बसखारी में ठंडा पानी, गरम घोटाला! वाटर कूलर के नाम पर ‘कूलर कम, कमीशन ज़्यादा’ का आरोप अंबेडकरनगर विकास खंड बसखारी में भले ही अभी गर्मी पूरी तरह शुरू न हुई हो, लेकिन वाटर कूलर स्थापना को लेकर चर्चाओं का पारा लगातार चढ़ता जा रहा है। ब्लॉक प्रमुख नरेंद्र मोहन उर्फ संजय सिंह की निधि से लगाए गए वाटर कूलरों की लागत को लेकर क्षेत्र में गंभीर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि वाटर कूलर जनता को ठंडा पानी देने से ज़्यादा सरकारी धन को “गरम” करने का जरिया बन गए हैं। अजमेरी बादशाहपुर, तिलकारपुर का नागदरपुर, रामपुर बेनीपुर, सिंहपुर, सुलेमपुर परसावां, बेलापरसा, नौरहनी रामपुर, नारायणपुर और एकडल्ला सहित कई गांवों में इन वाटर कूलरों की स्थापना की गई है। खास बात यह है कि अधिकतर कूलर सरकारी विद्यालयों और मंदिर परिसरों में लगाए गए हैं, जिससे इन स्थानों को लेकर भी चर्चा तेज़ है। खर्च का हिसाब देख चकराई जनता क्षेत्रवासियों के अनुसार जब इन वाटर कूलरों के खर्च का विवरण सामने आया, तो लोग हैरान रह गए। स्थानीय स्तर पर कराए गए आकलन के मुताबिक एक वाटर कूलर पर होने वाला वास्तविक खर्च इस प्रकार बताया जा रहा है— 4 इंच बोरिंग (पाइप सहित): लगभग ₹20,000 समरसेबल पंप, टंकी, प्लंबर व फिटिंग: ₹25,000 आरओ सिस्टम: ₹40 से 45 हजार जाल, फाउंडेशन एवं अन्य खर्च: ₹18,000 इस तरह एक वाटर कूलर की कुल लागत लगभग ₹1 लाख के आसपास बैठती है। सरकारी काग़ज़ों में साढ़े तीन लाख का भुगतान स्थानीय लोगों का कहना है कि जबकि जमीनी हकीकत में खर्च करीब एक लाख रुपये का है, वहीं सरकारी अभिलेखों में एक-एक वाटर कूलर की लागत ₹3,68,000 दर्शाई गई है। यह कार्य फर्म मे० सगीर अहमद (एम#47), ठेकेदार संख्या 432168 के माध्यम से कराया गया बताया जा रहा है। कथित घोटाले का आंकड़ा क्षेत्रवासियों के अनुसार यदि सभी वाटर कूलरों की वास्तविक लागत जोड़ी जाए तो यह करीब ₹13,56,000 बैठती है, जबकि भुगतान के आधार पर अनुमानित खर्च इससे कई गुना अधिक दर्शाया गया है। लोगों का दावा है कि इस अंतर के आधार पर कथित घोटाले की राशि लगभग ₹30,57,600 तक पहुंचती है। लोगों के बीच चर्चा है कि कई स्थानों पर वाटर कूलरों की फिटिंग और गुणवत्ता भी सवालों के घेरे में है। आरोप है कि “पाइप से पानी कम और कमीशन ज़्यादा बह रहा है।” निष्पक्ष जांच पर उठे सवाल अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि ब्लॉक प्रमुख निधि से कराए गए इस कार्य की निष्पक्ष जांच होगी या नहीं। ‘भ्रष्टाचार मुक्त प्रदेश’ के सरकारी दावों के बीच आमजन पूछ रहा है कि यदि सब कुछ नियमों के अनुसार है, तो लागत में इतना बड़ा अंतर क्यों है। फिलहाल यह मामला जनपद के जिम्मेदार अधिकारियों के लिए चुनौती बनता जा रहा है। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि पूरे प्रकरण की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाएगी, ताकि विकास के नाम पर हुए कथित खेल की सच्चाई उजागर हो सके। अब देखना यह है कि यह ठंडा–गरम खेल जांच की धूप सह पाता है या फिर फाइलों में ठंडा कर दिया जाता है।
