जीपीएफ लोन के लिए 25% कमीशन की मांग! फरियादी को ‘शराबी’ बताकर लौटा दिया गया—अम्बेडकरनगर में सिस्टम पर सवाल जीपीएफ लोन के लिए 25% कमीशन की मांग! फरियादी को ‘शराबी’ बताकर लौटा दिया गया—अम्बेडकरनगर में सिस्टम पर सवाल आलापुर अम्बेडकरनगर। जनपद के राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय आलापुर से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें स्वैच्छिक चौकीदार के रूप में तैनात फखरूद्दीन ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर आरोप लगाए हैं। फखरूद्दीन का कहना है कि वह अपने ही जीपीएफ (General Provident Fund) से करीब सात लाख रुपये का लोन लेना चाहता है, लेकिन इसके बदले उससे 25 प्रतिशत तक कमीशन मांगा जा रहा है। पीड़ित के अनुसार, पिछले डेढ़ वर्ष से वह अपने ही पैसे के लिए अधिकारियों के चक्कर काट रहा है, लेकिन हर बार उसे टाल दिया जाता है। आरोप है कि राजकीय आयुर्वेदिक/यूनानी विभाग के संबंधित अधिकारी द्वारा खुलेआम कमीशन की मांग की गई, जिससे परेशान होकर फखरूद्दीन ने जिलाधिकारी से न्याय की गुहार लगाई। हालांकि, जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचने पर भी उसे राहत नहीं मिली। पीड़ित का आरोप है कि संबंधित अधिकारी ने पहले ही जिलाधिकारी के समक्ष उसकी छवि खराब करते हुए उसे ‘शराबी’ करार दे दिया, जिसके चलते उसकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया गया और उसे निराश होकर लौटना पड़ा। सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि जब जीपीएफ फंड कर्मचारी का स्वयं का जमा किया हुआ पैसा होता है, तो उसे निकालने के लिए किसी प्रकार का कमीशन क्यों? यदि आरोप सही हैं, तो यह न केवल भ्रष्टाचार का गंभीर मामला है, बल्कि एक निम्नस्तरीय कर्मचारी के अधिकारों का भी खुला उल्लंघन है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो सच्चाई सामने आ सकती है। वहीं, प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर भी यह प्रकरण कई सवाल खड़े करता है। अब देखने वाली बात यह होगी कि जिला प्रशासन इस मामले में क्या रुख अपनाता है—क्या पीड़ित को न्याय मिलेगा या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।
जीपीएफ लोन के लिए 25% कमीशन की मांग! फरियादी को ‘शराबी’ बताकर लौटा दिया गया—अम्बेडकरनगर में सिस्टम पर सवाल जीपीएफ लोन के लिए 25% कमीशन की मांग! फरियादी को ‘शराबी’ बताकर लौटा दिया गया—अम्बेडकरनगर में सिस्टम पर सवाल आलापुर अम्बेडकरनगर। जनपद के राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय आलापुर से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें स्वैच्छिक चौकीदार के रूप में तैनात फखरूद्दीन ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर आरोप लगाए हैं। फखरूद्दीन का कहना है कि वह अपने ही जीपीएफ (General Provident Fund) से करीब सात लाख रुपये का लोन लेना चाहता है, लेकिन इसके बदले उससे 25 प्रतिशत तक कमीशन मांगा जा रहा है। पीड़ित के अनुसार, पिछले डेढ़ वर्ष से वह अपने ही पैसे के लिए अधिकारियों के चक्कर काट रहा है, लेकिन हर बार उसे टाल दिया जाता है। आरोप है कि राजकीय आयुर्वेदिक/यूनानी विभाग के संबंधित अधिकारी द्वारा खुलेआम कमीशन की मांग की गई, जिससे परेशान होकर फखरूद्दीन ने जिलाधिकारी से न्याय की गुहार लगाई। हालांकि, जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचने पर भी उसे राहत नहीं मिली। पीड़ित का आरोप है कि संबंधित अधिकारी ने पहले ही जिलाधिकारी के समक्ष उसकी छवि खराब करते हुए उसे ‘शराबी’ करार दे दिया, जिसके चलते उसकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया गया और उसे निराश होकर लौटना पड़ा। सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि