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गोला की खुटार रोड स्थित मथुरा नगर जलमग्न, से लोग परेशान खुटार रोड स्थित मथुरा नगर में जलभराव से लोग परेशान गोला गोकर्णनाथ, जिला लखीमपुर खीरी। नगर क्षेत्र में खुटार रोड पर स्थित मथुरा नगर में बारिश के बाद गलियों में जलभराव की समस्या से स्थानीय लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लगातार बारिश के कारण सड़क और गलियों में पानी जमा हो गया है, जिससे लोगों का आवागमन प्रभावित हो रहा है।
Prem chand
गोला की खुटार रोड स्थित मथुरा नगर जलमग्न, से लोग परेशान खुटार रोड स्थित मथुरा नगर में जलभराव से लोग परेशान गोला गोकर्णनाथ, जिला लखीमपुर खीरी। नगर क्षेत्र में खुटार रोड पर स्थित मथुरा नगर में बारिश के बाद गलियों में जलभराव की समस्या से स्थानीय लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लगातार बारिश के कारण सड़क और गलियों में पानी जमा हो गया है, जिससे लोगों का आवागमन प्रभावित हो रहा है।
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- गोला की खुटार रोड स्थित मथुरा नगर जलमग्न, से लोग परेशान खुटार रोड स्थित मथुरा नगर में जलभराव से लोग परेशान गोला गोकर्णनाथ, जिला लखीमपुर खीरी। नगर क्षेत्र में खुटार रोड पर स्थित मथुरा नगर में बारिश के बाद गलियों में जलभराव की समस्या से स्थानीय लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लगातार बारिश के कारण सड़क और गलियों में पानी जमा हो गया है, जिससे लोगों का आवागमन प्रभावित हो रहा है।1
- गंभीर बीमारी और बदहाली की मार: लखीमपुर खीरी में न राशन, न आयुष्मान... इलाज को तरस रहा परिवार; मीडिया की पहल पर अधिकारियों ने दी प्रतिक्रिया लखीमपुर खीरी। जिला लखीमपुर खीरी के विकासखंड बांकेगंज अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत संसारपुर के ग्राम विलाहिया से प्रशासनिक दावों की पोल खोलती एक अत्यंत दर्दनाक तस्वीर सामने आई है। यहाँ के निवासी घनश्याम (पुत्र रामस्वरूप) पिछले लगभग दो महीनों से पैरालिसिस (लकवा) की गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। बीमारी के कारण वे न चल-फिर सकते हैं और न ही बोलने की स्थिति में हैं, जिससे वे पूरी तरह बिस्तर पर लाचार पड़े हुए हैं। कमाई का इकलौता जरिया ठप, 6 बच्चों के सामने भुखमरी का संकट घनश्याम ही अपने परिवार में अकेले कमाने वाले व्यक्ति थे। उनके अचानक गंभीर रूप से बीमार होने के बाद से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। परिवार में उनकी पत्नी के अलावा छह मासूम बच्चे (चार बेटियां और दो छोटे बेटे) हैं। घर की आर्थिक स्थिति इस कदर बिगड़ चुकी है कि परिवार के सामने अब दो वक्त की रोटी का संकट पैदा हो गया है और पूरा कुनबा दाने-दाने को मोहताज है। इलाज में बिका सब कुछ; आयुष्मान व राशन कार्ड तक से वंचित पीड़ित परिवार का कहना है कि घनश्याम के शुरुआती इलाज में घर का बचा-कुचा सामान और जमा-पूंजी सब बिक चुकी है, लेकिन हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। अत्यंत दयनीय अवस्था में झोपड़पट्टी/कच्चे मकान में गुजर-बसर कर रहे इस बेहद गरीब परिवार के पास न तो राशन कार्ड है और न ही आयुष्मान भारत कार्ड। आयुष्मान कार्ड न होने के कारण परिवार धन के अभाव में घनश्याम का किसी बेहतर अस्पताल में इलाज कराने में पूरी तरह असमर्थ है। मामले पर जब जिम्मेदारों से बात की गई तो बोले: पत्रकारिता के दायित्व के