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आजकल बच्चों में क्रिकेट का जुनून सिर चढ़कर बोल रहा है और हर कोई एक बड़ा खिलाड़ी बनने की चाह रखता है। हालांकि, यह याद रखना ज़रूरी है कि सिर्फ़ खेल ही ज़िंदगी नहीं है, क्योंकि लाखों बच्चे क्रिकेट में मेहनत करते हैं लेकिन चयन कुछ ही का हो पाता है। ऐसे में, खेल के साथ-साथ पढ़ाई भी बेहद आवश्यक है ताकि ज़िंदगी में कभी हार का सामना न करना पड़े। पढ़ाई इंसान को अच्छी नौकरी, अच्छा व्यवसाय और समाज में सम्मान दिलाती है। इसलिए, खेलना जारी रखें लेकिन किताबों से अपना रिश्ता कभी न तोड़ें, क्योंकि जहाँ मैदान का खिलाड़ी हर कोई नहीं बन सकता, वहीं पढ़-लिखकर एक सफल इंसान हर कोई बन सकता है।

22 hrs ago
user_Aap ki baat sab tak
Aap ki baat sab tak
Newspaper advertising department राजगढ़, राजगढ़, मध्य प्रदेश•
22 hrs ago

आजकल बच्चों में क्रिकेट का जुनून सिर चढ़कर बोल रहा है और हर कोई एक बड़ा खिलाड़ी बनने की चाह रखता है। हालांकि, यह याद रखना ज़रूरी है कि सिर्फ़ खेल ही ज़िंदगी नहीं है, क्योंकि लाखों बच्चे क्रिकेट में मेहनत करते हैं लेकिन चयन कुछ ही का हो पाता है। ऐसे में, खेल के साथ-साथ पढ़ाई भी बेहद आवश्यक है ताकि ज़िंदगी में कभी हार का सामना न करना पड़े। पढ़ाई इंसान को अच्छी नौकरी, अच्छा व्यवसाय और समाज में सम्मान दिलाती है। इसलिए, खेलना जारी रखें लेकिन किताबों से अपना रिश्ता कभी न तोड़ें, क्योंकि जहाँ मैदान का खिलाड़ी हर कोई नहीं बन सकता, वहीं पढ़-लिखकर एक सफल इंसान हर कोई बन सकता है।

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  • देश में जनगणना 2027 की तैयारी चल रही है, जिसके मद्देनज़र लोगों को विशेष सावधानी बरतने की ज़रूरत है। सरकार ने स्पष्ट दिशानिर्देश जारी किए हैं कि जनगणना के कार्य में लगे कोई भी कर्मचारी आपसे OTP, बैंक PIN या किसी भी प्रकार का पैसा नहीं मांगेंगे। नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे किसी भी फ़र्ज़ी कॉल और नकली सर्वे लिंक से बचें। यह भी कहा गया है कि अपनी जानकारी केवल अधिकृत कर्मचारियों को ही प्रदान करें।
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    देश में जनगणना 2027 की तैयारी चल रही है, जिसके मद्देनज़र लोगों को विशेष सावधानी बरतने की ज़रूरत है। सरकार ने स्पष्ट दिशानिर्देश जारी किए हैं कि जनगणना के कार्य में लगे कोई भी कर्मचारी आपसे OTP, बैंक PIN या किसी भी प्रकार का पैसा नहीं मांगेंगे। नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे किसी भी फ़र्ज़ी कॉल और नकली सर्वे लिंक से बचें। यह भी कहा गया है कि अपनी जानकारी केवल अधिकृत कर्मचारियों को ही प्रदान करें।
    user_Aap ki baat sab tak
    Aap ki baat sab tak
    Newspaper advertising department राजगढ़, राजगढ़, मध्य प्रदेश•
    16 hrs ago
  • बमोरी तहसील में देर रात करीब 12 बजे तेज़ आंधी तूफान के साथ जोरदार बारिश दर्ज की गई। इस दौरान पूरे क्षेत्र में भारी बारिश हुई।
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    बमोरी तहसील में देर रात करीब 12 बजे तेज़ आंधी तूफान के साथ जोरदार बारिश दर्ज की गई। इस दौरान पूरे क्षेत्र में भारी बारिश हुई।
