिया, तहसीलदार अपूर्व गौतम और विकास अधिकारी मुकेश पोरवाल के निर्देशन में ग्रामीणों की समस्याओं का मौके पर ही समाधान किया गया। शिविर की महत्ता को देखते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय जयपुर की अधिकारी मंजू प्रजापत ने इसका औचक निरीक्षण किया, जहाँ उन्होंने विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए काउंटर्स का जायजा लिया, विभागीय प्रगति परखी और आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए। शिविर के दौरान विभिन्न सरकारी विभागों द्वारा आमजन को तत्काल राहत प्रदान की गई। ग्राम पंचायत प्रशासन ने ग्रामीणों को 8 आवासीय पट्टों का वितरण किया, जबकि समाज कल्याण विभाग ने 30 पात्र आवेदकों की नई पेंशन स्वीकृत की। पशुपालन विभाग ने 245 पशुओं का टीकाकरण व चिकित्सा उपचार किया, साथ ही 12 प्रगतिशील पशुपालकों को 'मंगल पशु योजना' के तहत पॉलिसी किट्स वितरित कीं। राजस्व विभाग ने
आपसी सहमति से विभाजन के 3 मामलों में 9 ग्रामीणों, खाता शुद्धि के 12 मामलों में 15 ग्रामीणों और 17 नामांतरण के मामलों में 17 लाभार्थियों को सीधे राहत पहुँचाई। इसके अतिरिक्त, सीमा ज्ञान व पत्थरगढ़ी के 6 मामलों का समाधान कर 8 भू-स्वामियों की समस्याएँ दूर की गईं। कृषि विभाग ने 5 कृषकों को बैल जोड़ी तथा 3 किसानों को खेत की तारबंदी के लिए प्रशासनिक स्वीकृति जारी की, वहीं 5 काश्तकारों को 'राज किसान सुविधा ऐप' डाउनलोड करवाकर डिजिटल सेवाओं से जोड़ा। इस शिविर में भाजपा जिला मंत्री देशराज गुर्जर, एसटी मोर्चा के जिला अध्यक्ष व प्रदेश भाजपा सदस्य पन्नालाल भील और ग्राम पंचायत प्रशासक भंवरलाल ढोली सहित कई क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। प्रशासनिक स्तर पर जिला परिषद प्रतिनिधि राजेंद्र सिंह पुरावत, नायब तहसीलदार ललित यादव, अतिरिक्त विकास अधिकारी देवीलाल जाट, सहायक कृषि अधिकारी प्रभुलाल खटीक, पशु चिकित्सा अधिकारी शिवाजी होशेकर, कृषि पर्यवेक्षक मुकेश जाट, पटवारी अशोक सैनी, ग्राम विकास अधिकारी कमलेश बौद्ध, सुमर सिंह चौहान और वरिष्ठ लिपिक भगवान लाल माली सहित ब्लॉक स्तर के समस्त कर्मचारी उपस्थित थे।
- भीलवाड़ा जिले के मांडल स्थित मलगानी गांव में रविवार देर रात सरकारी चरागाह भूमि से कथित अवैध मिट्टी दोहन को लेकर भारी हंगामा हो गया, जिसके बाद क्षेत्र में तनावपूर्ण माहौल बन गया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि रात के अंधेरे में जेसीबी मशीन और डंपरों की मदद से चरागाह भूमि से बड़े पैमाने पर मिट्टी निकाली जा रही थी। सूचना मिलने पर ग्रामीणों ने मौके पर पहुंचकर खनन कार्य में लगे वाहनों को घेर लिया, जिसमें डंपर संख्या RJ 09 GC 4001 सहित अन्य वाहन शामिल थे। हालांकि, ग्रामीणों का दावा है कि उनके विरोध के दौरान खनन कार्य से जुड़े लोग दबाव बनाकर वाहनों को मौके से छुड़ाकर ले गए। ग्रामीणों के अनुसार, चरागाह भूमि से मिट्टी दोहन का यह “खेल” काफी समय से चल रहा है। ग्रामीणों, जिनमें ओमप्रकाश, बालूराम, राहुल, रतनलाल जाट, हनुमान जाट, बालूलाल जाट, सूरजमल और जगदीश शामिल हैं, ने आरोप लगाया है कि इस अवैध गतिविधि की शिकायत कई बार प्रशासन और संबंधित विभागों को की जा चुकी है। इसके बावजूद समय पर प्रभावी कार्रवाई न होने के कारण इन अवैध गतिविधियों पर रोक नहीं लग पा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि शिकायत के बाद कुछ समय के लिए काम रुक जाता है, लेकिन फिर से मिट्टी निकालने का कार्य शुरू हो जाता है, जिससे उनमें गहरा रोष है और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि निकाली गई मिट्टी का उपयोग स्थानीय ईंट भट्ठे पर किया जा रहा है, और उन्होंने भट्ठे के आसपास मिट्टी के बड़े-बड़े ढेर होने का दावा किया है। उन्होंने चिंता जताई कि चरागाह भूमि, जो पशुओं के लिए चारागाह का मुख्य स्रोत है, पर लगातार मिट्टी खनन से गहरे गड्ढे बन रहे हैं, जिससे भविष्य में पशुपालकों को गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इसे देखते हुए ग्रामीणों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर मिट्टी के स्रोत की पुष्टि करने, खनन में प्रयुक्त जेसीबी और डंपरों को जब्त करने, भूमि को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने, और मामले में लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच करने की मांग की है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करने पर मजबूर होंगे। यह समस्त जानकारी ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों और शिकायतों पर आधारित है।2
