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जीपीएफ लोन में 25% कमीशन का आरोप, फरियादी को ‘शराबी’ बताकर लौटाया अम्बेडकरनगर। राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय आलापुर के स्वैच्छिक चौकीदार फखरूद्दीन ने अपने जीपीएफ लोन में 25% कमीशन का आरोप, फरियादी को ‘शराबी’ बताकर लौटाया अम्बेडकरनगर। राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय आलापुर के स्वैच्छिक चौकीदार फखरूद्दीन ने अपने जीपीएफ फंड से 7 लाख रुपये का लोन लेने में 25% कमीशन मांगने का आरोप लगाया है। डेढ़ साल से परेशान फखरूद्दीन ने जिलाधिकारी से गुहार लगाई, लेकिन उसे ‘शराबी’ बताकर शिकायत को नजरअंदाज कर दिया गया। मामला अब प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर रहा है। विस्तार से कल के अखबार में

5 hrs ago
user_Khan Rizwan
Khan Rizwan
Farmer अकबरपुर, अंबेडकर नगर, उत्तर प्रदेश•
5 hrs ago

जीपीएफ लोन में 25% कमीशन का आरोप, फरियादी को ‘शराबी’ बताकर लौटाया अम्बेडकरनगर। राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय आलापुर के स्वैच्छिक चौकीदार फखरूद्दीन ने अपने जीपीएफ लोन में 25% कमीशन का आरोप, फरियादी को ‘शराबी’ बताकर लौटाया अम्बेडकरनगर। राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय आलापुर के स्वैच्छिक चौकीदार फखरूद्दीन ने अपने जीपीएफ फंड से 7 लाख रुपये का लोन लेने में 25% कमीशन मांगने का आरोप लगाया है। डेढ़ साल से परेशान फखरूद्दीन ने जिलाधिकारी से गुहार लगाई, लेकिन उसे ‘शराबी’ बताकर शिकायत को नजरअंदाज कर दिया गया। मामला अब प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर रहा है। विस्तार से कल के अखबार में

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  • अंबेडकरनगर से एक चिंताजनक खबर सामने आई है, जहां सम्मनपुर थाना क्षेत्र से एक युवती रहस्यमय तरीके से लापता हो गई है। बताया जा रहा है कि युवती अपने ननिहाल में रह रही थी और गुरुवार को सब्जी लेने बाजार गई थी, लेकिन वापस नहीं लौटी। परिजनों ने हर संभव जगह तलाश की, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिल सकी। मोबाइल फोन बंद होने से मामला और गंभीर हो गया है। परिवार ने आशंका जताई है कि युवती को बहला-फुसलाकर ले जाया गया है। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। थानाध्यक्ष दिनेश कुमार सिंह के अनुसार, टीम गठित कर दी गई है और सर्विलांस की मदद से युवती की तलाश जारी है। पुलिस का दावा है कि जल्द ही पूरे मामले का खुलासा किया जाएगा।
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    अंबेडकरनगर से एक चिंताजनक खबर सामने आई है, जहां सम्मनपुर थाना क्षेत्र से एक युवती रहस्यमय तरीके से लापता हो गई है।
बताया जा रहा है कि युवती अपने ननिहाल में रह रही थी और गुरुवार को सब्जी लेने बाजार गई थी, लेकिन वापस नहीं लौटी। परिजनों ने हर संभव जगह तलाश की, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिल सकी।
मोबाइल फोन बंद होने से मामला और गंभीर हो गया है। परिवार ने आशंका जताई है कि युवती को बहला-फुसलाकर ले जाया गया है।
फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। थानाध्यक्ष दिनेश कुमार सिंह के अनुसार, टीम गठित कर दी गई है और सर्विलांस की मदद से युवती की तलाश जारी है।
पुलिस का दावा है कि जल्द ही पूरे मामले का खुलासा किया जाएगा।
    user_Up45news
    Up45news
    Akbarpur, Ambedkar Nagar•
    3 hrs ago
