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डीग जिले में भारी बारिश और आंधी तूफान का एक भयानक मंजर देखने को मिला है।
Mohit
डीग जिले में भारी बारिश और आंधी तूफान का एक भयानक मंजर देखने को मिला है।
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- डीग जिले में भारी बारिश और आंधी तूफान का एक भयानक मंजर देखने को मिला है।1
- डीग जिले में आयोजित हो रही बृज चौरासी कोस परिक्रमा के मद्देनजर, राज्य सरकार ने श्रद्धालुओं की सुविधा और धार्मिक भावनाओं को ध्यान में रखते हुए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। माननीय मुख्यमंत्री की मंशानुरूप, ऐतिहासिक डीग किले में परिक्रमार्थियों का प्रवेश पूर्णतः निःशुल्क कर दिया गया है। जिला कलेक्टर मयंक मनीष द्वारा राज्य सरकार को भेजे गए पत्र के आधार पर, राजस्थान के पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग ने 29 मई 2026 को इस संबंध में प्रशासनिक आदेश जारी किए हैं। इन आदेशों के अनुसार, 17 मई 2026 से 15 जून 2026 तक चलने वाले अधिक मास मेले की अवधि के दौरान सभी बृज चौरासी कोस परिक्रमा श्रद्धालुओं को किले में बिना शुल्क के प्रवेश मिलेगा। कलेक्टर ने अपने पत्र में उल्लेख किया था कि मेले में आने वाले लाखों श्रद्धालु, जिनमें अधिकांश ग्रामीण और सामान्य आर्थिक वर्ग से हैं, प्रवेश शुल्क के कारण अतिरिक्त आर्थिक बोझ का सामना कर रहे थे, जिसके चलते जनहित में इस शुल्क को हटाने की प्रबल अनुशंसा की गई थी। अतिरिक्त जिला कलेक्टर राजकुमार कस्वां ने बताया कि पूर्व में किले का गेट बंद होने और प्रवेश शुल्क लागू होने के कारण स्थानीय लोगों और समाज सेवी यादराम चौधरी सहित श्रद्धालुओं द्वारा इसे खोलने की लगातार मांग की जा रही थी। किले के अंदर कुल देवी चामड़ माता के दर्शन के लिए हजारों महिलाएं सुबह जाती हैं, और इस विषय को जिला प्रशासन ने संज्ञान में लेते हुए त्वरित उच्च स्तरीय वार्ता की। एडीएम राजकुमार कस्वां ने स्पष्ट किया कि माननीय मुख्यमंत्री का निर्देश और मंशा है कि परिक्रमा में आने वाले श्रद्धालु धार्मिक स्थलों के दर्शन के साथ-साथ डीग के इस ऐतिहासिक किले का भी आसानी से अवलोकन कर सकें। अब देश-विदेश और अन्य प्रदेशों से आने वाले सभी परिक्रमार्थी बिना किसी शुल्क के इस ऐतिहासिक धरोहर के दर्शन कर सकेंगे।3
- डीग जिले में राज्य सरकार के 'वन्दे गंगा जल संरक्षण जन अभियान-2026' के तहत जल एवं पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीण विकास, पशुपालक कल्याण और गोवंश संवर्धन को भी प्राथमिकता दी जा रही है। इसी क्रम में, ग्राम शीशवाड़ा निवासी पशुपालक धर्मेन्द्र सिंह को 'मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना' के तहत ₹40 हजार की आर्थिक सहायता मिली है, जिसके लिए उन्होंने माननीय मुख्यमंत्री और राज्य सरकार का हृदय से आभार व्यक्त किया है। धर्मेन्द्र सिंह ने मई 2024 में अपने गोवंश का बीमा करवाया था। दुर्भाग्यवश, कुछ समय बाद एक अज्ञात बीमारी के कारण उनके गोवंश की आकस्मिक मृत्यु हो गई, जिससे उन पर गंभीर आर्थिक संकट आ गया। 