IGRS पर गुहार के बाद खुली पोल, पर जिम्मेदार कर्मियों पर महज 'चेतावनी' की खानापूर्ति से उठ रहे सवाल बस्ती: सरकारी बाबुओं की कलम ने जिंदा इंसान को बनाया 'मृतक', 15 महीने से वृद्धा पेंशन के लिए दर-दर भटकने को मजबूर लाचार बुजुर्ग सल्टौआ गोपालपुर ब्लॉक का सनसनीखेज मामला; पंचायत सचिव की फर्जी रिपोर्ट से उजागर हुई प्रशासनिक संवेदनहीनता IGRS पर गुहार के बाद खुली पोल, पर जिम्मेदार कर्मियों पर महज 'चेतावनी' की खानापूर्ति से उठ रहे सवाल IGRS पर गुहार के बाद खुली पोल: पीड़ित बुजुर्ग द्वारा पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने के बाद खंड विकास अधिकारी की जाँच में लाभार्थी पूरी तरह जीवित और पात्र पाए गए। व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल: जीवित इंसान को कागजों में मारने वाले लापरवाह सत्यापनकर्ताओं और सचिव पर कठोर कार्रवाई के बजाय केवल 'भविष्य में सचेत रहने की चेतावनी' देकर खानापूर्ति करने पर भड़का आक्रोश। विशेष संवाददाता / बस्ती उत्तर प्रदेश के जनपद बस्ती में सरकारी व्यवस्था और संवेदनहीनता का एक ऐसा हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जो शासन के दावों की पोल खोलने के लिए काफी है। जनपद के सल्टौआ गोपालपुर विकास खंड अंतर्गत जसोवर (ग्राम पंचायत रेती) निवासी बुजुर्ग बनारस पुत्र राम आसरे को जिम्मेदार कर्मचारियों और पंचायत सचिव की लापरवाही के चलते कागजों में 'मृत' घोषित कर दिया गया। इसके परिणामस्वरूप, उस लाचार बुजुर्ग की वृद्धा पेंशन करीब 15 महीने से पूरी तरह रोक दी गई, और वह अपनी ही जीवित होने का प्रमाण देने के लिए अधिकारियों के चक्कर काटने को विवश हो गया। क्या है पूरा मामला? प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार, बुजुर्ग बनारस नियमित रूप से वृद्धा पेंशन योजना के पात्र हैं और उनका डेटा पोर्टल पर दर्ज था (पेंशन डेटा संख्या: 31531007875)। नियमानुसार होने वाले वार्षिक सत्यापन के दौरान संबंधित पंचायत सचिव और सत्यापनकर्ता ने मौके पर स्थलीय जाँच करने की जहमत तक नहीं उठाई और अपनी रिपोर्ट में जीवित लाभार्थी को मृत दर्शा दिया। इस एक फर्जी और लापरवाह प्रविष्टि के कारण पोर्टल पर उनका नाम और भुगतान रोक दिया गया। लगभग डेढ़ साल तक जब पेंशन खाते में नहीं आई, तो भुखमरी और दवा-इलाज के संकट से जूझ रहे बुजुर्ग ने हार न मानते हुए आईजीआरएस (IGRS) पोर्टल पर संदर्भ संख्या 40018526001294 (दिनांक 13.01.2026) के माध्यम से अपनी फरियाद मुख्यमंत्री और उच्चाधिकारियों तक पहुँचाई। जाँच में खुली पोल, पर कार्रवाई के नाम पर लीपापोती शिकायत के बाद जब खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) सल्टौआ गोपालपुर द्वारा मामले की वास्तविकता की जाँच कराई गई, तो सच्चाई सामने आ गई। जाँच में स्पष्ट हुआ कि लाभार्थी बनारस पूरी तरह जीवित हैं और पेंशन के पात्र हैं। इसके बाद खंड विकास अधिकारी और जिला समाज कल्याण अधिकारी, बस्ती द्वारा निदेशालय स्तर पर डेटा रिवर्ट करने व पेंशन बहाल करने की प्रक्रिया शुरू तो कर दी गई है। व्यवस्था पर बड़ा सवाल: कागजों में मारने वालों पर सिर्फ 'चेतावनी'? इस पूरे प्रकरण ने प्रशासनिक अमले की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। सवाल यह उठता है कि: क्या बिना स्थलीय सत्यापन