  • 📰 बड़ी खबर | अम्बेडकरनगर “बसखारी बना ‘मुकदमा और सम्मान’ का खेल मैदान!” दोषी बेदाग, निर्दोष पर वार—पंचायती राज विभाग पर उठे गंभीर सवाल अम्बेडकरनगर, बसखारी। विकासखंड बसखारी में इन दिनों हालात ऐसे बन गए हैं कि कब किस पर मुकदमा दर्ज हो जाए और कब किसे सम्मानित कर दिया जाए, इसका कोई भरोसा नहीं। पूरे क्षेत्र में प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर लोगों के बीच भारी असमंजस और आक्रोश का माहौल है। सूत्रों और स्थानीय चर्चाओं के अनुसार, पिछले 6 महीनों में लगातार ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां दोषियों को बचाने और निर्दोषों को फंसाने के आरोप लगते रहे हैं। इससे पंचायती राज विभाग की निष्पक्षता पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। “हर दिन नया मामला, हर दिन नया तमाशा” बसखारी में हर दिन एक नई कहानी सामने आ रही है—कहीं अचानक मुकदमा दर्ज हो जाता है, तो कहीं बिना स्पष्ट कारण के लोगों को सम्मानित किया जाता है। इस पूरे घटनाक्रम ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या यहां नियमों के बजाय मनमानी चल रही है? जमीनी हकीकत बनाम कागजी खेल ग्रामीणों का आरोप है कि कागजों में सब कुछ सही दिखाया जाता है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। कई मामलों में बिना निष्पक्ष जांच के ही कार्रवाई कर दी जाती है, जिससे निर्दोष लोग परेशान हो रहे हैं। जांच और जवाबदेही की मांग स्थानीय लोगों और जागरूक नागरिकों ने मांग की है कि पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच कराई जाए और जो भी अधिकारी या कर्मचारी दोषी पाए जाएं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। --- ⚖️ अब बड़ा सवाल: क्या बसखारी में “नया दिन, नया तमाशा” यूं ही चलता रहेगा, या फिर प्रशासन सख्त कदम उठाकर सच्चाई सामने लाएगा?
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    📰 बड़ी खबर | अम्बेडकरनगर
“बसखारी बना ‘मुकदमा और सम्मान’ का खेल मैदान!”
दोषी बेदाग, निर्दोष पर वार—पंचायती राज विभाग पर उठे गंभीर सवाल
अम्बेडकरनगर, बसखारी।
विकासखंड बसखारी में इन दिनों हालात ऐसे बन गए हैं कि कब किस पर मुकदमा दर्ज हो जाए और कब किसे सम्मानित कर दिया जाए, इसका कोई भरोसा नहीं। पूरे क्षेत्र में प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर लोगों के बीच भारी असमंजस और आक्रोश का माहौल है।
सूत्रों और स्थानीय चर्चाओं के अनुसार, पिछले 6 महीनों में लगातार ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां दोषियों को बचाने और निर्दोषों को फंसाने के आरोप लगते रहे हैं। इससे पंचायती राज विभाग की निष्पक्षता पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।
“हर दिन नया मामला, हर दिन नया तमाशा”
बसखारी में हर दिन एक नई कहानी सामने आ रही है—कहीं अचानक मुकदमा दर्ज हो जाता है, तो कहीं बिना स्पष्ट कारण के लोगों को सम्मानित किया जाता है। इस पूरे घटनाक्रम ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या यहां नियमों के बजाय मनमानी चल रही है?
जमीनी हकीकत बनाम कागजी खेल
ग्रामीणों का आरोप है कि कागजों में सब कुछ सही दिखाया जाता है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। कई मामलों में बिना निष्पक्ष जांच के ही कार्रवाई कर दी जाती है, जिससे निर्दोष लोग परेशान हो रहे हैं।
जांच और जवाबदेही की मांग
स्थानीय लोगों और जागरूक नागरिकों ने मांग की है कि पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच कराई जाए और जो भी अधिकारी या कर्मचारी दोषी पाए जाएं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
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⚖️ अब बड़ा सवाल:
क्या बसखारी में “नया दिन, नया तमाशा” यूं ही चलता रहेगा,
या फिर प्रशासन सख्त कदम उठाकर सच्चाई सामने लाएगा?
