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शिव सिंह राजपूत दहिया जर्नलिस्ट अमरपाटन सतना मैहर मध्य प्रदेश भोपाल न्यूज खबर विज्ञापन के लिए संपर्क करें 9974778863 मध्य प्रदेश

8 hrs ago
user_Shiv Singh rajput dahiya journalist MP
Shiv Singh rajput dahiya journalist MP
Court reporter Mada, Singrauli•
8 hrs ago

शिव सिंह राजपूत दहिया जर्नलिस्ट अमरपाटन सतना मैहर मध्य प्रदेश भोपाल न्यूज खबर विज्ञापन के लिए संपर्क करें 9974778863 मध्य प्रदेश

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  • शिव सिंह राजपूत दहिया जर्नलिस्ट अमरपाटन सतना मैहर मध्य प्रदेश भोपाल न्यूज खबर विज्ञापन के लिए संपर्क करें 9974778863 मध्य प्रदेश
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    शिव सिंह राजपूत दहिया जर्नलिस्ट अमरपाटन सतना मैहर मध्य प्रदेश भोपाल  न्यूज खबर विज्ञापन के लिए संपर्क करें 9974778863 मध्य प्रदेश
    user_Shiv Singh rajput dahiya journalist MP
    Shiv Singh rajput dahiya journalist MP
    Court reporter Mada, Singrauli•
    8 hrs ago
  • आईजी के सख्त निर्देशों के बावजूद कोरेक्स, गांजा, ब्राउन शुगर का खुलेआम कारोबार — ग्रामीणों ने लगाया संरक्षण का आरोप, कार्रवाई की उठी मांग सिंगरौली। 28 मार्च 2026 जिले के माड़ा थाना क्षेत्र में अवैध नशे का कारोबार तेजी से पैर पसार रहा है, जिससे कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। एक ओर रीवा रेंज के आईजी द्वारा लगातार नशामुक्ति अभियान को लेकर सख्त निर्देश दिए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत नजर आ रही है। क्षेत्र में कोरेक्स, हीरोइन, गांजा और ब्राउन शुगर जैसे मादक पदार्थों की बिक्री खुलेआम जारी है। क्षेत्र में इस समय नशे के कारोबार का गढ़ बनता जा रहा है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि माड़ा, छतौली, धनहा सहित कई गांवों में नशे का जाल गहराई तक फैल चुका है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि नशे के सौदागर अब बेखौफ होकर दिन-दहाड़े अपना धंधा चला रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार, इस अवैध कारोबार का सबसे बुरा असर क्षेत्र के युवाओं पर पड़ रहा है। बड़ी संख्या में युवा नशे की गिरफ्त में आ रहे हैं, जिससे कई परिवारों की स्थिति चिंताजनक हो गई है। अभिभावक अपने बच्चों को इस दलदल से निकालने के लिए प्रशासन से गुहार लगा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नजर नहीं आई है। थाना प्रभारी पर संरक्षण के आरोप? समाजसेवी संगठनों और ग्रामीणों ने सबसे गंभीर आरोप माड़ा थाना प्रभारी पर लगाए हैं। उनका कहना है कि इस पूरे अवैध कारोबार को कहीं न कहीं पुलिस का संरक्षण मिल रहा है। शिकायतों के बावजूद पुलिस द्वारा केवल औपचारिक कार्रवाई की जाती है — कभी कुछ पुड़िया बरामद कर प्रेस नोट जारी कर दिया जाता है, तो कभी अज्ञात आरोपियों पर मामला दर्ज कर खानापूर्ति कर ली जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि बड़े सौदागर और इस कारोबार के असली सरगना आज भी खुलेआम घूम रहे हैं। चौराहों पर यह चर्चा आम है कि पुलिस की कार्रवाई केवल दिखावे तक सीमित है और बड़े लोगों तक हाथ नहीं पहुंचता। कार्रवाई की मांग हुई तेज। माड़ा क्षेत्र के लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और क्षेत्र में विशेष टीम भेजकर सघन कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि जब तक बड़े स्तर पर सख्ती नहीं होगी, तब तक नशे के इस जाल को खत्म करना संभव नहीं है। सवालों के घेरे में व्यवस्था? माड़ा थाना क्षेत्र में बढ़ते नशे के कारोबार ने न केवल कानून-व्यवस्था को चुनौती दी है, बल्कि समाज के भविष्य पर भी गहरा संकट खड़ा कर दिया है। युवा पीढ़ी तेजी से इसकी चपेट में आ रही है, जबकि अपराधियों के हौसले लगातार बुलंद हो रहे हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशासन इन गंभीर आरोपों को संज्ञान में लेकर ठोस कार्रवाई करेगा? पुलिस विभाग अपने ही सिस्टम पर लगे आरोपों की निष्पक्ष जांच कर पाएगा? या फिर नशे का यह काला कारोबार यूं ही फलता-फूलता रहेगा…?