    user_Gopal Kirar पत्रकार बमोरी
    Gopal Kirar पत्रकार बमोरी
    Local News Reporter बामोरी, गुना, मध्य प्रदेश•
    5 hrs ago
  • भंडावद गांव के लाल और राजपूत रेजीमेंट के हवलदार कमल सिंह सोनगरा 1 जून को 16 साल की गौरवपूर्ण देशसेवा के बाद सेवानिवृत्त होकर अपने गांव लौट रहे हैं। उनके आगमन को लेकर पूरे जीरापुर क्षेत्र में भारी उत्साह का माहौल है और ग्रामीणों ने उनके भव्य स्वागत की तैयारियां पूरी कर ली हैं। कमल सिंह सोनगरा 28 मार्च 2010 को भारतीय सेना की राजपूत रेजीमेंट में हवलदार के पद पर भर्ती हुए थे, जिन्होंने 16 वर्षों तक कश्मीर से कन्याकुमारी तक मां भारती की अनवरत सेवा की है। उनके स्वागत में 1 जून को प्रातः 8:00 बजे ग्राम खूबनपुरा स्थित सीएम राइज स्कूल के सामने से 'वीर सम्मान समारोह' की शुरुआत होगी। यहां से ढोल-नगाड़ों, आतिशबाजी और फूल-मालाओं के साथ एक भव्य जुलूस निकाला जाएगा, जो जीरापुर के प्रमुख मार्गों से होता हुआ भंडावद स्थित बालाजी मंदिर पहुंचेगा। इस पूरे रास्ते 'भारत माता की जय' और 'वंदे मातरम्' के नारों से आसमान गूंज उठेगा। ग्रामीणों ने बताया है कि कमल सिंह ने गांव का नाम रोशन किया है और उनका स्वागत ऐतिहासिक होगा, जिसमें हर घर से एक व्यक्ति जुलूस में शामिल होगा। कमल सिंह के पिता, भंडावद निवासी ठाकुर सा. विक्रम सिंह सोनगरा की देशभक्ति पूरे अंचल में प्रशंसा का विषय बनी हुई है, क्योंकि उनके पांच बेटों में से तीन ने देशसेवा को चुना है। उनके सबसे बड़े बेटे भंवर सिंह खेती-किसानी करते हैं, जबकि दूसरे बेटे स्व. लक्ष्मण सिंह (जो 2012 में दिवंगत हुए) भी किसान थे। तीसरे बेटे शिव सिंह 2019 में सेना से सेवानिवृत्त हो चुके हैं और चौथे बेटे लाल सिंह अभी भी भारतीय सेना में सेवारत हैं। अब सबसे छोटे बेटे कमल सिंह 16 साल की सेवा के बाद घर लौट रहे हैं, जिससे पिता का सीना गर्व से चौड़ा है। ग्रामीण इस परिवार को 'धन्य है वो पिता जिसने तीन लाल फौज को दिए' कहकर सम्मानित कर रहे हैं और भंडावद के लिए इसे सौभाग्य बता रहे हैं कि 'एक घर से तीन-तीन फौजी' हैं।
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    भंडावद गांव के लाल और राजपूत रेजीमेंट के हवलदार कमल सिंह सोनगरा 1 जून को 16 साल की गौरवपूर्ण देशसेवा के बाद सेवानिवृत्त होकर अपने गांव लौट रहे हैं। उनके आगमन को लेकर पूरे जीरापुर क्षेत्र में भारी उत्साह का माहौल है और ग्रामीणों ने उनके भव्य स्वागत की तैयारियां पूरी कर ली हैं। कमल सिंह सोनगरा 28 मार्च 2010 को भारतीय सेना की राजपूत रेजीमेंट में हवलदार के पद पर भर्ती हुए थे, जिन्होंने 16 वर्षों तक कश्मीर से कन्याकुमारी तक मां भारती की अनवरत सेवा की है।

उनके स्वागत में 1 जून को प्रातः 8:00 बजे ग्राम खूबनपुरा स्थित सीएम राइज स्कूल के सामने से 'वीर सम्मान समारोह' की शुरुआत होगी। यहां से ढोल-नगाड़ों, आतिशबाजी और फूल-मालाओं के साथ एक भव्य जुलूस निकाला जाएगा, जो जीरापुर के प्रमुख मार्गों से होता हुआ भंडावद स्थित बालाजी मंदिर पहुंचेगा। इस पूरे रास्ते 'भारत माता की जय' और 'वंदे मातरम्' के नारों से आसमान गूंज उठेगा। ग्रामीणों ने बताया है कि कमल सिंह ने गांव का नाम रोशन किया है और उनका स्वागत ऐतिहासिक होगा, जिसमें हर घर से एक व्यक्ति जुलूस में शामिल होगा।