    user_Khan Rizwan
    Khan Rizwan
    Farmer अकबरपुर, अंबेडकर नगर, उत्तर प्रदेश•
    3 hrs ago
  • टांडा कोतवाली क्षेत्र के मीरानपुर मोहल्ले का है जहां, शीला गुप्ता पत्नी गणेश गुप्ता अपनी दस वर्षीय बेटी परी के साथ रहते थे , गणेश की शादी ग्यारह साल पहले सुलतान पुर जनपद में हुई थी, पड़ोसियों ने बताया कि शीला किसी के यहां आती जाती नहीं थी और मोहल्ले में न ही किसी से मेलजोल रखती थी, दोपहर में बेटी ने अपने पिता को फोन करके बताया कि मम्मी फंदे से लटक रही हैं, गणेश पर मानो पहाड़ टूट पड़ा वो दौड़ता हुआ घर आया देख तो पत्नी शीला कमरे में फंदे से झूल रही थी, गणेश ने पहले अपने बगल को सूचना दी और पुलिस को भी ,जिसने भी सुना सब हैरान रह गए मौके पर पहुंची पुलिस ने पहले फॉरेंसिक टीम को सूचना दी फॉरेंसिक टीम मौके पर पर पहुंच कर जांच प्रक्रिया को पूरा किया और पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया,
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    टांडा कोतवाली क्षेत्र के मीरानपुर मोहल्ले का है जहां, शीला गुप्ता पत्नी गणेश गुप्ता अपनी दस वर्षीय बेटी परी के साथ रहते थे ,
गणेश की शादी ग्यारह साल पहले सुलतान पुर जनपद में हुई थी, पड़ोसियों ने बताया कि शीला किसी के यहां आती जाती नहीं थी और मोहल्ले में न ही किसी से मेलजोल रखती थी,
दोपहर में बेटी ने अपने पिता को फोन करके बताया कि मम्मी फंदे से लटक रही हैं, गणेश पर मानो पहाड़ टूट पड़ा वो दौड़ता हुआ घर आया देख तो पत्नी शीला कमरे में फंदे से झूल रही थी,
गणेश ने पहले अपने बगल को सूचना दी और पुलिस को भी ,जिसने भी सुना सब हैरान रह गए 
मौके पर पहुंची पुलिस ने पहले फॉरेंसिक टीम को सूचना दी फॉरेंसिक टीम मौके पर पर पहुंच कर जांच प्रक्रिया को पूरा किया और पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया,
    user_Anant kushwaha
    Anant kushwaha
    Local News Reporter अकबरपुर, अंबेडकर नगर, उत्तर प्रदेश•
    5 hrs ago
  • Post by Dushyant Kumar Journalist
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    Post by Dushyant Kumar Journalist
    user_Dushyant Kumar Journalist
    Dushyant Kumar Journalist
    City Star अकबरपुर, अंबेडकर नगर, उत्तर प्रदेश•
    17 hrs ago
  • जीपीएफ लोन के लिए 25% कमीशन की मांग! फरियादी को ‘शराबी’ बताकर लौटा दिया गया—अम्बेडकरनगर में सिस्टम पर सवाल आलापुर अम्बेडकरनगर। जनपद के राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय आलापुर से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें स्वैच्छिक चौकीदार के रूप में तैनात फखरूद्दीन ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर आरोप लगाए हैं। फखरूद्दीन का कहना है कि वह अपने ही जीपीएफ (General Provident Fund) से करीब सात लाख रुपये का लोन लेना चाहता है, लेकिन इसके बदले उससे 25 प्रतिशत तक कमीशन मांगा जा रहा है। पीड़ित के अनुसार, पिछले डेढ़ वर्ष से वह अपने ही पैसे के लिए अधिकारियों के चक्कर काट रहा है, लेकिन हर बार उसे टाल दिया जाता है। आरोप है कि राजकीय आयुर्वेदिक/यूनानी विभाग के संबंधित अधिकारी द्वारा खुलेआम कमीशन की मांग की गई, जिससे परेशान होकर फखरूद्दीन ने जिलाधिकारी से न्याय की गुहार लगाई। हालांकि, जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचने पर भी उसे