तहत जब इस पीड़ित परिवार की समस्या को लेकर संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से संपर्क कर उनका पक्ष लिया गया, तो उन्होंने मामले में संज्ञान लेने की बात कही: ग्राम पंचायत अधिकारी (पंचायत सचिव) आलोक अवस्थी का पक्ष: ग्राम पंचायत अधिकारी आलोक अवस्थी ने बताया— "मुझको यहाँ आए अभी कुछ ही दिन हुए हैं। आज ही मुझे इस मामले की जानकारी हो रही है। मैं मामले की पूरी जानकारी कर जांच करूंगा और शासन की तरफ से जो भी संभव मदद होगी, उसकी प्रक्रिया पूरी कराकर परिवार को राहत दिलवाई जाएगी।" ग्राम प्रधान प्रतिनिधि रामप्रसाद देवल का पक्ष: वहीं ग्राम प्रधान प्रतिनिधि रामप्रसाद देवल ने बताया— "राशन कार्ड और आयुष्मान कार्ड न होने की जानकारी मुझे नहीं है। प्रधानमंत्री आवास योजना की सूची में घनश्याम का नाम डलवा दिया गया है। जैसे ही सरकार की तरफ से आवास स्वीकृत होकर आते हैं, उन्हें आवास दिलवाया जाएगा।" त्वरित राहत की दरकार अब देखना यह होगा कि इस असहाय परिवार तक कागजी प्रक्रियाओं से परे हटकर कितनी जल्दी जमीनी मदद पहुँचती है। ग्रामीणों और परिजनों की मांग है कि पीड़ित परिवार को तत्काल प्रभाव से खाद्यान्न (राशन) और घनश्याम के निशुल्क इलाज के लिए आयुष्मान/स्वास्थ्य सहायता उपलब्ध कराई जाए, ताकि इस बेबस परिवार का जीवन बच सके।1
- Sometimes you just need to pause and take in the view from above. Where is the most peaceful place you have ever visited?1
- बेहजम बी पैक्स अछनिया गोदाम में पानी भर जाने से लगभग 120 बोरी खाद भीग गईं मितौली खीरी । बेहजम बी पैक्स अछनिया गोदाम में पानी भर जाने से लगभग 120 बोरी खाद भीग गईं जहाँ किसान किसान खाद के लिए मारामारी कर रहा था वहीं कुदरत के कहर से 120 बोरी खाद गोदाम में पानी भर जाने से भीग गई1
- तीन दिन की बारिश से धान और गन्ने की फसल धराशायी किसानों को हुआ भारी नुकसान, दर्जनों गांवों के किसान प्रभावित पलियाकलां। तीन दिनों से लगातार हो रही बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खेतों में खड़ी धान और गन्ने की फसल बारिश और तेज हवाओं के चलते धराशायी हो गई है। कई स्थानों पर खेतों में पानी भरने से फसलें खराब होने की आशंका भी बढ़ गई है। पलिया क्षेत्र के दर्जनों गांवों में किसानों को भारी नुकसान होने की बात सामने आ रही है। पटिहन, फुलवरिया, मकनपुर, बसंतापुर, बंसीनगर, नगला, मरौचा, सरखना, अतरिया, मरूआ पश्चिम और मझौरा समेत आसपास के गांवों में बारिश का सबसे अधिक असर फसलों पर दिखाई दे रहा है। खेतों में तैयार खड़ी धान की फसल कई जगह जमीन पर बिछ गई है। किसानों का कहना है कि लगातार बारिश के कारण धान की बालियां पानी में डूब गई हैं। यदि खेतों से जल्द पानी नहीं निकला तो फसल के सड़ने और उत्पादन प्रभावित होने का खतरा है। वहीं, गन्ने की फसल भी तेज हवा और लगातार बारिश के कारण गिर गई है। किसानों का कहना है कि गन्ने के गिरने से उसकी बढ़वार और उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। पहले से ही खेती की बढ़ती लागत को लेकर परेशान किसानों के सामने अब बारिश से हुए नुकसान ने नई चिंता खड़ी कर दी है। किसान श्रीकृष्ण भास्कर, दिलीप सिंह राना, महेन्द्र अवस्थी, फारुख, अमरजीत सिंह, हरिन्दर सिंह, रिंकू सिंह, रणधीर सिंह, अमृतलाल एवं रज्जन ने बताया कि धान की फसल में काफी मेहनत और लागत लगाई गई थी। फसल तैयार होने के समय हुई लगातार बारिश ने मेहनत पर पानी फेर दिया। किसानों ने प्रशासन से प्रभावित क्षेत्रों में फसलों का सर्वे कराकर नुकसान का आकलन कराने और उचित मुआवजा दिलाने की मांग की है।3