कमल सिंह के पिता, भंडावद निवासी ठाकुर सा. विक्रम सिंह सोनगरा की देशभक्ति पूरे अंचल में प्रशंसा का विषय बनी हुई है, क्योंकि उनके पांच बेटों में से तीन ने देशसेवा को चुना है। उनके सबसे बड़े बेटे भंवर सिंह खेती-किसानी करते हैं, जबकि दूसरे बेटे स्व. लक्ष्मण सिंह (जो 2012 में दिवंगत हुए) भी किसान थे। तीसरे बेटे शिव सिंह 2019 में सेना से सेवानिवृत्त हो चुके हैं और चौथे बेटे लाल सिंह अभी भी भारतीय सेना में सेवारत हैं। अब सबसे छोटे बेटे कमल सिंह 16 साल की सेवा के बाद घर लौट रहे हैं, जिससे पिता का सीना गर्व से चौड़ा है। ग्रामीण इस परिवार को 'धन्य है वो पिता जिसने तीन लाल फौज को दिए' कहकर सम्मानित कर रहे हैं और भंडावद के लिए इसे सौभाग्य बता रहे हैं कि 'एक घर से तीन-तीन फौजी' हैं।
    user_भेरुलाल गुर्जर पत्रकार
    भेरुलाल गुर्जर पत्रकार
    Citizens advice bureau जीरापुर, राजगढ़, मध्य प्रदेश•
    22 hrs ago
  • भैंसाना आश्रम में एक भव्य और आध्यात्मिक आयोजन की झलक देखने को मिली, जहाँ लाखों की संख्या में श्रद्धालु उमड़ पड़े। इस अवसर पर उपस्थित भक्तों ने गहरी आस्था और उत्साह के साथ हिस्सा लिया, जिसमें रामायण से जुड़े प्रसंगों और भावनाओं को महसूस किया गया। यह कार्यक्रम भक्ति और श्रद्धा से ओत-प्रोत रहा, जिसमें कहीं खुशी के पल थे तो कहीं भावुकता के क्षण भी देखने को मिले, जो सामूहिक रूप से लाखों श्रद्धालुओं की अटूट श्रद्धा को दर्शाता है।
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    भैंसाना आश्रम में एक भव्य और आध्यात्मिक आयोजन की झलक देखने को मिली, जहाँ लाखों की संख्या में श्रद्धालु उमड़ पड़े। इस अवसर पर उपस्थित भक्तों ने गहरी आस्था और उत्साह के साथ हिस्सा लिया, जिसमें रामायण से जुड़े प्रसंगों और भावनाओं को महसूस किया गया। यह कार्यक्रम भक्ति और श्रद्धा से ओत-प्रोत रहा, जिसमें कहीं खुशी के पल थे तो कहीं भावुकता के क्षण भी देखने को मिले, जो सामूहिक रूप से लाखों श्रद्धालुओं की अटूट श्रद्धा को दर्शाता है।
    user_Tony Shah
    Tony Shah
    मकसूदनगढ़, गुना, मध्य प्रदेश•
    1 hr ago
  • मध्य प्रदेश के दतिया जिले में मांझी समाज के एक प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार, 29 मई 2026 को जिला कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन सौंपा है। समाज ने मांग की है कि तत्कालीन विंध्यप्रदेश की मूल समाहित मांझी जनजाति में शामिल धीमर, केवट, मल्लाह और भोई समुदायों को अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की सूची क्रमांक 12 से हटाया जाए। मांझी समाज के पदाधिकारियों ने अपनी मांग के समर्थन में कई पुराने दस्तावेजों का हवाला दिया। उन्होंने बताया कि 07 जनवरी 1950 को जारी तत्कालीन विंध्यप्रदेश के राजप्रमुख के परिपत्र क्रमांक 97/XIII/F/CENSUS 49 में मांझी जाति के समक्ष धीमर, केवट, मल्लाह और भोई को अनुसूचित जनजाति में समाहित करने की अनुशंसा की गई थी। इसके अतिरिक्त, जनजाति कार्य विभाग म.प्र. आयुक्त के पत्र क्रमांक जा.प्रा.