- एक सामग्री निर्माता ने अपने दर्शकों का हृदय से आभार व्यक्त किया है, जिन्होंने उनके मंच को मात्र छह दिनों की अवधि में 100 सदस्यों का परिवार बनाने में सहयोग दिया है। निर्माता ने इस उपलब्धि पर सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद दिया है और उनसे अपना सहयोग इसी प्रकार बनाए रखने का आग्रह किया है। उन्होंने विशेष रूप से दर्शकों को अपनी सामग्री साझा करने के लिए प्रेरित किया है, यह कहते हुए कि उनका एक शेयर उन्हें लगातार नई खबरें डालने के लिए बहुत प्रेरणा देता है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने दर्शकों को सदस्यता लेकर इस परिवार का सदस्य बनने का भी निमंत्रण दिया है।1
- सुरेंद्रसिंह जाड़ावत ने दुर्ग क्षेत्र में 'बुलडोजर संस्कृति' के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए जिला कलेक्टर को एक ज्ञापन सौंपा है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यह 'बुलडोजर संस्कृति' किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह ज्ञापन हजारों परिवारों के आशियानों और उनके रोजगार को बचाने की मांग को लेकर दिया गया है, ताकि इन परिवारों को संभावित बेघर होने और आजीविका खोने से बचाया जा सके।2
- आयुष हॉस्पिटल अपनी आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति के माध्यम से बेहतरीन परिणाम दे रहा है। इन शानदार परिणामों की कहानी मरीजों की जुबानी सुनने को मिल रही है, जो उनके अनुभवों पर आधारित है।1
- चित्तौड़गढ़ के बड़ी सादड़ी क्षेत्र में हिंदुस्तान जिंक द्वारा डंप किए गए औद्योगिक अपशिष्ट पदार्थ जेरोफिक्स को हटाने की मांग को लेकर 'जहर मुक्त बड़ी सादड़ी संघर्ष समिति' का आंदोलन सोमवार को 28वें दिन भी जारी रहा। इस दौरान धरना स्थल पर पहुंचे कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव धीरज गुर्जर ने आंदोलनकारियों को समर्थन देते हुए सरकार और प्रशासन से मामले पर त्वरित कार्रवाई की मांग की। धीरज गुर्जर ने जोर देकर कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता ही सर्वोपरि होती है, और जनभावनाओं से खिलवाड़ करने वालों को जनता समय आने पर जवाब देती है। उन्होंने प्रशासन और रेलवे अधिकारियों से जेरोफिक्स मामले का जल्द समाधान निकालने का आग्रह करते हुए चेतावनी दी कि यदि समस्या का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को आगे बढ़ाने और अनशन जैसे कदम उठाने के लिए वे मजबूर होंगे। गुर्जर ने यह भी कहा कि जेरोफिक्स के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उन पर कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि बड़ी सादड़ी की जनता की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है, और मंत्री गौतम दक मीडिया के सवालों से बचते नजर आ रहे हैं। आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि जेरोफिक्स को लेकर स्थानीय स्तर पर गहरी चिंता है, लेकिन जिले के कई पक्ष और विपक्ष के नेता इस मुद्दे पर खुलकर सामने नहीं आ रहे हैं। उनका आरोप है कि कुछ नेता केवल धरना स्थल पर आकर ठेकेदारों को निशाना बनाते हैं, जबकि मुख्य जिम्मेदारी हिंदुस्तान जिंक की भूमिका पर चर्चा नहीं करते। पूर्व में कांग्रेस से विधायक प्रत्याशी रहे बद्रीलाल जाट ने इस अपशिष्ट पदार्थ के लंबे समय तक क्षेत्र में रहने से आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले असर की आशंका जताई थी। आंदोलनकारियों का कहना है कि जेरोफिक्स अभी तक पूरी तरह नहीं हटाया गया है और क्षेत्र में स्वास्थ्य, जल स्रोतों तथा पर्यावरण को लेकर खतरे की आशंका बनी हुई है। धीरज गुर्जर के स्थानीय नेताओं पर निशाना साधने और राजनीतिक नुकसान के डर से जनता के पक्ष में आवाज न उठाने के आरोप के बाद चित्तौड़गढ़ जिले के राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है, और स्थानीय नेताओं की चुप्पी पर सवाल उठ रहे हैं। आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में जेरोफिक्स को क्षेत्र से पूरी तरह हटाना, पर्यावरणीय प्रभावों की जांच कराना और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करना शामिल है। अब सभी की नजर प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है।1
