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जय जोहार बलरामपुर कुसमी ब्लॉक मैं यफीम का खेती होते हुए और हमारे रायगढ़ तमनार, और हमारे दुर्ग जिला, इस सब शहरों में या फिर बहुत मात्रा से खेती किया जाता है, और ग्रामीण विकास इस्तेमाल करके हानिकारक में पहुंचते हैं
Ratan Choudhry
जय जोहार बलरामपुर कुसमी ब्लॉक मैं यफीम का खेती होते हुए और हमारे रायगढ़ तमनार, और हमारे दुर्ग जिला, इस सब शहरों में या फिर बहुत मात्रा से खेती किया जाता है, और ग्रामीण विकास इस्तेमाल करके हानिकारक में पहुंचते हैं
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- Post by Sunil singh1
- चिनीयां से हेमंत कुमार की रिपोर्ट चिनियां प्रखंड मुख्यालय क्षेत्र के चिनीयां-गढ़वा मुख्य सड़क पर जंगली घाटी स्थित शिव स्थान के पास लगभग एक वर्ष से बंद पड़े चापाकल को लेकर आखिरकार ग्रामीणों ने खुद ही पहल कर दी। बुधवार दोपहर करीब 12 बजे चिनीयां और तसरार गांव के लोगों ने आपसी सहयोग से मिस्त्री बुलवाकर चापाकल खुलवाया। जांच के दौरान पता चला कि चापाकल के पाइप समेत कई जरूरी पुर्जे पूरी तरह खराब हो चुके हैं, जिन्हें बदलने में हजारों रुपये खर्च आने का अनुमान है। इसके बावजूद ग्रामीणों ने हार नहीं मानी और मरम्मत कराने का संकल्प लिया। ग्रामीणों ने बताया कि यह सड़क काफी व्यस्त है, जहां हर दिन हजारों लोग पैदल, साइकिल और अन्य साधनों से आवागमन करते हैं। भीषण गर्मी में इस सुनसान जंगल के बीच यही चापाकल यात्रियों के लिए जीवनरेखा था। इसके बंद होने से लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही थी। स्थानीय लोगों—चरितर पासवान, अभिषेक सिंह, वकील ठाकुर, विजय सिंह, विजय ठाकुर और शाहिद—ने नाराजगी जताते हुए कहा कि एक साल से चापाकल खराब पड़ा था, लेकिन किसी भी जनप्रतिनिधि ने इसकी सुध नहीं ली। मजबूर होकर अब ग्रामीण खुद ही आगे आए हैं।1
- #समुदायों के बीच पीने की पानी को लेकर बहुत बड़ी संकट खड़ी हो चुकी है। साथ ही कुछ दबंगों के द्वारा भी जनजाति को दबाया जा रहा है। जो बिल्कुल गलत है। आजाद भारत में रहने चलने और हक सबको है।1
- रामप्रवेश गुप्ता महुआडांड़ प्रखंड के चैनपुर में निर्माणाधीन पावर प्लांट स्थल पर करंट लगने से बैल की मौत के मामले में ग्रामीणों का आक्रोश अब आंदोलन में बदल गया है। घटना के विरोध में ग्रामीणों ने गुरुवार को पावर प्लांट स्थल पर आंदोलन शुरू कर दिया।ग्रामीणों के अनुसार पावर प्लांट निर्माण स्थल पर फैले खुले बिजली तार की चपेट में आने से एक बैल की मौत हो गई। आरोप है कि घटना के बाद बैल को बिना ग्रामीणों को सूचना दिए दफना दिया गया, जिससे लोगों में भारी नाराजगी फैल गई।घटना की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण पावर प्लांट स्थल पर पहुंच गए और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। ग्रामीणों ने पावर प्लांट प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मृत बैल के मालिक को उचित मुआवजा देने और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की।ग्रामीणों का कहना है कि जब तक पीड़ित परिवार को मुआवजा नहीं दिया जाता और घटना की जांच नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।वहीं मौके पर तनाव की स्थिति बनी हुई है। प्रशासन को भी घटना की जानकारी दे दी गई है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि मांग पूरी नहीं होने पर आंदोलन और तेज किया जाएगा।2