राहत नहीं मिली। पीड़ित का आरोप है कि संबंधित अधिकारी ने पहले ही जिलाधिकारी के समक्ष उसकी छवि खराब करते हुए उसे ‘शराबी’ करार दे दिया, जिसके चलते उसकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया गया और उसे निराश होकर लौटना पड़ा। सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि जब जीपीएफ फंड कर्मचारी का स्वयं का जमा किया हुआ पैसा होता है, तो उसे निकालने के लिए किसी प्रकार का कमीशन क्यों? यदि आरोप सही हैं, तो यह न केवल भ्रष्टाचार का गंभीर मामला है, बल्कि एक निम्नस्तरीय कर्मचारी के अधिकारों का भी खुला उल्लंघन है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो सच्चाई सामने आ सकती है। वहीं, प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर भी यह प्रकरण कई सवाल खड़े करता है। अब देखने वाली बात यह होगी कि जिला प्रशासन इस मामले में क्या रुख अपनाता है—क्या पीड़ित को न्याय मिलेगा या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।
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    जीपीएफ लोन के लिए 25% कमीशन की मांग! फरियादी को ‘शराबी’ बताकर लौटा दिया गया—अम्बेडकरनगर में सिस्टम पर सवाल
आलापुर
अम्बेडकरनगर।
जनपद के राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय आलापुर से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें स्वैच्छिक चौकीदार के रूप में तैनात फखरूद्दीन ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर आरोप लगाए हैं। फखरूद्दीन का कहना है कि वह अपने ही जीपीएफ (General Provident Fund) से करीब सात लाख रुपये का लोन लेना चाहता है, लेकिन इसके बदले उससे 25 प्रतिशत तक कमीशन मांगा जा रहा है।
पीड़ित के अनुसार, पिछले डेढ़ वर्ष से वह अपने ही पैसे के लिए अधिकारियों के चक्कर काट रहा है, लेकिन हर बार उसे टाल दिया जाता है। आरोप है कि राजकीय आयुर्वेदिक/यूनानी विभाग के संबंधित अधिकारी द्वारा खुलेआम कमीशन की मांग की गई, जिससे परेशान होकर फखरूद्दीन ने जिलाधिकारी से न्याय की गुहार लगाई।
हालांकि, जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचने पर भी उसे राहत नहीं मिली। पीड़ित का आरोप है कि संबंधित अधिकारी ने पहले ही जिलाधिकारी के समक्ष उसकी छवि खराब करते हुए उसे ‘शराबी’ करार दे दिया, जिसके चलते उसकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया गया और उसे निराश होकर लौटना पड़ा।
सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि जब जीपीएफ फंड कर्मचारी का स्वयं का जमा किया हुआ पैसा होता है, तो उसे निकालने के लिए किसी प्रकार का कमीशन क्यों? यदि आरोप सही हैं, तो यह न केवल भ्रष्टाचार का गंभीर मामला है, बल्कि एक निम्नस्तरीय कर्मचारी के अधिकारों का भी खुला उल्लंघन है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो सच्चाई सामने आ सकती है। वहीं, प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर भी यह प्रकरण कई सवाल खड़े करता है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि जिला प्रशासन इस मामले में क्या रुख अपनाता है—क्या पीड़ित को न्याय मिलेगा या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।
    user_TEESRI AANKHEN
    TEESRI AANKHEN
    अल्लापुर, अंबेडकर नगर, उत्तर प्रदेश•
    5 hrs ago
  • पुलिस वाले पब्लिक को लाठी चार्ज से कैसे पीट रहे हैं
