मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के शिवपुरी दौरे के दौरान रविवार को आईटीआई तिराहे पर सुरक्षा व्यवस्था के बीच विवाद उत्पन्न हो गया। इस दौरान सुरक्षा कर्मियों ने कथित तौर पर करैरा विधायक रमेश खटीक को मुख्यमंत्री के काफिले में शामिल होने से रोक दिया। इस घटना के बाद विधायक और पुलिस अधिकारियों के बीच तीखी बहस हुई, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मुख्यमंत्री का काफिला निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत गुजर रहा था, तभी विधायक रमेश खटीक अपने वाहन के साथ काफिले में शामिल होने का प्रयास कर रहे थे। ड्यूटी पर तैनात पुलिस और सुरक्षा कर्मियों ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए उन्हें रोका। इसके बाद विधायक और पुलिसकर्मियों के बीच कुछ देर तक बहस चलती रही। मौके पर मौजूद अधिकारियों ने स्थिति को शांत कराने का प्रयास किया और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखते हुए मुख्यमंत्री के काफिले को आगे रवाना किया। घटना के दौरान कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया था, हालांकि बाद में मामला शांत हो गया और कोई अप्रिय घटना नहीं हुई। घटना का वीडियो सामने आने के बाद यह मामला राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है, और सोशल मीडिया पर लोग इस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। हालांकि, इस मामले में फिलहाल पुलिस या जिला प्रशासन की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि विधायक को किस सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत रोका गया था। यदि प्रशासन या विधायक की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी होती है, तो मामले की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के शिवपुरी दौरे के दौरान रविवार को आईटीआई तिराहे पर सुरक्षा व्यवस्था के बीच विवाद उत्पन्न हो गया। इस दौरान सुरक्षा कर्मियों ने कथित तौर पर करैरा विधायक रमेश खटीक को मुख्यमंत्री के काफिले में शामिल होने से रोक दिया। इस घटना के बाद विधायक और पुलिस अधिकारियों के बीच तीखी बहस हुई, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मुख्यमंत्री का काफिला निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत गुजर रहा था, तभी विधायक रमेश खटीक अपने वाहन के साथ काफिले में शामिल होने का प्रयास कर रहे थे। ड्यूटी पर तैनात पुलिस और सुरक्षा कर्मियों ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए उन्हें रोका। इसके बाद विधायक और पुलिसकर्मियों के बीच कुछ देर तक बहस चलती रही। मौके पर मौजूद अधिकारियों ने स्थिति को शांत कराने का प्रयास किया और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखते हुए मुख्यमंत्री के काफिले को आगे रवाना किया। घटना के दौरान कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया था, हालांकि बाद में मामला शांत हो गया और कोई अप्रिय घटना नहीं हुई। घटना का वीडियो सामने आने के बाद यह मामला राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है, और सोशल मीडिया पर लोग इस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। हालांकि, इस मामले में फिलहाल पुलिस या जिला प्रशासन की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि विधायक को किस सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत रोका गया था। यदि प्रशासन या विधायक की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी होती है, तो मामले की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