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    आईजी के सख्त निर्देशों के बावजूद कोरेक्स, गांजा, ब्राउन शुगर का खुलेआम कारोबार — ग्रामीणों ने लगाया संरक्षण का आरोप, कार्रवाई की उठी मांग
सिंगरौली। 28 मार्च 2026
जिले के माड़ा थाना क्षेत्र में अवैध नशे का कारोबार तेजी से पैर पसार रहा है, जिससे कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। एक ओर रीवा रेंज के आईजी द्वारा लगातार नशामुक्ति अभियान को लेकर सख्त निर्देश दिए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत नजर आ रही है। क्षेत्र में कोरेक्स, हीरोइन, गांजा और ब्राउन शुगर जैसे मादक पदार्थों की बिक्री खुलेआम जारी है।
क्षेत्र में इस समय नशे के कारोबार का गढ़ बनता जा रहा है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि माड़ा, छतौली, धनहा सहित कई गांवों में नशे का जाल गहराई तक फैल चुका है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि नशे के सौदागर अब बेखौफ होकर दिन-दहाड़े अपना धंधा चला रहे हैं।
ग्रामीणों के अनुसार, इस अवैध कारोबार का सबसे बुरा असर क्षेत्र के युवाओं पर पड़ रहा है। बड़ी संख्या में युवा नशे की गिरफ्त में आ रहे हैं, जिससे कई परिवारों की स्थिति चिंताजनक हो गई है।
अभिभावक अपने बच्चों को इस दलदल से निकालने के लिए प्रशासन से गुहार लगा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नजर नहीं आई है।
थाना प्रभारी पर संरक्षण के आरोप?
समाजसेवी संगठनों और ग्रामीणों ने सबसे गंभीर आरोप माड़ा थाना प्रभारी पर लगाए हैं। उनका कहना है कि इस पूरे अवैध कारोबार को कहीं न कहीं पुलिस का संरक्षण मिल रहा है। शिकायतों के बावजूद पुलिस द्वारा केवल औपचारिक कार्रवाई की जाती है — कभी कुछ पुड़िया बरामद कर प्रेस नोट जारी कर दिया जाता है, तो कभी अज्ञात आरोपियों पर मामला दर्ज कर खानापूर्ति कर ली जाती है।
ग्रामीणों का कहना है कि बड़े सौदागर और इस कारोबार के असली सरगना आज भी खुलेआम घूम रहे हैं। चौराहों पर यह चर्चा आम है कि पुलिस की कार्रवाई केवल दिखावे तक सीमित है और बड़े लोगों तक हाथ नहीं पहुंचता।
कार्रवाई की मांग हुई तेज।
माड़ा क्षेत्र के लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और क्षेत्र में विशेष टीम भेजकर सघन कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि जब तक बड़े स्तर पर सख्ती नहीं होगी, तब तक नशे के इस जाल को खत्म करना संभव नहीं है।
सवालों के घेरे में व्यवस्था?
माड़ा थाना क्षेत्र में बढ़ते नशे के कारोबार ने न केवल कानून-व्यवस्था को चुनौती दी है, बल्कि समाज के भविष्य पर भी गहरा संकट खड़ा कर दिया है। युवा पीढ़ी तेजी से इसकी चपेट में आ रही है, जबकि अपराधियों के हौसले लगातार बुलंद हो रहे हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशासन इन गंभीर आरोपों को संज्ञान में लेकर ठोस कार्रवाई करेगा? पुलिस विभाग अपने ही सिस्टम पर लगे आरोपों की निष्पक्ष जांच कर पाएगा?