समिति/23/12/2023 में भी धीमर, केवट, मल्लाह और भोई को मांझी जनजाति में मूल रूप से समाहित होना स्वीकार किया गया है। यह मुद्दा मध्य प्रदेश विधानसभा में भी उठ चुका है, जहां 13 मार्च 2023 को अतारांकित प्रश्न क्रमांक 1121 के जवाब में तत्कालीन जनजाति कार्य मंत्री सुश्री मीना सिंह माण्डवे ने स्वीकार किया था कि विंध्यप्रदेश के केवट, धीमर, मल्लाह और भोई मांझी जनजाति में समाहित हैं और यही मूल मांझी जनजाति है। समाज के जिला अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि विंध्यप्रदेश के अंतर्गत आने वाले जिलों जैसे रीवा, सीधी, शहडोल, सतना, छतरपुर, दतिया और टीकमगढ़ में "मांझी" नाम की कोई अलग जाति नहीं पाई जाती। इन क्षेत्रों में धीमर, केवट, मल्लाह और भोई को ही मूल समाहित मांझी जनजाति के रूप में मान्यता प्राप्त है, और ये विंध्यप्रदेश के पुकारू शब्द हैं। ज्ञापन सौंपने के दौरान मांझी समाज के जिला अध्यक्ष पूरन केवट सहित सैकड़ों समाजजन उपस्थित थे। कलेक्टर ने ज्ञापन स्वीकार कर इसे उचित माध्यम से शासन को भेजने का आश्वासन दिया है।
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    मध्य प्रदेश के दतिया जिले में मांझी समाज के एक प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार, 29 मई 2026 को जिला कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन सौंपा है। समाज ने मांग की है कि तत्कालीन विंध्यप्रदेश की मूल समाहित मांझी जनजाति में शामिल धीमर, केवट, मल्लाह और भोई समुदायों को अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की सूची क्रमांक 12 से हटाया जाए।

मांझी समाज के पदाधिकारियों ने अपनी मांग के समर्थन में कई पुराने दस्तावेजों का हवाला दिया। उन्होंने बताया कि 07 जनवरी 1950 को जारी तत्कालीन विंध्यप्रदेश के राजप्रमुख के परिपत्र क्रमांक 97/XIII/F/CENSUS 49 में मांझी जाति के समक्ष धीमर, केवट, मल्लाह और भोई को अनुसूचित जनजाति में समाहित करने की अनुशंसा की गई थी। इसके अतिरिक्त, जनजाति कार्य विभाग म.प्र. आयुक्त के पत्र क्रमांक जा.प्रा.समिति/23/12/2023 में भी धीमर, केवट, मल्लाह और भोई को मांझी जनजाति में मूल रूप से समाहित होना स्वीकार किया गया है। यह मुद्दा मध्य प्रदेश विधानसभा में भी उठ चुका है, जहां 13 मार्च 2023 को अतारांकित प्रश्न क्रमांक 1121 के जवाब में तत्कालीन जनजाति कार्य मंत्री सुश्री मीना सिंह माण्डवे ने स्वीकार किया था कि विंध्यप्रदेश के केवट, धीमर, मल्लाह और भोई मांझी जनजाति में समाहित हैं और यही मूल मांझी जनजाति है।

समाज के जिला अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि विंध्यप्रदेश के अंतर्गत आने वाले जिलों जैसे रीवा, सीधी, शहडोल, सतना, छतरपुर, दतिया और टीकमगढ़ में "मांझी" नाम की कोई अलग जाति नहीं पाई जाती। इन क्षेत्रों में धीमर, केवट, मल्लाह और भोई को ही मूल समाहित मांझी जनजाति के रूप में मान्यता प्राप्त है, और ये विंध्यप्रदेश के पुकारू शब्द हैं। ज्ञापन सौंपने के दौरान मांझी समाज के जिला अध्यक्ष पूरन केवट सहित सैकड़ों समाजजन उपस्थित थे। कलेक्टर ने ज्ञापन स्वीकार कर इसे उचित माध्यम से शासन को भेजने का आश्वासन दिया है।
    user_सतेन्द्र अहिरवार
    सतेन्द्र अहिरवार
    Local News Reporter बडोनी, दतिया, मध्य प्रदेश•
    16 hrs ago
