Shuru
Apke Nagar Ki App…
लेमुआबाद पंचायत में बाढ़ प्रभावितों के बीच मुखिया निक्की देवी ने बांटी तिरपाल, चूड़ा-गुड़, पशुओं के लिए भी मदद का आश्वासन बाढ़ प्रभावितों के बीच मुखिया निक्की देवी ने बांटी तिरपाल, चूड़ा-गुड़, पशुओं के लिए भी मदद का आश्वासन दिया।
न्यूज 30 बिहार
लेमुआबाद पंचायत में बाढ़ प्रभावितों के बीच मुखिया निक्की देवी ने बांटी तिरपाल, चूड़ा-गुड़, पशुओं के लिए भी मदद का आश्वासन बाढ़ प्रभावितों के बीच मुखिया निक्की देवी ने बांटी तिरपाल, चूड़ा-गुड़, पशुओं के लिए भी मदद का आश्वासन दिया।
More news from Patna and nearby areas
- लेमुआबाद पंचायत में बाढ़ प्रभावितों के बीच मुखिया निक्की देवी ने बांटी तिरपाल, चूड़ा-गुड़, पशुओं के लिए भी मदद का आश्वासन बाढ़ प्रभावितों के बीच मुखिया निक्की देवी ने बांटी तिरपाल, चूड़ा-गुड़, पशुओं के लिए भी मदद का आश्वासन दिया।1
- अथमलगोला में मिनी गन फैक्ट्री का भंडाफोड़, चार गिरफ्तार; जेल से छूटते ही फिर शुरू किया अवैध हथियारों का धंधा1
- 5 मिनट में समझिए हिमालय के सीने पर हुई सबसे बड़ी त्रासदी की पूरी इनसाइड स्टोरी! डेटा, वैज्ञानिक आंकड़ों और AI तकनीक के साथ NDTV का यह खास वीडियो नेपाल हादसे के हर पहलू को बारीकी से समझाता है। सटीक और प्रामाणिक जानकारी सभी तक पहुँचाने के लिए इस वीडियो को आगे री-ट्वीट और शेयर करें #NepalDisaster #DataDrivenJournalism #NepalExplained #NDTVBharatKaVishwas #MustWatch1
- मोकामा घाट में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मेले की धूम, गंगा किनारे उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ मोकामा घाट में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मेले की धूम, गंगा किनारे उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़ मोकामा। मोकामा घाट में हर वर्ष की तरह इस बार भी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मेले का आयोजन धूमधाम से किया जा रहा है। 4 सितंबर से शुरू हुए इस मेले को लेकर श्रद्धालुओं और बच्चों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। मेले में छोटे-बड़े बच्चों के मनोरंजन के लिए ब्रेक डांस, बतख, आसमानी तारा, नाव, मिक्की माउस, घोड़ा समेत कई प्रकार के झूले लगाए गए हैं। वहीं, मेले में रंग-बिरंगी दुकानों की भी खूब रौनक है। खिलौने, नमकीन, मिठाई, आइसक्रीम समेत खाने-पीने और जरूरत के कई सामानों की दुकानें सजाई गई हैं। मेले का मुख्य आकर्षण भगवान श्रीकृष्ण की आकर्षक मूर्तियां हैं। यहां श्रीकृष्ण की बाल लीला के साथ-साथ श्रीकृष्ण के माता-पिता वासुदेव और देवकी की जेल यात्रा से जुड़े धार्मिक प्रसंगों को मूर्तियों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है। इन मूर्तियों को देखने के लिए दूर-दराज से भी श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। मेले के अध्यक्ष रणवीर कुमार ने बताया कि प्रत्येक वर्ष की तरह इस बार भी मेले का आयोजन भव्य तरीके से किया गया है। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सभी आवश्यक तैयारियां पूरी की गई हैं। वहीं, मेले में उमड़ने वाली भीड़ को देखते हुए मोकामा थानाध्यक्ष कुणाल कुमार ने बताया कि सुरक्षा व्यवस्था के लिए अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है। असामाजिक तत्वों पर विशेष नजर रखी जा रही है, ताकि मेला शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो। बता दें कि बाढ़ अनुमंडल का यह एक प्रमुख श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मेला मोकामा प्रखंड के मोकामा घाट में आयोजित होता है, जहां हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। इधर, मेला स्थल गंगा नदी के किनारे होने और बढ़ते जलस्तर को देखते हुए नगर प्रशासन भी सतर्क है। गंगा किनारे बैरिकेडिंग कराई गई है और श्रद्धालुओं को खतरे से सावधान करने के लिए बोर्ड भी लगाए गए हैं। 4 सितंबर से शुरू हुए जन्माष्टमी मेले का अंतिम मेला 9 सितंबर को श्रीकृष्ण की छठी के साथ होगा। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी में छठी का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। इस दिन विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद प्रसाद का वितरण किया जाएगा और इसी के साथ मेले का समापन होगा। मोकामा घाट में इस समय भक्ति, आस्था और मेले की रौनक का अनोखा संगम देखने को मिल रहा है।1