के मनगढ़ंत रिपोर्ट तैयार करना अधिकारियों की आदत बन चुकी है? एक जीवित इंसान को कागजों में मौत के मुँह में धकेलने वाले लापरवाह सचिव और सत्यापनकर्ता के खिलाफ सिर्फ "भविष्य में सचेत रहने की चेतावनी" (कारण बताओ नोटिस का इतिश्री) जैसा हल्का दंड क्यों दिया गया? क्या गरीबों के हक पर डाका डालने वाले ऐसे कर्मचारियों पर कठोर आपराधिक या विभागीय कार्रवाई नहीं होनी चाहिए? उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के सल्टौआ गोपालपुर विकास खंड के जसोवर गाँव के बुजुर्ग बनारस पुत्र राम आसरे के साथ प्रशासनिक लापरवाही का घिनौना मजाक सामने आया है। पंचायत सचिव के फर्जी और संवेदनहीन सत्यापन के कारण लगभग 15 महीनों तक इस लाचार बुजुर्ग की वृद्धा पेंशन रोक दी गई, जबकि वे पूरी तरह जीवित और पात्र हैं। जब पीड़ित ने IGRS के माध्यम से गुहार लगाई, तब जाँच में खुलासा हुआ कि सचिव ने अपनी रिपोर्ट में जीवित व्यक्ति को 'मृत' दर्ज कर दिया था। हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी प्रशासनिक गलती और गरीब के उत्पीड़न के बावजूद जिम्मेदार कर्मियों पर कठोर कार्रवाई के बजाय केवल "भविष्य में सचेत रहने की चेतावनी" देकर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की गई है। सरकारी तंत्र की इस घोर लापरवाही ने यह साबित कर दिया है कि कागजी घोड़ों पर दौड़ने वाले अधिकारियों को आम जनता की पीड़ा से कोई सरोकार नहीं है। यदि ऐसे मामलों में सख्त नजीर पेश नहीं की गई, तो सरकारी योजनाएं इसी तरह भ्रष्टाचार और कागजी हेराफेरी की भेंट चढ़ती रहेंगी।
IGRS पर गुहार के बाद खुली पोल, पर जिम्मेदार कर्मियों पर महज 'चेतावनी' की खानापूर्ति से उठ रहे सवाल बस्ती: सरकारी बाबुओं की कलम ने जिंदा इंसान को बनाया 'मृतक', 15 महीने से वृद्धा पेंशन के लिए दर-दर भटकने को मजबूर लाचार बुजुर्ग सल्टौआ गोपालपुर ब्लॉक का सनसनीखेज मामला; पंचायत सचिव की फर्जी रिपोर्ट से उजागर हुई प्रशासनिक संवेदनहीनता IGRS पर गुहार के बाद खुली पोल, पर जिम्मेदार कर्मियों पर महज 'चेतावनी' की खानापूर्ति से उठ रहे सवाल IGRS पर गुहार के बाद खुली पोल: पीड़ित बुजुर्ग द्वारा पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने के बाद खंड विकास अधिकारी की जाँच में लाभार्थी पूरी तरह जीवित और पात्र पाए गए। व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल: जीवित इंसान को कागजों में मारने वाले लापरवाह सत्यापनकर्ताओं और सचिव पर कठोर कार्रवाई के बजाय केवल 'भविष्य में सचेत रहने की चेतावनी' देकर खानापूर्ति करने पर भड़का आक्रोश। विशेष संवाददाता / बस्ती उत्तर प्रदेश के जनपद बस्ती में सरकारी व्यवस्था और संवेदनहीनता का एक ऐसा हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जो शासन के दावों की पोल खोलने के लिए काफी है। जनपद के सल्टौआ गोपालपुर विकास खंड अंतर्गत जसोवर (ग्राम पंचायत रेती) निवासी बुजुर्ग बनारस पुत्र राम आसरे को जिम्मेदार कर्मचारियों और पंचायत सचिव की लापरवाही के चलते कागजों में 'मृत' घोषित कर दिया गया। इसके परिणामस्वरूप, उस लाचार बुजुर्ग की वृद्धा पेंशन करीब 15 महीने से पूरी तरह रोक दी गई, और वह अपनी ही जीवित होने का प्रमाण देने के लिए अधिकारियों के चक्कर काटने को विवश हो गया। क्या है पूरा