- जिस गाव के लोग भी मौजुत हुए, सभी लोगो की सहमति से निर्माण कर रहे (1) कंपनी की लापरवाही को मजबूत कर सर्बिश रोड की मांग रखीगई l (2) पंकज के परिवार वालों को 10 लाख की रकम चुकानी पडेगी l (3) पंडित परिवार को मुवाजे के साथ एक सदस्या को नौकरी देने की मांग की गई l1
- रमना हाईवे पर हुए भीषण सड़क हादसे में एक युवक की दर्दनाक मौत हो गई।1
- ..बलरामपुर: 'रक्षक ही बने भक्षक?' बेलकोना के हणहा जंगल में हजारों पेड़ों की बलि, वन भूमि पर भू-माफियाओं का कब्जा एंकर...शंकरगढ़, बलरामपुर। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में इन दिनों 'जल, जंगल और जमीन' को बचाने के दावों की हवा निकलती दिखाई दे रही है। ताजा मामला शंकरगढ़ वन परिक्षेत्र के बेलकोना गांव का है, जहां कभी बेशकीमती पेड़ों से लदा हणहा जंगल आज भू-माफियाओं और अवैध कब्जेधारियों की भेंट चढ़ चुका है। आरोप है कि यहाँ हजारों पेड़ों की बेरहमी से कटाई कर सैकड़ों एकड़ वन भूमि पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया गया है बीओ01..हैरानी की बात यह है कि जिस जंगल को बचाने के लिए शासन हर साल करोड़ों रुपए खर्च करता है, उसे चंद रसूखदारों ने अधिकारियों की नाक के नीचे उजाड़ दिया। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि इस पूरे खेल में वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध है। जंगल की जमीन की खुलेआम 'सौदेबाजी' की गई और उसे खेती या अन्य कार्यों के लिए बेच दिया गया, जबकि विभाग मूकदर्शक बना रहा। बीओ 02..स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह जंगल उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा है। ग्रामीणों के अनुसार: जंगल कटने से क्षेत्र का जलस्तर गिर रहा है।मवेशियों के लिए चारा और लकड़ी का संकट खड़ा हो गया है।पर्यावरण को अपूरणीय क्षति हो रही है। बीओ3...सर्व आदिवासी समाज के जिला अध्यक्ष बसंत कुजूर ने भी इस मामले में तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उनका कहना है कि आदिवासियों और जंगल का अटूट रिश्ता है, लेकिन यहाँ प्रशासन की मिलीभगत से वन संपदा को लूटा जा रहा है। बीओ04.....बेलकोना का यह मामला केवल पेड़ों की कटाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक बड़े सिंडिकेट की ओर इशारा कर रहा है जो सरकारी जमीनों और जंगलों को अपना निशाना बना रहा है। अब सवाल यह उठता है कि: क्या शासन इन अवैध कब्जों को हटाकर फिर से वहां वृक्षारोपण कराएगा? दोषी अधिकारियों और भू-माफियाओं पर कड़ी कार्रवाई होगी या फाइल ठंडे बस्ते में डाल दी जाएगी? फिलहाल, ग्रामीणों की नजरें अब जिला प्रशासन और उच्च अधिकारियों की कार्रवाई पर टिकी हैं। अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो वह दिन दूर नहीं जब बेलकोना का नक्शा पूरी तरह बदल जाएगा और जंगल सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाएगा। रिपोर्ट: अली खान, जिला ब्यूरो1
- Post by Sunil singh1
