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उत्तर प्रदेश के बागपत जिला अंतर्गत बड़ौत के सिल्वर नगर धनोरा में भीषण गर्मी के बीच पानी की भारी किल्लत देखी जा रही है। सिल्वर नगर में मदरसे वसीम की तरफ तापमान 41 डिग्री तक पहुंच गया है, जिसके कारण वहाँ बहुत ही ज्यादा गर्मी हो रही है। इस तपती गर्मी में भी यहाँ पानी बिल्कुल भी उपलब्ध नहीं है और पानी की सप्लाई को बार-बार बंद कर दिया जाता है, जिससे स्थानीय लोगों को बेहद परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

10 hrs ago
user_Sunny kumar
Sunny kumar
बड़ौत, बागपत, उत्तर प्रदेश•
10 hrs ago

उत्तर प्रदेश के बागपत जिला अंतर्गत बड़ौत के सिल्वर नगर धनोरा में भीषण गर्मी के बीच पानी की भारी किल्लत देखी जा रही है। सिल्वर नगर में मदरसे वसीम की तरफ तापमान 41 डिग्री तक पहुंच गया है, जिसके कारण वहाँ बहुत ही ज्यादा गर्मी हो रही है। इस तपती गर्मी में भी यहाँ पानी बिल्कुल भी उपलब्ध नहीं है और पानी की सप्लाई को बार-बार बंद कर दिया जाता है, जिससे स्थानीय लोगों को बेहद परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

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  • उत्तर प्रदेश के बागपत जिला अंतर्गत बड़ौत के सिल्वर नगर धनोरा में भीषण गर्मी के बीच पानी की भारी किल्लत देखी जा रही है। सिल्वर नगर में मदरसे वसीम की तरफ तापमान 41 डिग्री तक पहुंच गया है, जिसके कारण वहाँ बहुत ही ज्यादा गर्मी हो रही है। इस तपती गर्मी में भी यहाँ पानी बिल्कुल भी उपलब्ध नहीं है और पानी की सप्लाई को बार-बार बंद कर दिया जाता है, जिससे स्थानीय लोगों को बेहद परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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    उत्तर प्रदेश के बागपत जिला अंतर्गत बड़ौत के सिल्वर नगर धनोरा में भीषण गर्मी के बीच पानी की भारी किल्लत देखी जा रही है। सिल्वर नगर में मदरसे वसीम की तरफ तापमान 41 डिग्री तक पहुंच गया है, जिसके कारण वहाँ बहुत ही ज्यादा गर्मी हो रही है। इस तपती गर्मी में भी यहाँ पानी बिल्कुल भी उपलब्ध नहीं है और पानी की सप्लाई को बार-बार बंद कर दिया जाता है, जिससे स्थानीय लोगों को बेहद परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
    user_Sunny kumar
    Sunny kumar
    बड़ौत, बागपत, उत्तर प्रदेश•
    10 hrs ago
  • बागपत के संतोषपुर गांव के निवासी किसान कर्मवीर ने तहसील में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस में अधिकारियों से अपनी भूमि पर भू-माफिया द्वारा दोबारा कब्जा किए जाने की शिकायत की है। सोमवार को हुई इस शिकायत के दौरान भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के एनसीआर महासचिव प्रदीप धामा भी पीड़ित किसान के साथ मौजूद रहे। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी है कि यदि इस गंभीर समस्या का समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन और धरना प्रदर्शन किया जाएगा। पीड़ित किसान कर्मवीर के अनुसार, उनकी भूमि पर गांव में पहले भी अवैध कब्जा किया गया था, जिसे अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद 14 जनवरी 2026 को टीम ने मौके पर पहुंचकर कब्जा मुक्त कराया था। हालांकि, अब भू-माफिया फिर से उनकी जमीन पर कब्जा कर रहे हैं। पीड़ित का आरोप है कि विपक्षी लोग उन्हें अपनी ही बोई हुई फसल काटने नहीं दे रहे हैं और खुद जबरन फसल काट रहे हैं। भाकियू नेता प्रदीप धामा ने बताया कि किसान कर्मवीर इसी उत्पीड़न से परेशान होकर 20 वर्ष पहले भी गांव से पलायन कर चुके हैं और फिलहाल एक कमरे के मकान में रहने को मजबूर हैं। बार-बार शिकायत के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो रहा है और भू-माफिया लगातार उन्हें परेशान कर रहे हैं। संपूर्ण समाधान दिवस में मौजूद सीडीओ अनिल कुमार ने पीड़ित किसान को मामले में उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है। वहीं, किसान नेता प्रदीप धामा ने चेतावनी दी है कि यदि दो दिन के भीतर इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो किसान दिवस में इसी मुद्दे को उठाया जाएगा और जब तक पीड़ित किसान को न्याय नहीं मिल जाता, तब तक धरना प्रदर्शन जारी रहेगा।
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    बागपत के संतोषपुर गांव के निवासी किसान कर्मवीर ने तहसील में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस में अधिकारियों से अपनी भूमि पर भू-माफिया द्वारा दोबारा कब्जा किए जाने की शिकायत की है। सोमवार को हुई इस शिकायत के दौरान भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के एनसीआर महासचिव प्रदीप धामा भी पीड़ित किसान के साथ मौजूद रहे। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी है कि यदि इस गंभीर समस्या का समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन और धरना प्रदर्शन किया जाएगा।

