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आज उमरिया जिले की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और रोजगार सहायिकाओं ने अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम एक ज्ञापन कलेक्टर महोदया, उमरिया को सौंपा। उन्होंने इस ज्ञापन के माध्यम से अपना मानदेय बढ़ाने और उन्हें राज्य कर्मचारी का दर्जा दिए जाने का निवेदन किया। इस मांगों को लेकर हुए ज्ञापन सौंपने के दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका सहायक संघ की प्रदेश उपाध्यक्ष सुनीता त्रिपाठी, जिला अध्यक्ष श्रीमती आशा सिंह, जिला सचिव श्रीमती बेबी जान, जिला सह सचिव नेमकली सिंह, ललिता साहू, चयना पटेल, उमा कोल सहित कई अन्य सदस्य उपस्थित रहे। यह ज्ञापन मध्य प्रदेश आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका संघ और भारतीय मजदूर संघ द्वारा कलेक्टर कार्यालय उमरिया में प्रस्तुत किया गया।
जिला ब्यूरो चीफ/बाल्मीकि यादव
आज उमरिया जिले की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और रोजगार सहायिकाओं ने अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम एक ज्ञापन कलेक्टर महोदया, उमरिया को सौंपा। उन्होंने इस ज्ञापन के माध्यम से अपना मानदेय बढ़ाने और उन्हें राज्य कर्मचारी का दर्जा दिए जाने का निवेदन किया। इस मांगों को लेकर हुए ज्ञापन सौंपने के दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका सहायक संघ की प्रदेश उपाध्यक्ष सुनीता त्रिपाठी, जिला अध्यक्ष श्रीमती आशा सिंह, जिला सचिव श्रीमती बेबी जान, जिला सह सचिव नेमकली सिंह, ललिता साहू, चयना पटेल, उमा कोल सहित कई अन्य सदस्य उपस्थित रहे। यह ज्ञापन मध्य प्रदेश आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका संघ और भारतीय मजदूर संघ द्वारा कलेक्टर कार्यालय उमरिया में प्रस्तुत किया गया।
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- आशा, ऊषा एवं आशा पर्यवेक्षकों ने आज शहडोल के कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचकर अपनी विभिन्न मांगों को लेकर एक ज्ञापन सौंपा। संगठन ने आरोप लगाया है कि उन्हें मिलने वाली प्रोत्साहन राशि का भुगतान समय पर नहीं किया जा रहा है और कई स्थानों पर इसमें अनुचित कटौती भी की जा रही है, जिससे कर्मचारियों में भारी नाराजगी है। कर्मचारियों ने मांग की है कि प्रोत्साहन राशि का नियमित भुगतान हर माह की 5 तारीख तक बिना किसी कटौती के सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने वेतन पर्ची की व्यवस्था लागू करने, सभी बकाया राशि का एरियर सहित भुगतान करने और भुगतान प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बरतने की भी मांग की। इसके अतिरिक्त, आशा कार्यकर्ताओं के लिए ₹26,000 न्यूनतम वेतन, राज्य सरकार की ओर से तत्काल ₹10,000 मासिक मानदेय, गैर-विभागीय कार्यों के लिए अतिरिक्त भुगतान, रिक्त पदों पर योग्य उम्मीदवारों की नियुक्ति और सेवा समाप्ति में होने वाली मनमानी पर तत्काल रोक लगाने की भी मांग उठाई गई। संगठन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी इन प्रमुख मांगों का शीघ्र और संतोषजनक निराकरण नहीं किया जाता है, तो वे अपने आंदोलन को और भी अधिक तेज करेंगे।2
