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रिश्तेदार के घर बंसरी सरहुल मनाने पहुंची किशोरी ने फांसी लगा कि आत्महत्या जांच पड़ताल में जुटी पुलिस
आलोक कुमार
रिश्तेदार के घर बंसरी सरहुल मनाने पहुंची किशोरी ने फांसी लगा कि आत्महत्या जांच पड़ताल में जुटी पुलिस
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- आगामी रामनवमी मेला आयोजन के पुर अरु में विवाद की संभावना पर प्रशासन अलर्ट आयोजित हुआ शांति समिति की बैठक1
- Post by AAM JANATA1
- रामनवमी में डीजे बजेगा, मुस्लिम बुजुर्ग व्यक्ति बोले एक आंख में सुरमा एक आंख में काजल ऐसा नहीं चलेगा डीजे बैन होगा तो सबके त्योहार में बैन होगा बजेगा तो सबके त्योहार में बजेगा...1
- सिसई (गुमला)। प्रखंड क्षेत्र के सकरौली गांव में श्री संकट मोचन हनुमान मंंदिर का विधिवत् प्राण प्रतिष्ठा किया गया। इस उपलक्ष्य में 851 कलश के साथ भव्य रूप से कलश यात्रा निकाला गया। जिसमें हिन्दू जागरण के प्रदेश परावर्तन प्रमुख संजय वर्मा, विहिप बजरंग दल सिसई के प्रखंड अध्यक्ष पंकज साहु, संरक्षक मुकेश श्रीवास्तव डेविड, रोहित शर्मा, दामोदर सिंह, तेजमोहन साहु, मुकेश ताम्रकर,आशीष यादव, आनंद साहु सहित कई गणमान्य लोग शामिल हुए। वहीं जिला परिषद सदस्य सिसई उतरी विजयलक्ष्मी कुमारी, उर्वशी देवी सहित हज़ारों की संख्या में श्रधालु महिला पुरुष व बच्चों ने इस कलश यात्रा में भाग लिया। सभी भक्तगण जय श्री राम, जय जय श्री राम, जय हनुमान के जयघोष लगाते हुए आगे बढ़ रहे थे पुरा क्षेत्र जय श्री राम के जयघोष से गुंजायमान रहा। सकरौली परास नदी के तट पर पुरोहित द्वारा विधिवत् मंत्रोचारण के साथ जलभरनी का रस्म पुरा किया गया। तत्पश्चात् मंंदिर आकर जल से भरे कलश को पांच परिक्रमा कर स्थापित किया गया। एवं विधिवत् पूजा अर्चना कर श्री संकट मोचन हनुमान जी का प्राण प्रतिष्ठा संपन्न कराया गया। एवं सभी भक्तों के बीच गुड़ चना, शरबत तथा महाप्रसाद का वितरण किया गया। कीर्तन मंडली द्वारा संध्या 5 बजे से 12 घंटे का अखंड हरि कीर्तन प्रारंभ किया जा चुका है। कलश यात्रा को सफल बनाने में श्री संकट मोचन हनुमान मंंदिर समिति के अध्यक्ष जगरनाथ साहु, उपाध्यक्ष अमर साहु, संदीप साहु, विकास साहु, सचिव बजरंग साहु, सह सचिव कलिंद्र साहु, कोषाध्यक्ष कृष्णा कुमार साहु, संरक्षक प्रयाग साहु , महिपाल साहु, सहित सभी कार्यकर्ताओं का भरपूर योगदान रहा।4
- गुमला की पांच बेटियों ने समाज में प्रचलित परंपरा को तोड़कर एक नई मिसाल कायम की है। आमतौर पर अंतिम संस्कार की रस्मों को पुरुषों का अधिकार माना जाता है, लेकिन कौशल्या देवी की बेटियों ने यह साबित किया कि संस्कार निभाने के लिए जेंडर नहीं, बल्कि मजबूत इरादों और जिम्मेदारी की आवश्यकता होती है। 76 वर्षीय कौशल्या देवी का निधन 23 मार्च को हुआ। उनके कोई पुत्र नहीं थे, लेकिन उन्होंने अपनी पांचों बेटियों को पढ़ा-लिखाकर समाज के प्रतिष्ठित पदों तक पहुँचाया। मां के निधन के बाद बेटियों ने तय किया कि वे स्वयं अंतिम संस्कार करेंगी. इसके बाद बड़ी बेटी नीलिमा नीलिमा ओहदार, विद्या ओहदार, ज्योति ओहदार, अर्चना ओहदार और कल्पना ओहदार ने मां के शव को कंधा दिया। वहीं बड़ी बेटी नीलिमा ओहदार ने मुखाग्नि दी। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग भी मौजूद रहे।1
- हमारे यहां हर तरह के टैटू बनए एवं मिटाए जाते हैं और साथ ही चेहरे के दाग धब्बे उच्च तकनीक लेजर मशीन द्वारा हटाए जाते है1
- महुआडाँड़ की सड़कों पर आज भक्ति, शक्ति और शौर्य का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। बजरंग दल और महावीर मंडल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ऐतिहासिक 'मंगला जुलूस' का भव्य शुभारंभ हो गया है। पिछले 30 वर्षों की गौरवशाली परंपरा को जीवंत करते हुए, हजारों की संख्या में रामभक्त सड़कों पर उतर आए हैं। *शौर्य का प्रदर्शन: दुर्गा वाहिनी की बहनों ने दिखाया उत्साह* जुलूस की सबसे खास बात दुर्गा वाहिनी की बहनों की भारी उपस्थिति है। पारंपरिक परिधानों में सजीं और हाथों में भगवा ध्वज लिए इन बहनों का उत्साह देखते ही बन रहा है। रामभक्तों की टोली ढोल-नगाड़ों और ताशों की थाप पर थिरकते हुए जयकारे लगा रही है, जिससे पूरा प्रखंड भक्तिमय हो गया है। *30 वर्षों से अटूट है यह परंपरा* ज्ञात हो कि महुआडाँड़ में यह आयोजन पिछले तीन दशकों (30 वर्ष) से निरंतर आयोजित किया जा रहा है। समय के साथ इस जुलूस का स्वरूप और भी भव्य होता गया है। आज के इस विशेष 'मंगला जुलूस' में केवल स्थानीय लोग ही नहीं, बल्कि आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे हैं। *केसरिया ध्वजों से पटा महुआडाँड़* जुलूस का मार्ग पूरी तरह से केसरिया ध्वजों और स्वागत द्वारों से सजाया गया है। बजरंग दल के कार्यकर्ताओं द्वारा सुरक्षा और अनुशासन का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। महावीर मंडल के पदाधिकारियों ने बताया कि यह जुलूस शांति और सद्भाव के साथ अपनी मंजिल की ओर अग्रसर है। "यह केवल एक जुलूस नहीं, बल्कि महुआडाँड़ की आस्था का महाकुंभ है। 30 साल पहले जो संकल्प लिया गया था, वह आज एक विशाल वटवृक्ष बन चुका है।" — आयोजन समिति1
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