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कुर्सी में नूर भारत गैस सर्विस में लगातार लोग लंबी कतार में लगे है जिसमें लाइन में लगे जो पहले से लोग है वो पीछे ही खड़े रह गए बाकी जो लाइन में न है उनको आगे बुलाकर पर्ची दी जा रही ऐसी नाइंसाफी न चलेगी 💙💙 जय भीम नमो बुद्धाय साथियों स्थानीय पुलिस प्रशासन से मेरा निवेदन है कि लोगों की मदद करे । धन्यवाद 💙
अंकित भारती
कुर्सी में नूर भारत गैस सर्विस में लगातार लोग लंबी कतार में लगे है जिसमें लाइन में लगे जो पहले से लोग है वो पीछे ही खड़े रह गए बाकी जो लाइन में न है उनको आगे बुलाकर पर्ची दी जा रही ऐसी नाइंसाफी न चलेगी 💙💙 जय भीम नमो बुद्धाय साथियों स्थानीय पुलिस प्रशासन से मेरा निवेदन है कि लोगों की मदद करे । धन्यवाद 💙
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- स्थानीय पुलिस प्रशासन से मेरा निवेदन है कि लोगों की मदद करे । धन्यवाद 💙1
- *पीलीभीत टाइगर रिजर्व में सड़क पर बाघ का रोमांचक नज़ारा* पीलीभीत टाइगर रिजर्व में एक बार फिर से बाघ का रोमांचक नज़ारा देखने को मिला। एक बाघ सड़क पर टहलता दिखा, जिससे वाहनों के पहिये थम गए। लोग दूर से नज़ारा देखने लगे और कुछ ने वीडियो भी बनाया। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है ¹ ² ³। बाघ की चहलकदमी देखकर राहगीर इतने रोमांचित हो उठे कि हर कोई वहां का तहां थमा रह गया। पीलीभीत टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर मनीष सिंह ने बताया कि जंगल से गुजरने वाले मार्गों पर वन्यजीवों के आने की घटना आम है। बाघ की यह चहलकदमी पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गई है ² ⁴। क्या आप जानना चाहेंगे कि पीलीभीत टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या कितनी है या वहां के वन्यजीवों के बारे में और जानकारी चाहिए?1
- मोनालिसा के आरोपों पर अब सनोज़ मिश्रा ने अपना पक्ष सामने रखा है। उन्होंने कहा कि “धर्मांतरण गैंग मेरे पीछे पड़ा है और झूठे आरोप लगाकर मुझे फंसाने की कोशिश की जा रही है।” सनोज़ का दावा है कि पूरी सच्चाई जानने के लिए उनका पूरा वीडियो देखना चाहिए। फिलहाल इस मामले को लेकर दोनों पक्षों में तकरार जारी है और पुलिस भी मामले की जांच में जुटी है।1
- दिनांक 17 मार्च 2026 को उदवतपुर सेक्शन के पवैयाबाद गांव से गम्भीर रूप से घायल बाज को वन विभाग देवां रेंज की टीम द्वारा रेस्क्यू किया गया था।आज दिनांक 25 मार्च को पूरी तरह से स्वस्थ होने पर उसे प्राकृतवास में विमोचित किया गया। उक्त पक्षी को कलगीदार सर्प चील crested serpent eagle (Spilornis cheela) भी कहते हैं। यह विशेष रूप से वृक्षों पर रहने वाले सांपों को पसंद करता है इसके फलस्वरूप ही इन्हें इनका नाम दिया गया है।लेकिन इसका आहार केवल सांपों तक ही सीमित नहीं है। यह छिपकलियों, मेंढकों, टोड, स्तनधारियों, ईल, छोटे पक्षियों, दीमकों और बड़े केंचुओं का भी शिकार करता है। *वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972* के अंतर्गत इस पक्षी को संकटग्रस्त श्रेणी में रखते हुए एवम सर्वोच्च सुरक्षा हुए *अनुसूची 1* के अंतर्गत वर्गीकृत किया गया है।1
- अवधी भाषा को Google तक पहुंचाने की पहल | प्रदीप सारंग ने अवधी में दी बड़ी जानकारी1
- बिहार के कई प्राइवेट अस्पतालों में नर्सों की यूनिफॉर्म को लेकर इन दिनों विवाद गहराता जा रहा है। कुछ जगहों पर बदले हुए ड्रेस कोड को लेकर लोगों ने आपत्ति जताई है, वहीं अस्पताल प्रबंधन इसे प्रोफेशनल बदलाव बता रहा है। सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर तीखी बहस देखने को मिल रही है। कुछ लोग इसे आधुनिकता से जोड़ रहे हैं, तो कुछ पारंपरिक मर्यादाओं की बात कर रहे हैं।1