- *डीजल में पानी मिलने की शिकायत से नौगांव में मचा हड़कंप उपभोक्ताओं में आक्रोश* *डीजल में पानी मिलने की शिकायत से नौगांव में मचा हड़कंप उपभोक्ताओं में आक्रोश* जनपद लखीमपुर खीरी। थाना मझगई क्षेत्र के अंतर्गत नौगांव स्थित पेट्रोल पंप को लेकर उपभोक्ताओं की ओर से गंभीर शिकायत सामने आई है। लोगों का आरोप है कि पेट्रोल पंप से डीजल लेने के बाद उसमें पानी मिला हुआ पाया गया जिससे वाहन चालकों में नाराजगी और चिंता का माहौल है ग्राहकों का कहना है कि मेहनत की कमाई से खरीदा गया ईंधन यदि वाहन के लिए परेशानी का कारण बन जाए तो सवाल उठना स्वाभाविक है। तेल चाहिए था सफर को आसान बनाने के लिए मगर पानी की शिकायत ने राह में सवाल खड़े कर दिए शिकायत करने वाले उपभोक्ताओं ने मामले की निष्पक्ष जांच कराकर डीजल के नमूने की अधिकृत लैब से जांच कराने की मांग की है ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके। साथ ही संबंधित अधिकारियों से जांच के बाद नियमानुसार कार्रवाई की मांग उठ रही है मामले में पेट्रोल पंप संचालक का पक्ष तथा संबंधित विभाग की आधिकारिक पुष्टि/जांच रिपोर्ट सामने आना अभी बाकी है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि डीजल में पानी की मिलावट की शिकायत कितनी सही है। रिपोर्ट: संदेश राज1
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- लखीमपुर खीरी:रहमतपुर गांव में मौत बनकर टूटी दीवार,पति पत्नी और बेटे सहित तीन की मौत *नीमगांव थाना क्षेत्र के रहमतपुर गांव में मौत बनकर टूटी दीवार, पति-पत्नी एवं बेटे समेत एक ही परिवार के तीन लोगों की दर्दनाक मौत* *नीमगांव खीरी,26 सितंबर 2026।* लखीमपुर खीरी जनपद में लगातार भारी बारिश के कारण कमजोर हुई कच्ची दीवार भर भरा कर गिर गई जिसमें घर के अंदर सो रहे परिवार के तीन लोग दब कर मर गए। घटना लखीमपुर खीरी जनपद के नीमगांव थाना क्षेत्र के अंतर्गत रहमतपुर गांव की है जहां विगत रात भारी बारिश के चलते मिट्टी की कच्ची दीवार भर भरा कर गिर गई जिसमें छप्पर के नीचे सो रहे एक परिवार के तीन लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। बताया जा रहा है कि मृतकों में मोहन कश्यप पुत्र साधू कश्यप उम्र 50 वर्ष, कविता कश्यप पत्नी मोहन उम्र 45 वर्ष तथा नानू कश्यप पुत्र मोहन उम्र 8 वर्ष अपने कच्चे घर में सो रहे थे। सुबह करीब 3:30 बजे मिट्टी की दीवार भर भरा कर अचानक गिर गई जिसके नीचे तीनों दब गए। दीवार गिरने की तेज आवाज सुनकर के आसपास के ग्रामीण सहायता के लिए दौड़े तथा मलबा हटाने लगे लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। तीनों की घटनास्थल पर ही दर्दनाक मौत हो चुकी थी। एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मौत की खबर से गांव में मातम छा गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। आसपास के ग्रामीण भी घटना से स्तब्ध हैं। सूचना पर पहुँची पुलिस ने तीनों शवों को कब्जे में लेकर आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी है। हादसे के कारणों की जांच की जा रही है। लगातार बारिश के बीच हुई इस घटना ने कच्चे मकानों में रहने वाले परिवारों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के मौसम में कमजोर और जर्जर मकानों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।1