जब जीपीएफ फंड कर्मचारी का स्वयं का जमा किया हुआ पैसा होता है, तो उसे निकालने के लिए किसी प्रकार का कमीशन क्यों? यदि आरोप सही हैं, तो यह न केवल भ्रष्टाचार का गंभीर मामला है, बल्कि एक निम्नस्तरीय कर्मचारी के अधिकारों का भी खुला उल्लंघन है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो सच्चाई सामने आ सकती है। वहीं, प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर भी यह प्रकरण कई सवाल खड़े करता है। अब देखने वाली बात यह होगी कि जिला प्रशासन इस मामले में क्या रुख अपनाता है—क्या पीड़ित को न्याय मिलेगा या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।
- जीपीएफ लोन के लिए 25% कमीशन की मांग! फरियादी को ‘शराबी’ बताकर लौटा दिया गया—अम्बेडकरनगर में सिस्टम पर सवाल आलापुर अम्बेडकरनगर। जनपद के राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय आलापुर से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें स्वैच्छिक चौकीदार के रूप में तैनात फखरूद्दीन ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर आरोप लगाए हैं। फखरूद्दीन का कहना है कि वह अपने ही जीपीएफ (General Provident Fund) से करीब सात लाख रुपये का लोन लेना चाहता है, लेकिन इसके बदले उससे 25 प्रतिशत तक कमीशन मांगा जा रहा है। पीड़ित के अनुसार, पिछले डेढ़ वर्ष से वह अपने ही पैसे के लिए अधिकारियों के चक्कर काट रहा है, लेकिन हर बार उसे टाल दिया जाता है। आरोप है कि राजकीय आयुर्वेदिक/यूनानी विभाग के संबंधित अधिकारी द्वारा खुलेआम कमीशन की मांग की गई, जिससे परेशान होकर फखरूद्दीन ने जिलाधिकारी से न्याय की गुहार लगाई। हालांकि, जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचने पर भी उसे राहत नहीं मिली। पीड़ित का आरोप है कि संबंधित अधिकारी ने पहले ही जिलाधिकारी के समक्ष उसकी छवि खराब करते हुए उसे ‘शराबी’ करार दे दिया, जिसके चलते उसकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया गया और उसे निराश होकर लौटना पड़ा। सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि जब जीपीएफ फंड कर्मचारी का स्वयं का जमा किया हुआ पैसा होता है, तो उसे निकालने के लिए किसी प्रकार का कमीशन क्यों? यदि आरोप सही हैं, तो यह न केवल भ्रष्टाचार का गंभीर मामला है, बल्कि एक निम्नस्तरीय कर्मचारी के अधिकारों का भी खुला उल्लंघन है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो सच्चाई सामने आ सकती है। वहीं, प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर भी यह प्रकरण कई सवाल खड़े करता है। अब देखने वाली बात यह होगी कि जिला प्रशासन इस मामले में क्या रुख अपनाता है—क्या पीड़ित को न्याय मिलेगा या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।1
- संत कबीर नगर जनपद के नाथनगर विकासखंड अंतर्गत महोली कस्बे में स्थित श्रीमती गुलाबी देवी जूनियर हाई स्कूल की छात्राओं द्वारा नारी सशक्तिकरण की दिशा में सार्थक प्रयास नुक्कड़ नाटक के माध्यम से लोगों को जागरूक किया गया नाटक के माध्यम से दिखाने का प्रयास किया गया कि यह हमें कोई छेड़ता है तो हम उसे छोड़ेंगी नहीं आत्म स्वालंबन की भावना और स्वयं की रक्षा कैसे की जाए इस पर सुंदर नाटक प्रस्तुत किया गया1
- अंबेडकरनगर से एक चिंताजनक खबर सामने आई है, जहां सम्मनपुर थाना क्षेत्र से एक युवती रहस्यमय तरीके से लापता हो गई है। बताया जा रहा है कि युवती अपने ननिहाल में रह रही थी और गुरुवार को सब्जी लेने बाजार गई थी, लेकिन वापस नहीं लौटी। परिजनों ने हर संभव जगह तलाश की, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिल सकी। मोबाइल फोन बंद होने से मामला और गंभीर हो गया है। परिवार ने आशंका जताई है कि युवती को बहला-फुसलाकर ले जाया गया है। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। थानाध्यक्ष दिनेश कुमार सिंह के अनुसार, टीम गठित कर दी गई है और सर्विलांस की मदद से युवती की तलाश जारी है। पुलिस का दावा है कि जल्द ही पूरे मामले का खुलासा किया जाएगा।1