पीड़ित किसान कर्मवीर के अनुसार, उनकी भूमि पर गांव में पहले भी अवैध कब्जा किया गया था, जिसे अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद 14 जनवरी 2026 को टीम ने मौके पर पहुंचकर कब्जा मुक्त कराया था। हालांकि, अब भू-माफिया फिर से उनकी जमीन पर कब्जा कर रहे हैं। पीड़ित का आरोप है कि विपक्षी लोग उन्हें अपनी ही बोई हुई फसल काटने नहीं दे रहे हैं और खुद जबरन फसल काट रहे हैं। भाकियू नेता प्रदीप धामा ने बताया कि किसान कर्मवीर इसी उत्पीड़न से परेशान होकर 20 वर्ष पहले भी गांव से पलायन कर चुके हैं और फिलहाल एक कमरे के मकान में रहने को मजबूर हैं। बार-बार शिकायत के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो रहा है और भू-माफिया लगातार उन्हें परेशान कर रहे हैं।

संपूर्ण समाधान दिवस में मौजूद सीडीओ अनिल कुमार ने पीड़ित किसान को मामले में उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है। वहीं, किसान नेता प्रदीप धामा ने चेतावनी दी है कि यदि दो दिन के भीतर इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो किसान दिवस में इसी मुद्दे को उठाया जाएगा और जब तक पीड़ित किसान को न्याय नहीं मिल जाता, तब तक धरना प्रदर्शन जारी रहेगा।
    user_Instant News 24Hr
    Instant News 24Hr
    पत्रकार Baghpat, Uttar Pradesh•
    13 hrs ago
  • भारत ने हरित परिवहन के क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा के जींद से देश की पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह ऐतिहासिक सफर जींद और सोनीपत के बीच शुरू हुआ है, जिसे भारतीय रेलवे के हरित भविष्य की दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आम बोलचाल में "पानी से चलने वाली ट्रेन" कही जाने वाली यह ट्रेन तकनीकी रूप से हाइड्रोजन ईंधन से संचालित होती है। इस ट्रेन में मौजूद फ्यूल सेल हाइड्रोजन और हवा की ऑक्सीजन से बिजली उत्पन्न करता है, जिससे ट्रेन चलती है। इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इससे किसी भी प्रकार का धुआँ या प्रदूषण नहीं निकलता, बल्कि उत्सर्जन के रूप में केवल जलवाष्प यानी पानी की भाप ही बाहर आती है।
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    भारत ने हरित परिवहन के क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा के जींद से देश की पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह ऐतिहासिक सफर जींद और सोनीपत के बीच शुरू हुआ है, जिसे भारतीय रेलवे के हरित भविष्य की दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

