सीतापुर नए बस स्टैंड के शौचालय की हालत जर्जर, दरवाजा टूटा; शिकायत के बाद भी नहीं हुई मरम्मत सीतापुर। नगर पंचायत सीतापुर के नए बस स्टैंड परिसर में स्थित सार्वजनिक शौचालय इन दिनों बदहाली का शिकार है। शौचालय का दरवाजा टूटकर अलग हो गया है, जिसके कारण यहां आने-जाने वाले यात्रियों और आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार शौचालय की खराब स्थिति की जानकारी कई दिनों पहले नगर पंचायत के कर्मचारियों को दी जा चुकी है। इसके बावजूद अब तक इसकी मरम्मत नहीं कराई गई है। दरवाजा टूटे होने के कारण लोगों को शौचालय का उपयोग करने में असुविधा हो रही है और उन्हें खुले में शौच जाने की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। लोगों का आरोप है कि शिकायत करने के बावजूद नगर पंचायत के जिम्मेदार कर्मचारी मामले को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। सार्वजनिक सुविधा से जुड़े इस महत्वपूर्ण विषय पर लापरवाही से लोगों में नाराजगी है। नागरिकों ने नगर पंचायत के सीएमओ से तत्काल संज्ञान लेते हुए नए बस स्टैंड के सार्वजनिक शौचालय की मरम्मत कराने तथा टूटे दरवाजे को जल्द से जल्द ठीक कराने की मांग की है, ताकि यात्रियों और आम नागरिकों को हो रही परेशानी से राहत मिल सके।
सीतापुर नए बस स्टैंड के शौचालय की हालत जर्जर, दरवाजा टूटा; शिकायत के बाद भी नहीं हुई मरम्मत सीतापुर। नगर पंचायत सीतापुर के नए बस स्टैंड परिसर में स्थित सार्वजनिक शौचालय इन दिनों बदहाली का शिकार है। शौचालय का दरवाजा टूटकर अलग हो गया है, जिसके कारण यहां आने-जाने वाले यात्रियों और आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार शौचालय की खराब
स्थिति की जानकारी कई दिनों पहले नगर पंचायत के कर्मचारियों को दी जा चुकी है। इसके बावजूद अब तक इसकी मरम्मत नहीं कराई गई है। दरवाजा टूटे होने के कारण लोगों को शौचालय का उपयोग करने में असुविधा हो रही है और उन्हें खुले में शौच जाने की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। लोगों का आरोप है कि शिकायत करने के बावजूद नगर पंचायत के जिम्मेदार कर्मचारी
मामले को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। सार्वजनिक सुविधा से जुड़े इस महत्वपूर्ण विषय पर लापरवाही से लोगों में नाराजगी है। नागरिकों ने नगर पंचायत के सीएमओ से तत्काल संज्ञान लेते हुए नए बस स्टैंड के सार्वजनिक शौचालय की मरम्मत कराने तथा टूटे दरवाजे को जल्द से जल्द ठीक कराने की मांग की है, ताकि यात्रियों और आम नागरिकों को हो रही परेशानी से राहत मिल सके।
- *खबर का असर: घायल बैल के लिए तत्काल पहुंची पशु मेडिकल यूनिट, मौके पर दिया गया उपचार* धरमजयगढ़ - बीआरसी भवन के पास पिछले चार दिनों से गंभीर रूप से घायल पड़े बैल की खबर प्रकाशित होने के बाद मामले में तत्काल असर देखने को मिला है। प्रशासन ने संवेदनशीलता दिखाते हुए घायल बैल के उपचार के लिए पशु चिकित्सा मेडिकल यूनिट को मौके पर भेजा, जहां चिकित्सकीय टीम ने बैल की स्थिति का जायजा लेकर तत्काल आवश्यक दवाइयां दीं और उपचार शुरू