या फिर नशे का यह काला कारोबार यूं ही फलता-फूलता रहेगा…?
    user_Mithilesh Kumar Yadav
    Mithilesh Kumar Yadav
    Artist सिंगरौली, सिंगरौली, मध्य प्रदेश•
    5 hrs ago
  • दिनदहाड़े महिला से मोबाइल स्नैचिंग, भागते वक्त बाइक सवारों की दूसरी गाड़ी से जोरदार टक्कर दो आरोपियों को भीड़ ने पकड़ा, जमकर की पिटाई; एक की हालत गंभीर, पुलिस ने अस्पताल में कराया भर्ती कोतवाली थाना क्षेत्र के सेंट जोसेफ मोड़ पर दिनदहाड़े एक महिला से मोबाइल छीने जाने की सनसनीखेज वारदात सामने आई है। घटना उस वक्त हुई जब महिला सड़क पर पैदल जा रही थी, तभी तेज रफ्तार बाइक पर सवार तीन युवक अचानक पहुंचे और झपट्टा मारकर उसका मोबाइल छीन लिया। मोबाइल छीनने के बाद तीनों आरोपी तेजी से भागने लगे, लेकिन कुछ ही दूरी पर उनकी बाइक सामने से आ रही एक अन्य गाड़ी से जा टकराई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि बाइक सवार युवक सड़क पर गिर पड़े और मौके पर अफरा-तफरी मच गई। घटना के बाद मौके पर मौजूद लोगों ने तत्परता दिखाते हुए दो युवकों को पकड़ लिया और गुस्साई भीड़ ने उनकी जमकर पिटाई कर दी, जबकि तीसरा आरोपी मौके का फायदा उठाकर फरार हो गया। स्थानीय लोगों के अनुसार, घटना के बाद इलाके में काफी देर तक हंगामे की स्थिति बनी रही। सूचना मिलते ही कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और भीड़ के चंगुल से दोनों आरोपियों को छुड़ाकर अपने कब्जे में लिया। पिटाई के चलते एक युवक की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिसे तत्काल जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसका इलाज जारी है। पुलिस ने दोनों आरोपियों के परिजनों को घटना की सूचना दे दी है और फरार तीसरे आरोपी की तलाश शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में यह मामला मोबाइल स्नैचिंग का बताया जा रहा है, हालांकि पुलिस पूरे मामले की बारीकी से जांच कर रही है। इस घटना ने शहर में दिनदहाड़े बढ़ती आपराधिक घटनाओं पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों ने पुलिस से इलाके में गश्त बढ़ाने और ऐसे अपराधियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
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    दिनदहाड़े महिला से मोबाइल स्नैचिंग, भागते वक्त बाइक सवारों की दूसरी गाड़ी से जोरदार टक्कर
दो आरोपियों को भीड़ ने पकड़ा, जमकर की पिटाई; एक की हालत गंभीर, पुलिस ने अस्पताल में कराया भर्ती
कोतवाली थाना क्षेत्र के सेंट जोसेफ मोड़ पर दिनदहाड़े एक महिला से मोबाइल छीने जाने की सनसनीखेज वारदात सामने आई है। घटना उस वक्त हुई जब महिला सड़क पर पैदल जा रही थी, तभी तेज रफ्तार बाइक पर सवार तीन युवक अचानक पहुंचे और झपट्टा मारकर उसका मोबाइल छीन लिया।
मोबाइल छीनने के बाद तीनों आरोपी तेजी से भागने लगे, लेकिन कुछ ही दूरी पर उनकी बाइक सामने से आ रही एक अन्य गाड़ी से जा टकराई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि बाइक सवार युवक सड़क पर गिर पड़े और मौके पर अफरा-तफरी मच गई।
घटना के बाद मौके पर मौजूद लोगों ने तत्परता दिखाते हुए दो युवकों को पकड़ लिया और गुस्साई भीड़ ने उनकी जमकर पिटाई कर दी, जबकि तीसरा आरोपी मौके का फायदा उठाकर फरार हो गया। स्थानीय लोगों के अनुसार, घटना के बाद इलाके में काफी देर तक हंगामे की स्थिति बनी रही।
सूचना मिलते ही कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और भीड़ के चंगुल से दोनों आरोपियों को छुड़ाकर अपने कब्जे में लिया। पिटाई के चलते एक युवक की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिसे तत्काल जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसका इलाज जारी है।