- रामप्रवेश गुप्ता महुआडांड़ स्थित संत जेवियर कॉलेज में राष्ट्रीय सेवा योजना (एन.एस.एस.) इकाई के तत्वावधान में “टीबी मुक्त भारत” अभियान के अंतर्गत एक व्यापक जागरूकता कार्यक्रम एवं शपथ ग्रहण समारोह का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य क्षय रोग (टीबी) के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना तथा इसके उन्मूलन के लिए सामूहिक संकल्प को सुदृढ़ करना था। कार्यक्रम की शुरुआत स्वागत भाषण के साथ हुई, जिसमें टीबी जैसी गंभीर और संक्रामक बीमारी के प्रति समाज को सचेत रहने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया गया। इसके पश्चात महाविद्यालय के प्राध्यापकों, एन.एस.एस. स्वयंसेवकों एवं छात्र-छात्राओं को “टीबी मुक्त भारत” की शपथ दिलाई गई। शपथ के दौरान सभी ने यह संकल्प लिया कि वे टीबी के लक्षणों के प्रति सजग रहेंगे, समय पर जांच कराएंगे तथा अपने आसपास के लोगों को भी इसके प्रति जागरूक करेंगे। इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. फादर एम. के. जोस ने अपने प्रेरणादायी संबोधन में कहा— टीबी केवल एक बीमारी नहीं, बल्कि यह सामाजिक जागरूकता की कमी का भी परिणाम है। जब तक हम इसके लक्षणों, कारणों और उपचार के प्रति पूरी तरह जागरूक नहीं होंगे, तब तक इसे जड़ से समाप्त करना संभव नहीं है। ‘टीबी मुक्त भारत’ अभियान तभी सफल होगा, जब समाज का हर व्यक्ति इसमें अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करेगा। हमारा उद्देश्य केवल शपथ लेना नहीं, बल्कि इसे अपने व्यवहार में उतारना है। एन.एस.एस. स्वयंसेवकों की जिम्मेदारी और भी महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि वे समाज में परिवर्तन के वाहक होते हैं। विद्यार्थियों को चाहिए कि वे अपने गांव, परिवार एवं आसपास के क्षेत्रों में जाकर लोगों को टीबी के लक्षण—जैसे लगातार खांसी, वजन घटना, बुखार आदि—के बारे में जागरूक करें तथा जरूरत पड़ने पर उन्हें जांच और उपचार के लिए प्रेरित करें। यह ध्यान रखना आवश्यक है कि टीबी का इलाज पूरी तरह संभव है और सरकार द्वारा इसके लिए निःशुल्क दवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। यदि हम सब मिलकर प्रयास करें, तो टीबी मुक्त भारत का सपना अवश्य साकार होगा। कार्यक्रम के दौरान एन.एस.एस. कॉर्डिनेटर विक्रम रजत डुंगडुंग ने भी अपने संबोधन में कहा— “शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल ज्ञान अर्जित करना नहीं, बल्कि समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझना और उन्हें निभाना भी है। इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम विद्यार्थियों में सामाजिक चेतना, सेवा भाव और उत्तरदायित्व की भावना को विकसित करते हैं। एन.एस.एस. के स्वयंसेवकों को चाहिए कि वे इस अभियान को जन-जन तक पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाएं और समाज में सकारात्मक परिवर्तन के वाहक बनें।” इस कार्यक्रम में उपप्राचार्य फादर समीर टोप्पो, फादर लियो, सिस्टर चन्द्रोदया, फादर राजीप, प्रो. मनीषा, प्रो. बंसति, प्रो. अंकिता, प्रो. आदिति, प्रो. रेचेल, प्रो. सुष्मिता, प्रो. सुकुट, प्रो. रोनित, प्रो. शशि, प्रो. मन्नू, प्रो. जामेश, प्रो. मोनिका सहित अन्य शिक्षकों की गरिमामयी उपस्थिति रही। अंत में धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया। यह आयोजन न केवल विद्यार्थियों में जागरूकता बढ़ाने में सफल रहा, बल्कि उन्हें समाज सेवा के प्रति प्रेरित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी सिद्ध हुआ।4