- मध्य प्रदेश के कुल्लू बरखेड़ा गांव में अब विकास की एक नई कहानी लिखी जा रही है, जहाँ NGO SayTrees की पहल से प्रदेश का सबसे बड़ा तालाब बनाया जाएगा। इस परियोजना को "पानी, हरियाली और विकास" की नई क्रांति के रूप में देखा जा रहा है, जिससे पूरे क्षेत्र में जल संरक्षण, हरियाली और रोजगार के नए रास्ते खुलने की उम्मीद है। NGO SayTrees पर्यावरण संरक्षण, पौधारोपण और जल बचाने जैसे सराहनीय कार्यों के लिए जानी जाती है और इसने देश के कई राज्यों में हरियाली अभियान चलाकर हजारों पेड़ लगाए हैं। अब संस्था कुल्लू बरखेड़ा में यह विशाल तालाब बनाकर ग्रामीण विकास की एक मिसाल पेश करने जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से चली आ रही पानी की समस्या के कारण उनकी खेती बुरी तरह प्रभावित हो रही थी। इस तालाब के निर्माण से किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिलेगा, जिससे भूजल स्तर बढ़ेगा और गांव में एक बार फिर हरियाली लौटेगी। यह तालाब न केवल खेती को मजबूत करेगा, बल्कि मछली पालन, पशुपालन और अन्य छोटे रोजगारों को भी बढ़ावा देगा। आने वाले समय में यह स्थान पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है। गांव के लोगों ने NGO SayTrees की इस पहल की जमकर प्रशंसा की है, यह कहते हुए कि संस्था सिर्फ वादे नहीं कर रही, बल्कि जमीन पर उतरकर गांव और पर्यावरण के लिए वास्तविक काम कर रही है। संस्था द्वारा लगाए गए पौधों की कई वर्षों तक देखरेख भी की जाती है, ताकि हरियाली स्थायी बनी रहे। जल संकट के इस दौर में कुल्लू बरखेड़ा में बनने वाला यह विशाल तालाब आने वाली पीढ़ियों के लिए वरदान साबित हो सकता है, जिससे गांव को नई पहचान मिलने के साथ-साथ यह पूरे मध्य प्रदेश के लिए एक उदाहरण बनेगा। कुल्लू बरखेड़ा अब सिर्फ एक गांव नहीं, बल्कि विकास, हरियाली और जल संरक्षण की एक नई उम्मीद बनकर उभर रहा है।1
- अभिनेत्री कंगना रनौत ने रणवीर सिंह के समर्थन में सामने आकर फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज (FWICE) द्वारा उन पर लगाए गए कथित प्रतिबंध के मुद्दे पर अपनी बात रखी है। कंगना रनौत ने इस संदर्भ में टिप्पणी करते हुए कहा कि, जब किसी व्यक्ति की हैसियत और कद बढ़ता है तो उसके दुश्मन भी बनने लगते हैं।1
- कटनी के निमिहा मोहल्ला स्थित आदिशक्ति माँ विंध्यवासिनी मंदिर, विंध्याचल धाम में माँ विंध्यवासिनी की असीम कृपा से संतान सुख प्राप्त होने की खुशी में एक भव्य सोलह श्रृंगार एवं भजन संध्या का आयोजन किया गया। यह आयोजन जबलपुर के पनागर क्षेत्र निवासी श्री सुमित केवट और कटनी के आधारकाप निवासी खुशबू निषाद को संतान सुख की प्राप्ति के उपलक्ष्य में, माता रानी के श्री चरणों में कृतज्ञता व्यक्त करने हेतु संपन्न हुआ। यह मंगलमय आयोजन दिनांक 31 मई 2026, दिन रविवार को सायंकाल 7 बजे विंध्याचल धाम निमिहा मोहल्ला में हुआ। इस शुभ अवसर पर, माँ विंध्यवासिनी का दिव्य सोलह श्रृंगार गाने-बजाने और भक्तिमय भजनों के साथ श्रद्धापूर्वक अर्पित किया गया। मंदिर परिसर को भव्य रूप से सजाया गया था, तथा भक्तों के लिए विशेष पूजा-अर्चना एवं भंडारे की भी व्यवस्था की गई थी। आदिशक्ति माँ विंध्यवासिनी मंदिर परिवार, निमिहा मोहल्ला, कटनी द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में सभी श्रद्धालु परिवार सहित सादर आमंत्रित हुए। भक्तों ने माँ विंध्यवासिनी के दरबार में उपस्थित होकर माता रानी का आशीर्वाद प्राप्त किया और इस मंगलमय आयोजन में सहभागिता की। इस दौरान मंदिर में चुनरी यात्रा के साथ सोलह श्रृंगार चढ़ाया गया।4
- कटनी नगर में माँ विंध्यवासिनी की भव्य महाआरती हर महीने आयोजित की जाती है। यह विशेष महाआरती प्रत्येक पूर्णिमा स्नान दान के अवसर पर होती है, जिसमें भक्तगण पूरी श्रद्धा के साथ शामिल होते हैं।1