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    पुलिस वाले पब्लिक को लाठी चार्ज से कैसे पीट रहे हैं
    user_Rohit Rajbhar
    Rohit Rajbhar
    Artist शाहगंज, जौनपुर, उत्तर प्रदेश•
    3 hrs ago
  • अजीत मिश्रा (खोजी) विशेष रिपोर्ट: राजधानी में 'हनी ट्रैप' का खौफनाक खेल, खाकी की मुस्तैदी से बेनकाब हुआ गिरोह! ब्यूरो रिपोर्ट: उत्तर प्रदेश (लखनऊ) सफेदपोशों का काला खेल: पत्रकारिता और समाजसेवा की आड़ में चल रहा था उगाही का साम्राज्य। ठाकुरगंज पुलिस की बड़ी कामयाबी: फर्जी 'मसीहाओं' के दबाव को ठुकरा कर बेनकाब किया हनी ट्रैप गिरोह। योगी राज में जीरो टॉलरेंस: नाबालिग से दरिंदगी और ब्लैकमेलिंग करने वाली आतिका पर POCSO के तहत शिकंजा। फर्जी वीडियो बनाम पुख्ता सबूत: कैमरे में कैद हुई 25 लाख की रंगदारी, अब सलाखों के पीछे होगा गिरोह। लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ का ठाकुरगंज इलाका इन दिनों एक ऐसी साजिश का गवाह बना है, जिसने रिश्तों और इंसानियत दोनों को शर्मसार कर दिया है। एक तरफ 16 साल का मासूम नाबालिग लड़का और दूसरी तरफ उसे अपनी जाल में फंसाकर फरार होने वाली शातिर महिला—यह मामला महज एक 'फरार' होने की कहानी नहीं, बल्कि एक सुनियोजित 'हनी ट्रैप' और उगाही (Extortion) के काले साम्राज्य का पर्दाफाश है। साजिश का चेहरा: आतिका सिद्दीकी और उसका सिंडिकेट पुलिस की गहन जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। आरोपी महिला आतिका सिद्दीकी पर अब POCSO (पास्को), दुष्कर्म और रंगदारी जैसी संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज हो चुका है। पुलिस के मुताबिक, यह कोई अकेली महिला का कृत्य नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक पूरा गिरोह काम कर रहा है। डिजिटल साक्ष्यों का मायाजाल और पुलिस की चुनौतियां जांच में यह बात भी उभरकर सामने आई है कि गिरोह न केवल शारीरिक रूप से बल्कि डिजिटल स्पेस में भी बेहद सक्रिय था। नाबालिग को विश्वास में लेने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का सहारा लिया गया और फिर उन्हीं चैट्स और वीडियो को हथियार बनाकर ब्लैकमेलिंग शुरू की गई। साइबर विशेषज्ञों के मुताबिक, 'हनी ट्रैप' के ऐसे मामलों में अपराधी अक्सर 'साइकोलॉजिकल मैनिपुलेशन' का सहारा लेते हैं, जिससे पीड़ित और उसका परिवार लोक-लाज के डर से पुलिस के पास जाने में हिचकिचाता है। तथाकथित 'चौथे स्तंभ' पर दाग इस मामले ने उन स्वयंभू पत्रकारों की भूमिका पर भी सवालिया निशान लगा दिया है, जो यूट्यूब और फेसबुक जैसे पोर्टल्स के जरिए गिरोह को 'कवर' दे रहे थे। सूत्रों के अनुसार, पुलिस अब इन तथाकथित पत्रकारों के बैंक खातों और कॉल डिटेल्स को खंगाल रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि उगाही की रकम का कितना हिस्सा इन 'रक्षक' बने 'भक्षकों' की जेब में जा रहा था। कानूनी शिकंजा: सख्त धाराओं का प्रावधान पुलिस प्रशासन ने इस मामले में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है। दर्ज की गई धाराओं के तहत गिरोह के सदस्यों को कड़ी सजा मिलना तय माना जा रहा है: POCSO एक्ट: चूंकि पीड़ित नाबालिग है, इसलिए पास्को की धाराएं आरोपियों के लिए जमानत की राह मुश्किल कर देंगी। गैंगस्टर एक्ट की संभावना: गिरोह के संगठित स्वरूप को देखते हुए कयास लगाए जा रहे हैं कि भविष्य में इन पर 'गैंगस्टर