- लखनऊ में लोगों का शेड्यूल इन दिनों इतना टाइट हो गया है कि सुबह गैस सिलेंडर की लाइन में लगने के बाद सीधे तेल की लाइन में हाज़िरी लगानी पड़ रही है। अफवाहों का बाजार गर्म होने के बाद पूरे भारत में लोग पेट्रोल पंप ⛽ पर मौजूद।।1
- *🚨🇺🇸 अमेरिका में चिंता:* ईरान के शहीद ड्रोन पहले ही रक्षा प्रणाली को भेद रहे हैं — लेकिन चीन के ड्रोन और भी बड़ा खतरा बन सकते हैं *TGR:* ड्रोन अब सस्ते, ज्यादा स्मार्ट और रोकने में कठिन होते जा रहे हैं। मध्य पूर्व में हाल के संघर्षों ने दिखाया कि अपेक्षाकृत साधारण ईरानी सिस्टम भी रक्षा को चकमा देकर महत्वपूर्ण लक्ष्यों को नुकसान पहुंचा सकते हैं, जिससे अमेरिका/इज़राइल की एयर डिफेंस में कमजोरियां उजागर हुई हैं। अब असली सवाल यह है कि जब कोई ज्यादा उन्नत औद्योगिक ताकत इसी रणनीति को बड़े स्तर पर लागू करेगी, तो क्या होगा? चीन का ASN-301 एक अलग स्तर का खतरा है। ईरान के शहीद-136 के विपरीत, जो मुख्य रूप से पहले से प्रोग्राम किए गए हमले के लिए इस्तेमाल होता है, चीनी सिस्टम खास तौर पर एयर डिफेंस को निशाना बनाने के लिए बनाया गया है। यह घंटों तक हवा में रह सकता है, रडार सिग्नल पकड़ सकता है, सिग्नल बंद होने पर इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल ट्रैकिंग पर स्विच कर सकता है, और उड़ान के दौरान डाटा लिंक के जरिए अपडेट भी ले सकता है। यानी यह युद्धक्षेत्र को लगातार खोज और नष्ट करने वाले वातावरण में बदल देता है, खासकर रडार जैसे अहम सिस्टम के लिए। *ईरान की रणनीति संख्या पर आधारित है:* सस्ते और लंबी दूरी के ड्रोन को बड़ी संख्या में भेजकर रक्षा प्रणाली को थका देना। वहीं चीन इस मॉडल को सटीकता के साथ जोड़ता है। Feilong-300D जैसे वेरिएंट लागत को और कम करते हुए पेलोड और टार्गेटिंग में लचीलापन बनाए रखते हैं, जिससे बड़े पैमाने पर तैनाती और भी आसान हो जाती है। यहीं असली दबाव की स्थिति बनती है। अगर अमेरिकी सिस्टम पहले से ही ईरानी ड्रोन को रोकने में संघर्ष कर रहे हैं, तो इसके नतीजे गंभीर हो सकते हैं। पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में किसी भी संघर्ष का फैसला उत्पादन क्षमता पर निर्भर करेगा। चीन की बड़ी संख्या में स्मार्ट और अनुकूलनशील ड्रोन तैनात करने की क्षमता अमेरिका और उसके सहयोगियों को महंगे चक्र में फंसा सकती है — जहां उन्हें लाखों डॉलर के इंटरसेप्टर इस्तेमाल करने पड़ेंगे, उन ड्रोन को रोकने के लिए जो बेहद कम लागत में बनाए जाते हैं। *🇮🇳 भारत के लिए खतरा कितना बड़ा है?* भारत के लिए यह खतरा नजरअंदाज करने लायक नहीं है। चीन पहले से ही भारत का पड़ोसी और रणनीतिक प्रतिद्वंदी है, और यदि ऐसे उन्नत ड्रोन सिस्टम बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होते हैं, तो यह सीमावर्ती इलाकों — खासकर लद्दाख और अरुणाचल जैसे क्षेत्रों — में चुनौती बढ़ा सकते हैं। साथ ही, पाकिस्तान द्वारा सस्ते ड्रोन के इस्तेमाल के उदाहरण पहले ही सामने आ चुके हैं। अगर भविष्य में चीन की तकनीक या उसके जैसे सिस्टम क्षेत्र में फैलते हैं, तो भारत को दो तरफ से ड्रोन आधारित खतरे का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि भारत भी तेजी से अपनी एयर डिफेंस और एंटी-ड्रोन तकनीक को मजबूत कर रहा है, लेकिन यह साफ है कि आने वाले समय में युद्ध का स्वरूप बदल रहा है — जहां सस्ते, तेज और स्मार्ट ड्रोन बड़ी ताकतों को भी चुनौती दे सकते हैं।1