पुलिस ने दोनों आरोपियों के परिजनों को घटना की सूचना दे दी है और फरार तीसरे आरोपी की तलाश शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में यह मामला मोबाइल स्नैचिंग का बताया जा रहा है, हालांकि पुलिस पूरे मामले की बारीकी से जांच कर रही है।
इस घटना ने शहर में दिनदहाड़े बढ़ती आपराधिक घटनाओं पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों ने पुलिस से इलाके में गश्त बढ़ाने और ऐसे अपराधियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
    user_फणीन्द्र कुमार सिन्हा
    फणीन्द्र कुमार सिन्हा
    Photographer सिंगरौली नगर, सिंगरौली, मध्य प्रदेश•
    14 hrs ago
  • Post by Guru Reality Show
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    Post by Guru Reality Show
    user_Guru Reality Show
    Guru Reality Show
    पटना, कोरिया, छत्तीसगढ़•
    40 min ago
  • Post by पत्रकार,Kuber Tomar
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    Post by पत्रकार,Kuber Tomar
    user_पत्रकार,Kuber Tomar
    पत्रकार,Kuber Tomar
    पत्रकार, संवाददाता,रिपोर्टर Gopadbanas, Sidhi•
    18 hrs ago
  • विजय प्रकाश पटेल ने दी घंटानाद सत्याग्रह की चेतावनी।
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    विजय प्रकाश पटेल ने दी घंटानाद सत्याग्रह की चेतावनी।
    user_SM NEWS LIVE
    SM NEWS LIVE
    पत्रकार Chirmiri, Manendragarh Chirimiri Bharatpur•
    1 hr ago
  • सोनभद्र की यह हृदयविदारक घटना वाकई रोंगटे खड़े कर देने वाली है। जिस घाट पर सूर्य देव को अर्घ्य देकर जीवन की मंगलकामना की जाती है, वहीं एक नवजात का इस अवस्था में मिलना हमारी सामूहिक चेतना पर एक गहरा घाव है। ​आपने जो सवाल उठाया है—"क्या आज भी बेटियों को लेकर समाज में वही पुरानी कुरीतियाँ फैली हुई हैं?"—इसका उत्तर काफी जटिल और कड़वा है। ​1. आधुनिकता और पिछड़ती सोच का द्वंद्व ​हम मंगल ग्रह पर पहुँच चुके हैं, लेकिन आज भी समाज का एक बड़ा हिस्सा 'वंश' चलाने के नाम पर केवल बेटों को प्राथमिकता देता है। सोनभद्र जैसी घटनाएँ यह दर्शाती हैं कि शिक्षा के बावजूद पितृसत्तात्मक सोच (Patriarchal mindset) अभी भी जड़ों में जमी हुई है। बेटियों को आज भी कई जगहों पर "पराया धन" या आर्थिक बोझ के रूप में देखा जाता है। ​2. केवल लिंगभेद नहीं, लोक-लाज का डर भी ​अक्सर ऐसी घटनाओं के पीछे केवल बेटा-बेटी का भेद नहीं होता, बल्कि अवैध संबंधों या सामाजिक लोक-लाज का डर भी होता है। समाज का इतना क्रूर होना कि एक माँ या परिवार अपनी संतान को कुत्तों के नोचने के लिए छोड़ दे, यह दिखाता है कि हमारे समाज में 'बदनामी' का डर 'मानवता' से कहीं बड़ा हो गया है। ​3. प्रशासनिक और सामाजिक विकल्पों का अभाव ​जैसा कि आपने उल्लेख किया, सुरक्षित विकल्प (जैसे 'पालना योजना' या अनाथालय) मौजूद हैं, लेकिन: ​जागरूकता की कमी: ग्रामीण या पिछड़े इलाकों में लोगों को नहीं पता कि वे कानूनी रूप से बच्चे को छोड़ सकते हैं। ​गोपनीयता का अभाव: लोगों को डर रहता है कि अगर वे सरकारी संस्थान जाएँगे, तो उनसे सवाल पूछे जाएँगे या पुलिस केस होगा। ​4. गरिमापूर्ण विदाई का सवाल ​प्रशासन द्वारा आनन-फानन में अंतिम संस्कार कर देना प्रक्रियात्मक हो सकता है, लेकिन आपकी बात सही है—मृत्यु के बाद गरिमा हर मनुष्य का अधिकार है। बिना गहन जांच या डीएनए सुरक्षित किए अंतिम संस्कार करना कहीं न कहीं अपराधियों को बचाने का अनचाहा रास्ता भी बन जाता है। ​निष्कर्ष ​यह बच्ची का मिलना केवल एक व्यक्तिगत अपराध नहीं, बल्कि सामाजिक विफलता (Social Failure) है। जब तक समाज में "बेटी" को एक स्वतंत्र और मूल्यवान इकाई के रूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा, और जब तक हम लोक-लाज से ऊपर उठकर जीवन को महत्व नहीं देंगे, तब तक ऐसे 'छठ घाट' हमारी संवेदनाओं को झकझोरते रहेंगे।