मामला? प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार, बुजुर्ग बनारस नियमित रूप से वृद्धा पेंशन योजना के पात्र हैं और उनका डेटा पोर्टल पर दर्ज था (पेंशन डेटा संख्या: 31531007875)। नियमानुसार होने वाले वार्षिक सत्यापन के दौरान संबंधित पंचायत सचिव और सत्यापनकर्ता ने मौके पर स्थलीय जाँच करने की जहमत तक नहीं उठाई और अपनी रिपोर्ट में जीवित लाभार्थी को मृत दर्शा दिया। इस एक फर्जी और लापरवाह प्रविष्टि के कारण पोर्टल पर उनका नाम और भुगतान रोक दिया गया। लगभग डेढ़ साल तक जब पेंशन खाते में नहीं आई, तो भुखमरी और दवा-इलाज के संकट से जूझ रहे बुजुर्ग ने हार न मानते हुए आईजीआरएस (IGRS) पोर्टल पर संदर्भ संख्या 40018526001294 (दिनांक 13.01.2026) के माध्यम से अपनी फरियाद मुख्यमंत्री और उच्चाधिकारियों तक पहुँचाई। जाँच में खुली पोल, पर कार्रवाई के नाम पर लीपापोती शिकायत के बाद जब खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) सल्टौआ गोपालपुर द्वारा मामले की वास्तविकता की जाँच कराई गई, तो सच्चाई सामने आ गई। जाँच में स्पष्ट हुआ कि लाभार्थी बनारस पूरी तरह जीवित हैं और पेंशन के पात्र हैं। इसके बाद खंड विकास अधिकारी और जिला समाज कल्याण अधिकारी, बस्ती द्वारा निदेशालय स्तर पर डेटा रिवर्ट करने व पेंशन बहाल करने की प्रक्रिया शुरू तो कर दी गई है। व्यवस्था पर बड़ा सवाल: कागजों में मारने वालों पर सिर्फ 'चेतावनी'? इस पूरे प्रकरण ने प्रशासनिक अमले की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। सवाल यह उठता है कि: क्या बिना स्थलीय सत्यापन के मनगढ़ंत रिपोर्ट तैयार करना अधिकारियों की आदत बन चुकी है? एक जीवित इंसान को कागजों में मौत के मुँह में धकेलने वाले लापरवाह सचिव और सत्यापनकर्ता के खिलाफ सिर्फ "भविष्य में सचेत रहने की चेतावनी" (कारण बताओ नोटिस का इतिश्री) जैसा हल्का दंड क्यों दिया गया? क्या गरीबों के हक पर डाका डालने वाले ऐसे कर्मचारियों पर कठोर आपराधिक या विभागीय कार्रवाई नहीं होनी चाहिए? उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के सल्टौआ गोपालपुर विकास खंड के जसोवर गाँव के बुजुर्ग बनारस पुत्र राम आसरे के साथ प्रशासनिक लापरवाही का घिनौना मजाक सामने आया है। पंचायत सचिव के फर्जी और संवेदनहीन सत्यापन के कारण लगभग 15 महीनों तक इस लाचार बुजुर्ग की वृद्धा पेंशन रोक दी गई, जबकि वे पूरी तरह जीवित और पात्र हैं। जब पीड़ित ने IGRS के माध्यम से गुहार लगाई, तब जाँच में खुलासा हुआ कि सचिव ने अपनी रिपोर्ट में जीवित व्यक्ति को 'मृत' दर्ज कर दिया था। हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी प्रशासनिक गलती और गरीब के उत्पीड़न के बावजूद जिम्मेदार कर्मियों पर कठोर कार्रवाई के बजाय केवल "भविष्य में सचेत रहने की चेतावनी" देकर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की गई है। सरकारी तंत्र की इस घोर लापरवाही ने यह साबित कर दिया है कि कागजी घोड़ों पर दौड़ने वाले अधिकारियों को आम जनता की पीड़ा से कोई सरोकार नहीं है। यदि ऐसे मामलों में सख्त नजीर पेश नहीं की गई, तो सरकारी योजनाएं इसी तरह भ्रष्टाचार और कागजी हेराफेरी की भेंट चढ़ती रहेंगी।
