भीलवाड़ा में जिला कलेक्टर जसमीत सिंह संधू के निर्देशन में चलाए जा रहे ‘शुद्ध आहार, मिलावट पर वार’ अभियान के तहत चिकित्सा विभाग की फूड सेफ्टी टीम ने शुक्रवार को एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। टीम ने शहर स्थित मैसर्स मनोज इंटरप्राइजेज से ‘स्टिंग’ ब्रांड की 2950 बोतलें कैफीनेटेड पेय पदार्थ (एनर्जी ड्रिंक) जब्त की हैं। कार्रवाई के दौरान विभाग ने इन उत्पादों के नमूने लेकर जांच के लिए अजमेर स्थित अधिकृत प्रयोगशाला में भेज दिए हैं, और रिपोर्ट आने के बाद संबंधित फर्म के खिलाफ नियमानुसार विधिक कार्रवाई की जाएगी। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजीव कुमार शर्मा ने स्पष्ट किया कि एफएसएसएआई के निर्देशों के अनुसार कैफीनेटेड पेय पदार्थों पर 'एनर्जी ड्रिंक' या 'स्पोर्ट्स ड्रिंक' जैसे दावे करना भ्रामक श्रेणी में आता है। इसी क्रम में उपभोक्ताओं को जागरूक करने और खाद्य सुरक्षा मानकों की पालना सुनिश्चित करने के लिए जिले में यह सघन निरीक्षण अभियान चलाया जा रहा है। खाद्य सुरक्षा अधिकारी अशोक यादव, जिनके नेतृत्व में यह कार्रवाई की गई, ने आमजन को चेतावनी देते हुए बताया कि अधिक कैफीन वाले इन पेय पदार्थों का सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। विशेष रूप से बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को इनके उपयोग से बचने की सलाह दी गई है।
भीलवाड़ा में जिला कलेक्टर जसमीत सिंह संधू के निर्देशन में चलाए जा रहे ‘शुद्ध आहार, मिलावट पर वार’ अभियान के तहत चिकित्सा विभाग की फूड सेफ्टी टीम ने शुक्रवार को एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। टीम ने शहर स्थित मैसर्स मनोज इंटरप्राइजेज से ‘स्टिंग’ ब्रांड की 2950 बोतलें कैफीनेटेड पेय पदार्थ (एनर्जी ड्रिंक) जब्त की हैं। कार्रवाई के दौरान विभाग ने इन उत्पादों के नमूने लेकर जांच के लिए अजमेर स्थित अधिकृत प्रयोगशाला में भेज दिए हैं, और रिपोर्ट आने के बाद संबंधित फर्म के खिलाफ नियमानुसार विधिक कार्रवाई की जाएगी। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजीव कुमार शर्मा ने स्पष्ट किया कि एफएसएसएआई के निर्देशों के अनुसार कैफीनेटेड पेय पदार्थों पर 'एनर्जी ड्रिंक' या 'स्पोर्ट्स ड्रिंक' जैसे दावे करना भ्रामक श्रेणी में आता है। इसी क्रम में उपभोक्ताओं को जागरूक करने और खाद्य सुरक्षा मानकों की पालना सुनिश्चित करने के लिए जिले में यह सघन निरीक्षण अभियान चलाया जा रहा है। खाद्य सुरक्षा अधिकारी अशोक यादव, जिनके नेतृत्व में यह कार्रवाई की गई, ने आमजन को चेतावनी देते हुए बताया कि अधिक कैफीन वाले इन पेय पदार्थों का सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। विशेष रूप से बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को इनके उपयोग से बचने की सलाह दी गई है।
- देवली से भगवान श्री सांवरिया सेठ के दर्शन के लिए रवाना हुए श्रद्धालुओं का भीलवाड़ा के काछोला में गर्मजोशी के साथ स्वागत और अभिनंदन किया गया। नवल कुमार टेलर के सानिध्य में हुए इस आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान श्री सांवरिया सेठ के जयकारे लगाए, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। यात्रा संयोजक सत्यनारायण सेन ने बताया कि देवली से श्रद्धालु प्रत्येक ग्यारस पर सांवरियाजी के दर्शन के लिए यात्रा पर निकलते हैं। इस यात्रा में श्रद्धालु अपने परिवार और क्षेत्र की सुख-समृद्धि, खुशहाली तथा अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए विशेष परिक्रमा भी करते हैं। यह यात्रा सबसे पहले सिंगोली चारभुजा के दर्शन के साथ शुरू होती है और उसके बाद श्रद्धालु सीधे भगवान श्री सांवरिया सेठ के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इस अवसर पर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह और भक्ति का माहौल देखा गया।4