बसखारी में ठंडा पानी, गरम घोटाला! वाटर कूलर के नाम पर ‘कूलर कम, कमीशन ज़्यादा’ का आरोप अंबेडकरनगर विकास खंड बसखारी में भले ही अभी गर्मी पूरी तरह शुरू न हुई हो, लेकिन वाटर कूलर स्थापना को लेकर चर्चाओं का पारा लगातार चढ़ता जा रहा है। ब्लॉक प्रमुख नरेंद्र मोहन उर्फ संजय सिंह की निधि से लगाए गए वाटर कूलरों की लागत को लेकर क्षेत्र में गंभीर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि वाटर कूलर जनता को ठंडा पानी देने से ज़्यादा सरकारी धन को “गरम” करने का जरिया बन गए हैं। अजमेरी बादशाहपुर, तिलकारपुर का नागदरपुर, रामपुर बेनीपुर, सिंहपुर, सुलेमपुर परसावां, बेलापरसा, नौरहनी रामपुर, नारायणपुर और एकडल्ला सहित कई गांवों में इन वाटर कूलरों की स्थापना की गई है। खास बात यह है कि अधिकतर कूलर सरकारी विद्यालयों और मंदिर परिसरों में लगाए गए हैं, जिससे इन स्थानों को लेकर भी चर्चा तेज़ है। खर्च का हिसाब देख चकराई जनता क्षेत्रवासियों के अनुसार जब इन वाटर कूलरों के खर्च का विवरण सामने आया, तो लोग हैरान रह गए। स्थानीय स्तर पर कराए गए आकलन के मुताबिक एक वाटर कूलर पर होने वाला वास्तविक खर्च इस प्रकार बताया जा रहा है— 4 इंच बोरिंग (पाइप सहित): लगभग ₹20,000 समरसेबल पंप, टंकी, प्लंबर व फिटिंग: ₹25,000 आरओ सिस्टम: ₹40 से 45 हजार जाल, फाउंडेशन एवं अन्य खर्च: ₹18,000 इस तरह एक वाटर कूलर की कुल लागत लगभग ₹1 लाख के आसपास बैठती है। सरकारी काग़ज़ों में साढ़े तीन लाख का भुगतान स्थानीय लोगों का कहना है कि जबकि जमीनी हकीकत में खर्च करीब एक लाख रुपये का है, वहीं सरकारी अभिलेखों में एक-एक वाटर कूलर की लागत ₹3,68,000 दर्शाई गई है। यह कार्य फर्म मे० सगीर अहमद (एम#47), ठेकेदार संख्या 432168 के माध्यम से कराया गया बताया जा रहा है। कथित घोटाले का आंकड़ा क्षेत्रवासियों के अनुसार यदि सभी वाटर कूलरों की वास्तविक लागत जोड़ी जाए तो यह करीब ₹13,56,000 बैठती है, जबकि भुगतान के आधार पर अनुमानित खर्च इससे कई गुना अधिक दर्शाया गया है। लोगों का दावा है कि इस अंतर के आधार पर कथित घोटाले की राशि लगभग ₹30,57,600 तक पहुंचती है। लोगों के बीच चर्चा है कि कई स्थानों पर वाटर कूलरों की फिटिंग और गुणवत्ता भी सवालों के घेरे में है। आरोप है कि “पाइप से पानी कम और कमीशन ज़्यादा बह रहा है।” निष्पक्ष जांच पर उठे सवाल अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि ब्लॉक प्रमुख निधि से कराए गए इस कार्य की निष्पक्ष जांच होगी या नहीं। ‘भ्रष्टाचार मुक्त प्रदेश’ के सरकारी दावों के बीच आमजन पूछ रहा है कि यदि सब कुछ नियमों के अनुसार है, तो लागत में इतना बड़ा अंतर क्यों है। फिलहाल यह मामला जनपद के जिम्मेदार अधिकारियों के लिए चुनौती बनता जा रहा है। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि पूरे प्रकरण की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाएगी, ताकि विकास के नाम पर हुए कथित खेल की सच्चाई उजागर हो सके। अब देखना यह है कि यह ठंडा–गरम खेल जांच की धूप सह पाता है या फिर फाइलों में ठंडा कर दिया जाता है।