किया। घायल बैल की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे आगे बेहतर उपचार के लिए पशु चिकित्सालय पहुंचाने पर भी विचार किया जा रहा है। चिकित्सकीय टीम द्वारा उसकी स्थिति पर नजर रखी जा रही है तथा आवश्यकता के अनुसार आगे की उपचार व्यवस्था किए जाने की बात सामने आई है। इधर, वार्ड पार्षद जानू सिदार भी मौके पर पहुंचे और घायल बैल की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने मौके पर मौजूद लोगों से जानकारी ली तथा बैल के समुचित उपचार और आवश्यक देखभाल को लेकर पहल की। गौरतलब है कि बीआरसी भवन के कर्मचारियों द्वारा भी पिछले कई दिनों से घायल बैल के लिए चारा और पानी की व्यवस्था की जा रही थी। खबर सामने आने के बाद प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधि की तत्परता से अब इस बेजुबान को उपचार मिलना शुरू हो गया है। स्थानीय नागरिकों ने उम्मीद जताई है कि बैल को जल्द ही सुरक्षित रूप से पशु चिकित्सालय पहुंचाकर उसका समुचित उपचार कराया जाएगा।4
- The Economic Times World Leaders Forum: PM Modi ने गिनाईं भारत की विकास और सुधार की उपलब्धियां The Economic Times World Leaders Forum 2026 LIVE 🌍 दुनिया की नजर भारत पर है। The Economic Times World Leaders Forum में वैश्विक नेतृत्व, अर्थव्यवस्था, AI, तकनीक, निवेश और भारत की विकास यात्रा से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हो रही है। भारत की बढ़ती आर्थिक ताकत और वैश्विक भूमिका के बीच यह मंच आने वाले समय की नई संभावनाओं और चुनौतियों पर विचार का महत्वपूर्ण अवसर बन रहा है। #EconomicTimes #WorldLeadersForum #ETWLF2026 #India #Economy #AI #GlobalLeadership #PMModi1
- सरकारी हैंड पंप में प्राइवेट बर लगाया गया है और यहां चारों तरफ रास्ता है आने जाने का मूवमेंट यहां पर जाली जीवन है इसको शासन प्रशासन शामिल करता हूं कि तत्काल कार्रवाईकिया जाए आप लोग देख सकते हैं चारों तरफ रास्ता है बीच में तो हेडफोन पर इसमें भी प्राइवेट स्टोर से बोर लगाया गया1
- बारिश में भीगा शिक्षकों का आक्रोश: कोरबा में निकली ‘टेट मुक्ति रैली’, अपर कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन2
- ईद-ए-मिलादुन्नबी को लेकर चैनपुर पुलिस अलर्ट, निकाला फ्लैग मार्च ईद-ए-मिलादुन्नबी पर्व को लेकर चैनपुर पुलिस पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। पर्व के दौरान शांति एवं सौहार्दपूर्ण माहौल बनाए रखने के उद्देश्य से मंगलवार को चैनपुर नगर में पुलिस ने फ्लैग मार्च निकाला। चैनपुर थाना प्रभारी अरविंद कुमार की अगुवाई में पुलिस पदाधिकारियों एवं जवानों ने नगर के विभिन्न प्रमुख मार्गों का भ्रमण किया।1
- भरनो पहुंच गया वायरल गाड़ी,लोगो की लगी हुजूम गाड़ी देखते ही लोग सेल्फी रिल्स बनाते नजर आए1
- शासकीय बरिंग प्राइवेट स्टोर से पंप लगाया गया है बोर इसको तत्काल कार्रवाई किया जाए आने जाने वाले व्यक्ति को परेशानी ना हो जल्दी जीवन है चारों तरफ रास्ता भी है1