- समाजवादी पार्टी कार्यकर्ताओं की बैठक संपन्न बनी रणनीति समाजवादी पार्टी कार्यकर्ताओं की बैठक संपन्न बनी रणनीति बेलहर,संतकबीरनगर । समाजवादी पार्टी ने आगामी चुनावों के लिए रणनीति तैयार करने हेतु सेक्टर और बूथ प्रभारियों की बैठकें आयोजित कीं। ये बैठकें शनिवार को बेलहर विकास खंड क्षेत्र के बेलवा सेगर चौराहा, मनैतापुर, सियाकटाई और मंझरिया पठान में हुईं। इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य संगठन को मजबूत करना और बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना था। कार्यक्रम का संचालन ओमकार यादव ने किया। बैठकों को संबोधित करते हुए पूर्व विधानसभा प्रत्याशी जयराम पांडेय ने केंद्र और प्रदेश सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार गरीबों, असहायों और पिछड़े वर्ग की उपेक्षा कर रही है। पांडेय ने यह भी कहा कि युवाओं को रोजगार देने के बजाय उनके साथ अन्याय किया जा रहा है। उन्होंने अयोध्या में कथित चंदा चोरी के मुद्दे का भी जिक्र करते हुए सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। जयराम पांडेय ने कार्यकर्ताओं से बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने और पूरी निष्ठा के साथ पार्टी के लिए काम करने का आह्वान किया। उन्होंने जोर दिया कि आगामी चुनाव में समाजवादी पार्टी की जीत सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक कार्यकर्ता को अपने क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभानी होगी। बैठकों को पूर्व विधायक विजय बहादुर यादव, अनवारूल हक, प्रिया पाठक, इसहाक अंसारी, श्याम जी यादव और भावी जिला पंचायत प्रत्याशी वार्ड संख्या-7 राधेश्याम यादव सहित कई अन्य नेताओं ने भी संबोधित किया। सभी वक्ताओं ने कार्यकर्ताओं से संगठन की नीतियों को जन-जन तक पहुंचाने और बूथ स्तर पर मजबूती से काम करने का आग्रह किया। इस दौरान रियाज अहमद, अमित सिंह, उमाशंकर चौधरी, अमर सिंह यादव, राधेश्याम यादव, उमेश कुमार निषाद और संदीप कुमार यादव आर सी कन्नौजिया जैसे कई कार्यकर्ताओं ने सक्रिय रूप से हिस्सा लिया।4
- कपिलवस्तु स्तूप पर लाइट एंड साउंड शो शुरू, विपश्यना पार्क का लोकार्पण केंद्रीय मंत्री ने किया सिद्धार्थनगर जिले की भारत-नेपाल सीमा पर स्थित ऐतिहासिक कपिलवस्तु स्तूप पर शनिवार को केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने अत्याधुनिक लाइट एंड साउंड शो एवं विपश्यना पार्क का लोकार्पण किया। उन्होंने शिलापट्ट का अनावरण कर स्तूप की परिक्रमा की और बौद्ध भिक्षुओं से संवाद किया। पर्यटन सुविधा केंद्र में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री ने विभिन्न विभागों की विकास प्रदर्शनी का अवलोकन किया तथा गोदभराई और अन्नप्राशन कार्यक्रम में भी हिस्सा लिया। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ काला नमक चावल एवं भगवान बुद्ध पर आधारित लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया। अपने संबोधन में हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि केंद्र सरकार पर्यटन और विरासत स्थलों के विकास के साथ जनकल्याणकारी योजनाओं को प्राथमिकता दे रही है। सांसद जगदंबिका पाल ने कहा कि लाइट एंड साउंड शो से कपिलवस्तु को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान मिलेगी। विधायक श्यामधनी राही ने इसे जनपद के पर्यटन विकास की दिशा में ऐतिहासिक पहल बताया। कार्यक्रम