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    सोनभद्र की यह हृदयविदारक घटना वाकई रोंगटे खड़े कर देने वाली है। जिस घाट पर सूर्य देव को अर्घ्य देकर जीवन की मंगलकामना की जाती है, वहीं एक नवजात का इस अवस्था में मिलना हमारी सामूहिक चेतना पर एक गहरा घाव है।
​आपने जो सवाल उठाया है—"क्या आज भी बेटियों को लेकर समाज में वही पुरानी कुरीतियाँ फैली हुई हैं?"—इसका उत्तर काफी जटिल और कड़वा है।
​1. आधुनिकता और पिछड़ती सोच का द्वंद्व
​हम मंगल ग्रह पर पहुँच चुके हैं, लेकिन आज भी समाज का एक बड़ा हिस्सा 'वंश' चलाने के नाम पर केवल बेटों को प्राथमिकता देता है। सोनभद्र जैसी घटनाएँ यह दर्शाती हैं कि शिक्षा के बावजूद पितृसत्तात्मक सोच (Patriarchal mindset) अभी भी जड़ों में जमी हुई है। बेटियों को आज भी कई जगहों पर "पराया धन" या आर्थिक बोझ के रूप में देखा जाता है।
​2. केवल लिंगभेद नहीं, लोक-लाज का डर भी
​अक्सर ऐसी घटनाओं के पीछे केवल बेटा-बेटी का भेद नहीं होता, बल्कि अवैध संबंधों या सामाजिक लोक-लाज का डर भी होता है। समाज का इतना क्रूर होना कि एक माँ या परिवार अपनी संतान को कुत्तों के नोचने के लिए छोड़ दे, यह दिखाता है कि हमारे समाज में 'बदनामी' का डर 'मानवता' से कहीं बड़ा हो गया है।
​3. प्रशासनिक और सामाजिक विकल्पों का अभाव
​जैसा कि आपने उल्लेख किया, सुरक्षित विकल्प (जैसे 'पालना योजना' या अनाथालय) मौजूद हैं, लेकिन:
​जागरूकता की कमी: ग्रामीण या पिछड़े इलाकों में लोगों को नहीं पता कि वे कानूनी रूप से बच्चे को छोड़ सकते हैं।
​गोपनीयता का अभाव: लोगों को डर रहता है कि अगर वे सरकारी संस्थान जाएँगे, तो उनसे सवाल पूछे जाएँगे या पुलिस केस होगा।
​4. गरिमापूर्ण विदाई का सवाल
​प्रशासन द्वारा आनन-फानन में अंतिम संस्कार कर देना प्रक्रियात्मक हो सकता है, लेकिन आपकी बात सही है—मृत्यु के बाद गरिमा हर मनुष्य का अधिकार है। बिना गहन जांच या डीएनए सुरक्षित किए अंतिम संस्कार करना कहीं न कहीं अपराधियों को बचाने का अनचाहा रास्ता भी बन जाता है।
​निष्कर्ष
​यह बच्ची का मिलना केवल एक व्यक्तिगत अपराध नहीं, बल्कि सामाजिक विफलता (Social Failure) है। जब तक समाज में "बेटी" को एक स्वतंत्र और मूल्यवान इकाई के रूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा, और जब तक हम लोक-लाज से ऊपर उठकर जीवन को महत्व नहीं देंगे, तब तक ऐसे 'छठ घाट' हमारी संवेदनाओं को झकझोरते रहेंगे।
    user_कालचिंतन समाचार
    कालचिंतन समाचार
    Obra, Sonbhadra•
    4 hrs ago
  • शिव सिंह राजपूत दहिया जर्नलिस्ट अमरपाटन सतना मैहर मध्य प्रदेश भोपाल न्यूज खबर विज्ञापन के लिए संपर्क करें 9974778863 मध्य प्रदेश
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    शिव सिंह राजपूत दहिया जर्नलिस्ट अमरपाटन सतना मैहर मध्य प्रदेश भोपाल  न्यूज खबर विज्ञापन के लिए संपर्क करें 9974778863 मध्य प्रदेश
    user_Shiv Singh rajput dahiya journalist MP
    Shiv Singh rajput dahiya journalist MP
    Court reporter Singrauli Nagar, Madhya Pradesh•
    8 hrs ago
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