  • ग्राम मोहन बड़ोदिया के मोहना में गुरुवार को श्री हनुमान झंडा मंडल एवं समस्त ग्रामवासियों के तत्वावधान में एक विशाल एवं भव्य झंडा सम्मेलन का आयोजन किया गया। यह आयोजन स्थानीय हनुमान मंदिर परिसर में संपन्न हुआ, जहाँ सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़नी शुरू हो गई थी। इस धार्मिक सम्मेलन में आसपास के कई गाँवों से झंडा एवं भजन मंडलियाँ पहुँचीं, जिससे पूरा क्षेत्र भक्तिमय माहौल में सराबोर हो गया। ग्रामीण भगवान कलमोदिया ने बताया कि इस वर्ष सम्मेलन में कुल 105 झंडा एवं भजन मंडलियों ने भाग लिया। इन सभी मंडलियों ने मंच पर एक से बढ़कर एक आकर्षक भजन-कीर्तन प्रस्तुत किए। ढोल, मंजीरे, झांझ और विभिन्न वाद्य यंत्रों की मधुर ध्वनि के साथ प्रस्तुत किए गए इन भजनों ने श्रद्धालुओं को देर रात तक मंत्रमुग्ध रखा। कार्यक्रम में ग्राम मांगलिया की झंडा मंडली ने शानदार प्रस्तुति देकर प्रथम स्थान प्राप्त किया, और आयोजन समिति ने उन्हें श्री राधा रानी की तस्वीर भेंट कर सम्मानित किया। इसके अलावा, ग्राम ईचवाड़ा की भजन मंडली ने भी विशेष प्रस्तुति देकर श्रद्धालुओं की खूब वाहवाही बटोरी। सम्मेलन के दौरान पूरी रात भजन-कीर्तन का दौर चलता रहा, जहाँ श्रद्धालु भगवान हनुमान एवं राधा-कृष्ण के भजनों पर झूमते नजर आए। आयोजन स्थल को आकर्षक रोशनी एवं सजावट से सुसज्जित किया गया था, जिससे मंदिर परिसर की भव्यता देखते ही बन रही थी। क्षेत्रभर से हजारों श्रद्धालु इस कार्यक्रम में शामिल हुए। आयोजन समिति द्वारा श्रद्धालुओं के लिए भोजन प्रसादी की भी व्यवस्था की गई थी, जिसे लोगों ने देर रात तक ग्रहण किया। ग्रामीणों एवं युवाओं ने इस आयोजन को सफल बनाने में बढ़-चढ़कर सहयोग दिया। आयोजन समिति ने सभी भजन मंडलियों, श्रद्धालुओं एवं सहयोगकर्ताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के धार्मिक आयोजन समाज में एकता, भाईचारे एवं धार्मिक आस्था को मजबूत करने का कार्य करते हैं।
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    ग्राम मोहन बड़ोदिया के मोहना में गुरुवार को श्री हनुमान झंडा मंडल एवं समस्त ग्रामवासियों के तत्वावधान में एक विशाल एवं भव्य झंडा सम्मेलन का आयोजन किया गया। यह आयोजन स्थानीय हनुमान मंदिर परिसर में संपन्न हुआ, जहाँ सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़नी शुरू हो गई थी। इस धार्मिक सम्मेलन में आसपास के कई गाँवों से झंडा एवं भजन मंडलियाँ पहुँचीं, जिससे पूरा क्षेत्र भक्तिमय माहौल में सराबोर हो गया।

ग्रामीण भगवान कलमोदिया ने बताया कि इस वर्ष सम्मेलन में कुल 105 झंडा एवं भजन मंडलियों ने भाग लिया। इन सभी मंडलियों ने मंच पर एक से बढ़कर एक आकर्षक भजन-कीर्तन प्रस्तुत किए। ढोल, मंजीरे, झांझ और विभिन्न वाद्य यंत्रों की मधुर ध्वनि के साथ प्रस्तुत किए गए इन भजनों ने श्रद्धालुओं को देर रात तक मंत्रमुग्ध रखा। कार्यक्रम में ग्राम मांगलिया की झंडा मंडली ने शानदार प्रस्तुति देकर प्रथम स्थान प्राप्त किया, और आयोजन समिति ने उन्हें श्री राधा रानी की तस्वीर भेंट कर सम्मानित किया। इसके अलावा, ग्राम ईचवाड़ा की भजन मंडली ने भी विशेष प्रस्तुति देकर श्रद्धालुओं की खूब वाहवाही बटोरी।