- होलिका स्थल पर अवैध अतिक्रमण हटाने का निर्देश, प्रशासन की पहल से बनी सहमति अंबेडकरनगर। अकबरपुर तहसील क्षेत्र अंतर्गत इंजीनियरिंग कॉलेज के समीप स्थित शेखपुरा वार्ड नंबर-9 में होलिका स्थल पर अस्थायी रूप से किए गए अवैध अतिक्रमण को हटाने का निर्देश प्रशासन द्वारा दिया गया है। उप जिलाधिकारी अकबरपुर के आदेश पर राजस्व एवं पुलिस विभाग की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और दोनों पक्षों को बुलाकर वार्ता की। प्रशासन की मौजूदगी में हुई बातचीत के दौरान इस बात पर सहमति बनी कि विपक्षी द्वारा किए गए अवैध व अस्थायी अतिक्रमण को तत्काल प्रभाव से हटाया जाएगा, जिससे सार्वजनिक व धार्मिक स्थल की गरिमा बनी रहे और स्थानीय लोगों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। इस दौरान अकबरपुर तहसीलदार संतोष कुमार, अकबरपुर कोतवाली प्रभारी श्रीनिवास पांडे, तथा अकबरपुर नगर पालिका के कर्मचारी मौके पर उपस्थित रहे। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक स्थलों पर अतिक्रमण किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और भविष्य में ऐसी शिकायतें मिलने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। मौके पर वार्डवासियों की ओर से भाजपा नेता व सभासद अतुल वर्मा, अमित वर्मा, मुकेश, इंद्रेश प्रजापति, ज्ञानेंद्र वर्मा, राम सकल वर्मा सहित अन्य लोग भी मौजूद रहे। वार्डवासियों ने प्रशासन की त्वरित कार्रवाई का स्वागत करते हुए संतोष व्यक्त किया। प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनी हुई है। लोगों ने उम्मीद जताई है कि आगे भी सार्वजनिक व धार्मिक स्थलों को अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए प्रशासन इसी तरह सक्रिय भूमिका निभाएगा।1
- Post by शुरू न्यूज़ चैनल उत्तर प्रदेश1
- Post by Vindhyavasini Yadav1
- Post by फैजाबाद की आवाज1
- फर्जी बीमा पॉलिसी देकर लाखो रूपए हड़पने वाला आरोपी चढ़ा पुलिस के हत्थे रिपोर्ट-अनन्त कुशवाहा अम्बेडकरनगर जिले के कोतवाली टाण्डा क्षेत्र अंतर्गत पंजाब नेशनल बैंक शाखा छज्जापुर से जुड़े पीएनबी मेटलाइफ बीमा एजेंट द्वारा ग्राहकों की धनराशि में धोखाधड़ी व गबन करने के मामले में पुलिस ने एक अभियुक्त को किया गिरफ्तार.आरोपी पर बीमा के नाम पर रकम जमा कराकर हड़पने का आरोप..जनपद पुलिस मामले की आगे कर रहीं हैं गहनता से जांच.मामले में पुलिस अधीक्षक अभिजीत आर शंकर ने प्रेसवार्ता कर दी अधिक जानकारी.पुलिस द्वारा विधिक कार्यवाही करते हुए आरोपी को भेजा गया न्यायालय2
- *नीलगांयो के आतंक से किसानों की फसल हो रही बर्बाद* अंबेडकर नगर !! सम्मनपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत बरियावन बाजार के निकट सुल्तानपुर तुलसीपुर के पास किसने की फसलों में देखे गए सैकड़ो के तादाद में नीलगाय, ब्यूरो रिपोर्ट वैभव सिंह ✍️1
- खौफनाक वीडिओ , यह वीडियो कहा का है तो पता नही परन्तु ऐसा कृत्य करने वालो को फांसी होनी चाहिए1