एक्ट' के तहत भी कार्रवाई हो सकती है, जिससे इनकी अवैध रूप से अर्जित संपत्तियों की कुर्की की जा सके। सामाजिक सरोकार: क्या कहते हैं विशेषज्ञ? मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि किशोर उम्र के बच्चों को ऐसे गिरोह आसानी से निशाना बनाते हैं क्योंकि इस उम्र में वे भावनात्मक रूप से अस्थिर होते हैं। "अभिभावकों को अपने बच्चों की डिजिटल गतिविधियों और अचानक आए व्यवहारिक बदलावों पर नजर रखने की सख्त जरूरत है। संवाद ही वह एकमात्र रास्ता है जिससे बच्चों को ऐसे जाल में फंसने से बचाया जा सकता है।" राजधानी के लिए एक चेतावनी लखनऊ के ठाकुरगंज की यह घटना महज एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि राजधानी के सभ्य समाज के लिए एक 'वेक-अप कॉल' है। यह दिखाती है कि कैसे अपराधी अब तकनीक और फेक प्रोपेगेंडा का इस्तेमाल कर कानून को चुनौती दे रहे हैं। मुख्यमंत्री की 'अपराध मुक्त उत्तर प्रदेश' की नीति के तहत, अब जनता की नजरें पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं—क्या वे सफेदपोश मददगार भी सलाखों के पीछे जाएंगे जो इस काले खेल के असली सूत्रधार हैं? लखनऊ पुलिस ने जनता से अपील की है कि यदि कोई भी व्यक्ति इस तरह के ब्लैकमेल या हनी ट्रैप का शिकार होता है, तो वह डरे बिना सामने आए। आपकी पहचान गुप्त रखी जाएगी और दोषियों पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। मुख्य बातें: 25 लाख की डिमांड और 'कैमरा' गवाही: पीड़ित मां का आरोप है कि गिरोह के सदस्य उनसे 25 लाख रुपये की मोटी रकम मांग रहे थे। ताज्जुब की बात यह है कि यह पूरी सौदेबाजी और रंगदारी मांगने का खेल कैमरे में भी कैद हो चुका है, जो अब पुलिस के पास अहम सबूत है। फर्जी 'मसीहा' और तथाकथित पत्रकार: इस मामले का सबसे वीभत्स पहलू यह है कि इस गिरोह को कुछ फर्जी सामाजिक कार्यकर्ता और तथाकथित पत्रकार संरक्षण दे रहे हैं। ये लोग सोशल मीडिया पर भ्रामक और फर्जी वीडियो वायरल कर पुलिस पर दबाव बनाने की नाकाम कोशिश कर रहे थे। योगी सरकार और पुलिस की कार्रवाई: पीड़ित मां ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से न्याय की गुहार लगाई है। पुलिस ने अपनी जांच में पाया कि महिला द्वारा पहले लगाए गए तमाम आरोप पूरी तरह आधारहीन और फर्जी थे। इसी के बाद पुलिस ने शिकंजा कसते हुए आतिका और उसके मददगारों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। समीक्षात्मक नजरिया (Critical View): क्या समाज में अब अपराधी इतने निडर हो गए हैं कि वे कानून के रक्षकों (पुलिस) को ही सोशल मीडिया के जरिए डराने का प्रयास करेंगे? 'पत्रकारिता' और 'समाजसेवा' जैसे पवित्र शब्दों की आड़ में हनी ट्रैप का धंधा चलाने वाले इन सफेदपोश अपराधियों पर कठोरतम कार्रवाई समय की मांग है। बड़ा सवाल: आखिर कब तक फर्जी वीडियो और सोशल मीडिया ट्रायल के जरिए सच को दबाने की कोशिश होती रहेगी? फिलहाल, आतिका सिद्दीकी और उसका पूरा गिरोह पुलिस की रडार पर है। लखनऊ पुलिस की टीमें फरार आरोपियों की तलाश में दबिश दे रही हैं। उम्मीद है कि जल्द ही 'हनी ट्रैप' का यह पूरा सिंडिकेट सलाखों के पीछे होगा। ब्यूरो रिपोर्ट, उत्तर प्रदेश न्याय की आस, सच का साथ।
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    अजीत मिश्रा (खोजी)
विशेष रिपोर्ट: राजधानी में 'हनी ट्रैप' का खौफनाक खेल, खाकी की मुस्तैदी से बेनकाब हुआ गिरोह!