आम बोलचाल में "पानी से चलने वाली ट्रेन" कही जाने वाली यह ट्रेन तकनीकी रूप से हाइड्रोजन ईंधन से संचालित होती है। इस ट्रेन में मौजूद फ्यूल सेल हाइड्रोजन और हवा की ऑक्सीजन से बिजली उत्पन्न करता है, जिससे ट्रेन चलती है। इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इससे किसी भी प्रकार का धुआँ या प्रदूषण नहीं निकलता, बल्कि उत्सर्जन के रूप में केवल जलवाष्प यानी पानी की भाप ही बाहर आती है।
    user_Natural News
    Natural News
    Newspaper publisher सोनीपत, सोनीपत, हरियाणा•
    2 hrs ago
  • मुजफ्फरनगर के कस्बा बुढ़ाना में 16 जुलाई 2026 को एक गौमाता की मृत्यु के बाद उनके अंतिम संस्कार को लेकर गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। एक तरफ जहां देश में गौमाता को सर्वोच्च सम्मान देने और राष्ट्रीय माता का दर्जा देने की मांग की जा रही है, वहीं दूसरी तरफ बुढ़ाना में मृत गौमाता को नगर पंचायत के ठोस अपशिष्ट निस्तारण स्थल (कूड़ा निस्तारण केंद्र) में दफनाने का मामला सामने आया है। स्थानीय लोगों के अनुसार, दोपहर लगभग 12:00 बजे गौमाता का निधन हुआ था, लेकिन मालिक को इसकी जानकारी शाम लगभग 4:00 से 5:00 बजे के बीच मिली। इस दौरान गौमाता के अंतिम संस्कार को लेकर कई तरह की लापरवाही के आरोप लगे हैं। सबसे पहले गौमाता को एक निजी भूमि में दफनाने का प्रयास किया गया था, लेकिन भूमि स्वामी की आपत्ति के बाद उन्हें वहाँ से हटा दिया गया। आरोप है कि इसके बाद नगर पंचायत के वाहन को वापस बुला लिया गया और आखिरकार रात लगभग 9:30 से 10:00 बजे गौमाता को कूड़ा निस्तारण केंद्र में दफनाया गया। इस घटनाक्रम को लेकर स्थानीय लोग प्रशासन पर सवाल उठा रहे हैं कि बंजर और सार्वजनिक भूमि उपलब्ध होने के बावजूद गौमाता को कूड़ा निस्तारण स्थल पर क्यों दफनाया गया और नगर पंचायत के वाहन को वापस बुलाने के पीछे क्या कारण था। गौमाता के अंतिम संस्कार को लेकर उपजे इस विवाद से जनभावनाएं आहत हुई हैं और यह समाज व प्रशासन दोनों के लिए चिंतन का विषय बन गया है। इस पूरे मामले में निष्पक्ष जांच कराकर जिम्मेदारी तय करने की मांग की जा रही है। इसके साथ ही यह भी मांग उठाई गई है कि भविष्य में गौवंश के सम्मानजनक अंतिम संस्कार के लिए नगर पंचायतों में एक स्थायी व उचित व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।
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    मुजफ्फरनगर के कस्बा बुढ़ाना में 16 जुलाई 2026 को एक गौमाता की मृत्यु के बाद उनके अंतिम संस्कार को लेकर गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। एक तरफ जहां देश में गौमाता को सर्वोच्च सम्मान देने और राष्ट्रीय माता का दर्जा देने की मांग की जा रही है, वहीं दूसरी तरफ बुढ़ाना में मृत गौमाता को नगर पंचायत के ठोस अपशिष्ट निस्तारण स्थल (कूड़ा निस्तारण केंद्र) में दफनाने का मामला सामने आया है। स्थानीय लोगों के अनुसार, दोपहर लगभग 12:00 बजे गौमाता का निधन हुआ था, लेकिन मालिक को इसकी जानकारी शाम लगभग 4:00 से 5:00 बजे के बीच मिली।

इस दौरान गौमाता के अंतिम संस्कार को लेकर कई तरह की लापरवाही के आरोप लगे हैं। सबसे पहले गौमाता को एक निजी भूमि में दफनाने का प्रयास किया गया था, लेकिन भूमि स्वामी की आपत्ति के बाद उन्हें वहाँ से हटा दिया गया। आरोप है कि इसके बाद नगर पंचायत के वाहन को वापस बुला लिया गया और आखिरकार रात लगभग 9:30 से 10:00 बजे गौमाता को कूड़ा निस्तारण केंद्र में दफनाया गया। इस घटनाक्रम को लेकर स्थानीय लोग प्रशासन पर सवाल उठा रहे हैं कि बंजर और सार्वजनिक भूमि उपलब्ध होने के बावजूद गौमाता को कूड़ा निस्तारण स्थल पर क्यों दफनाया गया और नगर पंचायत के वाहन को वापस बुलाने के पीछे क्या कारण था।