- मोकामा प्रखण्ड के बरहपुर गांव में मक्का और सब्जी की लाखों रुपये की फसल बर्बाद हो गयी। मोकामा में गंगा नदी का कोहराम बढ़ता ही जा रहा है।शनिवार की रात से मोकामा के कई नये इलाकों को गंगा ने अपनी चपेट में ले लिया है। इस प्रखंड के मोर पूर्वी, बरहपुर,शिवनार और महेंद्रपुर गंगा की चपेट में कराह रहा है।हर तरफ त्राहिमाम मच गयी है।सड़क, दियारा और झोपड़ियों में गंगा के पानी से हाहाकार मचा हुआ है।गंगा नदी के इस रौंद्र रुप से पूरे इलाके में कोहराम मच गया है।मक्का और सब्जी की लाखों रुपये की फसल बर्बाद हो गयी।इस जल प्रहार से सैकड़ों लोग घरों में जल कैदी बने हुए हैं।नेशनल हाईवे पर बड़े वाहनों का परिचालन बाधित हो गया है।इस जल तांडव से कराह rahi जनता का हाल जानने मोकामा बीडीओ, सीओ और सामाजिक कार्यकर्त्ता भोला सिंह ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया।सामाजिक कार्यकर्त्ता सुधीर सिंह ने फसल क्षति का मुआवजा देने की मांग की है।1
- तेघड़ा का ऐतिहासिक 100वां जन्माष्टमी मेला: आस्था का सैलाब, लेकिन सुविधाओं पर उठे सवाल बेगूसराय | तेघड़ा बेगूसराय जिले के तेघड़ा में आयोजित प्रसिद्ध जन्माष्टमी मेला इस वर्ष अपने 100वें वर्ष में प्रवेश कर गया है। इस ऐतिहासिक अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन और मेले का आनंद लेने के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु तेघड़ा पहुंच रहे हैं। मंदिर परिसर और आसपास का क्षेत्र श्रद्धालुओं की भारी भीड़ से गुलजार है। हालांकि, इतने बड़े और ऐतिहासिक आयोजन के बीच मूलभूत सुविधाओं और भीड़ प्रबंधन को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि मेले में भारी भीड़ उमड़ रही है, लेकिन इसके अनुपात में व्यवस्थाएं पर्याप्त नजर नहीं आ रही हैं। पीने के पानी की समुचित व्यवस्था नहीं होने से परेशानी श्रद्धालुओं के मुताबिक, मेले में स्वच्छ पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। भीड़ और गर्मी के बीच सबसे अधिक परेशानी बच्चों, महिलाओं और बुजुर्ग श्रद्धालुओं को हो रही है। श्रद्धालुओं का कहना है कि 100वें वर्ष जैसे ऐतिहासिक आयोजन को ध्यान में रखते हुए प्रशासन और पूजा समिति को पर्याप्त संख्या में पेयजल केंद्र, प्याऊ और अन्य जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था पहले से करनी चाहिए थी। सीढ़ियों पर बैठने को लेकर श्रद्धालुओं और पुजारी में बहस इसी बीच सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो ने मंदिर परिसर की व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज कर दी है। वीडियो में मंदिर की सीढ़ियों पर बैठने को लेकर कुछ श्रद्धालुओं और पुजारी के बीच तीखी बहस होती दिखाई दे रही है। बताया जा रहा है कि थके हुए श्रद्धालु, महिलाएं और बच्चे कुछ देर आराम करने के लिए सीढ़ियों पर बैठ गए थे। इस दौरान पुजारी द्वारा उन्हें वहां से हटने के लिए कहा गया। पुजारी की ओर से रास्ते में बैठने से श्रद्धालुओं की आवाजाही प्रभावित होने और भीड़ नियंत्रण में परेशानी होने की बात कही गई। वहीं, कुछ श्रद्धालुओं का कहना है कि दूर-दराज से दर्शन के लिए आने वाले लोग घंटों भीड़ में खड़े रहते हैं। ऐसे में बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के लिए बैठने या आराम करने की उचित व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि उन्हें मंदिर परिसर में असुविधा का सामना न करना पड़े। 100वें वर्ष के आयोजन में बेहतर व्यवस्था की मांग स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं ने प्रशासन तथा पूजा समिति से मांग की है कि मेले की ऐतिहासिकता को देखते हुए पेयजल, बैठने की व्यवस्था, भीड़ नियंत्रण, साफ-सफाई और श्रद्धालुओं के लिए विश्राम स्थल जैसी सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जाए। लोगों का कहना है कि जन्माष्टमी का यह 100वां मेला केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि तेघड़ा की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान से भी जुड़ा हुआ है। ऐसे में यहां आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं और सम्मानजनक माहौल उपलब्ध कराना आयोजन की गरिमा के अनुरूप होगा। श्रद्धालुओं की आस्था और आयोजन की भव्यता के साथ यदि व्यवस्थाओं में भी सुधार किया जाए, तो यह ऐतिहासिक 100वां जन्माष्टमी मेला लंबे समय तक यादगार बन सकता है।1
- समस्तीपुर के मोहनपुर प्रखंड अंतर्गत जलालपुर पंचायत के शाहपुर बारात गांव के वार्ड संख्या 14 में बांध में पानी का रिसाव होने से ग्रामीणों में मचा हड़कंप।1
- ढिबर पंचायत में बाढ़ विधायक के पहुंचने के बाद लोगों में नाराजगी साफ दिखाई दिया ढिबर पंचायत में बाढ़ विधायक के पहुंचने के बाद लोगों में नाराजगी साफ दिखाई दिया1