'वन्दे गंगा अभियान' के तहत ग्रामीण और पशुपालक कल्याण के लिए प्रतिबद्ध पशुपालन विभाग ने इस प्रकरण पर त्वरित कार्यवाही करते हुए विभागीय प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा किया। परिणामस्वरूप, बीमा क्लेम के रूप में ₹40 हजार की सहायता राशि सीधे उनके बैंक खाते में हस्तांतरित की गई। योजना का त्वरित लाभ मिलने पर धर्मेन्द्र सिंह ने खुशी जाहिर करते हुए बताया कि गोवंश की मृत्यु से उन्हें भारी आघात लगा था, लेकिन 'वन्दे गंगा अभियान' में प्रशासन की मुस्तैदी और 'मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना' से समय पर मिले क्लेम ने उन्हें बड़ा आर्थिक संबल प्रदान किया है। उन्होंने इस सहायता के लिए सरकार का आभार व्यक्त किया। उल्लेखनीय है कि 'वन्दे गंगा जल संरक्षण जन अभियान' केवल जल सहेजने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने और पशुपालकों को संकट के समय सुरक्षा कवच प्रदान करने का भी एक सशक्त माध्यम बन रहा है। विभाग ने आमजन और कृषक वर्ग से अपील की है कि वे इस अभियान से जुड़कर जल संरक्षण के साथ-साथ राज्य सरकार की जन-कल्याणकारी योजनाओं का भी भरपूर लाभ उठाएं।1
- डीग जिले में हुई भयंकर बारिश ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। इस बारिश के कारण ब्रज चौरासी कोस की प्याऊ के सभी तंबू उड़ गए और सभी प्याऊ को भी काफी नुकसान पहुंचा है।1
- कामां क्षेत्र के कलतरिया गाँव में सड़कों पर भारी जलभराव की समस्या बनी हुई है। बारिश के बाद सड़कों पर पानी भर जाता है और जल निकासी के लिए कोई जगह नहीं बचती, जिससे ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। स्थानीय लोगों ने सरकार से इस समस्या का संज्ञान लेने और उचित समाधान करने का आग्रह किया है।1
- एक ही प्रदेश और सरकार के अंतर्गत दो पवित्र धामों से जुड़ी नदियों की स्थिति में भारी विषमता पर सवाल उठाए गए हैं। जहाँ एक ओर अयोध्या में भगवान श्रीराम की जन्मभूमि पर सरयू नदी की निर्मल धारा बह रही है, वहीं दूसरी ओर मथुरा-वृंदावन में भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली पर यमुना मैया आज भी प्रदूषण और गंदगी से कराह रही हैं। जनता पूछ रही है कि आखिर ऐसा क्यों है, जब यमुना शुद्धिकरण के नाम पर वर्षों से करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके हैं, फिर भी आज भी यमुना का जल दूषित क्यों है? मथुरा की जनता और श्रद्धालु यह जानना चाहते हैं कि क्या यमुना मैया को स्वच्छ और निर्मल बनाने के लिए किए गए दावे केवल कागजों तक ही सीमित हैं, और यमुना की सफाई के लिए आवंटित धन आखिर कहां चला गया। RPRNEWSTV DIGITAL के अनुसार, यह केवल एक नदी का सवाल नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का गहरा प्रश्न है, जिस पर सरकार से जवाबदेही की मांग की जा रही है।1
- शाम के समय मौसम में परिवर्तन देखा जा रहा है और तूफानी मौसम होने की संभावना है। इस स्थिति को देखते हुए सभी नागरिकों से अपील की गई है कि वे सावधानी बरतें और अपने-अपने घरों में सुरक्षित रहें।1
- मथुरा के प्रसिद्ध राधा रानी मंदिर में चढ़ावे के पैसों के बंटवारे को लेकर दो पुजारियों के बीच उस समय झगड़ा हो गया, जब दर्शनार्थी राधा रानी के दर्शन कर रहे थे। काफी मशक्कत के बाद दोनों पुजारियों को एक-दूसरे से अलग किया जा सका। इस घटना का वीडियो श्रद्धालुओं ने बना लिया और उसे सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।1