गौमाता के अंतिम संस्कार को लेकर उपजे इस विवाद से जनभावनाएं आहत हुई हैं और यह समाज व प्रशासन दोनों के लिए चिंतन का विषय बन गया है। इस पूरे मामले में निष्पक्ष जांच कराकर जिम्मेदारी तय करने की मांग की जा रही है। इसके साथ ही यह भी मांग उठाई गई है कि भविष्य में गौवंश के सम्मानजनक अंतिम संस्कार के लिए नगर पंचायतों में एक स्थायी व उचित व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।
    user_Chhavi सहायक ब्यूरो चीफ
    Chhavi सहायक ब्यूरो चीफ
    Court reporter बुढाना, मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश•
    7 hrs ago
  • मुजफ्फरनगर के बुढ़ाना कस्बे में एक मृत गौमाता के अंतिम संस्कार को लेकर गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। जहां एक तरफ देश में गौमाता को राष्ट्रीय माता का दर्जा देने की मांग की जा रही है, वहीं बुढ़ाना में उनके अंतिम संस्कार को लेकर खड़े हुए सवालों ने समाज और प्रशासन दोनों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। आरोप है कि स्थानीय नगर पंचायत द्वारा मृत गौमाता को सम्मानजनक स्थान देने के बजाय ठोस अपशिष्ट निस्तारण स्थल (कूड़ा निस्तारण केंद्र) में दफना दिया गया। यह मामला 16 जुलाई 2026 का है। स्थानीय लोगों के अनुसार, दोपहर लगभग 12:00 बजे गौमाता की मृत्यु हुई थी, लेकिन उनके मालिक को इसकी सूचना शाम लगभग 4:00 से 5:00 बजे के बीच मिली। इसके बाद गौमाता को पहले एक निजी भूमि में दफनाने की कोशिश की गई, लेकिन जमीन के मालिक की आपत्ति के कारण उन्हें वहां से हटा दिया गया। आरोप है कि इसके बाद नगर पंचायत के वाहन को वापस बुला लिया गया और रात लगभग 9:30 से 10:00 बजे के बीच उन्हें कूड़ा निस्तारण केंद्र में दफनाया गया। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों ने नगर पंचायत पर सवाल उठाए हैं कि जब उनके पास बंजर और सार्वजनिक भूमि मौजूद थी, तो गौमाता के सम्मानजनक अंतिम संस्कार के लिए उसका उपयोग क्यों नहीं किया गया? कूड़ा निस्तारण केंद्र में दफनाने और वाहन वापस बुलाने के पीछे की वजहों पर भी सवाल उठाए गए हैं। एमडी न्यूज (MD NEWS) ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर जिम्मेदारी तय करने और भविष्य में गौवंश के सम्मानजनक अंतिम संस्कार के लिए नगर पंचायतों में स्थायी व्यवस्था बनाने की मांग की है।
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    मुजफ्फरनगर के बुढ़ाना कस्बे में एक मृत गौमाता के अंतिम संस्कार को लेकर गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। जहां एक तरफ देश में गौमाता को राष्ट्रीय माता का दर्जा देने की मांग की जा रही है, वहीं बुढ़ाना में उनके अंतिम संस्कार को लेकर खड़े हुए सवालों ने समाज और प्रशासन दोनों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। आरोप है कि स्थानीय नगर पंचायत द्वारा मृत गौमाता को सम्मानजनक स्थान देने के बजाय ठोस अपशिष्ट निस्तारण स्थल (कूड़ा निस्तारण केंद्र) में दफना दिया गया।

यह मामला 16 जुलाई 2026 का है। स्थानीय लोगों के अनुसार, दोपहर लगभग 12:00 बजे गौमाता की मृत्यु हुई थी, लेकिन उनके मालिक को इसकी सूचना शाम लगभग 4:00 से 5:00 बजे के बीच मिली। इसके बाद गौमाता को पहले एक निजी भूमि में दफनाने की कोशिश की गई, लेकिन जमीन के मालिक की आपत्ति के कारण उन्हें वहां से हटा दिया गया। आरोप है कि इसके बाद नगर पंचायत के वाहन को वापस बुला लिया गया और रात लगभग 9:30 से 10:00 बजे के बीच उन्हें कूड़ा निस्तारण केंद्र में दफनाया गया।