- FIR के डेढ़ महीने बाद भी 'फरार' या 'फरमाइशी छूट'? लैलूंगा में पॉक्सो की फाइल धूल फांक रही, खाकी की सुस्ती पर उठे सवाल "13 साल की दिव्यांग नाबालिक बच्ची के साथ रेप" लैलूंगा/रायगढ़। 13 साल की दिव्यांग नाबालिग बच्ची से दरिंदगी, 10 जुलाई को दर्ज FIR (धारा 127(1), 76 BNS व 8 POCSO) और घटना को बीते 45 से ज्यादा दिन... लेकिन पुलिस की मुस्तैदी का आलम यह है कि मुख्य आरोपी श्याम लाल चौहान आज भी 'गायब' है। कानून की किताबों में POCSO मामलों को लेकर त्वरित गिरफ्तारी के सख्त निर्देश दर्ज हैं, पर लैलूंगा पुलिस के कागजों में शायद 'इंतजार करो और देखो' की नई धारा जुड़ गई है। आखिर कानून के हाथ आरोपी की गर्दन तक पहुंचने में इतने ढीले क्यों पड़ रहे हैं? गोविंद मालाकार की भूमिका: मददगार या 'मार्गदर्शक'? मामले का सबसे दिलचस्प और उलझा हुआ पहलू है गोविंद मालाकार की एंट्री। पीड़ित परिवार का सीधा आरोप है कि वारदात के बाद आरोपी को गोविंद मालाकार के ठिकाने पर शरण दी गई और पिछले दरवाजे से सुरक्षित निकालने में मदद की गई। दूसरी तरफ, गोविंद के चाचा सुंदरलाल मालाकार का एक कथित वीडियो सामने लाकर यह समानांतर कहानी गढ़ी जा रही है कि भतीजे ने तो आरोपी को सीधे थाने ले जाकर 'सुपुर्द' कर दिया था। * अगर आरोपी को थाने में 'सरेंडर' करा दिया गया था, तो फिर वह पुलिस कस्टडी से कहां चला गया? * और अगर वह थाने नहीं पहुंचा, तो यह वीडियो बयान किस पटकथा का हिस्सा है? * क्या गोविंद मालाकार ने शरणदाता की भूमिका निभाई या वो वाकई एक 'जिम्मेदार नागरिक' थे? यह विरोधाभास साफ इशारा करता है कि साक्ष्यों की निष्पक्ष जांच की जगह बयानों का गोलमाल खेल खेला जा रहा है। पंचायती इंसाफ: सिर्फ हमदर्दी के बोल या कागजी गोलमोल? दावा किया जा रहा है कि स्थानीय पंचायत पीड़ित परिवार के साथ खड़ी थी। लेकिन जब कागजी कार्रवाई का हिसाब मांगा जाता है, तो जवाब में सन्नाटा पसरा मिलता है: * लिखित बैठक और प्रस्ताव: क्या पीड़ित बच्ची के न्याय के लिए पंचायत की कोई आधिकारिक बैठक हुई या प्रस्ताव पास हुआ? * नोटिस और पंचनामा: क्या आरोपी पक्ष या उसके कथित मददगारों को कोई लिखित नोटिस दिया गया? क्या मौके का कोई कानूनी पंचनामा या पंचायत रिकॉर्ड तैयार हुआ? यदि कागजों पर कुछ दर्ज ही नहीं हुआ, तो यह पंचायती समर्थन महज मौखिक सांत्वना था या मामले को रफा-दफा करने का अनौपचारिक जरिया? जांच पर लगा 'रिश्वत और संरक्षण' का दाग डेढ़ महीने का लंबा वक्त, उलझे हुए बयान और पुलिस की खामोशी—यह सब मिलकर अब खाकी पर रिश्वतखोरी और राजनीतिक/स्थानीय संरक्षण के गंभीर आरोप मढ़ रहे हैं। एक दिव्यांग नाबालिग की चीख पर जब डेढ़ महीने तक गिरफ्तारी न हो, तो सवाल उठना लाजिमी है कि पुलिस आखिर किसकी ढाल बन रही है? क्या लैलूंगा पुलिस गोविंद मालाकार की भूमिका और आरोपी की फरारी के बीच के तारों को बेनकाब करने का साहस दिखाएगी, या यह मामला भी फाइलों के ढेर में दबकर रह जाएगा? जवाब का इंतजार अब सिर्फ पीड़ित परिवार को ही नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था पर भरोसा रखने वाले हर नागरिक को है। सारे सबूत संरक्षित रखा गया है4