- मैहर जिले के ग्राम पंचायत बढेरूहा में राजस्व विभाग और पटवारी की लापरवाही के कारण एक किसान अपनी जमीन के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है। पीड़ित किसान का आरोप है कि उसकी भूमि की कई बार नाप कराई जा चुकी है, लेकिन राजस्व अभिलेखों में स्पष्ट रूप से दर्ज होने के बावजूद उसे आज तक मौके पर उसकी वास्तविक जमीन नहीं मिल पाई है। किसान कामता प्रसाद पटेल का कहना है कि उनकी जमीन पर सड़क निर्माण कर दिया गया है, जिससे उन्हें लगातार आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता के चलते, कई बार अधिकारियों से शिकायत करने और भूमि की नाप कराने के बावजूद, उनकी समस्या का समाधान नहीं हो सका है। इसी क्रम में, पीड़ित कामता प्रसाद पटेल ने जिला कलेक्टर से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि यदि उनकी जमीन पर सड़क का निर्माण हुआ है, तो उन्हें नियमानुसार उचित मुआवजा दिया जाए और दोषी अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाए। अब यह देखना होगा कि जिला प्रशासन इस गंभीर मामले में कितनी गंभीरता दिखाता है और पीड़ित किसान को न्याय दिलाने के लिए क्या कदम उठाता है।4
- उमरिया जिला मुख्यालय के मानपुर जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत नौगमा में भ्रष्टाचार थमने का नाम नहीं ले रहा है, जहाँ सभी निर्माण कार्यों में लगातार गुणवत्ताविहीन कार्य कराया जा रहा है। एक चेक डैम बिना किसी ड्राइंग या नक्शे के बनवाया गया था, जो पहली ही बरसात में बह गया। वहीं, अपने निजी फायदे के लिए घर के पास ही ₹18 से ₹20 लाख का एक और चेक डैम बनवाया गया है। इन निर्माण कार्यों पर आज तक कोई लागत बोर्ड भी नहीं लगाया गया है, और जल बहाव से दिशा बदल देने के कारण यह चेक डैम पूरी तरह से बेकार हो गया है। इसी कड़ी में, ग्राम पंचायत भवन के पीछे स्थित लगभग 100 वर्ष पुराने पूर्वजों द्वारा निर्मित तालाब को ग्राम पंचायत नौगमा के प्रभावशाली व्यक्ति, सरपंच और सचिव मिलकर नियमों का उल्लंघन करते हुए लुप्त कर रहे हैं। जल संवर्धन योजना के तहत इस तालाब को सिर्फ अपने निजी स्वार्थ के लिए मिटाया जा रहा है, जिसकी न तो कोई योजना संबंधी जानकारी उपलब्ध है, न ही कोई कार्य प्रस्ताव है और न ही लागत बोर्ड लगाया गया है। लगातार पाँच दिनों से जेसीबी मशीन लगाकर तालाब के मेड़ को नष्ट किया जा रहा है। यह तालाब खसरा नंबर 363 (रकबा 0.239 हेक्टेयर) और खसरा नंबर 364/1 के कुछ भाग पर स्थित है, जो आज भी खसरे में मध्य प्रदेश शासन तालाब के रूप में दर्ज है। ग्राम पंचायत सरपंच, सचिव राम लखन सिंह और उप यंत्री संतोष सिंह की कथित मिलीभगत से मुकेश पटेल ने इस तालाब को पूर्ण रूप से गायब कर दिया है। इस तालाब को बदना पटेल और राम सखी पटेल, जो शिव प्रसाद पटेल के पुत्र थे, ने दान किया था। इस गंभीर समस्या को लेकर ग्रामीण और दानदाताओं के वारिसदार मुख्यालय पहुँचे हैं, जहाँ उन्होंने अपने पूर्वजों की संपत्ति को यथावत रखने की गुहार लगाई है और अपनी पीड़ा व्यक्त की है। अब देखना यह होगा कि शासन-प्रशासन ग्रामीण जनों की इस समस्या पर ध्यान देती है या नहीं।1
- बिहार से जुड़े एक मामले को लेकर न्यायिक प्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। इस मामले में, यह देखकर चिंता व्यक्त की गई है कि किसी व्यक्ति को 'इस उम्र' में जेल भेजा गया है। पोस्ट में इस कदम को लेकर पूछा गया है कि क्या यह वास्तविक न्याय है या केवल कागज़ी औपचारिकता, क्योंकि इसे देखकर लोगों का सिस्टम से भरोसा उठ सकता है।1
- सतना में स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत लगाई गईं "स्मार्ट" जुगनू लाइटें केवल दो दिनों तक ही चमक पाईं और फिर पूरी तरह ठप पड़ गईं। इस विफलता पर नगर निगम पर गंभीर आरोप लगे हैं कि उसने करोड़ों रुपये का गबन किया है और शहर को अंधेरे में धकेल दिया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि ये लाइटें सिर्फ उद्घाटन समारोह तक ही रोशन थीं, जिसके बाद अब खंभों पर खुले तौर पर भ्रष्टाचार लटकता हुआ दिखाई दे रहा है।1