इस घटना के बाद स्थानीय लोगों ने नगर पंचायत पर सवाल उठाए हैं कि जब उनके पास बंजर और सार्वजनिक भूमि मौजूद थी, तो गौमाता के सम्मानजनक अंतिम संस्कार के लिए उसका उपयोग क्यों नहीं किया गया? कूड़ा निस्तारण केंद्र में दफनाने और वाहन वापस बुलाने के पीछे की वजहों पर भी सवाल उठाए गए हैं। एमडी न्यूज (MD NEWS) ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर जिम्मेदारी तय करने और भविष्य में गौवंश के सम्मानजनक अंतिम संस्कार के लिए नगर पंचायतों में स्थायी व्यवस्था बनाने की मांग की है।
    user_रोहितजैन सहायक ब्यूरो प्रमुख
    रोहितजैन सहायक ब्यूरो प्रमुख
    Court reporter बुढाना, मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश•
    8 hrs ago
  • हरियाणा के जींद स्टेशन से भारत की पहली अनोखी हाइड्रोजन ट्रेन चलने जा रही है, जिसे चलाने के लिए न तो डीजल की जरूरत है और न ही बिजली की। 17 जुलाई को शुरू होने वाला यह सफर जींद से सोनीपत के बीच 89 किलोमीटर का होगा। 2600 यात्रियों की क्षमता वाली यह ट्रेन चलने पर कोई धुआं या राख नहीं छोड़ेगी, बल्कि केवल पानी उत्सर्जित करेगी। इसे दुनिया की सबसे ताकतवर हाइड्रोजन ट्रेनों में गिना जाएगा। 17 जुलाई 2026 को लॉन्च होने वाली भारत की यह ट्रेन जर्मनी की मूल हाइड्रोजन ट्रेन से करीब पांच गुना लंबी है। हाइड्रोजन के ईंधन बनने की यह कहानी करीब ढाई सौ साल पहले साल 1776 में लंदन की एक लैब से शुरू हुई थी, जहां वैज्ञानिक हेनरी कैवेंडिश ने जिंक धातु को तेजाब में डालकर पहली बार इस गैस को पहचाना था। बाद में फ्रांस के एक केमिस्ट ने इसे 'हाइड्रोजन' नाम दिया, जिसका ग्रीक अर्थ 'पानी से जन्मा' होता है। साल 1800 में दो अंग्रेज वैज्ञानिकों ने 'इलेक्ट्रोलिसिस' तकनीक के जरिए पानी से हाइड्रोजन और ऑक्सीजन को अलग किया, जबकि 1838 में विलियम ग्रोव ने पहला फ्यूल सेल (गैस बैटरी) बनाकर हाइड्रोजन की ऊर्जा को स्टोर करने का तरीका खोजा, जिसके लिए उन्हें 'फादर ऑफ द फ्यूल सेल' कहा जाता है। इस सफर में 1937 का हिंडनबर्ग एयरशिप हादसा भी शामिल है, जब अत्यधिक ज्वलनशील होने के कारण हाइड्रोजन से भरा एक विशालकाय एयरशिप लैंडिंग के समय जलकर राख हो गया था, जिसके बाद इसे खतरनाक मानकर प्रोजेक्ट बंद कर दिया गया था। असली बदलाव साल 1973 में आया जब मिडिल ईस्ट द्वारा तेल की सप्लाई रोकने पर दुनिया ने तेल के विकल्प के रूप में हाइड्रोजन को गंभीरता से लिया। इसके बाद, साल 1998 में आइसलैंड ने 2030 तक खुद को पूरी तरह हाइड्रोजन-आधारित इकोनॉमी बनाने का ऐलान किया। जर्मनी, जापान, चीन और अमेरिका के बाद अब भारत भी इस बेजोड़ तकनीक के साथ एक नई मंजिल की ओर बढ़ चुका है।
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    हरियाणा के जींद स्टेशन से भारत की पहली अनोखी हाइड्रोजन ट्रेन चलने जा रही है, जिसे चलाने के लिए न तो डीजल की जरूरत है और न ही बिजली की। 17 जुलाई को शुरू होने वाला यह सफर जींद से सोनीपत के बीच 89 किलोमीटर का होगा। 2600 यात्रियों की क्षमता वाली यह ट्रेन चलने पर कोई धुआं या राख नहीं छोड़ेगी, बल्कि केवल पानी उत्सर्जित करेगी। इसे दुनिया की सबसे ताकतवर हाइड्रोजन ट्रेनों में गिना जाएगा। 17 जुलाई 2026 को लॉन्च होने वाली भारत की यह ट्रेन जर्मनी की मूल हाइड्रोजन ट्रेन से करीब पांच गुना लंबी है।