- आज सोमवार सुबह, कोलकाता के कालीघाट में ममता बनर्जी के आवास के बाहर का दृश्य शांत रहा, जो कल की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और उससे जुड़ी राजनीतिक अटकलों के ठीक विपरीत था। यह स्थिति बारुईपुर में एक नाबालिग से बलात्कार के मामले के बाद उत्पन्न हुई थी, जब पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस नेत्री ममता बनर्जी ने बारुईपुर जाने का प्रयास किया था। पार्टी सूत्रों के अनुसार, ममता बनर्जी ने अपने घर से निकलने की कोशिश की, लेकिन उन्हें 'सुरक्षा कारणों' का हवाला देते हुए रोका गया, जिसकी तृणमूल ने शिकायत की है। इस घटना के तुरंत बाद, कालीघाट स्थित उनके घर के सामने अतिरिक्त पुलिस बल और केंद्रीय बलों की तैनाती देखी गई, जिससे राजनीतिक गलियारों में गरमागरम चर्चा शुरू हो गई थी। हालांकि, आज सुबह स्थानीय सूत्रों के अनुसार, क्षेत्र में कोई बड़ी पुलिस तैनाती नहीं दिखी और स्थिति सामान्य थी। हालांकि, तृणमूल कांग्रेस के कुछ कार्यकर्ता और समर्थक उनके आवास के बाहर मौजूद थे। कल की घटना को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। तृणमूल कांग्रेस का आरोप है कि ममता बनर्जी को एक विपक्षी नेता के तौर पर बारुईपुर जाने से रोका गया, जबकि प्रशासन ने सुरक्षा चिंताओं को प्राथमिकता दी। बारुईपुर की इस घटना ने राज्य की राजनीतिक हवा को और गर्म कर दिया है, और ममता बनर्जी के आवास पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर राजनीतिक हलकों में तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।1
- शिक्षा और अवसरों में व्याप्त गहरे भेदभाव पर तीखा सवाल उठाते हुए, यह मत व्यक्त किया गया है कि जब बच्चों के लिए शुरुआती परिस्थितियाँ ही असमान हैं तो ‘मेरिट’ और ‘प्रतियोगिता’ की बात क्यों की जाती है। इसमें बताया गया है कि जहाँ एक ओर बच्चे कीचड़ में पैदल चलकर स्कूल पहुँचते हैं, वहीं दूसरे बच्चे एसी बसों और कारों में आराम से यात्रा करते हैं। यह तर्क दिया गया है कि कुछ बच्चे तमाम अभावों से जूझते हुए उस मुकाम तक पहुँचते हैं, जहाँ से दूसरे बच्चों का सफर शुरू होता है। ऐसी स्थिति में, जब ‘स्टार्टिंग लाइन’ ही अलग-अलग हो, तो ‘मेरिट’ और ‘प्रतियोगिता’ का बखान करना अनुचित है। समान अवसर देने की वकालत करते हुए, यह कहा गया है कि उसके बाद ही ‘समान प्रतियोगिता’ की बात करना न्यायसंगत होगा।1
- राजस्थान के बारां जिले के छीपाबड़ौद क्षेत्र में येहरनावदा शाहजी के पास बिजली गिरने से एक दर्दनाक हादसा हो गया। इस घटना में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि एक महिला घायल हो गई है।1
- जानकारी के अनुसार, सोमवार सुबह 10 बजे मिली सूचना के मुताबिक, कस्बाथाना की ऐतिहासिक धरोहरें लगातार उपेक्षा का शिकार हो रही हैं। प्राचीन दरवाजों के बाद अब राजा-महाराजाओं के समय की ऐतिहासिक छतरियां भी खंडहर में तब्दील हो चुकी हैं। रखरखाव के अभाव में इन धरोहरों की दीवारें टूट रही हैं और पत्थर बिखर रहे हैं। ग्रामीण देवेंद्र भार्गव, राजू औझा, राजू बंसल सहित कई अन्य लोगों ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि यदि समय रहते इन धरोहरों का संरक्षण नहीं किया गया, तो क्षेत्र का गौरवशाली इतिहास पूरी तरह मिट जाएगा। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल इन ऐतिहासिक स्थलों का सर्वे कराने, जीर्णोद्धार करने और इस दिशा में शीघ्र कार्रवाई करने की मांग की है।1
- विदिशा में लोधी समाज के पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं ने कलेक्टोरेट पहुँचकर कलेक्टर के नाम एक ज्ञापन सौंपा है। इस ज्ञापन के माध्यम से उन्होंने सागर जिले के जिला पंचायत सदस्य और युवा लोधी समाज के प्रदेश अध्यक्ष सर्वजीत सिंह लोधी पर दर्ज एक मामले की निष्पक्ष जाँच की माँग की। समाज ने आरोप लगाया कि सर्वजीत सिंह लोधी को एक पुराने मामले में बिना किसी जाँच के गिरफ्तार किया गया है, और इस कार्रवाई को द्वेषपूर्ण तथा राजनीतिक दबाव के कारण किया गया बताया। लोधी समाज ने पूरे मामले की गहन और निष्पक्ष जाँच सुनिश्चित करने पर जोर दिया है।4
- मध्य प्रदेश पुलिस के राज्य स्तरीय विशेष साइबर जन-जागरूकता अभियान "सेफ क्लिक 2.0" के तहत गुना पुलिस ने सोमवार को एक साइबर जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। पुलिस अधीक्षक हितिका वासल ने पुलिस कार्यालय परिसर से अधिकारियों एवं कर्मचारियों की उपस्थिति में इस रथ को रवाना किया। इसका मुख्य उद्देश्य शहर के प्रत्येक नागरिक तक साइबर सुरक्षा का संदेश पहुँचाना और उन्हें डिजिटल माध्यमों से होने वाली धोखाधड़ी के प्रति जागरूक करना है। यह साइबर जागरूकता रथ गुना शहर के प्रमुख बाजारों, सार्वजनिक स्थलों, शैक्षणिक संस्थानों और अन्य भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में भ्रमण करेगा। इस दौरान नागरिकों को ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी, फर्जी कॉल, डिजिटल अरेस्ट, बैंकिंग फ्रॉड, OTP शेयरिंग, सोशल मीडिया हैकिंग, फिशिंग लिंक और QR कोड स्कैम सहित विभिन्न साइबर अपराधों से बचने के व्यावहारिक उपाय बताए जाएँगे। पुलिस अधीक्षक हितिका वासल ने इस अवसर पर कहा कि बदलते समय में साइबर अपराधों की प्रकृति लगातार बदल रही है, इसलिए जागरूकता ही सबसे प्रभावी सुरक्षा है। उन्होंने बताया कि इस अभियान के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचकर उन्हें सुरक्षित ऑनलाइन व्यवहार अपनाने, साइबर अपराधियों की नई-नई चालों से सतर्क रहने और आपात स्थिति में त्वरित सहायता प्राप्त करने की जानकारी दी जाएगी। कार्यक्रम में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रशांत सिंह सुमन, डीएसपी यातायात मुकेश कुमार दीक्षित, प्रभारी नगर पुलिस अधीक्षक आनंद राय, रक्षित निरीक्षक पूजा उपाध्याय, यातायात प्रभारी निरीक्षक अजय प्रताप सिंह, रेडियो प्रभारी निरीक्षक विकास उपाध्याय और सूबेदार स्मृति दोहरे सहित कई पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे। गुना पुलिस ने आमजन से अपील की है कि वे किसी भी अज्ञात कॉल, संदिग्ध लिंक, QR कोड या OTP साझा करने के अनुरोध पर विश्वास न करें। यदि किसी प्रकार की साइबर धोखाधड़ी का सामना करना पड़े, तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कर निकटतम पुलिस से संपर्क करें। इस अभियान का संदेश है: "सुरक्षित क्लिक, सुरक्षित जीवन; साइबर सुरक्षा ही डिजिटल युग की सबसे बड़ी सुरक्षा है।"1
- इंदौर में चल रहे अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन के दौरान, प्रदर्शनकारियों ने एक कैंडल मार्च का आयोजन किया। इस कैंडल मार्च के माध्यम से, नीट पेपर लीक के कारण कथित तौर पर 'शहीद' हुए एक छात्र को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई।1
- RSMSSB राजस्थान CET ग्रेजुएशन लेवल 2026 के लिए आवेदन फॉर्म भरने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इच्छुक उम्मीदवारों को अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए अपनी SSO ID में जांच करने की सलाह दी गई है। इसके साथ ही, यह भी सूचित किया गया है कि जिन उम्मीदवारों का वन टाइम रजिस्ट्रेशन (OTR) अभी तक नहीं हुआ है, वे अपनी SSO ID पर जल्द से जल्द OTR प्रक्रिया पूरी करवा लें।1
- ग्राम पंचायत भिंडरा (फतेहगढ़, गुना) में स्कूल मार्ग पर बन रही सीसी रोड पिछले छह महीने से अधूरी पड़ी है, जिसके कारण ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। बारिश शुरू होते ही इस सड़क पर कीचड़ और जलभराव की स्थिति बन गई है, जिससे स्कूली बच्चों, ग्रामीणों और राहगीरों को आवागमन में गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बच्चे हर दिन कीचड़ और फिसलन भरे रास्ते से स्कूल जाने को मजबूर हैं, जिससे दुर्घटना का खतरा लगातार बना हुआ है। दोपहिया वाहन चालक भी फिसलकर घायल हो रहे हैं और छोटे बच्चों के जूते, कपड़े तथा किताबें भी कीचड़ से खराब हो रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण कार्य लंबे समय से रुका हुआ है। उन्होंने कई बार पंचायत के सरपंच और सचिव से शिकायत भी की, लेकिन निर्माण कार्य दोबारा शुरू नहीं किया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में लापरवाही बरती गई है और समय पर सड़क पूरी न होने के कारण बारिश में यह समस्या खड़ी हुई है। वहीं, ग्राम पंचायत सचिव रामस्वरूप इराक ने स्पष्ट किया है कि यह सीसी रोड पंचायत द्वारा नहीं बनाई जा रही है, बल्कि यह कार्य संबंधित विभाग के अधीन है और इसका निर्माण पीडब्ल्यूडी विभाग द्वारा कराया जाएगा। ग्रामीणों की नाराजगी बढ़ती जा रही है और उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही अधूरी सीसी रोड का निर्माण पूरा नहीं कराया गया तो वे आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। उन्होंने जिला प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग की है कि निर्माण तत्काल पूरा किया जाए, बारिश के दौरान वैकल्पिक सुरक्षित मार्ग की व्यवस्था हो, देरी की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए और स्कूल जाने वाले बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए।1