ब्यूरो रिपोर्ट: उत्तर प्रदेश (लखनऊ)
सफेदपोशों का काला खेल: पत्रकारिता और समाजसेवा की आड़ में चल रहा था उगाही का साम्राज्य।
ठाकुरगंज पुलिस की बड़ी कामयाबी: फर्जी 'मसीहाओं' के दबाव को ठुकरा कर बेनकाब किया हनी ट्रैप गिरोह।
योगी राज में जीरो टॉलरेंस: नाबालिग से दरिंदगी और ब्लैकमेलिंग करने वाली आतिका पर POCSO के तहत शिकंजा।
फर्जी वीडियो बनाम पुख्ता सबूत: कैमरे में कैद हुई 25 लाख की रंगदारी, अब सलाखों के पीछे होगा गिरोह।
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ का ठाकुरगंज इलाका इन दिनों एक ऐसी साजिश का गवाह बना है, जिसने रिश्तों और इंसानियत दोनों को शर्मसार कर दिया है। एक तरफ 16 साल का मासूम नाबालिग लड़का और दूसरी तरफ उसे अपनी जाल में फंसाकर फरार होने वाली शातिर महिला—यह मामला महज एक 'फरार' होने की कहानी नहीं, बल्कि एक सुनियोजित 'हनी ट्रैप' और उगाही (Extortion) के काले साम्राज्य का पर्दाफाश है।
साजिश का चेहरा: आतिका सिद्दीकी और उसका सिंडिकेट
पुलिस की गहन जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। आरोपी महिला आतिका सिद्दीकी पर अब POCSO (पास्को), दुष्कर्म और रंगदारी जैसी संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज हो चुका है। पुलिस के मुताबिक, यह कोई अकेली महिला का कृत्य नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक पूरा गिरोह काम कर रहा है।
डिजिटल साक्ष्यों का मायाजाल और पुलिस की चुनौतियां
जांच में यह बात भी उभरकर सामने आई है कि गिरोह न केवल शारीरिक रूप से बल्कि डिजिटल स्पेस में भी बेहद सक्रिय था। नाबालिग को विश्वास में लेने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का सहारा लिया गया और फिर उन्हीं चैट्स और वीडियो को हथियार बनाकर ब्लैकमेलिंग शुरू की गई। साइबर विशेषज्ञों के मुताबिक, 'हनी ट्रैप' के ऐसे मामलों में अपराधी अक्सर 'साइकोलॉजिकल मैनिपुलेशन' का सहारा लेते हैं, जिससे पीड़ित और उसका परिवार लोक-लाज के डर से पुलिस के पास जाने में हिचकिचाता है।
तथाकथित 'चौथे स्तंभ' पर दाग
इस मामले ने उन स्वयंभू पत्रकारों की भूमिका पर भी सवालिया निशान लगा दिया है, जो यूट्यूब और फेसबुक जैसे पोर्टल्स के जरिए गिरोह को 'कवर' दे रहे थे। सूत्रों के अनुसार, पुलिस अब इन तथाकथित पत्रकारों के बैंक खातों और कॉल डिटेल्स को खंगाल रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि उगाही की रकम का कितना हिस्सा इन 'रक्षक' बने 'भक्षकों' की जेब में जा रहा था।
कानूनी शिकंजा: सख्त धाराओं का प्रावधान
पुलिस प्रशासन ने इस मामले में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है। दर्ज की गई धाराओं के तहत गिरोह के सदस्यों को कड़ी सजा मिलना तय माना जा रहा है:
POCSO एक्ट: चूंकि पीड़ित नाबालिग है, इसलिए पास्को की धाराएं आरोपियों के लिए जमानत की राह मुश्किल कर देंगी।
गैंगस्टर एक्ट की संभावना: गिरोह के संगठित स्वरूप को देखते हुए कयास लगाए जा रहे हैं कि भविष्य में इन पर 'गैंगस्टर एक्ट' के तहत भी कार्रवाई हो सकती है, जिससे इनकी अवैध रूप से अर्जित संपत्तियों की कुर्की की जा सके।
सामाजिक सरोकार: क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि किशोर उम्र के बच्चों को ऐसे गिरोह आसानी से निशाना बनाते हैं क्योंकि इस उम्र में वे भावनात्मक रूप से अस्थिर होते हैं।
"अभिभावकों को अपने बच्चों की डिजिटल गतिविधियों और अचानक आए व्यवहारिक बदलावों पर नजर रखने की सख्त जरूरत है। संवाद ही वह एकमात्र रास्ता है जिससे बच्चों को ऐसे जाल में फंसने से बचाया जा सकता है।"
राजधानी के लिए एक चेतावनी
लखनऊ के ठाकुरगंज की यह घटना महज एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि राजधानी के सभ्य समाज के लिए एक 'वेक-अप कॉल' है। यह दिखाती है कि कैसे अपराधी अब तकनीक और फेक प्रोपेगेंडा का इस्तेमाल कर कानून को चुनौती दे रहे हैं। मुख्यमंत्री की 'अपराध मुक्त उत्तर प्रदेश' की नीति के तहत, अब जनता की नजरें पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं—क्या वे सफेदपोश मददगार भी सलाखों के पीछे जाएंगे जो इस काले खेल के असली सूत्रधार हैं?
