छतरपुर जिले के सरवई थाना क्षेत्र के दूल्हादेव गांव में हुई एक संदिग्ध मौत ने अब हत्या के आरोपों और पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतक रामस्वरूप पटेल की पत्नी सुरजा पटेल ने पुलिस अधीक्षक को आवेदन देकर अपने ही गांव के एक व्यक्ति पर पति की हत्या का आरोप लगाते हुए मामला दर्ज कर कार्रवाई करने की मांग की है। सुरजा पटेल के अनुसार, 21 जून 2026 की शाम को दूल्हादेव निवासी पलटू पटेल उनके पति रामस्वरूप को अपनी मोटरसाइकिल पर यह कहकर सरवई ले गया था कि वहां एक शादी समारोह है और वह उन्हें वापस छोड़ देगा। देर रात तक पति के वापस न लौटने पर जब पत्नी ने पलटू पटेल से पूछताछ की, तो उसने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। इसके बाद अगले दिन सुबह प्रतापपुरा गांव के बाहर एक खेत में रामस्वरूप पटेल का शव पड़ा हुआ मिला। मृतक की पत्नी सुरजा पटेल का सीधा आरोप है कि उनके पति की हत्या पलटू पटेल ने ही की है और शव को छिपाने के इरादे से खेत में फेंक दिया। आवेदिका ने सरवई थाना पुलिस पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि इस घटना के संबंध में थाना सरवई में जानकारी देने के बावजूद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज नहीं किया। आवेदन में थाना प्रभारी पर सीधे तौर पर पक्षपात करने का आरोप लगाया गया है। इसके अलावा, पुलिस पर मृतक के देवर से कोरे कागजों पर हस्ताक्षर कराने का भी आरोप लगाया गया है। पीड़िता ने अब पुलिस अधीक्षक से आरोपी के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की गुहार लगाई है। फिलहाल इन आरोपों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और यह देखना बाकी है कि पुलिस इस आवेदन पर आगे क्या कदम उठाती है।
छतरपुर जिले के सरवई थाना क्षेत्र के दूल्हादेव गांव में हुई एक संदिग्ध मौत ने अब हत्या के आरोपों और पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतक रामस्वरूप पटेल की पत्नी सुरजा पटेल ने पुलिस अधीक्षक को आवेदन देकर अपने ही गांव के एक व्यक्ति पर पति की हत्या का आरोप लगाते हुए मामला दर्ज कर कार्रवाई करने की मांग की है। सुरजा पटेल के अनुसार, 21 जून 2026 की शाम को दूल्हादेव निवासी पलटू पटेल उनके पति रामस्वरूप को अपनी मोटरसाइकिल पर यह कहकर सरवई ले गया था कि वहां एक शादी समारोह है और वह उन्हें वापस छोड़ देगा। देर रात तक पति के वापस न लौटने पर जब पत्नी ने पलटू पटेल से पूछताछ की, तो उसने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। इसके बाद अगले दिन सुबह प्रतापपुरा गांव के बाहर एक खेत में रामस्वरूप पटेल का शव पड़ा हुआ मिला। मृतक की पत्नी सुरजा पटेल का सीधा आरोप है कि उनके पति की हत्या पलटू पटेल ने ही की है और शव को छिपाने के इरादे से खेत में फेंक दिया। आवेदिका ने सरवई थाना पुलिस पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि इस घटना के संबंध में थाना सरवई में जानकारी देने के बावजूद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज नहीं किया। आवेदन में थाना प्रभारी पर सीधे तौर पर पक्षपात करने का आरोप लगाया गया है। इसके अलावा, पुलिस पर मृतक के देवर से कोरे कागजों पर हस्ताक्षर कराने का भी आरोप लगाया गया है। पीड़िता ने अब पुलिस अधीक्षक से आरोपी के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की गुहार लगाई है। फिलहाल इन आरोपों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और यह देखना बाकी है कि पुलिस इस आवेदन पर आगे क्या कदम उठाती है।
- छतरपुर जिले की नौगांव तहसील के ग्राम नयागांव में जमीन विवाद का एक मामला सामने आया है। यहां उत्तर प्रदेश पुलिस के सिपाही अखंड प्रताप यादव ने कलेक्टर को शिकायत देकर न्याय की गुहार लगाई है। सिपाही ने किरण कुमार बुंदेला नामक व्यक्ति पर उनकी निजी और शासकीय भूमि पर कथित तौर पर कब्जा करने का आरोप लगाया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि आरोपी ने जमीन के सीमांकन कार्य में बाधा डाली, गाली-गलौज की और उन्हें झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी। सिपाही ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर उचित कार्रवाई करने की मांग की है।1