में सांसद जगदंबिका पाल, विधायक श्यामधनी राही, भाजपा जिलाध्यक्ष दीपक मौर्य, सिद्धार्थ विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. कविता शाह, भाजपा निवर्तमान जिलाध्यक्ष कन्हैया पासवान, जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष विक्रम सिंह, नगर पालिका अध्यक्ष गोविंद माधव,मीडिया प्रभारी रमेश मणि त्रिपाठी, भाजपा नेत्री पूजा पाल मुख्य विकास अधिकारी बलराम सिंह, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अभिषेक महाजन ,पुलिस क्षेत्राधिकारी मयंक द्विवेदी, शुभेंदु सिंह, विश्वजीत शौरयान सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।1
- अम्बेडकरनगर। आगामी कांवड़ यात्रा को सकुशल एवं व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के उद्देश्य से जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक प्राची सिंह ने शनिवार को थाना आलापुर क्षेत्र स्थित चौहड़ा घाट का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था, यातायात प्रबंधन, बैरिकेडिंग, साफ-सफाई तथा श्रद्धालुओं को उपलब्ध कराई जाने वाली मूलभूत सुविधाओं का जायजा लिया। इस दौरान संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश देते हुए सभी व्यवस्थाओं को समय से पूर्ण करने तथा कांवड़ यात्रियों की सुरक्षा एवं सुविधा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। रिपोर्ट : बलराम सोनी आलापुर1
- भरी सभा में ये कैसा 'सत्यदर्शन'? – जब मंच पर ही सच का आईना सामने आ गया! अजीत मिश्रा (खोजी) राजनीति और कूटनीति के गलियारों में अक्सर वो सब कुछ दिखाया जाता है, जो जनता देखना चाहती है। लेकिन कभी-कभी, अनजाने में या अचानक, एक ऐसा वाकया हो जाता है जो सारे पर्दों को हटाकर हकीकत को सबके सामने लाकर रख देता है। हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा एक वीडियो इस बात का सबसे बेहतरीन उदाहरण है। एक तरफ मंच पर नेताजी अपने चिर-परिचित अंदाज़ में बैठे हैं, और ठीक पीछे लगी बड़ी स्क्रीन पर अचानक एक महिला का इंटरव्यू चल पड़ता है — "मैं सैफई से हूं, अखिलेश राज में कभी सेफ नहीं रही।" भरी सभा, कैमरे की नज़रें और ठीक पीछे गूँजती यह बेबाक आवाज़! इस दृश्य को देखकर ऐसा लगा मानो किसी ने राजनीति की भारी-भरकम पटकथा के बीचों-बीच, अचानक से ज़मीन की हकीकत का सायरन बजा दिया हो। नेताजी की बगलें झांकने वाली मुद्रा और कमरे का माहौल यह बताने के लिए काफ़ी था कि कभी-कभी तकनीक भी सही समय पर सही मज़ाक करने के मूड में होती है। खैर, इसे तकनीकी चूक कहें या किसी की सोची-समझी शरारत, लेकिन इस वीडियो ने सोशल मीडिया पर बहस का एक नया दौर ज़रूर शुरू कर दिया है। आख़िरकार, जनता के बीच के सच को आप कितनी देर तक मंच के पीछे छुपाकर रख सकते हैं? स्क्रीन पर चल रही वह तसवीर और मंच पर बैठे चेहरों के भाव देखने लायक थे! इस मज़ेदार और व्यंग्यात्मक राजनीतिक पल पर आपकी क्या राय है? कमेंट सेक्शन में अपनी प्रतिक्रिया ज़रूर दें! #PoliticalSatire #ViralVideo #Saifai #IndianPolitics #AkhileshYadav #Sarcasm #PoliticalHumor #SocialMediaTrends1
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- जायरीन से भरी ऑटो पलटी, 12 घायल—2 की हालत गंभीर #viral #ambedkar_nagar #ambedkarnagarpolice #uppolice1