- भीलवाड़ा में जिला कलेक्टर जसमीत सिंह संधू के निर्देशन में चलाए जा रहे ‘शुद्ध आहार, मिलावट पर वार’ अभियान के तहत चिकित्सा विभाग की फूड सेफ्टी टीम ने शुक्रवार को एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। टीम ने शहर स्थित मैसर्स मनोज इंटरप्राइजेज से ‘स्टिंग’ ब्रांड की 2950 बोतलें कैफीनेटेड पेय पदार्थ (एनर्जी ड्रिंक) जब्त की हैं। कार्रवाई के दौरान विभाग ने इन उत्पादों के नमूने लेकर जांच के लिए अजमेर स्थित अधिकृत प्रयोगशाला में भेज दिए हैं, और रिपोर्ट आने के बाद संबंधित फर्म के खिलाफ नियमानुसार विधिक कार्रवाई की जाएगी। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजीव कुमार शर्मा ने स्पष्ट किया कि एफएसएसएआई के निर्देशों के अनुसार कैफीनेटेड पेय पदार्थों पर 'एनर्जी ड्रिंक' या 'स्पोर्ट्स ड्रिंक' जैसे दावे करना भ्रामक श्रेणी में आता है। इसी क्रम में उपभोक्ताओं को जागरूक करने और खाद्य सुरक्षा मानकों की पालना सुनिश्चित करने के लिए जिले में यह सघन निरीक्षण अभियान चलाया जा रहा है। खाद्य सुरक्षा अधिकारी अशोक यादव, जिनके नेतृत्व में यह कार्रवाई की गई, ने आमजन को चेतावनी देते हुए बताया कि अधिक कैफीन वाले इन पेय पदार्थों का सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। विशेष रूप से बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को इनके उपयोग से बचने की सलाह दी गई है।1
- भीलवाड़ा में लग्जरी और स्लीपर बसों में यात्रियों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा एक माह के बड़े अभियान की शुरुआत की गई है। इस अभियान के तहत आज होटल लैंडमार्क के पास बसों की सघन जांच की गई, जिसमें सुरक्षा नियमों में भारी खामियां मिलने पर एक ट्रेवल्स बस को सीज कर दिया गया। इस कार्रवाई से क्षेत्र के ट्रेवल्स संचालकों में हड़कंप मच गया है। जांच के दौरान विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव रश्मि आर्य स्वयं अधिकारियों के साथ मौके पर मौजूद रहीं और सुरक्षा व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। जिला परिवहन अधिकारी रामकृष्ण चौधरी और यातायात विभाग के अधिकारियों की उपस्थिति में यह कार्रवाई पूरी की गई। सुरक्षा नियमों के गंभीर उल्लंघन को देखते हुए जिला परिवहन अधिकारी के माध्यम से संबंधित बस को तत्काल प्रभाव से सीज करने के निर्देश दिए गए।1
- भीलवाड़ा में परिवहन विभाग और यातायात पुलिस ने संयुक्त रूप से स्कूल वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की है। इस अभियान के तहत नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों की जांच की गई और उन पर सख्त कदम उठाए गए।1
- भीलवाड़ा के रूडसेट संस्थान, सुवाणा में 9 जुलाई को आयोजित पब्लिक स्पीकिंग मास्टरक्लास के दूसरे सत्र में, प्रख्यात लाइफ कोच एवं पब्लिक स्पीकिंग प्रशिक्षक आचार्य देवेंद्र डाणी ने प्रशिक्षणार्थियों को प्रभावशाली संवाद और वॉइस मॉड्यूलेशन की उन्नत तकनीकों का प्रशिक्षण दिया। उन्होंने बताया कि सफल वक्तृत्व कला में केवल जानकारी ही नहीं, बल्कि आवाज़ का उतार-चढ़ाव, सही पिच, स्पष्ट उच्चारण और उचित ठहराव भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को लो, मीडियम और हाई पिच के उपयोग, श्वास नियंत्रण, बोलने की गति तथा संवाद की लय बनाए रखने का व्यावहारिक अभ्यास कराया गया। आचार्य डाणी ने इस बात पर जोर दिया कि "प्रभावशाली वक्ता वह होता है, जो यह जानता है कि कब बोलना है और कब रुकना है", क्योंकि सही समय पर लिया गया ठहराव श्रोताओं पर गहरा प्रभाव छोड़ता है और संदेश को अधिक प्रभावशाली बनाता है। इस कार्यक्रम में प्रशिक्षणार्थियों को मंच पर बुलाकर उनकी आवाज़, प्रस्तुति शैली और आत्मविश्वास का मूल्यांकन किया गया, जिसके बाद उन्हें सुधार के लिए आवश्यक सुझाव दिए गए। इस मास्टरक्लास में रूडसेट संस्थान के सत्यनारायण नागर, सुधा शर्मा सहित संस्थान के प्रशिक्षक और बड़ी संख्या में प्रशिक्षणार्थी उपस्थित रहे।4