- देश की कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाते हुए पूछा गया है कि आखिर हमारे देश में गरीब और अमीर के लिए अलग-अलग व्यवस्था क्यों है और क्या कानून सबके लिए एक समान नहीं है? यह तीखा आक्रोश बाबा बागेश्वर के भाई शालिगराम और अंकित मिश्रा को जेल ले जाने के दौरान दिए गए वीआईपी ट्रीटमेंट को लेकर सामने आया है। इस पूरे मामले पर खुद एक पुलिसकर्मी ने खुलकर बताया है कि आखिर उन्हें यह वीआईपी ट्रीटमेंट क्यों दिया गया। कानून व्यवस्था के इस दोहरे रवैये को लेकर तीखे सवाल खड़े किए जा रहे हैं।1
- टीकमगढ़ जिले के खरगापुर थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत फुटेर में सरकारी जमीन को माफियाओं द्वारा अवैध रूप से खोदे जाने का मामला सामने आया है। ग्रामीणों के अनुसार, खसरा नंबर 968 की इस सरकारी जमीन पर पहले क्रिकेट खेल ग्राउंड बना हुआ था, जिसका उपयोग स्थानीय बच्चे और युवा खेलने के लिए करते थे। आरोप है कि कुछ दबंग माफियाओं ने प्रशासन से साठगांठ करके इस शासकीय खेल मैदान पर मुरमा का अवैध उत्खनन शुरू कर दिया है। लगातार जेसीबी और ट्रैक्टरों का इस्तेमाल करके यहाँ से मुरमा निकाला जा रहा है, जिससे यह खेल मैदान अब पूरी तरह से बर्बाद हो चुका है। इस पूरे मामले में हैरान करने वाली बात यह है कि ग्रामीणों द्वारा बार-बार शिकायत किए जाने और जिम्मेदार अधिकारियों को पूरी जानकारी देने के बावजूद प्रशासन मौन साधे बैठा है और कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। अधिकारियों की इस अनदेखी को लेकर ग्रामवासियों में भारी आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों ने पुरजोर मांग की है कि इस अवैध उत्खनन को तुरंत रोका जाए, दोषी दबंगों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई हो और बच्चों के खेलने की इस जमीन को जल्द से जल्द अतिक्रमण मुक्त कराया जाए। इस गंभीर मामले पर फिलहाल किसी भी प्रशासनिक अधिकारी का कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।2
- छतरपुर जिले के कुपी ग्राम के समीप चल रहे धरना-प्रदर्शन की सूचना मिलने पर छतरपुर जिला प्रशासन के अधिकारियों ने तत्काल मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। प्रशासन द्वारा मौके पर किए गए सर्वे और सत्यापन में यह स्पष्ट हुआ कि प्रदर्शन में शामिल सभी 176 प्रभावित लोग पन्ना जिले की मझगांव एवं रूंझ परियोजना क्षेत्र के निवासी हैं। इस प्रदर्शन और विस्थापन अथवा मुआवजा प्रक्रिया का छतरपुर जिले से कोई संबंध नहीं है। छतरपुर प्रशासन ने मानवीय संवेदनशीलता का परिचय देते हुए प्रदर्शन स्थल पर ही पेयजल की व्यवस्था कराई और लोगों की समस्याएं सुनीं। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को समझाया कि उनकी मांगें और समस्याएं पन्ना जिले से संबंधित हैं, इसलिए उनके निराकरण के लिए पन्ना जिला प्रशासन से संपर्क करना ही उचित और प्रभावी माध्यम है। इसके साथ ही, सुरक्षा की दृष्टि से बिना अनुमति सार्वजनिक स्थान पर लंबे समय तक धरना न देने की समझाइश देते हुए महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य के हित में उन्हें अपने घर लौटने का आग्रह किया गया। इस दौरान मौके पर मौजूद कई प्रभावित परिवारों ने सरकार द्वारा मुआवजा राशि को ₹5 लाख प्रति परिवार से बढ़ाकर ₹12.50 लाख प्रति परिवार करने के निर्णय का स्वागत किया और सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया। छतरपुर जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कुपी में चल रहा यह प्रदर्शन पूरी तरह पन्ना जिले के प्रभावितों से संबंधित विषय है। प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि वे किसी भी भ्रामक जानकारी या अफवाह पर विश्वास न करें। साथ ही प्रशासन ने कहा कि केन-बेतवा लिंक परियोजना राष्ट्रीय महत्व की विकास परियोजना है, जिससे बुंदेलखंड क्षेत्र की सिंचाई, पेयजल और समग्र विकास को नई गति मिलेगी, इसलिए इस संबंध में भ्रम की स्थिति उत्पन्न करना जनहित में नहीं है।4