सम्मेलन के दौरान पूरी रात भजन-कीर्तन का दौर चलता रहा, जहाँ श्रद्धालु भगवान हनुमान एवं राधा-कृष्ण के भजनों पर झूमते नजर आए। आयोजन स्थल को आकर्षक रोशनी एवं सजावट से सुसज्जित किया गया था, जिससे मंदिर परिसर की भव्यता देखते ही बन रही थी। क्षेत्रभर से हजारों श्रद्धालु इस कार्यक्रम में शामिल हुए। आयोजन समिति द्वारा श्रद्धालुओं के लिए भोजन प्रसादी की भी व्यवस्था की गई थी, जिसे लोगों ने देर रात तक ग्रहण किया। ग्रामीणों एवं युवाओं ने इस आयोजन को सफल बनाने में बढ़-चढ़कर सहयोग दिया।

आयोजन समिति ने सभी भजन मंडलियों, श्रद्धालुओं एवं सहयोगकर्ताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के धार्मिक आयोजन समाज में एकता, भाईचारे एवं धार्मिक आस्था को मजबूत करने का कार्य करते हैं।
    user_Rajesh jamliya
    Rajesh jamliya
    Local News Reporter मोमन बड़ोदिया, शाजापुर, मध्य प्रदेश•
    19 hrs ago
  • कालापीपल में विधायक घनश्याम जी चन्द्रवंशी जी ने जैन मंदिर चौराहा पर पंचमुखी चौराहा से रेलवे स्टेशन तक होने वाले पेवर ब्लॉक और डामरीकरण कार्यों का भूमिपूजन किया। यह विकास कार्य 29 मई, 2026 को संपन्न हुए, जिसे क्षेत्र में विकास की नई राह के रूप में देखा जा रहा है।
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    कालापीपल में विधायक घनश्याम जी चन्द्रवंशी जी ने जैन मंदिर चौराहा पर पंचमुखी चौराहा से रेलवे स्टेशन तक होने वाले पेवर ब्लॉक और डामरीकरण कार्यों का भूमिपूजन किया। यह विकास कार्य 29 मई, 2026 को संपन्न हुए, जिसे क्षेत्र में विकास की नई राह के रूप में देखा जा रहा है।
    user_Jitendra Patidar
    Jitendra Patidar
    Local News Reporter Kalapipal, Shajapur•
    20 hrs ago
  • आजकल बच्चों में क्रिकेट का जुनून सिर चढ़कर बोल रहा है और हर कोई एक बड़ा खिलाड़ी बनने की चाह रखता है। हालांकि, यह याद रखना ज़रूरी है कि सिर्फ़ खेल ही ज़िंदगी नहीं है, क्योंकि लाखों बच्चे क्रिकेट में मेहनत करते हैं लेकिन चयन कुछ ही का हो पाता है। ऐसे में, खेल के साथ-साथ पढ़ाई भी बेहद आवश्यक है ताकि ज़िंदगी में कभी हार का सामना न करना पड़े। पढ़ाई इंसान को अच्छी नौकरी, अच्छा व्यवसाय और समाज में सम्मान दिलाती है। इसलिए, खेलना जारी रखें लेकिन किताबों से अपना रिश्ता कभी न तोड़ें, क्योंकि जहाँ मैदान का खिलाड़ी हर कोई नहीं बन सकता, वहीं पढ़-लिखकर एक सफल इंसान हर कोई बन सकता है।
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    आजकल बच्चों में क्रिकेट का जुनून सिर चढ़कर बोल रहा है और हर कोई एक बड़ा खिलाड़ी बनने की चाह रखता है। हालांकि, यह याद रखना ज़रूरी है कि सिर्फ़ खेल ही ज़िंदगी नहीं है, क्योंकि लाखों बच्चे क्रिकेट में मेहनत करते हैं लेकिन चयन कुछ ही का हो पाता है। ऐसे में, खेल के साथ-साथ पढ़ाई भी बेहद आवश्यक है ताकि ज़िंदगी में कभी हार का सामना न करना पड़े। पढ़ाई इंसान को अच्छी नौकरी, अच्छा व्यवसाय और समाज में सम्मान दिलाती है। इसलिए, खेलना जारी रखें लेकिन किताबों से अपना रिश्ता कभी न तोड़ें, क्योंकि जहाँ मैदान का खिलाड़ी हर कोई नहीं बन सकता, वहीं पढ़-लिखकर एक सफल इंसान हर कोई बन सकता है।
    user_Aap ki baat sab tak
    Aap ki baat sab tak
    Newspaper advertising department राजगढ़, राजगढ़, मध्य प्रदेश•
    22 hrs ago
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