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14 अप्रैल को बाबा साहेब का जन्मदिन मनाते हुए सब लोग क्या पता है बात कहां से छिड़ गई पुलिस वाले पब्लिक को लाठी चार्ज से कैसे पीट रहे हैं
Rohit Rajbhar
14 अप्रैल को बाबा साहेब का जन्मदिन मनाते हुए सब लोग क्या पता है बात कहां से छिड़ गई पुलिस वाले पब्लिक को लाठी चार्ज से कैसे पीट रहे हैं
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- Post by अरुण कुमार दुबे ब्यूरो चीफ1
- टांडा कोतवाली क्षेत्र के मीरानपुर मोहल्ले का है जहां, शीला गुप्ता पत्नी गणेश गुप्ता अपनी दस वर्षीय बेटी परी के साथ रहते थे , गणेश की शादी ग्यारह साल पहले सुलतान पुर जनपद में हुई थी, पड़ोसियों ने बताया कि शीला किसी के यहां आती जाती नहीं थी और मोहल्ले में न ही किसी से मेलजोल रखती थी, दोपहर में बेटी ने अपने पिता को फोन करके बताया कि मम्मी फंदे से लटक रही हैं, गणेश पर मानो पहाड़ टूट पड़ा वो दौड़ता हुआ घर आया देख तो पत्नी शीला कमरे में फंदे से झूल रही थी, गणेश ने पहले अपने बगल को सूचना दी और पुलिस को भी ,जिसने भी सुना सब हैरान रह गए मौके पर पहुंची पुलिस ने पहले फॉरेंसिक टीम को सूचना दी फॉरेंसिक टीम मौके पर पर पहुंच कर जांच प्रक्रिया को पूरा किया और पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया,2
- जीपीएफ लोन के लिए 25% कमीशन की मांग! फरियादी को ‘शराबी’ बताकर लौटा दिया गया—अम्बेडकरनगर में सिस्टम पर सवाल आलापुर अम्बेडकरनगर। जनपद के राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय आलापुर से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें स्वैच्छिक चौकीदार के रूप में तैनात फखरूद्दीन ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर आरोप लगाए हैं। फखरूद्दीन का कहना है कि वह अपने ही जीपीएफ (General Provident Fund) से करीब सात लाख रुपये का लोन लेना चाहता है, लेकिन इसके बदले उससे 25 प्रतिशत तक कमीशन मांगा जा रहा है। पीड़ित के अनुसार, पिछले डेढ़ वर्ष से वह अपने ही पैसे के लिए अधिकारियों के चक्कर काट रहा है, लेकिन हर बार उसे टाल दिया जाता है। आरोप है कि राजकीय आयुर्वेदिक/यूनानी विभाग के संबंधित अधिकारी द्वारा खुलेआम कमीशन की मांग की गई, जिससे परेशान होकर फखरूद्दीन ने जिलाधिकारी से न्याय की गुहार लगाई। हालांकि, जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचने पर भी उसे राहत नहीं मिली। पीड़ित का आरोप है कि संबंधित अधिकारी ने पहले ही जिलाधिकारी के समक्ष उसकी छवि खराब करते हुए उसे ‘शराबी’ करार दे दिया, जिसके चलते उसकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया गया और उसे निराश होकर लौटना पड़ा। सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि जब जीपीएफ फंड कर्मचारी का स्वयं का जमा किया हुआ पैसा होता है, तो उसे निकालने के लिए किसी प्रकार का कमीशन क्यों? यदि आरोप सही हैं, तो यह न केवल भ्रष्टाचार का गंभीर मामला है, बल्कि एक निम्नस्तरीय कर्मचारी के अधिकारों का भी खुला उल्लंघन है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो सच्चाई सामने आ सकती है। वहीं, प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर भी यह प्रकरण कई सवाल खड़े करता है। अब देखने वाली बात यह होगी कि जिला प्रशासन इस मामले में क्या रुख अपनाता है—क्या पीड़ित को न्याय मिलेगा या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।1
- जीपीएफ लोन में 25% कमीशन का आरोप, फरियादी को ‘शराबी’ बताकर लौटाया अम्बेडकरनगर। राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय आलापुर के स्वैच्छिक चौकीदार फखरूद्दीन ने अपने जीपीएफ फंड से 7 लाख रुपये का लोन लेने में 25% कमीशन मांगने का आरोप लगाया है। डेढ़ साल से परेशान फखरूद्दीन ने जिलाधिकारी से गुहार लगाई, लेकिन उसे ‘शराबी’ बताकर शिकायत को नजरअंदाज कर दिया गया। मामला अब प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर रहा है। विस्तार से कल के अखबार में1
- Post by Rahat time's1
- Post by Dushyant Kumar Journalist1
- अम्बेडकरनगर चलती कार मे अचानक लगी आग, कूद कर लोगो ने बचाई अपनी जान कार में अचानक शार्ट सर्किट से लगी आग फायर ब्रिगेड के आने से पहले स्थानीय लोगों ने बाल्टी से पानी डाल, आग को किया काबू कार मे आग लगने से आस पास रहा अफरा तफरी का माहौल मामला शहजादपुर स्थित गांधी चौक के समीप का1
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