हाइड्रोजन के ईंधन बनने की यह कहानी करीब ढाई सौ साल पहले साल 1776 में लंदन की एक लैब से शुरू हुई थी, जहां वैज्ञानिक हेनरी कैवेंडिश ने जिंक धातु को तेजाब में डालकर पहली बार इस गैस को पहचाना था। बाद में फ्रांस के एक केमिस्ट ने इसे 'हाइड्रोजन' नाम दिया, जिसका ग्रीक अर्थ 'पानी से जन्मा' होता है। साल 1800 में दो अंग्रेज वैज्ञानिकों ने 'इलेक्ट्रोलिसिस' तकनीक के जरिए पानी से हाइड्रोजन और ऑक्सीजन को अलग किया, जबकि 1838 में विलियम ग्रोव ने पहला फ्यूल सेल (गैस बैटरी) बनाकर हाइड्रोजन की ऊर्जा को स्टोर करने का तरीका खोजा, जिसके लिए उन्हें 'फादर ऑफ द फ्यूल सेल' कहा जाता है।

इस सफर में 1937 का हिंडनबर्ग एयरशिप हादसा भी शामिल है, जब अत्यधिक ज्वलनशील होने के कारण हाइड्रोजन से भरा एक विशालकाय एयरशिप लैंडिंग के समय जलकर राख हो गया था, जिसके बाद इसे खतरनाक मानकर प्रोजेक्ट बंद कर दिया गया था। असली बदलाव साल 1973 में आया जब मिडिल ईस्ट द्वारा तेल की सप्लाई रोकने पर दुनिया ने तेल के विकल्प के रूप में हाइड्रोजन को गंभीरता से लिया। इसके बाद, साल 1998 में आइसलैंड ने 2030 तक खुद को पूरी तरह हाइड्रोजन-आधारित इकोनॉमी बनाने का ऐलान किया। जर्मनी, जापान, चीन और अमेरिका के बाद अब भारत भी इस बेजोड़ तकनीक के साथ एक नई मंजिल की ओर बढ़ चुका है।
    user_Mohit Kumar
    Mohit Kumar
    Local News Reporter बड़ौत, बागपत, उत्तर प्रदेश•
    3 hrs ago
  • उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में खेकड़ा पुलिस ने मोटरसाइकिल चोरी के एक मामले का खुलासा करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। डगरपुर निवासी अतुल की मोटरसाइकिल बीते 16 जुलाई को चोरी हो गई थी, जिसकी लिखित शिकायत पीड़ित ने खेकड़ा थाने में दर्ज कराई थी। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस टीम ने आसपास के क्षेत्रों में गहन जांच-पड़ताल और संदिग्धों से पूछताछ करने के बाद आरोपी को धर दबोचा। पकड़े गए आरोपी की पहचान रटौल निवासी आरिफ पुत्र शमीम के रूप में हुई है। पुलिस ने आरोपी की तलाशी और पूछताछ के दौरान उसके कब्जे से चोरी की गई मोटरसाइकिल बरामद की। थाना प्रभारी आशीष कुमार ने इस गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए बताया कि आरोपी के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उसे जेल भेज दिया गया है। पुलिस टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस मामले का खुलासा किया है।
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    उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में खेकड़ा पुलिस ने मोटरसाइकिल चोरी के एक मामले का खुलासा करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। डगरपुर निवासी अतुल की मोटरसाइकिल बीते 16 जुलाई को चोरी हो गई थी, जिसकी लिखित शिकायत पीड़ित ने खेकड़ा थाने में दर्ज कराई थी। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस टीम ने आसपास के क्षेत्रों में गहन जांच-पड़ताल और संदिग्धों से पूछताछ करने के बाद आरोपी को धर दबोचा।

पकड़े गए आरोपी की पहचान रटौल निवासी आरिफ पुत्र शमीम के रूप में हुई है। पुलिस ने आरोपी की तलाशी और पूछताछ के दौरान उसके कब्जे से चोरी की गई मोटरसाइकिल बरामद की। थाना प्रभारी आशीष कुमार ने इस गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए बताया कि आरोपी के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उसे जेल भेज दिया गया है। पुलिस टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस मामले का खुलासा किया है।
    user_Mohit Kumar
    Mohit Kumar
    Local News Reporter बड़ौत, बागपत, उत्तर प्रदेश•
    11 min ago
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