- राष्ट्रीय अफीम किसान संघ ने अफीम किसानों की विभिन्न मांगों को लेकर 23 जून को एक किसान जागरण रैली आयोजित करने की घोषणा की है। यह रैली 26 जून को चित्तौड़गढ़ में प्रस्तावित एक महापड़ाव की तैयारियों के तहत निकाली जा रही है, जिसमें डूंगला, बड़ीसादड़ी, कानोड़, भिंडर और वल्लभनगर सहित कई क्षेत्रों से हजारों किसानों के शामिल होने की संभावना है। संघ के अध्यक्ष दुर्गेश जोशी ने बताया कि रैली 23 जून को सुबह 10 बजे डूंगला से शुरू होकर बड़ीसादड़ी क्षेत्र के जरखाना मोड़ पहुंचेगी। वहाँ स्थानीय किसान इसका स्वागत करेंगे और उपखंड अधिकारी को अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपेंगे। इसके बाद रैली लूंणदा, अमरपुरा, मेनार और वल्लभनगर होते हुए आगे बढ़ेगी। हर पड़ाव पर क्षेत्रीय किसान रैली का स्वागत करेंगे और संबंधित उपखंड अधिकारियों को 8 सूत्रीय मांगपत्र प्रस्तुत किया जाएगा। रात्रि विश्राम इटली गांव में प्रस्तावित है। जोशी ने आगे बताया कि 24 जून को यह रैली मावली, भूपालसागर, कपासन और राशमी क्षेत्रों में पहुंचेगी, जहाँ किसानों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया जाएगा। संघ का कहना है कि अफीम किसानों पर डोडा-चूरा नष्ट करने का लगातार दबाव बनाया जा रहा है, जबकि उनका वर्षों पुराना बकाया डोडा-चूरा अभी तक लंबित है। किसानों की मुख्य मांग है कि बिना उचित मुआवजे के नष्टीकरण की कोई कार्रवाई न की जाए और उनकी अन्य लंबित मांगों का भी जल्द समाधान किया जाए। संघ ने स्पष्ट कर दिया है कि किसानों की 8 सूत्रीय मांगों को लेकर 26 जून को चित्तौड़गढ़ में महापड़ाव आयोजित किया जाएगा। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि आवश्यकता पड़ी, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा, जिसमें आमरण अनशन जैसे कड़े कदम भी उठाए जा सकते हैं, क्योंकि यह अफीम किसानों के अधिकारों की लड़ाई है और 26 जून के महापड़ाव की तैयारी तेजी से चल रही है।1
- वल्लभनगर उपखंड क्षेत्र में एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया, जिसमें स्कूटी सवार पिता की मौत हो गई और उनका पुत्र गंभीर रूप से घायल हो गया। यह घटना राष्ट्रीय राजमार्ग 48 पर भमरासिया घाटी चौराहे के ओवरब्रिज पर घटी, जब एक अज्ञात वाहन ने उनकी स्कूटी को टक्कर मार दी। डबोक थाने के हेड कांस्टेबल अर्जुन सिंह द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, नया बाजार कानोड़ निवासी हरि सिंह पंवार अपने पुत्र दीपक के साथ स्कूटी पर सवार होकर उदयपुर की दिशा में जा रहे थे। इसी दौरान भमरासिया घाटी चौराहे के ओवरब्रिज पर एक अज्ञात वाहन ने उनकी स्कूटी को जोरदार टक्कर मारी। टक्कर इतनी भीषण थी कि स्कूटी अनियंत्रित होकर डिवाइडर से जा टकराई, जिससे हरि सिंह और दीपक दोनों गंभीर रूप से घायल होकर नीचे गिर गए। हादसे में पिता हरि सिंह की मौत हो गई, जबकि पुत्र दीपक गंभीर रूप से जख्मी है।1
- चित्तौड़गढ़ ज़िले में स्थित धनेतकलां काजवे पुलिया पर ओवरब्रिज के निर्माण को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार, बजट में ओवरब्रिज के लिए घोषणाएं होने के बावजूद इसका निर्माण कार्य अभी तक शुरू नहीं हो पाया है। यह धनेतकलां काजवे पुलिया लगभग 25 गांवों के लिए जीवनरेखा का काम करती है, और हजारों राहगीर इस महत्वपूर्ण ओवरब्रिज के बनने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।1
- यह पोस्ट दर्शकों को भारतीय टीम के सेमीफाइनल और फाइनल में पहुँचने की संभावनाओं से जुड़ी ख़बरें जानने के लिए चैनल को सब्सक्राइब करने का आग्रह करती है। इसके माध्यम से खेल जगत की ऐसी ही अन्य ख़बरें भी प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।1