- 📰 बड़ी खबर | अम्बेडकरनगर “बसखारी बना ‘मुकदमा और सम्मान’ का खेल मैदान!” दोषी बेदाग, निर्दोष पर वार—पंचायती राज विभाग पर उठे गंभीर सवाल अम्बेडकरनगर, बसखारी। विकासखंड बसखारी में इन दिनों हालात ऐसे बन गए हैं कि कब किस पर मुकदमा दर्ज हो जाए और कब किसे सम्मानित कर दिया जाए, इसका कोई भरोसा नहीं। पूरे क्षेत्र में प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर लोगों के बीच भारी असमंजस और आक्रोश का माहौल है। सूत्रों और स्थानीय चर्चाओं के अनुसार, पिछले 6 महीनों में लगातार ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां दोषियों को बचाने और निर्दोषों को फंसाने के आरोप लगते रहे हैं। इससे पंचायती राज विभाग की निष्पक्षता पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। “हर दिन नया मामला, हर दिन नया तमाशा” बसखारी में हर दिन एक नई कहानी सामने आ रही है—कहीं अचानक मुकदमा दर्ज हो जाता है, तो कहीं बिना स्पष्ट कारण के लोगों को सम्मानित किया जाता है। इस पूरे घटनाक्रम ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या यहां नियमों के बजाय मनमानी चल रही है? जमीनी हकीकत बनाम कागजी खेल ग्रामीणों का आरोप है कि कागजों में सब कुछ सही दिखाया जाता है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। कई मामलों में बिना निष्पक्ष जांच के ही कार्रवाई कर दी जाती है, जिससे निर्दोष लोग परेशान हो रहे हैं। जांच और जवाबदेही की मांग स्थानीय लोगों और जागरूक नागरिकों ने मांग की है कि पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच कराई जाए और जो भी अधिकारी या कर्मचारी दोषी पाए जाएं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। --- ⚖️ अब बड़ा सवाल: क्या बसखारी में “नया दिन, नया तमाशा” यूं ही चलता रहेगा, या फिर प्रशासन सख्त कदम उठाकर सच्चाई सामने लाएगा?1
- टांडा कोतवाली क्षेत्र के मीरानपुर मोहल्ले का है जहां, शीला गुप्ता पत्नी गणेश गुप्ता अपनी दस वर्षीय बेटी परी के साथ रहते थे , गणेश की शादी ग्यारह साल पहले सुलतान पुर जनपद में हुई थी, पड़ोसियों ने बताया कि शीला किसी के यहां आती जाती नहीं थी और मोहल्ले में न ही किसी से मेलजोल रखती थी, दोपहर में बेटी ने अपने पिता को फोन करके बताया कि मम्मी फंदे से लटक रही हैं, गणेश पर मानो पहाड़ टूट पड़ा वो दौड़ता हुआ घर आया देख तो पत्नी शीला कमरे में फंदे से झूल रही थी, गणेश ने पहले अपने बगल को सूचना दी और पुलिस को भी ,जिसने भी सुना सब हैरान रह गए मौके पर पहुंची पुलिस ने पहले फॉरेंसिक टीम को सूचना दी फॉरेंसिक टीम मौके पर पर पहुंच कर जांच प्रक्रिया को पूरा किया और पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया,2
- Post by Dushyant Kumar Journalist1
- ग्रामीणों द्वारा बताया गया कि शॉट सर्किट से लगी आग लाखों की सामान जल कर हुई राख1
- जीपीएफ लोन में 25% कमीशन का आरोप, फरियादी को ‘शराबी’ बताकर लौटाया अम्बेडकरनगर। राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय आलापुर के स्वैच्छिक चौकीदार फखरूद्दीन ने अपने जीपीएफ फंड से 7 लाख रुपये का लोन लेने में 25% कमीशन मांगने का आरोप लगाया है। डेढ़ साल से परेशान फखरूद्दीन ने जिलाधिकारी से गुहार लगाई, लेकिन उसे ‘शराबी’ बताकर शिकायत को नजरअंदाज कर दिया गया। मामला अब प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर रहा है। विस्तार से कल के अखबार में1