लखनऊ पुलिस ने जनता से अपील की है कि यदि कोई भी व्यक्ति इस तरह के ब्लैकमेल या हनी ट्रैप का शिकार होता है, तो वह डरे बिना सामने आए। आपकी पहचान गुप्त रखी जाएगी और दोषियों पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
मुख्य बातें:
25 लाख की डिमांड और 'कैमरा' गवाही: पीड़ित मां का आरोप है कि गिरोह के सदस्य उनसे 25 लाख रुपये की मोटी रकम मांग रहे थे। ताज्जुब की बात यह है कि यह पूरी सौदेबाजी और रंगदारी मांगने का खेल कैमरे में भी कैद हो चुका है, जो अब पुलिस के पास अहम सबूत है।
फर्जी 'मसीहा' और तथाकथित पत्रकार: इस मामले का सबसे वीभत्स पहलू यह है कि इस गिरोह को कुछ फर्जी सामाजिक कार्यकर्ता और तथाकथित पत्रकार संरक्षण दे रहे हैं। ये लोग सोशल मीडिया पर भ्रामक और फर्जी वीडियो वायरल कर पुलिस पर दबाव बनाने की नाकाम कोशिश कर रहे थे।
योगी सरकार और पुलिस की कार्रवाई: पीड़ित मां ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से न्याय की गुहार लगाई है। पुलिस ने अपनी जांच में पाया कि महिला द्वारा पहले लगाए गए तमाम आरोप पूरी तरह आधारहीन और फर्जी थे। इसी के बाद पुलिस ने शिकंजा कसते हुए आतिका और उसके मददगारों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
समीक्षात्मक नजरिया (Critical View):
क्या समाज में अब अपराधी इतने निडर हो गए हैं कि वे कानून के रक्षकों (पुलिस) को ही सोशल मीडिया के जरिए डराने का प्रयास करेंगे? 'पत्रकारिता' और 'समाजसेवा' जैसे पवित्र शब्दों की आड़ में हनी ट्रैप का धंधा चलाने वाले इन सफेदपोश अपराधियों पर कठोरतम कार्रवाई समय की मांग है।
बड़ा सवाल: आखिर कब तक फर्जी वीडियो और सोशल मीडिया ट्रायल के जरिए सच को दबाने की कोशिश होती रहेगी?
फिलहाल, आतिका सिद्दीकी और उसका पूरा गिरोह पुलिस की रडार पर है। लखनऊ पुलिस की टीमें फरार आरोपियों की तलाश में दबिश दे रही हैं। उम्मीद है कि जल्द ही 'हनी ट्रैप' का यह पूरा सिंडिकेट सलाखों के पीछे होगा।
ब्यूरो रिपोर्ट, उत्तर प्रदेश
न्याय की आस, सच का साथ।
    user_अजीत मिश्रा (खोजी)
    अजीत मिश्रा (खोजी)
    बस्ती, बस्ती, उत्तर प्रदेश•
    3 hrs ago
  • जीपीएफ लोन में 25% कमीशन का आरोप, फरियादी को ‘शराबी’ बताकर लौटाया अम्बेडकरनगर। राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय आलापुर के स्वैच्छिक चौकीदार फखरूद्दीन ने अपने जीपीएफ फंड से 7 लाख रुपये का लोन लेने में 25% कमीशन मांगने का आरोप लगाया है। डेढ़ साल से परेशान फखरूद्दीन ने जिलाधिकारी से गुहार लगाई, लेकिन उसे ‘शराबी’ बताकर शिकायत को नजरअंदाज कर दिया गया। मामला अब प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर रहा है। विस्तार से कल के अखबार में
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    जीपीएफ लोन में 25% कमीशन का आरोप, फरियादी को ‘शराबी’ बताकर लौटाया
अम्बेडकरनगर।
राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय आलापुर के स्वैच्छिक चौकीदार फखरूद्दीन ने अपने जीपीएफ फंड से 7 लाख रुपये का लोन लेने में 25% कमीशन मांगने का आरोप लगाया है। डेढ़ साल से परेशान फखरूद्दीन ने जिलाधिकारी से गुहार लगाई, लेकिन उसे ‘शराबी’ बताकर शिकायत को नजरअंदाज कर दिया गया। मामला अब प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर रहा है।
विस्तार से कल के अखबार में
    user_Khan Rizwan
    Khan Rizwan
    Farmer अकबरपुर, अंबेडकर नगर, उत्तर प्रदेश•
    5 hrs ago
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