- टीकमगढ़ जिले के खरगापुर अंतर्गत बलदेवगढ़ जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत धनेरा में विकास योजनाओं में खुलेआम भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है, जहाँ दिन के उजाले को छोड़कर रात के घने अंधेरे में पुलिया के लेंटर डालने का काम धड़ल्ले से किया जा रहा है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि इस निर्माण कार्य में गुणवत्ता को पूरी तरह ताक पर रख दिया गया है। रात में निर्माण इसलिए किया जा रहा है ताकि घटिया सामग्री का उपयोग छुपाया जा सके। पुलिया निर्माण में सीमेंट की मात्रा नाममात्र की है और बजरी का उपयोग अत्यधिक मात्रा में किया जा रहा है, जिससे पहली ही बारिश या भारी वाहनों के निकलने पर पुलिया के ताश के पत्तों की तरह ढहने और बड़ा हादसा होने की आशंका है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि ग्राम पंचायत के सरपंच और सचिव की आपसी मिलीभगत और शह के कारण ही ठेकेदार और बिचौलिए बेखौफ होकर इस घटिया निर्माण को अंजाम दे रहे हैं। इस मामले में जब सरपंच प्रतिनिधि 'पंचू' से रात में हो रहे निर्माण और गुणवत्ताहीन सामग्री पर सवाल किया गया, तो उन्होंने गैर-जिम्मेदाराना रवैया अपनाते हुए अहंकार में कहा कि "जहां डालना है डालो, न्यूज़ (खबर) बना कर दे दो, हमें कोई फर्क नहीं पड़ता।" इस संबंध में जब बलदेवगढ़ जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) विकास राव से फोन पर बात करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। सरपंच प्रतिनिधि के इस बेखौफ अंदाज और अहंकार से स्पष्ट है कि उन्हें प्रशासन का कोई डर नहीं है। अब ग्रामीणों ने इस मामले की निष्पक्ष जांच कराने और निर्माण कार्य पर तुरंत रोक लगाने की मांग की है। देखना यह होगा कि इस खुलासे के बाद जिला प्रशासन और जनपद पंचायत के आला अधिकारी इस मामले पर संज्ञान लेते हैं या भ्रष्टाचार के इस खेल पर पर्दा डाल दिया जाएगा।1
- कुलपहाड़ के महोबकंठ थाना क्षेत्र अन्तर्गत ग्राम टुडर में तालाब की भूमि से हो रहे अवैध खनन के खिलाफ तहसील प्रशासन और पुलिस ने बड़ी संयुक्त कार्रवाई की है। इस छापेमारी में अवैध खनन में लिप्त एक जेसीबी और 10 ट्रैक्टरों को रंगे हाथ पकड़कर महोबकंठ थाना पुलिस के सुपुर्द किया गया है। इस औचक प्रशासनिक कार्रवाई से इलाके के खनन माफियाओं में पूरी तरह से हड़कंप मच गया है। यह कार्रवाई उपजिलाधिकारी के निर्देशन में तहसील क्षेत्र में अवैध खनन को रोकने के लिए चलाई जा रही मुहिम के तहत की गई है। नायब तहसीलदार मुकुल कुमार और पुलिस टीम ने ग्राम टुण्डर में सरकारी कागजात में तालाब के रूप में दर्ज गाटा संख्या 209 रकबा 2.873 पर छापा मारकर इन वाहनों को पकड़ा। नायब तहसीलदार ने स्पष्ट किया है कि उपजिलाधिकारी के निर्देश पर अवैध खनन के खिलाफ इस प्रकार की सख्त कार्रवाई आगे भी लगातार जारी रहेगी।1
- छतरपुर के मातगुवां थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम मातगुवां निवासी गोवरधन राजपूत (40), पिता सरजू प्रसाद राजपूत, को खेत जाते समय एक जहरीले सांप ने डस लिया। गोवरधन 16 जुलाई की सुबह करीब 10:00 बजे अपने घर से खेत पर बंधी गायों को पानी पिलाने जा रहे थे। इसी दौरान रास्ते में पड़ने वाली नाली से निकलते समय पत्तों में छिपे सांप ने उनके पैर में काट लिया। सांप के काटने के बाद गोवरधन किसी तरह अपने घर पहुंचे और पूरे मामले की जानकारी परिजनों को दी। परिजन उन्हें तुरंत एक निजी वाहन से जिला अस्पताल छतरपुर लेकर गए, जहां इमरजेंसी ड्यूटी पर मौजूद डॉ. रवि सोनी ने प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें मेल मेडिकल वार्ड में भर्ती कर लिया। फिलहाल अस्पताल में उनका उपचार जारी है।1
- बुंदेलखंड में कई पीढ़ियों से चली आ रही परंपरागत गंगा जी में फूल विसर्जन की परंपरा को लेकर महिलाओं और पुरुषों द्वारा इस पारंपरिक प्रथा का निर्वहन किया जा रहा है।1
- जहां एक तरफ आम इंसान को लतियाते हुए जेल लाया जाता है, वहीं धीरेंद्र शास्त्री के भाई को अनोखे अंदाज में जेल पहुंचाया गया। शास्त्री के भाई को फुल एसी वाली इनोवा क्रिस्टा गाड़ी में बैठाकर जेल लाया गया है। इतना ही नहीं, जेल के अंदर भाईसाहब के लिए बाहर से छप्पन भोज भी भेजा जा रहा है। छतरपुर की इस पूरी घटना को वहां मौजूद क्षेत्रीय पत्रकारों ने अपने फोन में रिकॉर्ड कर लिया। जेल के इस दोहरे रवैये को देखकर पत्रकारों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने अंत में जेल अधीक्षक की भी क्लास लगा डाली।1