- भीलवाड़ा जिले के आसींद स्थित शंभूगढ़ कस्बे के निवासियों ने चारागाह भूमि को बचाने की मांग को लेकर एक अनूठा कदम उठाया है। कस्बेवासियों ने ग्रामीण सेवा शिविर के दौरान प्रशासन को खून से लिखा एक ज्ञापन सौंपा है। ग्रामीणों का यह विरोध प्रदर्शन सार्वजनिक चारागाह भूमि के संरक्षण के प्रति उनकी चिंता को दर्शाता है, जिसे लेकर उन्होंने प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने के लिए इस तरीके को अपनाया।1
- यह वीडियो एक पति द्वारा अपनी पत्नी की वापसी की कामना करते हुए बनाई गई एक भावनात्मक प्रस्तुति है, जिसमें वैवाहिक संबंधों में आ रही चुनौतियों और परिवार को बचाने के महत्व पर चर्चा की गई है। लेखक का कहना है कि यह विचार केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं, बल्कि उन सभी पत्नियों के लिए है जो वैवाहिक जीवन के कठिन दौर से गुजर रही हैं। उनका स्पष्ट उद्देश्य किसी का अपमान करना नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और संवाद के माध्यम से रिश्तों को सहेजने का प्रयास करना है। वीडियो में पति ने अपनी पत्नी से उन लोगों के बहकावे से सावधान रहने का आग्रह किया है जो उन्हें पति के खिलाफ भड़का रहे हैं। उन्होंने याद दिलाया है कि बीमारी के समय, यहाँ तक कि कैंसर जैसी स्थिति में, उन्होंने बिना सोचे अपनी मेहनत की कमाई इलाज पर खर्च की थी, जबकि उस समय अन्य लोग मदद के लिए आगे नहीं आए थे। पति का मुख्य दुख कोर्ट-कचहरी में खड़ा होना नहीं, बल्कि यह देखना है कि दूसरों के प्रभाव में आकर पत्नी और बच्चे भविष्य में किन कठिन परिस्थितियों का सामना कर सकते हैं। अंत में, यह अपील की गई है कि अहंकार को त्यागकर समझदारी से निर्णय लिया जाए। यदि रिश्ते में सुधार की कोई गुंजाइश है, तो संवाद का मार्ग चुनना चाहिए क्योंकि सच्चा पश्चाताप टूटे हुए रिश्तों को फिर से जोड़ सकता है। लेखक का मानना है कि अहंकार से केवल एक पल की जीत मिलती है, जबकि परिवार के टूटने से पूरी ज़िंदगी की हार हो जाती है। इस संदेश को साझा करने का उद्देश्य किसी के घर को टूटने से बचाना और बच्चों का भविष्य सुरक्षित करना है।1
- भीलवाड़ा के आकोला में अफीम उत्पादक किसानों ने अपनी मांगों को लेकर मांडलगढ़ उपखंड अधिकारी को मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा। राजकुमार गोयल के नेतृत्व में किसानों ने इस दौरान धरना प्रदर्शन भी किया। किसानों की मुख्य मांग है कि उन्हें डोडा चूरा का मुआवजा 2000 रुपये प्रति किलो की दर से उनके वजन के अनुसार दिया जाए। ज्ञापन में बताया गया कि भारत सरकार जीवन रक्षक दवाइयां बनाने के लिए अफीम खरीदती है, लेकिन 2016 के बाद से डोडा चूरा की खरीद राज्य सरकार द्वारा बंद कर दी गई है। वर्तमान में सरकार द्वारा डोडा चूरा के नष्टीकरण और इसे जमींदोज करने के आदेश दिए गए हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। किसानों का कहना है कि कच्चे मकान होने के कारण इसे सुरक्षित रखना कठिन है, क्योंकि मवेशी इसे खा जाते हैं या बारिश में यह खराब हो जाता है। किसानों ने मांग की है कि जब तक 2000 रुपये प्रति किलो के हिसाब से मुआवजा नहीं मिलता, तब तक नष्टीकरण के आदेश को स्थगित रखा जाए। इसके विकल्प के तौर पर उन्होंने यह अधिकार मांगा है कि वे स्वयं अपने खेत में डोडा चूरा को नष्ट कर स्व-घोषित प्रमाण पत्र दे दें, जिससे खेत की उर्वरता बढ़ेगी और जैविक खेती को बढ़ावा मिलेगा। इस ज्ञापन के दौरान अफीम आयाम प्रमुख बद्रीलाल तेली और मांडलगढ़ तहसील के बड़ी संख्या में किसान उपस्थित थे।3