- बसखारी में ठंडा पानी, गरम घोटाला! वाटर कूलर के नाम पर ‘कूलर कम, कमीशन ज़्यादा’ का आरोप अंबेडकरनगर विकास खंड बसखारी में भले ही अभी गर्मी पूरी तरह शुरू न हुई हो, लेकिन वाटर कूलर स्थापना को लेकर चर्चाओं का पारा लगातार चढ़ता जा रहा है। ब्लॉक प्रमुख नरेंद्र मोहन उर्फ संजय सिंह की निधि से लगाए गए वाटर कूलरों की लागत को लेकर क्षेत्र में गंभीर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि वाटर कूलर जनता को ठंडा पानी देने से ज़्यादा सरकारी धन को “गरम” करने का जरिया बन गए हैं। अजमेरी बादशाहपुर, तिलकारपुर का नागदरपुर, रामपुर बेनीपुर, सिंहपुर, सुलेमपुर परसावां, बेलापरसा, नौरहनी रामपुर, नारायणपुर और एकडल्ला सहित कई गांवों में इन वाटर कूलरों की स्थापना की गई है। खास बात यह है कि अधिकतर कूलर सरकारी विद्यालयों और मंदिर परिसरों में लगाए गए हैं, जिससे इन स्थानों को लेकर भी चर्चा तेज़ है। खर्च का हिसाब देख चकराई जनता क्षेत्रवासियों के अनुसार जब इन वाटर कूलरों के खर्च का विवरण सामने आया, तो लोग हैरान रह गए। स्थानीय स्तर पर कराए गए आकलन के मुताबिक एक वाटर कूलर पर होने वाला वास्तविक खर्च इस प्रकार बताया जा रहा है— 4 इंच बोरिंग (पाइप सहित): लगभग ₹20,000 समरसेबल पंप, टंकी, प्लंबर व फिटिंग: ₹25,000 आरओ सिस्टम: ₹40 से 45 हजार जाल, फाउंडेशन एवं अन्य खर्च: ₹18,000 इस तरह एक वाटर कूलर की कुल लागत लगभग ₹1 लाख के आसपास बैठती है। सरकारी काग़ज़ों में साढ़े तीन लाख का भुगतान स्थानीय लोगों का कहना है कि जबकि जमीनी हकीकत में खर्च करीब एक लाख रुपये का है, वहीं सरकारी अभिलेखों में एक-एक वाटर कूलर की लागत ₹3,68,000 दर्शाई गई है। यह कार्य फर्म मे० सगीर अहमद (एम#47), ठेकेदार संख्या 432168 के माध्यम से कराया गया बताया जा रहा है। कथित घोटाले का आंकड़ा क्षेत्रवासियों के अनुसार यदि सभी वाटर कूलरों की वास्तविक लागत जोड़ी जाए तो यह करीब ₹13,56,000 बैठती है, जबकि भुगतान के आधार पर अनुमानित खर्च इससे कई गुना अधिक दर्शाया गया है। लोगों का दावा है कि इस अंतर के आधार पर कथित घोटाले की राशि लगभग ₹30,57,600 तक पहुंचती है। लोगों के बीच चर्चा है कि कई स्थानों पर वाटर कूलरों की फिटिंग और गुणवत्ता भी सवालों के घेरे में है। आरोप है कि “पाइप से पानी कम और कमीशन ज़्यादा बह रहा है।” निष्पक्ष जांच पर उठे सवाल अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि ब्लॉक प्रमुख निधि से कराए गए इस कार्य की निष्पक्ष जांच होगी या नहीं। ‘भ्रष्टाचार मुक्त प्रदेश’ के सरकारी दावों के बीच आमजन पूछ रहा है कि यदि सब कुछ नियमों के अनुसार है, तो लागत में इतना बड़ा अंतर क्यों है। फिलहाल यह मामला जनपद के जिम्मेदार अधिकारियों के लिए चुनौती बनता जा रहा है। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि पूरे प्रकरण की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाएगी, ताकि विकास के नाम पर हुए कथित खेल की सच्चाई उजागर हो सके। अब देखना यह है कि यह ठंडा–गरम खेल जांच की धूप सह पाता है या फिर फाइलों में ठंडा कर दिया जाता है।1